Sunil Madhukar Katdare
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🔵SC Blue सह ब्लू टिक मिळवा - ONT सोमनाथ मंदिर में शुर हुई मिनो इलेक्ट्रिक ट्रेन सेवा goodnewstoday ONT सोमनाथ मंदिर में शुर हुई मिनो इलेक्ट्रिक ट्रेन सेवा goodnewstoday - ShareChat
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🔵SC Blue सह ब्लू टिक मिळवा - DNT सोमनाथ महादेव मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा शुरू। अब पार्किंग से मंदिर एंट्री गेट तक मिनी इलेक्ट्रिक ट्रेन सेवा उपलब्ध है। १४ फरवरी से चार ट्रेनें लगातार भक्तों को लाने ले ! रही हैं। जाने का काम कर goodnewstoday DNT सोमनाथ महादेव मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी सुविधा शुरू। अब पार्किंग से मंदिर एंट्री गेट तक मिनी इलेक्ट्रिक ट्रेन सेवा उपलब्ध है। १४ फरवरी से चार ट्रेनें लगातार भक्तों को लाने ले ! रही हैं। जाने का काम कर goodnewstoday - ShareChat
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🔵SC Blue सह ब्लू टिक मिळवा - DNT से लेकर बंद होने तक ट्रेन मंदिर के कपाट खुलने i सेवा जारी रहेगी। एक ट्रेन में करीब १८ श्रद्धालु बैठ सकेंगे। अब भक्तों को लंबी दूरी पैदल नहीं चलना पेगा, दर्शन होंगे आसान। goodnewstoday DNT से लेकर बंद होने तक ट्रेन मंदिर के कपाट खुलने i सेवा जारी रहेगी। एक ट्रेन में करीब १८ श्रद्धालु बैठ सकेंगे। अब भक्तों को लंबी दूरी पैदल नहीं चलना पेगा, दर्शन होंगे आसान। goodnewstoday - ShareChat
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🔵SC Blue सह ब्लू टिक मिळवा - BREAKING NEWS Kedarnath 2026: अप्रेल को खुल सकते हैं कपाट, 22 चार थाम यात्रा की पूरी डिटेल रिपोटर्र के अनूसार, Kedarnath के कपाट २२ अप्रेल २०२६ को सुवह ८ः०० वजे खुल सकते हें बदीनाथ , गंगोन्रो , के भी कपाट সীং নন চীন কী खुलने यमूलोत्रो মপানিন নাঠীবর খরীণিন? देवस्थनम बौर्डकी आथयिकारीक चोचणा तक समाबित तोथियों की perfect_planners_travels BREAKING NEWS Kedarnath 2026: अप्रेल को खुल सकते हैं कपाट, 22 चार थाम यात्रा की पूरी डिटेल रिपोटर्र के अनूसार, Kedarnath के कपाट २२ अप्रेल २०२६ को सुवह ८ः०० वजे खुल सकते हें बदीनाथ , गंगोन्रो , के भी कपाट সীং নন চীন কী खुलने यमूलोत्रो মপানিন নাঠীবর খরীণিন? देवस्थनम बौर्डकी आथयिकारीक चोचणा तक समाबित तोथियों की perfect_planners_travels - ShareChat
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🔵SC Blue सह ब्लू टिक मिळवा - LOW LIKE हनुमान जी शिव का अवतार (रूद्रावतार ) क्यों माने जाते हैं? ने राम अवतार लेने का निर्णय लिया, तो महादेव fdwj' जत भगवान भी उनकी सेवा करना चाहते थे। लेकिन वे अपने पूर्ण स्वरूप में नहीं जा सकते थे। इसलिए, महादेव ने अपनी शक्ति और तेज को वायुदेव के माध्यम से माता अंजनी के गर्भ में स्थापित किया। इसी अंश से महाबली हनुमान का जन्म हुआ, जो शिव के १ावें रुद्रावतार माने जाते हें। उन्होने वानर रूप लेकर जीवन भर प्रभु श्री राम की भक्ति और सेवा की। इस लीला से महादेव ने 'दास भक्ति' का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया। rahasya_verse_ LOW LIKE हनुमान जी शिव का अवतार (रूद्रावतार ) क्यों माने जाते हैं? ने राम अवतार लेने का निर्णय लिया, तो महादेव fdwj' जत भगवान भी उनकी सेवा करना चाहते थे। लेकिन वे अपने पूर्ण स्वरूप में नहीं जा सकते थे। इसलिए, महादेव ने अपनी शक्ति और तेज को वायुदेव के माध्यम से माता अंजनी के गर्भ में स्थापित किया। इसी अंश से महाबली हनुमान का जन्म हुआ, जो शिव के १ावें रुद्रावतार माने जाते हें। उन्होने वानर रूप लेकर जीवन भर प्रभु श्री राम की भक्ति और सेवा की। इस लीला से महादेव ने 'दास भक्ति' का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत किया। rahasya_verse_ - ShareChat
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🔵SC Blue सह ब्लू टिक मिळवा - aa 6 న ~  L OW LIKE महादेव मनिहारी (चूड़ी बेचने वाले) क्यों बने थे? पार्वती को उदास देखकर शिवजी ने कारण पूछा। माता ने एकचारमाता कहा कि मेरा कोई मायका नहीं है, इसलिए विवाह के रस्म में मुझे किसी से चूड़ियाँ नहीं पहनाई।उनकी यह इच्छा पूरी करने के हाथों ने अपने लिए महादेव ने एक  मनिहारी (चूड़़ी बेचने वाले) का रूप धारण किया। पदक  [oll ' ঐ নণী ক ही आए और पार्वती का हाथ थामकर उन्हे माता प्रेम से रंग-बिरंगी चूड़ियाँ पहनाई। शिवजी का स्पर्श पाते ही माता पार्वती मुस्कुरा उठीं ओर ' पहचान लिया। इस लीला से महादेव ने बताया कि 3ob वे अपने भक्तों और प्रियजनों की छोटी-सी खुशी के लिए कोई भी रूप धर মকন ৪ rahasya _ verse _ aa 6 న ~  L OW LIKE महादेव मनिहारी (चूड़ी बेचने वाले) क्यों बने थे? पार्वती को उदास देखकर शिवजी ने कारण पूछा। माता ने एकचारमाता कहा कि मेरा कोई मायका नहीं है, इसलिए विवाह के रस्म में मुझे किसी से चूड़ियाँ नहीं पहनाई।उनकी यह इच्छा पूरी करने के हाथों ने अपने लिए महादेव ने एक  मनिहारी (चूड़़ी बेचने वाले) का रूप धारण किया। पदक  [oll ' ঐ নণী ক ही आए और पार्वती का हाथ थामकर उन्हे माता प्रेम से रंग-बिरंगी चूड़ियाँ पहनाई। शिवजी का स्पर्श पाते ही माता पार्वती मुस्कुरा उठीं ओर ' पहचान लिया। इस लीला से महादेव ने बताया कि 3ob वे अपने भक्तों और प्रियजनों की छोटी-सी खुशी के लिए कोई भी रूप धर মকন ৪ rahasya _ verse _ - ShareChat
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🔵SC Blue सह ब्लू टिक मिळवा - LOW LIKE भगवान शिव को एक मछुआरे का रूप क्यों लेना पड़ा? किसी कारणवश माता पार्वती को पृथ्वी पर UO IG एक के रूप में जन्म लेना पड़ा। केलाश पर महादेव का मन मछुआरिन ; मछुआरे उनके बिना नहीं लगा। तब भोलेनाथ एक साधारण उसी तट पर पहुँच गए। वहाँ 1 का रूप धारण किया और ' एक विशाल मछली ।जो वास्तव में नंदी थे) ने आतंक मचा रखा था। मछआरे रूपी शिवजी ने उस को पकड़ा़, जिससे खुश होकर गाँव मछली वालों ने उनका विवाह गछ़आरिन रूपी पार्वती जी से करवा दिया। यह लीला बताती है कि सच्चा प्रेम और संयोग ईश्वर स्वयं रचते हैं। rahasya_verse_ LOW LIKE भगवान शिव को एक मछुआरे का रूप क्यों लेना पड़ा? किसी कारणवश माता पार्वती को पृथ्वी पर UO IG एक के रूप में जन्म लेना पड़ा। केलाश पर महादेव का मन मछुआरिन ; मछुआरे उनके बिना नहीं लगा। तब भोलेनाथ एक साधारण उसी तट पर पहुँच गए। वहाँ 1 का रूप धारण किया और ' एक विशाल मछली ।जो वास्तव में नंदी थे) ने आतंक मचा रखा था। मछआरे रूपी शिवजी ने उस को पकड़ा़, जिससे खुश होकर गाँव मछली वालों ने उनका विवाह गछ़आरिन रूपी पार्वती जी से करवा दिया। यह लीला बताती है कि सच्चा प्रेम और संयोग ईश्वर स्वयं रचते हैं। rahasya_verse_ - ShareChat
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🔵SC Blue सह ब्लू टिक मिळवा - LOW LIKE शिवजी ने अपने मस्तक पर चंद्रमा को क्यों धारण किया? प्रजापति दक्ष के श्राप के कारण चंद्रमा का तेज खत्म हो रहा था ओर वे मृत्यु के निकट थे। अपनी रक्षा के लिए चंद्रमा ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। भोलेनाथ उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए। चूँकि श्राप पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता था, इसलिए शिवजी ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण कर लिया ताकि उन्हें जीवनदान मिले और वे अमर हो जाएं। तभी से शिवजी   चंद्रशेखर कहलाए। इस कथा से पता चलता है कि शरण में : हुए की रक्षा आए करना ही महादेव का धर्म हे। rahasya_verse_ LOW LIKE शिवजी ने अपने मस्तक पर चंद्रमा को क्यों धारण किया? प्रजापति दक्ष के श्राप के कारण चंद्रमा का तेज खत्म हो रहा था ओर वे मृत्यु के निकट थे। अपनी रक्षा के लिए चंद्रमा ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की। भोलेनाथ उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए। चूँकि श्राप पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता था, इसलिए शिवजी ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण कर लिया ताकि उन्हें जीवनदान मिले और वे अमर हो जाएं। तभी से शिवजी   चंद्रशेखर कहलाए। इस कथा से पता चलता है कि शरण में : हुए की रक्षा आए करना ही महादेव का धर्म हे। rahasya_verse_ - ShareChat
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