Ramchandra Rajpoot
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Ramchandra Rajpoot
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jabalpur mp India
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🤗I 💖 शेयरचैट - #ugging is a silent way of saying  'You matter to me Huo HaPPY Dou #ugging is a silent way of saying  'You matter to me Huo HaPPY Dou - ShareChat
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🤗I 💖 शेयरचैट - सनातन धर्म रक्षक, महापराक्रमी योद्धा, 31qR साहसी, परम पूजनीय Hहाराजा सवाई ईश्वरी सिंह जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। सनातन धर्म रक्षक, महापराक्रमी योद्धा, 31qR साहसी, परम पूजनीय Hहाराजा सवाई ईश्वरी सिंह जी की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। - ShareChat
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🤗I 💖 शेयरचैट - [ওঁঠ নঞ্ী নখয়৩য | जय श्री हरि, जगत के पालनहार श्री विष्णु की कृपा सदैव आप पर बनी रहे। राम [ওঁঠ নঞ্ী নখয়৩য | जय श्री हरि, जगत के पालनहार श्री विष्णु की कृपा सदैव आप पर बनी रहे। राम - ShareChat
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🤗I 💖 शेयरचैट - प्रसिद्ध अभिनेता प्राण कृष्ण सिकंद (12 !5<4&} 1920 2013) তুলাৎ 1२ Wేళ प्राण कृष्ण सिकंद हिंदी सिनेमा के अभिनेता जयंती पर शतनशत नमन थे, जिन्हें फिल्म जगत में केवल प्राण के नाम से जाना जाता है। वे भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली खलनायकों में गिने जाते हैं और लगभग छह दशकों तक फिल्म उद्योग में सक्रिय रहे। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत पंजाबी फिल्म 'यमला जट' से की। हिंदी फिल्म खानदान' थी, जिसमें वे उनकी पहली नूरजहाँ के साथ दिखाई दिए। १९५० से १९७० के दशक तक उन्होंने अनेक सुपरहिट फिल्मों में खलनायक की यादगार भूमिकाएँ निभाईं जिनमें मधुमती, जिस देश में गंगा बहती है, उपकार, ज़ंजीर, अमर अकबर एंथनी प्रमुख हैं। फिल्म उपकार में " मलंग चाचा" की सकारात्मक ने उनकी छवि को नया आयाम दिया और भूमिका दर्शकों का अपार स्नेह दिलाया। में उन्होंने चरित्र अभिनेता के रूप में भी बाद महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। उन्हें २००२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। २०१२ में उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्राण भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसे अभिनेता के में याद किए जाते हैं जिन्होंने खलनायकी को नई रूप पहचान दी और अपने सशक्त अभिनय से उसे अमर बना दिया। प्रसिद्ध अभिनेता प्राण कृष्ण सिकंद (12 !5<4&} 1920 2013) তুলাৎ 1२ Wేళ प्राण कृष्ण सिकंद हिंदी सिनेमा के अभिनेता जयंती पर शतनशत नमन थे, जिन्हें फिल्म जगत में केवल प्राण के नाम से जाना जाता है। वे भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली खलनायकों में गिने जाते हैं और लगभग छह दशकों तक फिल्म उद्योग में सक्रिय रहे। उन्होंने अपने अभिनय करियर की शुरुआत पंजाबी फिल्म 'यमला जट' से की। हिंदी फिल्म खानदान' थी, जिसमें वे उनकी पहली नूरजहाँ के साथ दिखाई दिए। १९५० से १९७० के दशक तक उन्होंने अनेक सुपरहिट फिल्मों में खलनायक की यादगार भूमिकाएँ निभाईं जिनमें मधुमती, जिस देश में गंगा बहती है, उपकार, ज़ंजीर, अमर अकबर एंथनी प्रमुख हैं। फिल्म उपकार में " मलंग चाचा" की सकारात्मक ने उनकी छवि को नया आयाम दिया और भूमिका दर्शकों का अपार स्नेह दिलाया। में उन्होंने चरित्र अभिनेता के रूप में भी बाद महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। उन्हें २००२ में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। २०१२ में उन्हें भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्राण भारतीय सिनेमा के इतिहास में ऐसे अभिनेता के में याद किए जाते हैं जिन्होंने खलनायकी को नई रूप पहचान दी और अपने सशक्त अभिनय से उसे अमर बना दिया। - ShareChat
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🤗I 💖 शेयरचैट - foppy Poise ٥ 0 foppy Poise ٥ 0 - ShareChat
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🤗I 💖 शेयरचैट - মঠাল কামনা ক সাথ मनमाहक सुप्रभात 3ুঁ ঠা ঠাতাবন নম: आपका दिन शुभ, सुखद  सुंदर एवं खुशियों से भरा रहे মঠাল কামনা ক সাথ मनमाहक सुप्रभात 3ুঁ ঠা ঠাতাবন নম: आपका दिन शुभ, सुखद  सुंदर एवं खुशियों से भरा रहे - ShareChat
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🤗I 💖 शेयरचैट - अमर शहोद राजा बख्तावर सिह (14 নিমনং 1824 10 !<4| 1858) राजा बख्तावर सिंह मध्य प्रदेश के अमझेरा कस्बे के शासक थे और १८५७ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ़ अग्रणी भूमिका निभाने वाले वीर नेता रहे। आयु में ही अपने राज्य की वे मात्र 7 वर्ष की fse बागडोर संभाले और जीवनभर अंग्रेजों के लड़ाई में अग्रणी रहे। कई युद्धों में fse २८५७ में उन्होंने अंग्रेजों के सफलता पाई और मालवा क्षेत्र में अंग्रेजों को कडी दी। चुनौती अंग्रेज़ों के खिलाफ उन्होंने मालवा और निम्मर क्षेत्र में सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया। स्थानीय सैनिकों और नागरिकों को संगठित कर ब्रिटिश सेना पर सफल हमले किए। उन्हें मालवा क्षेत्र का "वीर प्रतापी राजा" भी कहा जाता है। अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ़्तार कर महू की जेल में रखा, और बाद में २० फ़रवरी २८५८ को इंदौर के महाराजा यशवंत चिकित्सालय परिसर के निकट नीम के पेड़ पर फाँसी पर लटका दिया। उनका बलिदान आज भी स्वाधीनता संग्राम की वीर गाथाओं में सम्मान के साथ याद किया जाता है। अमर शहोद राजा बख्तावर सिह (14 নিমনং 1824 10 !<4| 1858) राजा बख्तावर सिंह मध्य प्रदेश के अमझेरा कस्बे के शासक थे और १८५७ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अंग्रेजों के खिलाफ़ अग्रणी भूमिका निभाने वाले वीर नेता रहे। आयु में ही अपने राज्य की वे मात्र 7 वर्ष की fse बागडोर संभाले और जीवनभर अंग्रेजों के लड़ाई में अग्रणी रहे। कई युद्धों में fse २८५७ में उन्होंने अंग्रेजों के सफलता पाई और मालवा क्षेत्र में अंग्रेजों को कडी दी। चुनौती अंग्रेज़ों के खिलाफ उन्होंने मालवा और निम्मर क्षेत्र में सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया। स्थानीय सैनिकों और नागरिकों को संगठित कर ब्रिटिश सेना पर सफल हमले किए। उन्हें मालवा क्षेत्र का "वीर प्रतापी राजा" भी कहा जाता है। अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ़्तार कर महू की जेल में रखा, और बाद में २० फ़रवरी २८५८ को इंदौर के महाराजा यशवंत चिकित्सालय परिसर के निकट नीम के पेड़ पर फाँसी पर लटका दिया। उनका बलिदान आज भी स्वाधीनता संग्राम की वीर गाथाओं में सम्मान के साथ याद किया जाता है। - ShareChat
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🤗I 💖 शेयरचैट - राजेश पायलट फरवरी १९४५ 11 সুন 2000 10 पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं किसान नेता राजेश पायलट फरवरी १९४५ 11 সুন 2000 10 पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं किसान नेता - ShareChat
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🤗I 💖 शेयरचैट - থাহান নী ঐকায ম बदनाम है नशा तो मोबाइल में भी कम नही থাহান নী ঐকায ম बदनाम है नशा तो मोबाइल में भी कम नही - ShareChat