#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
अन्नपूर्णा मुहिम
चलाई गई उससे लाखों असहाय लोग, लाखों किसान सुखी हुए। यह देख किसी ने करोड़ों का दान देना चाहा, लेकिन हम कबीर सेठ के भिखारी हैं, जगत के नहीं।
इसलिए हम उनका दिया दान नहीं लेंगे ।
- परम संत रामपाल जी महाराज
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महल
35 गज की छोटी सी जगह में बना शानदार मकान
पहले और बाद में
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है काम आदमी का औरों के काम आना
हमारा लक्ष्य पूरे संसार को सुखी करना है।
हम सब एक भगवान के बच्चे हैं, न कोई जाति अलग है, न कोई धर्म अलग है।
अपने कर्म सुधारो, भक्ति करो और सबसे प्यार करो
जहाँ कोई दुखी दिखे हमें बताओ,
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇
'कबीर' रहस्य !
क्या आप जानते हैं कि 'ऑर्थोडॉक्स जेविश बाइबल' (IYOV 36:5) में लिखा है
Kabir
कि परमात्मा 'कबीर' है?
#🙏रामायण🕉 #🚩राम नवमी Status⏳
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જાત્વ नवमी
श्रीरामचरितमानस
रामचरित मानस में हुआ बड़ा खुलासा
कौन है श्रीराम से भी बड़ा भगवान
सनातनी पूजा के
भाग-3
श्री रामचरितमानस के बालकाण्ड के दोहा 143 में वर्णित द्वादशाक्षर मंत्र कौन सा है ?
जानने के लिए देखिए असली रामायण सार Factful Debates यूट्यूब चैनल पर
#🚩राम नवमी Status⏳ #🙏रामायण🕉
श्री राम जी सतगुण, विष्णु जी के अवतार थे। उनका भी आविर्भाव (जन्म) तथा तिरोभाव (मृत्यु) होता है। – प्रमाण श्रीमद्देवी भागवत अध्याय 5 स्कंध 3 पृष्ठ 123
1133
संक्षिप्त
श्रीमद्देवीभागवत
1 मधिर, मोहार, केवल हिन्दी।
गीताप्रेस, गोरखपुर
अधिक जानकारी के लिए पढ़ें ज्ञान गंगा
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राम राज्य आ रहा है।
ठहरो स्वर्ण युग (रामराज्य)
आ रहा है। एक अधेड़ उम्र का औदार्य (उदार) अजोड़ महासत्ता अधिकारी भारत ही नहीं सारी पृथ्वी पर स्वर्ण युग लाएगा
और अपने सनातन धर्म का पुनरुत्थान करके यथार्थ भक्ति मार्ग बताकर
सर्वश्रेष्ठ हिन्दू राष्ट्र बनाएगा।
संत रामपाल जी महाराज के विषय में नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी
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Satlok Ashram Betul
@Satlok_Ashram_Betul
@SatlokBetul_
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साहिब जय बंदीछोड़
गरीब
यौह माटी का महल है, छार मिलै क्षण माहि। चार सख्स कांधै धरें, मरहट कूँ ले जाहि
▲ सत् साहिब
बंदीछोड़ गरीबदास साहिब जी अपनी वाणी में फरमाते है कि यह मानव शरीर केवल माटी का बना हुआ महल जितना भी सौंदर्य, बल या अभिमान क्यों न हो, क्षण भर में यह मिट्टी में मिल जाता है। प्राण निकलने पर वह हम “मैं” कहते थे, उसे चार व्यक्ति कंधे पर उठाकर श्मशान (मरघट) की ओर ले जाते हैं। तब न कोई अपना यहीं छूट जाता है। यह जीवन अस्थायी है; स्थायी केवल आत्मा और परमात्मा का स्मरण है। मनुष्य को देह-अि
भक्ति, सदाचार और आत्मज्ञान की ओर ध्यान देना चाहिए।
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कबीर, वो दिन याद कर, पग ऊपर तल शीश।
मृत्युमण्डल में आयके, अब भूल गया जगदीश ।।












