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#🙏भक्ती सुविचार📝 #🎭Whatsapp status #☀️गुड मॉर्निंग☀️ #🙏भक्तीमय सकाळ🎬
🙏भक्ती सुविचार📝 - अव्यक्त मास के लिए विशेष पुरूषार्थ प्रजापिता ब्रह्मा बाबा HI मैं ब्रह्मा  बाप समान सर्व बन्धनों से मुक्त, जीवनमुक्त आत्मा हूँ। योगाभ्यास मैं आत्मा मास्टर त्रिकालदर्शा हूँ, साक्षीपन की सीट पर बैठ कर्मेन्द्रिय द्वारा कर्म करा रही हूँ, इसी करावनहार बन अपने हर एक अभ्यास से कर्मबन्धन मुक्त स्थिति का अनुभव कर रही हूँ॰.. | धारणा मास्टर त्रिकालदर्शी  साक्षीपन की स्थिति में स्थित होकर हर कर्मेन्द्रिय द्वारा कार्य कराना। अव्यक्त इशारे मास्टर त्रिकालदर्शी बनकर हर कर्म, हर संकल्प करो वा वचन बोलो, तो कोई भी कर्म व्यर्थ वा अनर्थ वाला नहीं हो सकता। त्रिकालदर्शी अर्थात् साक्षीपन की स्थिति में स्थित होकर इन कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म वशीभूत करेंगे तो कर्म के नहीं होंगे। सदा कर्म और कर्म के बन्धन बन अपनी ऊँची स्टेज को प्राप्त कर लेंगे।  5< जनवरी 24 ब्रह्माकुमारीज़, माउंट आबू 2026 अव्यक्त मास के लिए विशेष पुरूषार्थ प्रजापिता ब्रह्मा बाबा HI मैं ब्रह्मा  बाप समान सर्व बन्धनों से मुक्त, जीवनमुक्त आत्मा हूँ। योगाभ्यास मैं आत्मा मास्टर त्रिकालदर्शा हूँ, साक्षीपन की सीट पर बैठ कर्मेन्द्रिय द्वारा कर्म करा रही हूँ, इसी करावनहार बन अपने हर एक अभ्यास से कर्मबन्धन मुक्त स्थिति का अनुभव कर रही हूँ॰.. | धारणा मास्टर त्रिकालदर्शी  साक्षीपन की स्थिति में स्थित होकर हर कर्मेन्द्रिय द्वारा कार्य कराना। अव्यक्त इशारे मास्टर त्रिकालदर्शी बनकर हर कर्म, हर संकल्प करो वा वचन बोलो, तो कोई भी कर्म व्यर्थ वा अनर्थ वाला नहीं हो सकता। त्रिकालदर्शी अर्थात् साक्षीपन की स्थिति में स्थित होकर इन कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म वशीभूत करेंगे तो कर्म के नहीं होंगे। सदा कर्म और कर्म के बन्धन बन अपनी ऊँची स्टेज को प्राप्त कर लेंगे।  5< जनवरी 24 ब्रह्माकुमारीज़, माउंट आबू 2026 - ShareChat
#🙏भक्तीमय सकाळ🎬 #🎭Whatsapp status #☀️गुड मॉर्निंग☀️ #🙏भक्ती सुविचार📝
🙏भक्तीमय सकाळ🎬 - क्रोध' तेज हवा की तरह है। कुछ देर बाद यह ठंडा हो जाता है, लेकिन तब तक कई शाखाएँ और पत्ते टूट होते हैं, जिन्हें ತಾ दोबारा जोड़ा नहीं जा सकता . . ! क्रोध' तेज हवा की तरह है। कुछ देर बाद यह ठंडा हो जाता है, लेकिन तब तक कई शाखाएँ और पत्ते टूट होते हैं, जिन्हें ತಾ दोबारा जोड़ा नहीं जा सकता . . ! - ShareChat
#🙏भक्ती सुविचार📝 #🎭Whatsapp status #☀️गुड मॉर्निंग☀️ #🙏भक्तीमय सकाळ🎬
🙏भक्ती सुविचार📝 - परमपिता परमात्मा शिव भगवानुवाच  बाबा आया हुआ हे पुरानी दुनिया को बनाने। जहाँ कर्म बदलने, नई दुनिया  अकर्म हो जाते हैे उसको ही सतयुग कहा जाता है और फिर जहाँ सब कर्म, विकर्म होते हैं उसको कलियुग कहा जाता हे। तुम अभी हो संगम पर। बाबा दोर्नों तरफ की बात समझाते हैं। सतयुग त्रेता तो हे पवित्र दुनिया, वहाँ कोई पाप होता नहीं। जब रावण राज्य शुरू होता हैे तब ही पाप होते हैं। वहाँ নিন্ধাৎকানাম ন্নীচীনাl 24.01.2026 Learn Rajyoga Meditation Download App परमपिता परमात्मा शिव भगवानुवाच  बाबा आया हुआ हे पुरानी दुनिया को बनाने। जहाँ कर्म बदलने, नई दुनिया  अकर्म हो जाते हैे उसको ही सतयुग कहा जाता है और फिर जहाँ सब कर्म, विकर्म होते हैं उसको कलियुग कहा जाता हे। तुम अभी हो संगम पर। बाबा दोर्नों तरफ की बात समझाते हैं। सतयुग त्रेता तो हे पवित्र दुनिया, वहाँ कोई पाप होता नहीं। जब रावण राज्य शुरू होता हैे तब ही पाप होते हैं। वहाँ নিন্ধাৎকানাম ন্নীচীনাl 24.01.2026 Learn Rajyoga Meditation Download App - ShareChat
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🙏भक्तीमय सकाळ🎬 - की ओर सम्पूर्णता मास्टर त्रिकालदर्शी बनकर हर कर्म , हर संकल्प करो वा वचन बोलो , तो कोई भी कर्म व्यर्थ वा अनर्थ वाला नहीं हो सकता। त्रिकालदर्शी अर्थात् साक्षीपन की स्थिति में स्थित होकर इन कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म करेंगे तो कर्म के वशीभूत नहीं होंगे। सदा कर्म और कर्म के बन्धन से मुक्त बन अपनी ऊंची स्टेज को प्राप्त कर लेंगे । की ओर सम्पूर्णता मास्टर त्रिकालदर्शी बनकर हर कर्म , हर संकल्प करो वा वचन बोलो , तो कोई भी कर्म व्यर्थ वा अनर्थ वाला नहीं हो सकता। त्रिकालदर्शी अर्थात् साक्षीपन की स्थिति में स्थित होकर इन कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म करेंगे तो कर्म के वशीभूत नहीं होंगे। सदा कर्म और कर्म के बन्धन से मुक्त बन अपनी ऊंची स्टेज को प्राप्त कर लेंगे । - ShareChat
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🙏भक्ती सुविचार📝 - परमपिता परमात्मा शिव भगवानुवाच टीचर बन ऐसे पढ़ाते हैं। हमको बाप बाप अपना परिचय खुद ही आकर देते हैं। खुद कहते हैं मैं आता हूँ पतितों को पावन बनाने तो मुझे शरीर जरूर चाहिए। नहीं तो बात कैसे करूँ। मैं चैतन्य हूँ, सत हूँ और अमर हूँ। आत्मा सतो, रजो, तमो में आती है। आत्मा ही पावन और पतित बनती है इसलिए कहा जाता है पतित आत्मा , पावन में ही सब संस्कार हैं। आत्मा। आत्मा पास्ट के कर्म वा विकर्म का संस्कार आत्मा ले आती है। 24.01.2026 Downlood App Learn Rajyoga Meditation GoopeP परमपिता परमात्मा शिव भगवानुवाच टीचर बन ऐसे पढ़ाते हैं। हमको बाप बाप अपना परिचय खुद ही आकर देते हैं। खुद कहते हैं मैं आता हूँ पतितों को पावन बनाने तो मुझे शरीर जरूर चाहिए। नहीं तो बात कैसे करूँ। मैं चैतन्य हूँ, सत हूँ और अमर हूँ। आत्मा सतो, रजो, तमो में आती है। आत्मा ही पावन और पतित बनती है इसलिए कहा जाता है पतित आत्मा , पावन में ही सब संस्कार हैं। आत्मा। आत्मा पास्ट के कर्म वा विकर्म का संस्कार आत्मा ले आती है। 24.01.2026 Downlood App Learn Rajyoga Meditation GoopeP - ShareChat
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🙏भक्तीमय सकाळ🎬 - परमपिता परमात्मा शिव आज का वरदान घबराने की डांस छोड़ सदा की खुशी नॉलेजफुल भव डांस करने वाले मास्टर नॉलेजफुल हैं वह जो बच्चे मास्टर कभी घबराने की डांस नहीं कर सकते। सेकण्ड में सीढ़ी नीचे, सेकण्ड में ऊपर अब यह संस्कार चेंज करो तो बहुत फास्ट जायेंगे | सिर्फ मिली हुई अथॉरिटी को, नॉलेज को , परिवार के सहयोग को यूज़ करो , बाप के हाथ में हाथ देकर মরলনী ফ্ী নী की डांस करते खुशी रहेंगे , घबराने की डांस हो नहीं सकती | लेकिन जब माया का हाथ पकड़ लेते हो तो वह डांस होती है। 24.01.2026 Learn Rajyoga Meditation Download App परमपिता परमात्मा शिव आज का वरदान घबराने की डांस छोड़ सदा की खुशी नॉलेजफुल भव डांस करने वाले मास्टर नॉलेजफुल हैं वह जो बच्चे मास्टर कभी घबराने की डांस नहीं कर सकते। सेकण्ड में सीढ़ी नीचे, सेकण्ड में ऊपर अब यह संस्कार चेंज करो तो बहुत फास्ट जायेंगे | सिर्फ मिली हुई अथॉरिटी को, नॉलेज को , परिवार के सहयोग को यूज़ करो , बाप के हाथ में हाथ देकर মরলনী ফ্ী নী की डांस करते खुशी रहेंगे , घबराने की डांस हो नहीं सकती | लेकिन जब माया का हाथ पकड़ लेते हो तो वह डांस होती है। 24.01.2026 Learn Rajyoga Meditation Download App - ShareChat
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🙏भक्ती सुविचार📝 - श्रेष्ठ प्रेरणा जब कोई कार्य हम परमात्मा की याद में रहकर करते हैं॰॰॰ तो उस कार्य को पूरा और सफ़ल करने की ज़िम्मेदारी परमात्मा की हो जाती है॰. इसलिए মী ব্রূায जीवन Ha हर परमात्मा की याद में रहकर करें.॰. | Download App Learn Rajyoga Meditation 099^ श्रेष्ठ प्रेरणा जब कोई कार्य हम परमात्मा की याद में रहकर करते हैं॰॰॰ तो उस कार्य को पूरा और सफ़ल करने की ज़िम्मेदारी परमात्मा की हो जाती है॰. इसलिए মী ব্রূায जीवन Ha हर परमात्मा की याद में रहकर करें.॰. | Download App Learn Rajyoga Meditation 099^ - ShareChat
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🙏भक्तीमय सकाळ🎬 - परमपिता परमातमा शिव आज का स्लोगन जिनका संकल्प और कर्म महान है वही सर्वशक्तिमान् है। H 24.01.2026 বৈল _= APP Learn Rajyoga Meditation] Download GTITO . Play Google परमपिता परमातमा शिव आज का स्लोगन जिनका संकल्प और कर्म महान है वही सर्वशक्तिमान् है। H 24.01.2026 বৈল _= APP Learn Rajyoga Meditation] Download GTITO . Play Google - ShareChat
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🙏भक्ती सुविचार📝 - सृष्टिकाआदिमध्यअंत (चारयुगों काज्ञान) मुरली बजाई | भगवान ने माना ही ज्ञान देना। गायन भी है मुरली में जादू। तो जरूर कोई जादू मुरली [ बजाना , वह तो होगा ना! सिर्फ मुरली कॉमन फकीर लोग भी बजाते रहते हैं । 5ஈச भगवान की मुरली जादू है 4 ऐसा ज्ञान जिससे मनुष्य से देवता बनते हैं। ৯ ঐণনাঙজী सतयुग का ॰  युग। को विकारी, देवताओं को मनुष्यों निर्विकारी कहा जाता है। देवताओं की gaeesan सृष्टि को पवित्र कहा जाता है। दुनिया      सृष्टिकाआदिमध्यअंत (चारयुगों काज्ञान) मुरली बजाई | भगवान ने माना ही ज्ञान देना। गायन भी है मुरली में जादू। तो जरूर कोई जादू मुरली [ बजाना , वह तो होगा ना! सिर्फ मुरली कॉमन फकीर लोग भी बजाते रहते हैं । 5ஈச भगवान की मुरली जादू है 4 ऐसा ज्ञान जिससे मनुष्य से देवता बनते हैं। ৯ ঐণনাঙজী सतयुग का ॰  युग। को विकारी, देवताओं को मनुष्यों निर्विकारी कहा जाता है। देवताओं की gaeesan सृष्टि को पवित्र कहा जाता है। दुनिया - ShareChat
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🙏भक्तीमय सकाळ🎬 - Drawing  Murli 24/1/26 Paramdham Srishti Chakral हम सब आत्मायें भाई-भाई हैं शरीर द्वारा पार्ट बजाते हैं। बाप का परिचय और सृष्टि चक्र का ज्ञान। सत्ययुग कर्म = अकर्म कलियुग (कोई पाप नहीं) सतयुग (16 কলা) (रावण राज्य ) कलियुग त्रेतायुग द्वापरयुग (वाम मार्ग নিকর্ম ಹಗ = (14 কলা) g5) (विकार , रावण राज्य) सतयुग में कर्म अकर्म , कलियुग में कर्म विकर्म। ८४ का सृष्टि चक्रः सतयुग , त्रेता , द्वापर , कलियुग।  मनुष्य सृष्टि रूपी झाड INCORPOREAL WORLD शांतिधाम शरीर नहीं , आदि मध्य अन्त कर्म नहीं का ज्ञान CORPOREAL बीजरूप बाप WORLD  यमनुष् सृष्िरूप्ती झाड़ के ব্রাণ (নীনি-মং)মসুল্প परमधाम (शांतिधाम ) और साकार दुनिया ( कर्मक्षेत्र)| को संगमयुग भाग्यशाली बाप प्रवेश करते ২থ २४ कैरेट सोना Impure याद /योग (सतोप्रधान ) आत्मा संगमयुग पर बाप भाग्यशाली रथ (ब्रह्मा) में याद से आत्मा २४ कैरेट सोना (सतोप्रधान ) बनती है प्रवेश करते हैं। MASTER KNOWLEDGEFUL #1 DANCE ঘনযান কী DANCE खुशी की डांस करो। माया का हाथ छोड़़, बाप का हाथ पकड़ खुशी  वरदान Drawing  Murli 24/1/26 Paramdham Srishti Chakral हम सब आत्मायें भाई-भाई हैं शरीर द्वारा पार्ट बजाते हैं। बाप का परिचय और सृष्टि चक्र का ज्ञान। सत्ययुग कर्म = अकर्म कलियुग (कोई पाप नहीं) सतयुग (16 কলা) (रावण राज्य ) कलियुग त्रेतायुग द्वापरयुग (वाम मार्ग নিকর্ম ಹಗ = (14 কলা) g5) (विकार , रावण राज्य) सतयुग में कर्म अकर्म , कलियुग में कर्म विकर्म। ८४ का सृष्टि चक्रः सतयुग , त्रेता , द्वापर , कलियुग।  मनुष्य सृष्टि रूपी झाड INCORPOREAL WORLD शांतिधाम शरीर नहीं , आदि मध्य अन्त कर्म नहीं का ज्ञान CORPOREAL बीजरूप बाप WORLD  यमनुष् सृष्िरूप्ती झाड़ के ব্রাণ (নীনি-মং)মসুল্প परमधाम (शांतिधाम ) और साकार दुनिया ( कर्मक्षेत्र)| को संगमयुग भाग्यशाली बाप प्रवेश करते ২থ २४ कैरेट सोना Impure याद /योग (सतोप्रधान ) आत्मा संगमयुग पर बाप भाग्यशाली रथ (ब्रह्मा) में याद से आत्मा २४ कैरेट सोना (सतोप्रधान ) बनती है प्रवेश करते हैं। MASTER KNOWLEDGEFUL #1 DANCE ঘনযান কী DANCE खुशी की डांस करो। माया का हाथ छोड़़, बाप का हाथ पकड़ खुशी  वरदान - ShareChat