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🌺Gulzar of shayari🌺 :)
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - दीवारों के कान नहीं होते "साहब" कोई अपना ही ग़द्दार होता है दीवारों के कान नहीं होते "साहब" कोई अपना ही ग़द्दार होता है - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - उम्र का भी एक मज़ा है बढ़ती आँखे धीरे धीरे धुंदली होने लगती हैं लेकिन लोगों को पहचानने में आप माहिर हो जाते हैं ...!! उम्र का भी एक मज़ा है बढ़ती आँखे धीरे धीरे धुंदली होने लगती हैं लेकिन लोगों को पहचानने में आप माहिर हो जाते हैं ...!! - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - तो तुम चाहे भी हाल पूछ सकते हो हमारा कुछ हक दिये नहीं जाते fಷ जाते है ! Guizar Ke Wora तो तुम चाहे भी हाल पूछ सकते हो हमारा कुछ हक दिये नहीं जाते fಷ जाते है ! Guizar Ke Wora - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - బకT और बताओ ना मुझे मेरे बारे में , सुना है बहुत अच्छे से जानते हो मुझे. Gulzar Ke.Word: బకT और बताओ ना मुझे मेरे बारे में , सुना है बहुत अच्छे से जानते हो मुझे. Gulzar Ke.Word: - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - सस्ते और बिना ब्रांड के कपड़े নন্কী ক্ি का मतलब ये पहनने आप गरीब हैं याद रखो आपको अपने परिवार का पेट भरना है लोगो को प्रभावित नहीं करना.. सस्ते और बिना ब्रांड के कपड़े নন্কী ক্ি का मतलब ये पहनने आप गरीब हैं याद रखो आपको अपने परिवार का पेट भरना है लोगो को प्रभावित नहीं करना.. - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - जाने किस हुनर को 7 हो तुम शायरी कहते हम तो वो लिखते हैं कह नहीं पाते 57 3#4 Gu zar Ke Woras जाने किस हुनर को 7 हो तुम शायरी कहते हम तो वो लिखते हैं कह नहीं पाते 57 3#4 Gu zar Ke Woras - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - खुद्दारी का सुरूर है साहब , उसने बात नहीं की तो, हमने भी पलट कर नही देखा. a GulzarKeWords खुद्दारी का सुरूर है साहब , उसने बात नहीं की तो, हमने भी पलट कर नही देखा. a GulzarKeWords - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - फासलों का अहसास तब हुआ 0 जब मैंने कहा ठीक हूँ , 1 और उसने मान लिया !! फासलों का अहसास तब हुआ 0 जब मैंने कहा ठीक हूँ , 1 और उसने मान लिया !! - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - कहाँ समेटूँ कहाँ- faft; तुझे जिधर भी देखु तू बस बिखरी पड़ी है। कहाँ समेटूँ कहाँ- faft; तुझे जिधर भी देखु तू बस बिखरी पड़ी है। - ShareChat
#✒ गुलज़ार की शायरी 🖤
✒ गुलज़ार की शायरी 🖤 - रिश्तेदार हमेशा विपक्ष के नेता की तरह होते हैं आप कितना भी अच्छा कर लो वो कोई ना कोई कमी निकाल ही देंगे. . रिश्तेदार हमेशा विपक्ष के नेता की तरह होते हैं आप कितना भी अच्छा कर लो वो कोई ना कोई कमी निकाल ही देंगे. . - ShareChat