*एक ऐसा त्यौहार जो चार दिन चलता है, कोई दंगा नहीं होता, इंटरनेट कनेक्शन नहीं काटा जाता, किसी शांति समिति की बैठक कराने की जरुरत नहीं पड़ती, चंदे के नाम पर गुंडा गर्दी नहीं होती और जबरन उगाही भी नहीं ! शराब की दुकाने बंद रखने का नोटिस नहीं चिपकना पड़ता, मिठाई के नाम पर मिलावट नहीं परोसी जाती है! उंच - नीच का भेद नहीं होता, व्यक्ति-धर्म विशेष के जयकारे नहीं लगते, किसी से अनुदान और अनुकम्पा की अपेक्षा नहीं रहती है, राजा रंक एक कतार में खड़े होते है, समझ से परे रहने वाले मंत्रो का उच्चारण नहीं होता और दान दक्षिणा का रिवाज नहीं है ।*
*एक ऐसी पूजा जिसमें कोई* *पुजारी नहीं होता,*
*जिसमें देवता प्रत्यक्ष हैं*
*जिसमें ढूबते सूर्य को भी पूजते हैं,*
*जिसमें व्रती जाति समुदाय से परे है,*
*जिसमें केवल लोक गीत गाते हैं,*
*जिसमें पकवान घर पर बनते हैं*,
*जिसमें घाटों पर कोई ऊँच नीच नहीं है,*
*जिसमें प्रसाद अमीर गरीब सभी श्रद्धा से ग्रहण करते हैं।*
*जिसमे प्रकृति संरक्षण का बोध होता है*
*जिसमे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संजीवनी मिलती हो*
*ऐसे सामाजिक सौहार्द, सद्भाव, शांति, समृद्धि और सादगी के महापर्व छठ की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं! #🙏जय हे छठी मईया🙏
🚩🚩🚩🚩🚩
🙏🙏🙏🙏
केदारनाथ धाम बंद 🥺
बद्रीनाथ धाम बंद 🥺
माता वैष्णो देवी धाम बंद 🥺
ऋषिकेश के घाट बंद 🥺
मणिमहेश यात्रा बंद 🥺
किन्नर कैलाश बंद 🥺
धारी देवी बंद 🥺
अमरनाथ यात्रा बंद 🥺
ये सब वो यात्रा है जहां जाकर साक्षात् भगवान के दर्शन होते हैं, 🙏🚩
कुछ तो गलती कर रहे हैं इंसान,जिसके कारण भगवान भी मुंह मोड़ रहे है 🤔😞
*इन जगह को पर्यटक स्थल न बनाए 🙏*
*सिर्फ भक्ति के🙏लिए ही जाएं।*
*बहुत कुछ संकेत☝️हमको दिए जा रहे हैं*
*वरना😳प्रलय दूर नहीं*
सनातन धर्म की जय हो। 🚩🚩🚩 #🙏ईश्वर एक रूप अनेक
हे देवियों थोड़ा रुक जा थोड़ा ठहर बचा ले अपने बच्चे और उसका घर थोड़ी संयम रख अपने दिल और दिमाग में
मत जलो आधुनिकता के
भयंकर आग में छोटे कपड़ों में जो दिखना चाहती हो सुन्दर
लगती हो बेवकूफ पागल और छूछुंदर सचमुच में दिखना है
तुमको खूबसूरत तो देखो सीता सावित्रीऔर पद्मावती की मूरत
कहां थी कहां हो कहां जाओगी
अपने शालीनता को कितना गिराओगी क्यों बनना चाहती हो
पुरुषों के बराबर तुम्हारा दर्जा है
उससे काफी ऊपर बचा ले अपने बच्चे को बर्बाद होने से उसके साथ खुद भी जिन्दगी भर रोने से
सोशल मीडिया पर होने को मशहूर कर रहे हैं वो लोग
असभ्यता अभद्रता भरपूर
ये जो लीव- इन का नया कैंसर फैला है सभ्य समाज को निकलता अजगर विषैला हैं
नई पीढ़ी में भरे सभ्यता संस्कृति संस्कार उसके सर से उतारे
आधुनिकता का बुखार पहने सभ्य और सुंदर परिधान पाएं असली सौंदर्य और सम्मान। #🙏ईश्वर एक रूप अनेक








