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#🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🙏 नवदुर्गा #🌞सुबह की पूजा
🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 - ShareChat
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#🙏 नवदुर्गा #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🙏जय माँ काली🌼
🙏 नवदुर्गा - ShareChat
00:10
#👩🏻‍🎤Girls नौटंकी
👩🏻‍🎤Girls नौटंकी - ShareChat
00:19
#🙏जय माँ काली🌼 #🙏 नवदुर्गा #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🙏प्रातः वंदन
🙏जय माँ काली🌼 - ShareChat
00:31
#🌞सुबह की पूजा #🌷शुभ सोमवार #🔱हर हर महादेव #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏गीता ज्ञान🛕
🌞सुबह की पूजा - ShareChat
00:39
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🖋कहानी: टूटे दिल की💔
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ShareChat
00:29
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏 देवी दर्शन🌸 #🔱हर हर महादेव
🙏गीता ज्ञान🛕 - ShareChat
00:47
#🌙 गुड नाईट #🌸 जय श्री कृष्ण😇 #🌸 बोलो राधे राधे
🌙 गुड नाईट - Night Good 7 9 Jai Sree Krishnal 9S < I Night Good 7 9 Jai Sree Krishnal 9S < I - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🔊सुन्दर कांड🕉️
🙏कर्म क्या है❓ - त्याग का रहस्य सच्चा त्यागी कौन है ? जो कर्मफल का त्याग करता है , वही सच्चा त्यागी है । ( श्लोक 18/11 ) त्याग तीन प्रकार का होता है गुणों के आधार पर त्याग सात्विक , राजसिक और तामसिक होता है । ( श्लोक 18/4 ) कर्म के तीन मार्ग : भगवद् गीता का सार श्रीमद्भगवदगीता का यह अंतिम अध्याय सच्चे ' त्याग ' का रहस्य समझाता है । इलका अर्थ कमों को छोड़ता नहीं , बल्कि अपने कर्तव्य को फल की इच्छा के विना करना है । यह अध्याय कर्म , ज्ञान और सुख को तीन गुणों के आधार पर वर्गीकृत करता है , ताकि व्यक्ति को मुक्ति के भार्ग पर मार्गदर्शन निल सके । सात्विक ( Sattvic ) कर्म कर्तव्य भाव से , फल की इच्छा बिना ( 18 / 23 ) ज्ञान सब में एक अविनाणी आल्या देखना ( 18 / 20 ) राजसिक ( Rajasic ) कर्म अईकार और फल की इच्छा से ( 18/24 ) ज्ञान सब प्राणियों में भेद देखना ( 18/21 ) तामसिक ( Tamasic ) कर्म मोह और अल्लान सेजिया गया ( 18/25 ) ज्ञान एक ही कार्य को सब कुछ मानना ( 18/22 ) सुख आरम्भ में विष , अंत में अमृत ( 18/37 ) सुख आरम्प में अमृत , अंत में विष ( 18/38 ) परम सिद्धि का मार्ग सुख शुरू और अंत में मोहकारी ( 18/39 ) अपने स्वभाव - नियत कर्म का पालन करें दोपयुक्त होने पर भी अपना स्वाभाविक कर्म करन श्रेष्ठ है । ( श्लोक 18/47 ) ईश्वर को पूर्ण समर्पण करें सभी शर्मा को त्यागकर केवल ईश्वर की शरण में जाएं । ( श्लोक 18/66 ) समर्पण का फल : परम शांति ईश्वर की कृमा से ही परम शांति और शाश्वत पद वान्त होता है । ( श्लोक 18/62 ) NotebookLM - ShareChat