Prisha
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#❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस #🏠घर-परिवार #☝ मेरे विचार #🌸 सत्य वचन #📜 Whatsapp स्टेटस
❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस - परिवार में सबसे खतरनाक वो लोग होते हैं जो कभी सामने कुछ नहीं कहते , چ٤٨-٤٨ के कान भरते रहते हैं। दूसरों ; उनहें ना रिश्तों की परवाह होती है , ना धर को शांति की उनहें बस इतना चाहिए कि आग लगे , और वो दूर खड़े होकर तमाशा देखें । से बहुत : ऐसे लोग बाहर  अव्छे लगते हैं, लेकिन अंदर से सबसे ज़्यादा खोखले होते है।  समय आने पर यही लोग सबसे पहले नकाब के साथ गिरते हैं। परिवार में सबसे खतरनाक वो लोग होते हैं जो कभी सामने कुछ नहीं कहते , چ٤٨-٤٨ के कान भरते रहते हैं। दूसरों ; उनहें ना रिश्तों की परवाह होती है , ना धर को शांति की उनहें बस इतना चाहिए कि आग लगे , और वो दूर खड़े होकर तमाशा देखें । से बहुत : ऐसे लोग बाहर  अव्छे लगते हैं, लेकिन अंदर से सबसे ज़्यादा खोखले होते है।  समय आने पर यही लोग सबसे पहले नकाब के साथ गिरते हैं। - ShareChat
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📜 Whatsapp स्टेटस - पहले के समय में रिश्ते इसलिए सुलझ करत्ते थे क्यौकि घर में समझदार और जिम्मेदार बड़े बुजुर्ग होते थे।. लेकिन आज के समय में रिश्ते इसलिए बिगड़ रहे हैं क्यौकि कई बुजुर्ग उन्हें सुलझाने की बजाय आग लगाने में लगे रहते हैं। पहले के समय में रिश्ते इसलिए सुलझ करत्ते थे क्यौकि घर में समझदार और जिम्मेदार बड़े बुजुर्ग होते थे।. लेकिन आज के समय में रिश्ते इसलिए बिगड़ रहे हैं क्यौकि कई बुजुर्ग उन्हें सुलझाने की बजाय आग लगाने में लगे रहते हैं। - ShareChat
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❤️सैड व्हाट्सएप स्टेटस - दामाद बेटा बन सकता है, पर बहू बेटी कभी नहीं बन सकती | क्यॉकि जितनी डज्जत ससुरात में मिलती है, एक दामाद को उसके अपना पूरा जीवन समर्पित करने केबाद भी बही इज्नत एक बहू को उसके ससुरात में कभी नहीं मिलती| दामाद बेटा बन सकता है, पर बहू बेटी कभी नहीं बन सकती | क्यॉकि जितनी डज्जत ससुरात में मिलती है, एक दामाद को उसके अपना पूरा जीवन समर्पित करने केबाद भी बही इज्नत एक बहू को उसके ससुरात में कभी नहीं मिलती| - ShareChat
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👫चैटरूम चिटचैट✨ - की सलाह 8 वुजुर्गा मत मान लिया करो बथौकि भी बूर्ढ़े होते हैं! 3 की सलाह 8 वुजुर्गा मत मान लिया करो बथौकि भी बूर्ढ़े होते हैं! 3 - ShareChat
#👉 लोगों के लिए सीख👈 #🌸 सत्य वचन #📜 Whatsapp स्टेटस #🤟 सुपर स्टेटस #😝ट्रेंडिंग मीम्स
👉 लोगों के लिए सीख👈 - मैं वैसे लोगों से दूरी बनाकर रखता हूँ जो किसी दूसरे की बुराई मेरे सामने आकर करते हैं क्याकि ये बही लोग होते हैं जो दूसरों की बुराई मेरे सामने और मेरी बुराई दूसरों के सामने करते है ! ऐसे लोग किसी के सगे नहीं होते , ये बस सबके सामने अव्छा होने का ढोंग करते हैं ! मैं वैसे लोगों से दूरी बनाकर रखता हूँ जो किसी दूसरे की बुराई मेरे सामने आकर करते हैं क्याकि ये बही लोग होते हैं जो दूसरों की बुराई मेरे सामने और मेरी बुराई दूसरों के सामने करते है ! ऐसे लोग किसी के सगे नहीं होते , ये बस सबके सामने अव्छा होने का ढोंग करते हैं ! - ShareChat
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📜 Whatsapp स्टेटस - आज की कई लड़कियां आज़ादी को नुमाईश समझ बैठी हैं। कपडे , हरकतें और सोशल मीडिया = सब कुछ सिर्फ़ दिखावे के लिए। तथी लगता है पुराने जमाने के बुजुर्ग गलत नहींथे, जो औरतों को मर्यादा और पर्द में रखते थे।. आज़ादी का मतलब खुद की इज़्ज़त गिराना नहीं होता ।. और जो इसे नहीं समझते , वही सबसे ज्यादा मॉडर्न ' बनने का शोर मचाते हैंl. आज की कई लड़कियां आज़ादी को नुमाईश समझ बैठी हैं। कपडे , हरकतें और सोशल मीडिया = सब कुछ सिर्फ़ दिखावे के लिए। तथी लगता है पुराने जमाने के बुजुर्ग गलत नहींथे, जो औरतों को मर्यादा और पर्द में रखते थे।. आज़ादी का मतलब खुद की इज़्ज़त गिराना नहीं होता ।. और जो इसे नहीं समझते , वही सबसे ज्यादा मॉडर्न ' बनने का शोर मचाते हैंl. - ShareChat
#🪔सकट चौथ🌺 #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🎁चैटरूम: अर्न & लर्न🤑 #📜 Whatsapp स्टेटस
🪔सकट चौथ🌺 - Lovkush Roipoot सकट चौथ व्रत कथा प्राचीन काल की बात है। एक नगर में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी अत्यंत पतिव्रता और भगवान श्री गणेश की परम भक्त थी। उनके कोई  दुखी रहते थे। एक दिन किसी साधु  संतान नहीं थी, इस कारण वे दंपति अत्यंत  ने ब्राह्मणी से कहा- "यदि तुम माघ मास की कृष्ण : जिसे सकट चौथ या चतुर्थी, चतुर्थी कहते हैं, का व्रत श्रद्धा से करोगी , तो भगवान गणेश अवश्य प्रसन्न संकष्टी होंगे।" ब्राह्मणी ने विधिपूर्वक सकट चौथ का व्रत रखा। उन्होंने दिनभर उपवास संध्या के समय भगवान गणेश की पूजा की, दूर्वा, मोदक अर्पित किए किया, और कथा सुनी। चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद ही उन्होंने व्रत का पारण किया। भगवान गणेश उनकी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें संतान सुख का ब्राह्मणी को एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। लेकिन वरदान दिया। कुछ समय बाद दुर्भाग्यवश, बालक एक दिन अचानक होकर गिर पडा।  344 मूर्छित সাম্মণী व्याकुल हो उठी और भगवान गणेश का स्मरण करने लगी। उसी क्षण भगवान गणेश प्रकट हुए और बोले- "हे भक्ते यह तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्मों का फल है, किया है, इसलिए मैं तुम्हारे पुत्र परंतु क्योंकि तुमने सकट चौथ का व्रत श्रद्धा से | को जीवनदान देता हूँ।" भगवान गणेश के आशीर्वाद से बालक पुनः जीवित हो पूर्ति के लिए किया उठा। तब से यह व्रत संतान रक्षा , संकट नाश और मनोकामना जाने लगा। (ग्रंथों के अनुसार) सकट चौथ व्रत का फल संतान सुख की प्राप्ति संतान पर आए संकट दूर होते हैं घर-परिवार में सुखनशांति आती है दरिद्रता और बाधाओं का नाश होता है भगवान गणेश शीघ्र प्रसन्न होते हैं कमेंट में लिखें - "जय श्री गणेश" अब देखते हैं कितने सच्चे भक्त श्री गणेश के चरणों में नमन करते हैं कृपया पोस्ट आगे भी शेयर करें ताकि सभी को यह जानकारी मिल सके | Lovkush Roipoot सकट चौथ व्रत कथा प्राचीन काल की बात है। एक नगर में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण रहता था। उसकी पत्नी अत्यंत पतिव्रता और भगवान श्री गणेश की परम भक्त थी। उनके कोई  दुखी रहते थे। एक दिन किसी साधु  संतान नहीं थी, इस कारण वे दंपति अत्यंत  ने ब्राह्मणी से कहा- "यदि तुम माघ मास की कृष्ण : जिसे सकट चौथ या चतुर्थी, चतुर्थी कहते हैं, का व्रत श्रद्धा से करोगी , तो भगवान गणेश अवश्य प्रसन्न संकष्टी होंगे।" ब्राह्मणी ने विधिपूर्वक सकट चौथ का व्रत रखा। उन्होंने दिनभर उपवास संध्या के समय भगवान गणेश की पूजा की, दूर्वा, मोदक अर्पित किए किया, और कथा सुनी। चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद ही उन्होंने व्रत का पारण किया। भगवान गणेश उनकी भक्ति से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें संतान सुख का ब्राह्मणी को एक तेजस्वी पुत्र की प्राप्ति हुई। लेकिन वरदान दिया। कुछ समय बाद दुर्भाग्यवश, बालक एक दिन अचानक होकर गिर पडा।  344 मूर्छित সাম্মণী व्याकुल हो उठी और भगवान गणेश का स्मरण करने लगी। उसी क्षण भगवान गणेश प्रकट हुए और बोले- "हे भक्ते यह तुम्हारे पूर्व जन्म के कर्मों का फल है, किया है, इसलिए मैं तुम्हारे पुत्र परंतु क्योंकि तुमने सकट चौथ का व्रत श्रद्धा से | को जीवनदान देता हूँ।" भगवान गणेश के आशीर्वाद से बालक पुनः जीवित हो पूर्ति के लिए किया उठा। तब से यह व्रत संतान रक्षा , संकट नाश और मनोकामना जाने लगा। (ग्रंथों के अनुसार) सकट चौथ व्रत का फल संतान सुख की प्राप्ति संतान पर आए संकट दूर होते हैं घर-परिवार में सुखनशांति आती है दरिद्रता और बाधाओं का नाश होता है भगवान गणेश शीघ्र प्रसन्न होते हैं कमेंट में लिखें - "जय श्री गणेश" अब देखते हैं कितने सच्चे भक्त श्री गणेश के चरणों में नमन करते हैं कृपया पोस्ट आगे भी शेयर करें ताकि सभी को यह जानकारी मिल सके | - ShareChat
#💗माना के हम यार नहीं 🤗 #😒दर्द भरी शायरी🌸 #🌸 सत्य वचन #👉 लोगों के लिए सीख👈 #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
💗माना के हम यार नहीं 🤗 - ससुर अगर सास की हर बात मानकर उसका घ्यान ख्खे तो सब ठिक, लैकिन बेटा अगर बहू की बात मानना থুফ ক২ ঐ, तो वही सासन्ससुर उसे 5০3 ২ত্য সুভৎসস কম্ন লগল টঁ1 ससुर अगर सास की हर बात मानकर उसका घ्यान ख्खे तो सब ठिक, लैकिन बेटा अगर बहू की बात मानना থুফ ক২ ঐ, तो वही सासन्ससुर उसे 5০3 ২ত্য সুভৎসস কম্ন লগল টঁ1 - ShareChat
#Check My Account 👆 #earnmoney #fun #mostbet #moonrise #🎁चैटरूम: अर्न & लर्न🤑 #👫चैटरूम चिटचैट✨ #💔 हार्ट ब्रेक स्टेटस #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
Check My Account 👆 #earnmoney #fun #mostbet #moonrise - मानो याना मानो, लेकिन सच यही है कि आज कई बहूएं अपने ही घर में बिना वेतन की, अनऑफिशियल नौकरानी बनकर रह जाती है। जहां उनसे हर जिम्मेदारी निभाने की उम्मोद की जाती है, लेकिन उनकी थकान, भावनाएँ ओर जलरते अकसर अनदेखी कर दी जाती हैं। वो बहू नहीं , एक इंसान होती है- जो प्यार, सम्मान ओर समझ की हक़दार है। जिस दिन बहू को काम करने बाली मशीन नहीं , घर की बेटी समझा जाएगा , उस दिन घर नहीं , परिवार बसेगे! जिस दिन बहू को काम करने वाली मशीन नहीं, घर की बेटी समद्या जाएगाा , उस दिन घर नहीं ! मानो याना मानो, लेकिन सच यही है कि आज कई बहूएं अपने ही घर में बिना वेतन की, अनऑफिशियल नौकरानी बनकर रह जाती है। जहां उनसे हर जिम्मेदारी निभाने की उम्मोद की जाती है, लेकिन उनकी थकान, भावनाएँ ओर जलरते अकसर अनदेखी कर दी जाती हैं। वो बहू नहीं , एक इंसान होती है- जो प्यार, सम्मान ओर समझ की हक़दार है। जिस दिन बहू को काम करने बाली मशीन नहीं , घर की बेटी समझा जाएगा , उस दिन घर नहीं , परिवार बसेगे! जिस दिन बहू को काम करने वाली मशीन नहीं, घर की बेटी समद्या जाएगाा , उस दिन घर नहीं ! - ShareChat
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💗माना के हम यार नहीं 🤗 - अगर बहू को देसरे घर की बेटी नहीं , *अपने घर की बेटी* समझकर रखा जाए तो हर घर खुशहाल हो सकता है। आज की बहू सिर्फ जिप्मेदरियां निभाने नहीं आती, वह भी किसी की लाडली बेटी होतो है, अपने सपने , अपनी भावनाएं और अपनी थकान साथ लेकर आती है। अफसोस की बात यह है कि आज अी कहं घरो भे वह को अनओफिणियत नौकरानीं ममअ लिथा जाता है जर्हा काम तो कभीं खत्म नही होता , लेकिन प्यार , सम्मान ओर समअ अयूरे रह जाते है। अवसर मिले, अगर बहू को अपनायन उसकी मेहनन को सराहा जाए, और ३से इंसान की तरह समझा जाए, तो बही बहू अस घर की सवसे बहो ताकत बन जाती है। रिश्ते दबाव से नहीं, सन्मान और प्यार से निभते हैं ! बहू खुरा होगो , जब 7 ؟٢ परिबार खुश रहेगा. अगर बहू को देसरे घर की बेटी नहीं , *अपने घर की बेटी* समझकर रखा जाए तो हर घर खुशहाल हो सकता है। आज की बहू सिर्फ जिप्मेदरियां निभाने नहीं आती, वह भी किसी की लाडली बेटी होतो है, अपने सपने , अपनी भावनाएं और अपनी थकान साथ लेकर आती है। अफसोस की बात यह है कि आज अी कहं घरो भे वह को अनओफिणियत नौकरानीं ममअ लिथा जाता है जर्हा काम तो कभीं खत्म नही होता , लेकिन प्यार , सम्मान ओर समअ अयूरे रह जाते है। अवसर मिले, अगर बहू को अपनायन उसकी मेहनन को सराहा जाए, और ३से इंसान की तरह समझा जाए, तो बही बहू अस घर की सवसे बहो ताकत बन जाती है। रिश्ते दबाव से नहीं, सन्मान और प्यार से निभते हैं ! बहू खुरा होगो , जब 7 ؟٢ परिबार खुश रहेगा. - ShareChat