५.१ लाख व्ह्यू · २७ ह प्रतिक्रिया | आज तक, जागरण, भास्कर जैसे मुख्यधारा मीडिया के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर इस्लाम से जुड़े विषयों पर लगातार लेख, वीडियो, एक्सप्लेनर और फैक्ट-चेक छपते हैं। समस्या यह है कि इनका अधिकतर कंटेंट ऐसे लोगों द्वारा लिखा जाता है जो इस्लामी ज्ञान, फिक़्ह, इतिहास और अरबी स्रोतों से परिचित नहीं होती। गैर-जानकार लोग धर्म की तकनीकी बातों को गलत समझकर गलत तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उदाहरण: हलाल/हराम के मसले, शरिया, फिक़्ह, सूफी सिलसिले, इतिहास इन्हें बिना गहराई के समझाए सीधा पॉलिटिकल एंगल दे देते हैं। धार्मिक शब्दों को सनसनीखीज़ तरीके से पेश किया जाता है, ताकि क्लिक मिलें। इससे मूल अर्थ खो जाता है। एकतरफा नैरेटिव बनता है, क्योंकि लेखक का बैकग्राउंड धार्मिक अध्ययन का नहीं होता। उनकी समझ पॉलिटिकल या सोशल मीडिया आधारित होती है। इसलिए उनकी जानकारी आधी-अधूरी होती है और वही आधी-अधूरी बात आगे गलतफहमी बनकर फैलती है। पूरी बात समझने के लिए वीडियो देखें। | Qamar Kranti
आज तक, जागरण, भास्कर जैसे मुख्यधारा मीडिया के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर इस्लाम से जुड़े विषयों पर लगातार लेख, वीडियो, एक्सप्लेनर और फैक्ट-चेक छपते हैं।...