बाबू राम
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#सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा
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#सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा
सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा - काशी का अजब गजब भंडारा विक्रमी संवत् १५७० (सन १५१३ ) में कबीर परमेश्वर केशव बंजारे का वेश धारण करके अमर लोक यानी सतलोक से नौ लाख बोरी में भंडारा सामग्री बैलों पर रखकर व एक लाख सेवादारों के साथ कांशी नगर आए। केशव बंजारे का वेश धारण करके अमर लोक यानी सतलोक से नौ लाख बोरी में भंडारा सामग्री बैलों पर रखकर व एक लाख सेवादारों के साथ कांशी नगर आए। Sant Rampal Ji YOUTUBE fee Buuk Maharaj CHANNEL 7496801825 @SnintRampalJiMaharai काशी का अजब गजब भंडारा विक्रमी संवत् १५७० (सन १५१३ ) में कबीर परमेश्वर केशव बंजारे का वेश धारण करके अमर लोक यानी सतलोक से नौ लाख बोरी में भंडारा सामग्री बैलों पर रखकर व एक लाख सेवादारों के साथ कांशी नगर आए। केशव बंजारे का वेश धारण करके अमर लोक यानी सतलोक से नौ लाख बोरी में भंडारा सामग्री बैलों पर रखकर व एक लाख सेवादारों के साथ कांशी नगर आए। Sant Rampal Ji YOUTUBE fee Buuk Maharaj CHANNEL 7496801825 @SnintRampalJiMaharai - ShareChat
#सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा
सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा - Kashis Divine Feast Phenomenal Wonder! A Supreme Sant Rampal Ji Maharaj Ji In 1513, Kabir Parmatma, appearing as Keshav Banjara, performed an astounding feat in Kashi He hosted a three day grand feast for 1.8 million people where food spontaneously appeared. Piles of sweets and brimming kheer and halwa left all along dishes, with satisfied and glorifying the Supreme God This  miraculous divine provision ensured everyone received food and alms Sant Rampal Ji YOUTUBE free Buuk : Maharaj CHANNEL 7496801825 SuntR IIOష Jieiu  Kashis Divine Feast Phenomenal Wonder! A Supreme Sant Rampal Ji Maharaj Ji In 1513, Kabir Parmatma, appearing as Keshav Banjara, performed an astounding feat in Kashi He hosted a three day grand feast for 1.8 million people where food spontaneously appeared. Piles of sweets and brimming kheer and halwa left all along dishes, with satisfied and glorifying the Supreme God This  miraculous divine provision ensured everyone received food and alms Sant Rampal Ji YOUTUBE free Buuk : Maharaj CHANNEL 7496801825 SuntR IIOష Jieiu - ShareChat
#सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा
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#सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा 3Days Left Divya Dharma Yagya ##सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा 3Days Left Divya Dharma Yagya #सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा ##सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा 3Days Left Divya Dharma Yagya #सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा
सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा - काशी का दिव्य भंडारा कबीर परमात्मा ने काशी में केशव बंजारा का रूप धारण करके एक असाधारण कार्य किया। उन्होंने १८ लाख साधु-संतों सहित जनसमुदाय को तीन दिन का दिव्य भंडारा करवाया। यह किसी चमत्कार से कम न था, क्योंकि बिना पकाए ही मिठाईयों , लड्डू, जलेबी व चंगेर सहित सभी पकवानों के ढेर लग रहे थे। चावल, खीर और हलवे के कड़ाहे भरे हुए थे, और हर कोई तृप्त होकर परमात्मा की महिमा गा रहा था। यह कुबेर के  समान असीमित भंडार था, जहाँ भोजन और दक्षिणा निरंतर वितरित గెt 7గేt బfTI1 1 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @ @SAINTRAMPAUIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ काशी का दिव्य भंडारा कबीर परमात्मा ने काशी में केशव बंजारा का रूप धारण करके एक असाधारण कार्य किया। उन्होंने १८ लाख साधु-संतों सहित जनसमुदाय को तीन दिन का दिव्य भंडारा करवाया। यह किसी चमत्कार से कम न था, क्योंकि बिना पकाए ही मिठाईयों , लड्डू, जलेबी व चंगेर सहित सभी पकवानों के ढेर लग रहे थे। चावल, खीर और हलवे के कड़ाहे भरे हुए थे, और हर कोई तृप्त होकर परमात्मा की महिमा गा रहा था। यह कुबेर के  समान असीमित भंडार था, जहाँ भोजन और दक्षिणा निरंतर वितरित గెt 7గేt బfTI1 1 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @ @SAINTRAMPAUIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला - का श्लोक 9 अध्याय दिच्यम 44-4 एवम यः aेत्ति तत्वतः V೦L. देहम, पनः, जन्म  एति माम एति सः अर्जन।।  ాా अनुवादः ( अर्जुन।  अर्जुन! (गे। गेरे । जन्ग। जन्म (च॰ कर्म (दिव्यम्) दिव्य भर्थात् मलोकिक ्हे॰ [ক4]  (यः) जो मनृष्य ( तत्त्वतः ) तत्वसे येत्ति)  ।एयम्) डिस L Cm जान लेता है।सः ) बह ( देहम) शरीरको (त्यकचा) त्यागवर (पुनः) ।फिर ( जन्म। जन्मको (न एाते) प्राप्त न्हा हांता कितु जो मुडा काल को तत्य  नहीं जानते ( माम्। मुडो हो (एति।  प्राप्त तोता हे। (९)  ೯-: अर्जुन! गैरे जन्म ओर कर्म दिव्य अर्थान् अलीकिक  इस प्रकार जो मनुष्य तत्यसे जान लेता ह यह  शरीरको त्यागकर फिर जन्मको माप्त नही ठोता कित जो काल को तत्व रा नर्ही जानते मुझ ही गराप्त हाता हे।  गीता जी का ज्ञान किसने बोला ? श्लोक 9 में कहा है कि हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म गीता अध्याय दिव्य हैं भावार्थ है कि काल ब्रह्म अन्य के शरीर में प्रवेश करके श्री कृष्ण " कार्य करता है जैसे जी ने प्रतिज्ञा कर रखी थी ೯ ಶ್ಷ कि मैं महाभारत में किसी को मारने के लिए शस्त्र भी नही उठाऊँगा | श्री कृष्ण में काल ब्रह्म ने प्रवेश होकर रथ का पहिया उठाकर अनेकों सैनिकों को मार डाला पाप श्री कृष्ण जी के जिम्मे कर दिए प्रतिज्ञा भी समाप्त करके कलंकित किया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नाम, पूरा पता भेजें  নান যযা +91 7496801823 SPIRITUAL LEADER  SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ का श्लोक 9 अध्याय दिच्यम 44-4 एवम यः aेत्ति तत्वतः V೦L. देहम, पनः, जन्म  एति माम एति सः अर्जन।।  ాా अनुवादः ( अर्जुन।  अर्जुन! (गे। गेरे । जन्ग। जन्म (च॰ कर्म (दिव्यम्) दिव्य भर्थात् मलोकिक ्हे॰ [ক4]  (यः) जो मनृष्य ( तत्त्वतः ) तत्वसे येत्ति)  ।एयम्) डिस L Cm जान लेता है।सः ) बह ( देहम) शरीरको (त्यकचा) त्यागवर (पुनः) ।फिर ( जन्म। जन्मको (न एाते) प्राप्त न्हा हांता कितु जो मुडा काल को तत्य  नहीं जानते ( माम्। मुडो हो (एति।  प्राप्त तोता हे। (९)  ೯-: अर्जुन! गैरे जन्म ओर कर्म दिव्य अर्थान् अलीकिक  इस प्रकार जो मनुष्य तत्यसे जान लेता ह यह  शरीरको त्यागकर फिर जन्मको माप्त नही ठोता कित जो काल को तत्व रा नर्ही जानते मुझ ही गराप्त हाता हे।  गीता जी का ज्ञान किसने बोला ? श्लोक 9 में कहा है कि हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म गीता अध्याय दिव्य हैं भावार्थ है कि काल ब्रह्म अन्य के शरीर में प्रवेश करके श्री कृष्ण " कार्य करता है जैसे जी ने प्रतिज्ञा कर रखी थी ೯ ಶ್ಷ कि मैं महाभारत में किसी को मारने के लिए शस्त्र भी नही उठाऊँगा | श्री कृष्ण में काल ब्रह्म ने प्रवेश होकर रथ का पहिया उठाकर अनेकों सैनिकों को मार डाला पाप श्री कृष्ण जी के जिम्मे कर दिए प्रतिज्ञा भी समाप्त करके कलंकित किया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नाम, पूरा पता भेजें  নান যযা +91 7496801823 SPIRITUAL LEADER  SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला - का श्लोक 9 अध्याय दिच्यम 44-4 एवम यः aेत्ति तत्वतः V೦L. देहम, पनः, जन्म  एति माम एति सः अर्जन।।  ాా अनुवादः ( अर्जुन।  अर्जुन! (गे। गेरे । जन्ग। जन्म (च॰ कर्म (दिव्यम्) दिव्य भर्थात् मलोकिक ्हे॰ [ক4]  (यः) जो मनृष्य ( तत्त्वतः ) तत्वसे येत्ति)  ।एयम्) डिस L Cm जान लेता है।सः ) बह ( देहम) शरीरको (त्यकचा) त्यागवर (पुनः) ।फिर ( जन्म। जन्मको (न एाते) प्राप्त न्हा हांता कितु जो मुडा काल को तत्य  नहीं जानते ( माम्। मुडो हो (एति।  प्राप्त तोता हे। (९)  ೯-: अर्जुन! गैरे जन्म ओर कर्म दिव्य अर्थान् अलीकिक  इस प्रकार जो मनुष्य तत्यसे जान लेता ह यह  शरीरको त्यागकर फिर जन्मको माप्त नही ठोता कित जो काल को तत्व रा नर्ही जानते मुझ ही गराप्त हाता हे।  गीता जी का ज्ञान किसने बोला ? श्लोक 9 में कहा है कि हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म गीता अध्याय दिव्य हैं भावार्थ है कि काल ब्रह्म अन्य के शरीर में प्रवेश करके श्री कृष्ण " कार्य करता है जैसे जी ने प्रतिज्ञा कर रखी थी ೯ ಶ್ಷ कि मैं महाभारत में किसी को मारने के लिए शस्त्र भी नही उठाऊँगा | श्री कृष्ण में काल ब्रह्म ने प्रवेश होकर रथ का पहिया उठाकर अनेकों सैनिकों को मार डाला पाप श्री कृष्ण जी के जिम्मे कर दिए प्रतिज्ञा भी समाप्त करके कलंकित किया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नाम, पूरा पता भेजें  নান যযা +91 7496801823 SPIRITUAL LEADER  SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ का श्लोक 9 अध्याय दिच्यम 44-4 एवम यः aेत्ति तत्वतः V೦L. देहम, पनः, जन्म  एति माम एति सः अर्जन।।  ాా अनुवादः ( अर्जुन।  अर्जुन! (गे। गेरे । जन्ग। जन्म (च॰ कर्म (दिव्यम्) दिव्य भर्थात् मलोकिक ्हे॰ [ক4]  (यः) जो मनृष्य ( तत्त्वतः ) तत्वसे येत्ति)  ।एयम्) डिस L Cm जान लेता है।सः ) बह ( देहम) शरीरको (त्यकचा) त्यागवर (पुनः) ।फिर ( जन्म। जन्मको (न एाते) प्राप्त न्हा हांता कितु जो मुडा काल को तत्य  नहीं जानते ( माम्। मुडो हो (एति।  प्राप्त तोता हे। (९)  ೯-: अर्जुन! गैरे जन्म ओर कर्म दिव्य अर्थान् अलीकिक  इस प्रकार जो मनुष्य तत्यसे जान लेता ह यह  शरीरको त्यागकर फिर जन्मको माप्त नही ठोता कित जो काल को तत्व रा नर्ही जानते मुझ ही गराप्त हाता हे।  गीता जी का ज्ञान किसने बोला ? श्लोक 9 में कहा है कि हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म गीता अध्याय दिव्य हैं भावार्थ है कि काल ब्रह्म अन्य के शरीर में प्रवेश करके श्री कृष्ण " कार्य करता है जैसे जी ने प्रतिज्ञा कर रखी थी ೯ ಶ್ಷ कि मैं महाभारत में किसी को मारने के लिए शस्त्र भी नही उठाऊँगा | श्री कृष्ण में काल ब्रह्म ने प्रवेश होकर रथ का पहिया उठाकर अनेकों सैनिकों को मार डाला पाप श्री कृष्ण जी के जिम्मे कर दिए प्रतिज्ञा भी समाप्त करके कलंकित किया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नाम, पूरा पता भेजें  নান যযা +91 7496801823 SPIRITUAL LEADER  SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला - पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी का ज्ञान किसने कहा 33/9 जानने के लिए अवश्य ज्ञान पढें पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा [ गगा ಣ77 @; हाने नन्व iर् *=7+!=` 175 ٤٣ ؟« ؟٦٢ ٤٦  SPIRITUAL LEADER' SANT RAMPAL Jl () @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ पवित्र श्रीमद्भगवत गीता जी का ज्ञान किसने कहा 33/9 जानने के लिए अवश्य ज्ञान पढें पवित्र पुस्तक ज्ञान गंगा [ गगा ಣ77 @; हाने नन्व iर् *=7+!=` 175 ٤٣ ؟« ؟٦٢ ٤٦  SPIRITUAL LEADER' SANT RAMPAL Jl () @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला
गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला - अध्याय ११ का श्लोक ४७ भगवान उवाच प्रसन्नेन तव अर्जुन इदम रूपम परम् दर्शितम् आत्मयोगात् तेजोमयम विश्वम अनन्तम आद्यम यत मे त्वदन्येन 7 #ಣaTII47II अनुवादः ( अर्जुन) हे अर्जून। (पसनेन। अनुग्रहपूर्वक ( मया) र्मैने ( आत्मयोगात अपनी योगशक्तिके प्रभावसे (इदम। यह मेरा ( परम् ) परम (तेजोमयम्) तेजोमय ( आदाम्) (Fann] चिराट सनका आदि ओर ( अनन्तम्) सीमारहित नुझको ( दशितम) दिखलाया है (यत)  रूपम। रूप ।तव जिसे ( त्वदन्येन ) तेरे अतिरिक्त दूसरे किसीने (न दृष्टपूर्वम्। पहले नहों देखा था। (४७) हिन्दीः हे अर्जुन। अनुग्रहपूर्वक र्मैने अपनी योगशक्तिके  प्र्ावसे यह् मेरा परम तेजोमय सबका आदि और जिसे तेरे चिराट  सीमारहित तुझको दिखलाया  रप ரிளசி आंत्िरिक्त दूसरे किसीने पहले नहीं देखा था। ज्ञान किसने बोला? अध्याय १ १ श्लोक ४७ में पवित्र गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा है कि 'हे अर्जुन! यह मेरा वास्तविक काल रूप है, जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा था। ' सिद्ध हुआ कि कौरवों की सभा में विराट रूप श्री कृष्ण जी ने दिखाया था तथा कुरूक्षेत्र में युद्ध के मैदान में विराट रूप काल ने दिखाया था। नहीं तो यह नहीं कहता कि यह विराट रूप तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है। क्योंकि श्री कृष्ण जी अपना विराट रूप कौरवों की सभा में पहले ही दिखा चुके थे जो अनेकों ने देखा था। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज पचित्र पुस्तक  निःशल्क  पाये अपना नाम , परा पता भेजे ज्ञान गगा +91 7496801825 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl 0 @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ अध्याय ११ का श्लोक ४७ भगवान उवाच प्रसन्नेन तव अर्जुन इदम रूपम परम् दर्शितम् आत्मयोगात् तेजोमयम विश्वम अनन्तम आद्यम यत मे त्वदन्येन 7 #ಣaTII47II अनुवादः ( अर्जुन) हे अर्जून। (पसनेन। अनुग्रहपूर्वक ( मया) र्मैने ( आत्मयोगात अपनी योगशक्तिके प्रभावसे (इदम। यह मेरा ( परम् ) परम (तेजोमयम्) तेजोमय ( आदाम्) (Fann] चिराट सनका आदि ओर ( अनन्तम्) सीमारहित नुझको ( दशितम) दिखलाया है (यत)  रूपम। रूप ।तव जिसे ( त्वदन्येन ) तेरे अतिरिक्त दूसरे किसीने (न दृष्टपूर्वम्। पहले नहों देखा था। (४७) हिन्दीः हे अर्जुन। अनुग्रहपूर्वक र्मैने अपनी योगशक्तिके  प्र्ावसे यह् मेरा परम तेजोमय सबका आदि और जिसे तेरे चिराट  सीमारहित तुझको दिखलाया  रप ரிளசி आंत्िरिक्त दूसरे किसीने पहले नहीं देखा था। ज्ञान किसने बोला? अध्याय १ १ श्लोक ४७ में पवित्र गीता जी को बोलने वाले प्रभु काल ने कहा है कि 'हे अर्जुन! यह मेरा वास्तविक काल रूप है, जिसे तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा था। ' सिद्ध हुआ कि कौरवों की सभा में विराट रूप श्री कृष्ण जी ने दिखाया था तथा कुरूक्षेत्र में युद्ध के मैदान में विराट रूप काल ने दिखाया था। नहीं तो यह नहीं कहता कि यह विराट रूप तेरे अतिरिक्त पहले किसी ने नहीं देखा है। क्योंकि श्री कृष्ण जी अपना विराट रूप कौरवों की सभा में पहले ही दिखा चुके थे जो अनेकों ने देखा था। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज पचित्र पुस्तक  निःशल्क  पाये अपना नाम , परा पता भेजे ज्ञान गगा +91 7496801825 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl 0 @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGODORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat