hayate zindagi
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#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - जहन्नम का खौफनाक मंज़र अल्लाह तआला कुरआन में फ़रमाता हैः जब काफ़िरों को जहन्नम में डाला जाएगा , तो वे उसकी गरजती आवाज़ और वह जोश में सुनेंगे उबलती होगी , ऐसा लगेगा मानो गुस्से से फट पड़ने वाली हो। (6 3-56 67:7-8) यह आयत हमें याद दिलाती है कि जहन्नम कोई कहानी नहीं , बल्कि हक़ीक़त है। अक्लमंद वही है जो आज ही तौबा कर ले, अल्लाह की राह पकड़ ले, और अपने अंजाम की तैयारी कर ले। अल्लाह हमें जहन्नम से महफूज़ रखे और जन्नत का हक़दार बनाए। आमीन। जहन्नम का खौफनाक मंज़र अल्लाह तआला कुरआन में फ़रमाता हैः जब काफ़िरों को जहन्नम में डाला जाएगा , तो वे उसकी गरजती आवाज़ और वह जोश में सुनेंगे उबलती होगी , ऐसा लगेगा मानो गुस्से से फट पड़ने वाली हो। (6 3-56 67:7-8) यह आयत हमें याद दिलाती है कि जहन्नम कोई कहानी नहीं , बल्कि हक़ीक़त है। अक्लमंद वही है जो आज ही तौबा कर ले, अल्लाह की राह पकड़ ले, और अपने अंजाम की तैयारी कर ले। अल्लाह हमें जहन्नम से महफूज़ रखे और जन्नत का हक़दार बनाए। आमीन। - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - ನಿಕ್ಕ লিৎ रसूल ने फ़रमायाः মীমিন ৯ दुनिया कैदखाना है।" (मुस्लिम) चमकदार है दुनिया लेकिन वफ़ादार नहीं। जो आज पास है, कल दूर होगा। जो आज तुम्हारी तारीफ़ करता है, भूल जाएगा| अगर दिल को सुकून 5 कल ঝামিত নী से नहीं, अल्लाह से जोड़ो। ತf1M क्योंकि सच्ची राहत सिर्फ़ वहीं है। ನಿಕ್ಕ লিৎ रसूल ने फ़रमायाः মীমিন ৯ दुनिया कैदखाना है।" (मुस्लिम) चमकदार है दुनिया लेकिन वफ़ादार नहीं। जो आज पास है, कल दूर होगा। जो आज तुम्हारी तारीफ़ करता है, भूल जाएगा| अगर दिल को सुकून 5 कल ঝামিত নী से नहीं, अल्लाह से जोड़ो। ತf1M क्योंकि सच्ची राहत सिर्फ़ वहीं है। - ShareChat
#Assalamu🤲 🕌🕋👉Alaikum🤲🌍
Assalamu🤲 🕌🕋👉Alaikum🤲🌍 - ६-गलतियां जो रमज़ान में नहीं करनी चाहिए | १. पूरा दिन सोना रमज़ान इबादत का महीना है सिर्फ सोने का नहीं ध्यान रखें २- गंदी जुबान इस्तेमाल करना अच्छे अल्फ़ाज़ और मीठी बोली से अपने रोज़़ा का नूर बढ़ाओ. ३. मूवी और डरामा देखना ये वक्त एंटरटेनमेंट का नहीं अपनी रूह को सुधारने का है ७७ ४. नमाज़ न पढ़ना रोज़़ा सिर्फ भूख और प्यास का नाम नहीं नमाज़ भी जरूरी है ५- गुस्सा करना रमज़ान सबर और शुक्र का महीना है नफ़रत का नहीं म्यूजिक सुनना दिल को सुकून कुरआन और 6- जिक्र से मिलेगा , न के म्यूजिक से॰. ६-गलतियां जो रमज़ान में नहीं करनी चाहिए | १. पूरा दिन सोना रमज़ान इबादत का महीना है सिर्फ सोने का नहीं ध्यान रखें २- गंदी जुबान इस्तेमाल करना अच्छे अल्फ़ाज़ और मीठी बोली से अपने रोज़़ा का नूर बढ़ाओ. ३. मूवी और डरामा देखना ये वक्त एंटरटेनमेंट का नहीं अपनी रूह को सुधारने का है ७७ ४. नमाज़ न पढ़ना रोज़़ा सिर्फ भूख और प्यास का नाम नहीं नमाज़ भी जरूरी है ५- गुस्सा करना रमज़ान सबर और शुक्र का महीना है नफ़रत का नहीं म्यूजिक सुनना दिल को सुकून कुरआन और 6- जिक्र से मिलेगा , न के म्यूजिक से॰. - ShareChat
#❤️अस्सलामु अलैकुम #assalamualaikum
❤️अस्सलामु अलैकुम - Il 12 2 कुरआन बताता है कि मौत के वक़्त इंसान थोड़ा सा और वक्त दे दे।" कहेगाः "ऐ मेरे रब, मुझे मगर उस वक्त कोई मौका नहीं मिलेगा। 1ా S गुनाह आसान लगते हैं, मगर मौत के सामने हर झूठ ट्ूट जाता है। इसलिए इस्लाम हमें आज ही सुधरने की दावत देता है। मौत के बाद पछतावे का कोई फ़ायदा नहीं, फ़ायदा आज की तौबा में Il 12 2 कुरआन बताता है कि मौत के वक़्त इंसान थोड़ा सा और वक्त दे दे।" कहेगाः "ऐ मेरे रब, मुझे मगर उस वक्त कोई मौका नहीं मिलेगा। 1ా S गुनाह आसान लगते हैं, मगर मौत के सामने हर झूठ ट्ूट जाता है। इसलिए इस्लाम हमें आज ही सुधरने की दावत देता है। मौत के बाद पछतावे का कोई फ़ायदा नहीं, फ़ायदा आज की तौबा में - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - ত্ুঙসা अगर मेरी क़िस्मत में दर्द लिखा है या अल्लाह तो उसे रहमत में बदल दे, अगर रास्ते बंद हैं तो अपनी रहमत से खोल दे। जहाँ उम्मीद टूट रही है बहाँ अपने करम से नई रेशनी भर दे। मेरी ज़िंदगी के हर फैसले को अपनी हिकमत से ঐরেনৎ' बना दे। अपने फैसलों पर राज़ी मुझे या र ! रहने वाला दिल अता कर और मुझे कभी मायूस न होने दे। मेरी तक़दीर को अपनी रहमत से सजा दे... आमीन ত্ুঙসা अगर मेरी क़िस्मत में दर्द लिखा है या अल्लाह तो उसे रहमत में बदल दे, अगर रास्ते बंद हैं तो अपनी रहमत से खोल दे। जहाँ उम्मीद टूट रही है बहाँ अपने करम से नई रेशनी भर दे। मेरी ज़िंदगी के हर फैसले को अपनी हिकमत से ঐরেনৎ' बना दे। अपने फैसलों पर राज़ी मुझे या र ! रहने वाला दिल अता कर और मुझे कभी मायूस न होने दे। मेरी तक़दीर को अपनी रहमत से सजा दे... आमीन - ShareChat
#❤️अस्सलामु अलैकुम #assalamualaikum
❤️अस्सलामु अलैकुम - गीबत (पीठ पीछे बुराई) का अंजाम... रसूलुल्लाह ने इरशाद फ़रमाया कि मेराज की रात मैंने कुछ लोगों को देखा जिनके नाखू़न तांबे के थे और वे अपने चेहरों और सीनों को नोच रहे थे। मैंने पूछाः "ऐ जिब्रील! ये कौन लोग हैं?" जवाब दियाः "ये उन्होंने में लोगों की ग़ीबत करते थे और उनकी इज़्ज़त को वो लोग हैं जो दुनिया नुक़सान पहुँचाते थे।" (सुनन अबू दाऊदः ४८७8) इस्लाम हमें सिखाता है कि किसी की गैरहाज़िरी में उसकी बुराई करना ग़ीबत है, और इससे बचना हर मुसलमान पर ज़रूरी है। अपनी जुबान को नेक बातों में लगाओ , क्योंकि अल्लाह हर शब्द को सुन रहा है। अल्लाह हमें ग़ीबत से बचने और पाकीज़ा जुबान रखने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन गीबत (पीठ पीछे बुराई) का अंजाम... रसूलुल्लाह ने इरशाद फ़रमाया कि मेराज की रात मैंने कुछ लोगों को देखा जिनके नाखू़न तांबे के थे और वे अपने चेहरों और सीनों को नोच रहे थे। मैंने पूछाः "ऐ जिब्रील! ये कौन लोग हैं?" जवाब दियाः "ये उन्होंने में लोगों की ग़ीबत करते थे और उनकी इज़्ज़त को वो लोग हैं जो दुनिया नुक़सान पहुँचाते थे।" (सुनन अबू दाऊदः ४८७8) इस्लाम हमें सिखाता है कि किसी की गैरहाज़िरी में उसकी बुराई करना ग़ीबत है, और इससे बचना हर मुसलमान पर ज़रूरी है। अपनी जुबान को नेक बातों में लगाओ , क्योंकि अल्लाह हर शब्द को सुन रहा है। अल्लाह हमें ग़ीबत से बचने और पाकीज़ा जुबान रखने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - दुआ में शामिल हो जाओ या अल्लाह हमें इतना अता फरमा जितनी तेरी शान है, इतनी खताएं माफ फरमा जितना तू रहमान है, आफतों और मुसीबतों से इतना महफूज़ फरमा जितना तू मेहरबान है रिज़्क मे इतनी बरकत अता फरमा जितनी तेरी कुदरत बेहद है, दिलों में इतना सुकून भर दे जितना तू रहीम है, ज़िंदगी को इतना आसान कर दे जितना तू करीम है, और ईमान को इतना मज़बूत कर दे जितना तू अज़ीम है या रब हमें अपने कुर्ब का वह एहसास अता कर जो दुनिया की हर ख्वाहिश से बढ़कर हो.. दुआ में शामिल हो जाओ या अल्लाह हमें इतना अता फरमा जितनी तेरी शान है, इतनी खताएं माफ फरमा जितना तू रहमान है, आफतों और मुसीबतों से इतना महफूज़ फरमा जितना तू मेहरबान है रिज़्क मे इतनी बरकत अता फरमा जितनी तेरी कुदरत बेहद है, दिलों में इतना सुकून भर दे जितना तू रहीम है, ज़िंदगी को इतना आसान कर दे जितना तू करीम है, और ईमान को इतना मज़बूत कर दे जितना तू अज़ीम है या रब हमें अपने कुर्ब का वह एहसास अता कर जो दुनिया की हर ख्वाहिश से बढ़कर हो.. - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - ব্রুত্তু ৪ মীতী মী যুু আনা [१] बेहोश हा जाना [२] मूह भर कर उलटी हो जाना [३] मजनू या पागल हा जाना [४] नमाज की हालात मे हसना [५] खून बदन से निकल जाना [६] टेक या सहारा लगाकर सो जाना [७] पैखाना पेशाब की जगह से कुछ निकल जाना दिल इजाजत दे तो आगे शेयर करना मत भूलना [8] हवा का ख़ारिज हो जाना. ব্রুত্তু ৪ মীতী মী যুু আনা [१] बेहोश हा जाना [२] मूह भर कर उलटी हो जाना [३] मजनू या पागल हा जाना [४] नमाज की हालात मे हसना [५] खून बदन से निकल जाना [६] टेक या सहारा लगाकर सो जाना [७] पैखाना पेशाब की जगह से कुछ निकल जाना दिल इजाजत दे तो आगे शेयर करना मत भूलना [8] हवा का ख़ारिज हो जाना. - ShareChat
#assalamualaikum #❤️अस्सलामु अलैकुम
assalamualaikum - नबी करीम ने फ़रमायाः से चला जाता है तो उसके S जब इंसान इस अमल बंद हो जाते हैं, सिवाय तीन चीज़ों सदक़ा एन्जारीया ऐसा नेक काम जिसका सवाब 1 लगातार मिलता रहे, जैसे मस्जिद बनवाना, पानी का इंतज़ाम करना या किसी नेक काम में हिस्सा लेना| इल्म एननाफ़े ऐसा ज्ञान जिससे लोग फायदा 2. उठाते रहें, जैसे दीन सिखाना या अच्छी बातें फैलाना {8' ३. नेक औलाद जो अपने वालिदैन के दुआ करती रहे। इसलिए आज ही अपने अमल सुधार लो , क्योंकि मौत का वक़्त किसी को मालूम नहीं | अल्लाह तआला हमें ऐसे नेक काम करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन नबी करीम ने फ़रमायाः से चला जाता है तो उसके S जब इंसान इस अमल बंद हो जाते हैं, सिवाय तीन चीज़ों सदक़ा एन्जारीया ऐसा नेक काम जिसका सवाब 1 लगातार मिलता रहे, जैसे मस्जिद बनवाना, पानी का इंतज़ाम करना या किसी नेक काम में हिस्सा लेना| इल्म एननाफ़े ऐसा ज्ञान जिससे लोग फायदा 2. उठाते रहें, जैसे दीन सिखाना या अच्छी बातें फैलाना {8' ३. नेक औलाद जो अपने वालिदैन के दुआ करती रहे। इसलिए आज ही अपने अमल सुधार लो , क्योंकि मौत का वक़्त किसी को मालूम नहीं | अल्लाह तआला हमें ऐसे नेक काम करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन - ShareChat
#❤️अस्सलामु अलैकुम #assalamualaikum
❤️अस्सलामु अलैकुम - हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम बहुत ही खूबसूरत और पाकनदामन नबी थे। जिस घर में वे रहते थे, वहाँ की औरत ने एक दिन उन्हें गुनाह की तरफ़ बुलाया। कुरआन बताता है कि उस औरत ने दरवाज़ा बंद दिया , लेकिन यूसुफ़ अलैहिस्सलाम एक पल कर के लिए भी नहीं रुके उन्होंने गुनाह को नहीं चुना, बल्कि दरवाज़े की तरफ़ दौड़ पडे़े ताकि अल्लाह की नाफ़रमानी से बच सकें। यूसुफ़ अलैहिस्सलाम को यह यक़ीन नहीं था कि दरवाज़ा या नहीं, लेकिन खुलेगा यह यक़ीन ज़रूर था कि अल्लाह देख रहा है। और अल्लाह ने उसी लम्हे उनकी मदद की, सच्चाई ज़ाहिर कर दी और उन्हें गुनाह से बचा लिया नसीहत (Main Point): जब इंसान गुनाह से बचने के लिए अल्लाह की तरफ़ कदम बढ़ाता है, तो अल्लाह उसके लिए निकलने का रास्ता बना देता है हज़रत यूसुफ़ अलैहिस्सलाम बहुत ही खूबसूरत और पाकनदामन नबी थे। जिस घर में वे रहते थे, वहाँ की औरत ने एक दिन उन्हें गुनाह की तरफ़ बुलाया। कुरआन बताता है कि उस औरत ने दरवाज़ा बंद दिया , लेकिन यूसुफ़ अलैहिस्सलाम एक पल कर के लिए भी नहीं रुके उन्होंने गुनाह को नहीं चुना, बल्कि दरवाज़े की तरफ़ दौड़ पडे़े ताकि अल्लाह की नाफ़रमानी से बच सकें। यूसुफ़ अलैहिस्सलाम को यह यक़ीन नहीं था कि दरवाज़ा या नहीं, लेकिन खुलेगा यह यक़ीन ज़रूर था कि अल्लाह देख रहा है। और अल्लाह ने उसी लम्हे उनकी मदद की, सच्चाई ज़ाहिर कर दी और उन्हें गुनाह से बचा लिया नसीहत (Main Point): जब इंसान गुनाह से बचने के लिए अल्लाह की तरफ़ कदम बढ़ाता है, तो अल्लाह उसके लिए निकलने का रास्ता बना देता है - ShareChat