@166948180
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देवेन्द्र गर्ग

akhiyon Ko rahne de akhiyon ke aas paas

अपने अहसास से छू के. मुझे संदल कर दो, मैं कई सदियों से अधूरा हूँ, मुझे मुकमल कर दो.. ना तुम्हें होश रहे, ना मुझे होश रहे, इस कदर टूट के चाहो, मुझे पागल कर दो.. तुम हथेली को, मेरे प्यार की महंदी से रंगो, अपनी आँखों में, मेरे नाम का काजल कर दो.. इसके साये तले मेरे ख्वाब धक उठेगें, मेरे चेहरे पे चमकता हुआ, आंचल कर दो.. धूप ही धूप हूँ मैं, टूट के बरसो मुझ पर, इस कदर बरसो मेरी रूह में, ज़ल थल कर दो.. जैसे सहराओं में, हर शाम हवा चलती है, इस तरह मुझमें चलो, और मुझे थल कर दो.. तुम छुपा लो मेरा दिल, ओट में अपने दिल की, और मुझे मेरी निगाहों, से भी ओझल कर दो.. मसला हूँ तो निगाहें ना चुराओ मुझसे, अपनी चाहत से तवज्जों से मुझे हल कर दो.. #🎼 ग़ज़ल
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🎼 ग़ज़ल

🎼 ग़ज़ल - एक बरसा नहीं जाला हो जो दिल @ Dev - ShareChat
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2 दिन पहले
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