गीता 5.10) हिंदी अर्थ: जो मनुष्य समस्त कर्मों को परमात्मा को अर्पित करके और आसक्ति (लालच या मोह) को त्यागकर कर्म करता है, वह पाप से वैसे ही अलिप्त रहता है, जैसे कमल का पत्ता जल में रहकर भी जल से भीगता नहीं है । ...
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #moj_content #🥰 इमोशनल पल #😃 शानदार स्टेटस #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें