Rajkumar  .S.  Vishwakarma
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Rajkumar .S. Vishwakarma
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जय श्री महाकाल 🙏🙏🙏🌹🚩🌹💐 🔔
#🇮🇳 देशभक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
🇮🇳 देशभक्ति - 433 एक साधु द्वार पर बैठे तीन भाइयों को उपदेश कर रहे थे, `वत्स ! जो कछुए की तरह अपने हाथ ्पाँव सब ओर से समेटकर आत्म- लीन हो जाता है , ऐसे निरुद्योगी पुरुष के लिए का दुःख नहीं रहता P संसार में किसी प्रकार घर के भीतर लगा रही माँ के कानों बुहारी < में साधु की यह वाणी पड़ी तो वह चौकन्ना हो उठी | बाहर आई और तीनों लड़कों को खड़ा करके छोटे से बोली, शले यह घड़ा पानी भर से कहा, ९तू चल और सब কয লাP मझले साधु की कूड़ा उठाकर बाहर फेंक । अंत में ओर देखकर उस कर्मावती ने उपदेश दिया,  महात्मन्! निरुद्योगी मैंने बहुत देखे हैं , कई पड़ोस में ही बीमारी से ग्रस्त , ऋण भार से दबे शैतान की दुकान खोले पडे़े हैं। " ज्ञान को कर्म का सहयोग न मिले, तो कितना ही उपयोगी होने पर भी वह ज्ञान निरर्थक है। Shantikunj WhatsApp   8439014110 4|3|3|3|3|3|3|3|3( eऋऋs%ऋ 433 एक साधु द्वार पर बैठे तीन भाइयों को उपदेश कर रहे थे, `वत्स ! जो कछुए की तरह अपने हाथ ्पाँव सब ओर से समेटकर आत्म- लीन हो जाता है , ऐसे निरुद्योगी पुरुष के लिए का दुःख नहीं रहता P संसार में किसी प्रकार घर के भीतर लगा रही माँ के कानों बुहारी < में साधु की यह वाणी पड़ी तो वह चौकन्ना हो उठी | बाहर आई और तीनों लड़कों को खड़ा करके छोटे से बोली, शले यह घड़ा पानी भर से कहा, ९तू चल और सब কয লাP मझले साधु की कूड़ा उठाकर बाहर फेंक । अंत में ओर देखकर उस कर्मावती ने उपदेश दिया,  महात्मन्! निरुद्योगी मैंने बहुत देखे हैं , कई पड़ोस में ही बीमारी से ग्रस्त , ऋण भार से दबे शैतान की दुकान खोले पडे़े हैं। " ज्ञान को कर्म का सहयोग न मिले, तो कितना ही उपयोगी होने पर भी वह ज्ञान निरर्थक है। Shantikunj WhatsApp   8439014110 4|3|3|3|3|3|3|3|3( eऋऋs%ऋ - ShareChat
#🇮🇳 देशभक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
🇮🇳 देशभक्ति - आज का सद्चितन आज तो ब्राह्मणबीज ही इस धरती पर से समाप्त हो गया সিপ্সী है । मेरे बेटो ! तुम्हें फिर से ब्राह्मणत्व को जगाना और उसकी गरिमा  जीवन में उसे उतारकर जन-्जन को उसे अपनाने का बखान कर स्वयं सुनिश्चित को प्रेरित करना होगा | यदि ब्राह्मण जाग गया तो सतयुग रूप से आकर रहेगा । ' Ioll Ile Shantikunj Rishi Chintan कलियुग ' दिखाई देता है , मानसिक गिरावट से आया है। য& जो मनुष्य की अधिक संग्रह करने की, संचय की वृत्ति ने ही वह स्थिति पैदा की है जिससे ब्राह्मणत्व समाप्त होे रहा है । प्रत्येक के अंदर का वह विकृति की ओर ले जा रहा है। पशु जाग उठा है , जो उसे मानसिक आवश्यकता से अधिक संग्रह मन में विक्षोभ , परिवार में कलह तथा | কলিঘরুঠা মনীবিকাহী কা  समाज में विग्रह पैदा करता है। २ एवं ಶ್ತಾ೯ ये मनोविकार तभी मिटेंगे जब ब्राह्मणत्व जागेगा । ' < ब्राह्मण सूर्य की तरह तेजस्वी होता है , प्रतिकूल परिस्थितियों में भी चलता रहता है। वह कहीं रुकता नहीं, कभी आवेश में नहीं लोभ, मोह पर सतत नियंत्रण रखता है 3ানা নথা ब्राह्मण शब्द ब्रह्मा से बना है तथा समाज शीर्ष माना JT & कभी यह ক্রা शिखर पर था तो वैभव गौण व गुण प्रधान माने जाते थे। जलकुंभी की तरह छा जाने वाला यही ब्राह्मण सतयुग लाता था।आज की परिस्थितियाँ इसलिए बिगड़ीं कि ब्राह्मणत्व लुप्त हो गया भिखारी 3া9ন 9াম মসক ক্রহন কী বৃনি মন ম হস্সকয ওমন बनकर , अपने को पदच्युत कर दिया है।उसी वर्ण को पुनः जिंदा करना होगा एवं वे लोकसेवी समुदाय में से ही उभर आयेंगे , चाहे कर जन्म से वे किसी भी जाति के हों । जीवन दर्शन पृष्ठ 8.३५ यगदृष्टा आज का सद्चितन आज तो ब्राह्मणबीज ही इस धरती पर से समाप्त हो गया সিপ্সী है । मेरे बेटो ! तुम्हें फिर से ब्राह्मणत्व को जगाना और उसकी गरिमा  जीवन में उसे उतारकर जन-्जन को उसे अपनाने का बखान कर स्वयं सुनिश्चित को प्रेरित करना होगा | यदि ब्राह्मण जाग गया तो सतयुग रूप से आकर रहेगा । ' Ioll Ile Shantikunj Rishi Chintan कलियुग ' दिखाई देता है , मानसिक गिरावट से आया है। য& जो मनुष्य की अधिक संग्रह करने की, संचय की वृत्ति ने ही वह स्थिति पैदा की है जिससे ब्राह्मणत्व समाप्त होे रहा है । प्रत्येक के अंदर का वह विकृति की ओर ले जा रहा है। पशु जाग उठा है , जो उसे मानसिक आवश्यकता से अधिक संग्रह मन में विक्षोभ , परिवार में कलह तथा | কলিঘরুঠা মনীবিকাহী কা  समाज में विग्रह पैदा करता है। २ एवं ಶ್ತಾ೯ ये मनोविकार तभी मिटेंगे जब ब्राह्मणत्व जागेगा । ' < ब्राह्मण सूर्य की तरह तेजस्वी होता है , प्रतिकूल परिस्थितियों में भी चलता रहता है। वह कहीं रुकता नहीं, कभी आवेश में नहीं लोभ, मोह पर सतत नियंत्रण रखता है 3ানা নথা ब्राह्मण शब्द ब्रह्मा से बना है तथा समाज शीर्ष माना JT & कभी यह ক্রা शिखर पर था तो वैभव गौण व गुण प्रधान माने जाते थे। जलकुंभी की तरह छा जाने वाला यही ब्राह्मण सतयुग लाता था।आज की परिस्थितियाँ इसलिए बिगड़ीं कि ब्राह्मणत्व लुप्त हो गया भिखारी 3া9ন 9াম মসক ক্রহন কী বৃনি মন ম হস্সকয ওমন बनकर , अपने को पदच्युत कर दिया है।उसी वर्ण को पुनः जिंदा करना होगा एवं वे लोकसेवी समुदाय में से ही उभर आयेंगे , चाहे कर जन्म से वे किसी भी जाति के हों । जीवन दर्शन पृष्ठ 8.३५ यगदृष्टा - ShareChat
#🇮🇳 देशभक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #☝आज का ज्ञान #🔬विज्ञान के प्रयोग🧬
🇮🇳 देशभक्ति - आज का ज्ञान 51 सनातन धर्म   में बाँस जलना मना है , तो अगरबत्ती क्यूं जलते हैं , अगरबत्ती जलने से देवी ఢqT नाराज हो जाते और वायु प्रदूषण भी होता है। अगरबत्ती की कपूर या लोहबान जलना चाहिए। जगह दीया धूपबत्ती , राजकुमार श्यामबहादुर विश्वकर्मा धर्म और विज्ञान इस बात मानते हैं । ) आज का ज्ञान 51 सनातन धर्म   में बाँस जलना मना है , तो अगरबत्ती क्यूं जलते हैं , अगरबत्ती जलने से देवी ఢqT नाराज हो जाते और वायु प्रदूषण भी होता है। अगरबत्ती की कपूर या लोहबान जलना चाहिए। जगह दीया धूपबत्ती , राजकुमार श्यामबहादुर विश्वकर्मा धर्म और विज्ञान इस बात मानते हैं । ) - ShareChat
#🇮🇳 देशभक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
🇮🇳 देशभक्ति - allzzilcilzl शान्तिकुञ्ज हमें जानना चाहिये कि हर वर्तु समयसाध्य है और श्रमसाध्य भी। कोई मार्ग ऐसा नहीं जिसमें रुकावटें f؟ और बाधायें न हों। उन्हें हटाने के प्रयत्न भी करना पडता है और धैर्य पूर्वक प्रतीक्षा भी। अखण्ड ज्योति १९६४ जनवरी हम बदलेंगे- युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी வதய 192li ` "-J  दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial uuWalgporg 8439014110 YoUfUBE Shantikunj Rishi Chintan allzzilcilzl शान्तिकुञ्ज हमें जानना चाहिये कि हर वर्तु समयसाध्य है और श्रमसाध्य भी। कोई मार्ग ऐसा नहीं जिसमें रुकावटें f؟ और बाधायें न हों। उन्हें हटाने के प्रयत्न भी करना पडता है और धैर्य पूर्वक प्रतीक्षा भी। अखण्ड ज्योति १९६४ जनवरी हम बदलेंगे- युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी வதய 192li ` "-J  दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial uuWalgporg 8439014110 YoUfUBE Shantikunj Rishi Chintan - ShareChat
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🇮🇳 देशभक्ति - allzzilcilzl शान्तिकुञ्ज जल्दबाज लोग कुछ थोड़ा-सा पूजा , पाठ , दर्शन , झाँकी , दान , दक्षिणा मात्र का सस्ता आधार लेकर जल्दी ही स्वर्ग प्राप्त कर लेना স্তুকি चाहते हैं। इन बेचारों को भला क्या कुछ्ठ हाथ लगता होगा अख्ण्ड ज्योति 1९६४ जनवरी हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी வதய 192li ` 202& दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial uuWalgporg 8439014110 YoUfUBE Shantikunj Rishi Chintan allzzilcilzl शान्तिकुञ्ज जल्दबाज लोग कुछ थोड़ा-सा पूजा , पाठ , दर्शन , झाँकी , दान , दक्षिणा मात्र का सस्ता आधार लेकर जल्दी ही स्वर्ग प्राप्त कर लेना স্তুকি चाहते हैं। इन बेचारों को भला क्या कुछ्ठ हाथ लगता होगा अख्ण्ड ज्योति 1९६४ जनवरी हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी வதய 192li ` 202& दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial uuWalgporg 8439014110 YoUfUBE Shantikunj Rishi Chintan - ShareChat
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🇮🇳 देशभक्ति - आजं का सद्चितनं घरेलू  सुई चुभोकर भी निकाला जा सकता मित्रो फुन्सी का मवाद में घुसी गोली को निकालने के लिए कुशल है, पर मस्तिष्क या हृदय सर्जन और बहुमूल्य उपकरणों की जरूरत है। मकड़ी का पेट புளி` एक मक्खी से भर जाता है , पर हाथी को मनों गन्ना रोज चाहिए। घोँघे जलाशय की तली में जा बैठते हैं, पर समुद्र सोखने के लिए अगस्त्य ऋषि जैसा चुल्लू चाहिए। कुएँ से घड़ा भरकर पानी कोई भी निकाल है, पर स्वर्ग से गंगा का अवतरण धरती पर करने के लिए सकता भगीरथ जैसा तप और शिव जटाओं का आधार चाहिए वृत्रासुर वध के लिए ऊर्जामयी अस्थियों से वज बनाना पड़ा था| छोटे काम साधारण की साधारण हलचलों से, स्वल्प साधनों से बन पडते हैं, पर मनुष्यों महान कार्यों के लिए महान व्यवस्था बनानी पडती है | धरती की प्यास और समुद्र की सतह यथावत बनाए रखने के लिए बुझाते बादल सहस्त्रों नदियों की असीम जलराशि का निरन्तर समर्पित होते रहना आवश्यक होता है। YouTube) Shantikunj Rishi Chintan] अच्छा हो इस गोवर्द्धन को मिल-्जुलकर उठाया जाए 31ಪT ೯ ೯ समुद्र सेतु बाँधने की घडी में कंकड़ ्पत्थर ढोने मात्र से श्रेय लूटा और यशस्वी बना जाए परिजनों के लिए इस योजना में हाथ बॅंटाना प्रज्ञा उनके निज के हित में है, जो खोएँगे उससे हजार गुना अधिक पाएँगे बीज को कुछ क्षण ही गलने का कष्ट उठाना पडता है 3পহাল নী इसके बढ़ने , हरियाने और फूलने ्फलने का आनन्द ही आनन्द है, वैभव ही में जो अग्रगामी बने, वे मिनिस्टर बनने से darq కౌ स्वतन्त्रता सग्राम লক্য অনপ্সনা মনানিতী বালী ঐন্থান, মম্সান মভিন সাম ক্রয মক यह अवसर भी ऐसा ही है, जिसमें ली हुई भागीदारी मणिन्मुक्तकों की खदान कौड़ी मोल खरीद लेने के समान है | গীনন Shantikuni WhatsAPP.8439014110 a*1-Y8-7.66 यगदृष्टा का आजं का सद्चितनं घरेलू  सुई चुभोकर भी निकाला जा सकता मित्रो फुन्सी का मवाद में घुसी गोली को निकालने के लिए कुशल है, पर मस्तिष्क या हृदय सर्जन और बहुमूल्य उपकरणों की जरूरत है। मकड़ी का पेट புளி` एक मक्खी से भर जाता है , पर हाथी को मनों गन्ना रोज चाहिए। घोँघे जलाशय की तली में जा बैठते हैं, पर समुद्र सोखने के लिए अगस्त्य ऋषि जैसा चुल्लू चाहिए। कुएँ से घड़ा भरकर पानी कोई भी निकाल है, पर स्वर्ग से गंगा का अवतरण धरती पर करने के लिए सकता भगीरथ जैसा तप और शिव जटाओं का आधार चाहिए वृत्रासुर वध के लिए ऊर्जामयी अस्थियों से वज बनाना पड़ा था| छोटे काम साधारण की साधारण हलचलों से, स्वल्प साधनों से बन पडते हैं, पर मनुष्यों महान कार्यों के लिए महान व्यवस्था बनानी पडती है | धरती की प्यास और समुद्र की सतह यथावत बनाए रखने के लिए बुझाते बादल सहस्त्रों नदियों की असीम जलराशि का निरन्तर समर्पित होते रहना आवश्यक होता है। YouTube) Shantikunj Rishi Chintan] अच्छा हो इस गोवर्द्धन को मिल-्जुलकर उठाया जाए 31ಪT ೯ ೯ समुद्र सेतु बाँधने की घडी में कंकड़ ्पत्थर ढोने मात्र से श्रेय लूटा और यशस्वी बना जाए परिजनों के लिए इस योजना में हाथ बॅंटाना प्रज्ञा उनके निज के हित में है, जो खोएँगे उससे हजार गुना अधिक पाएँगे बीज को कुछ क्षण ही गलने का कष्ट उठाना पडता है 3পহাল নী इसके बढ़ने , हरियाने और फूलने ्फलने का आनन्द ही आनन्द है, वैभव ही में जो अग्रगामी बने, वे मिनिस्टर बनने से darq కౌ स्वतन्त्रता सग्राम লক্য অনপ্সনা মনানিতী বালী ঐন্থান, মম্সান মভিন সাম ক্রয মক यह अवसर भी ऐसा ही है, जिसमें ली हुई भागीदारी मणिन्मुक्तकों की खदान कौड़ी मोल खरीद लेने के समान है | গীনন Shantikuni WhatsAPP.8439014110 a*1-Y8-7.66 यगदृष्टा का - ShareChat
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🇮🇳 देशभक्ति - दो संत तीर्थयात्रा पर रहे थे। एक जा विशालकाय वृक्ष के नीचे उन्होंने आश्रय लिया और आगे बढ़े | पर्यटन के उपरांत अगले वर्ष जब वे वापस लौटे , तो उन्होंने पाया कि जिस सघन वृक्ष की छाया में उन्होंने भोजन किया था, विश्राम किया था, गिरा पड़ा है | पहले ने अपने से वरिष्ठ संत से पूछा, महात्मन्! यह कैसे हुआ कि इतनी अल्प अवधि में यह वृक्ष गिर गया है ? संत बोले, तात! यह वृक्ष छिद्रों कारण गिरा है के प्राण था इसका जीवन जो गोंद रूप में सतत बहता रहा। उसे 2 पाने की लालसा में मनुष्य ने उसमें छेदकर उसे खोखला बना दिया। खोखली वस्तु कभी खडी नहीं रह सकती | झंझावातों को सहन न कर पाने के कारण ही यह गति 5$81 इसकी दो संत तीर्थयात्रा पर रहे थे। एक जा विशालकाय वृक्ष के नीचे उन्होंने आश्रय लिया और आगे बढ़े | पर्यटन के उपरांत अगले वर्ष जब वे वापस लौटे , तो उन्होंने पाया कि जिस सघन वृक्ष की छाया में उन्होंने भोजन किया था, विश्राम किया था, गिरा पड़ा है | पहले ने अपने से वरिष्ठ संत से पूछा, महात्मन्! यह कैसे हुआ कि इतनी अल्प अवधि में यह वृक्ष गिर गया है ? संत बोले, तात! यह वृक्ष छिद्रों कारण गिरा है के प्राण था इसका जीवन जो गोंद रूप में सतत बहता रहा। उसे 2 पाने की लालसा में मनुष्य ने उसमें छेदकर उसे खोखला बना दिया। खोखली वस्तु कभी खडी नहीं रह सकती | झंझावातों को सहन न कर पाने के कारण ही यह गति 5$81 इसकी - ShareChat
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