Rajkumar  .S.  Vishwakarma
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Rajkumar .S. Vishwakarma
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जय श्री महाकाल 🙏🙏🙏🌹🚩🌹💐 🔔
#🇮🇳 देशभक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
🇮🇳 देशभक्ति - आज का संदचिंतन चाहती है कि उसके की नसन्नस में ತai HId JIII एक नवीन शक्ति ক্রা মমা ৪া| লীঠা মাঃমী নন' कायरता से घृणा करें | संकीर्णता और स्वार्थपरता कायरता आदर्श मार्ग के पर चलते हुए जो कष्ट उठाने के चिह्न हैं पडते हैं, उन्हें प्रसन्नतापूर्वक शिरोधार्य करना ही साहस और वीरता है। कायर घड़ी-घड़ी मरते रहते हैं पर वीर पुरुष केवल एक बार मरते हैं और वह भी शानदार परंपरा स्थापित करते हुए Shantikunj WhatsApp 8439014110 मनुष्य तभी तक मनुष्य है जब तक वह पशु से সবৃনি ऊपर उठने के लिए संघर्ष करता रहता है संसार पर गौरवपूर्ण है पर अपनी दुर्बलताओं ही विजय प्राप्त करना साहित्य, विज्ञान ক্রা সীন লনা মন য নহী নিতয্র ৪ और कला-्कौशल में निष्णात होना अच्छी बात है पर मनुष्य जीवन की समस्याओं , वासनाओं , भावनाओं और आकांक्षाओं को समझना और उन्हें नियन्त्रण करने की विधि जानना सब से बड़ी बात है।आज की सब से बड़ी बनें | संकीर्णता आवश्यकता है कि लोग साहसी स्वार्थपरता और तुच्छता से घृणा करें और महान बनने के लिए साहस पूर्वक कदम बढ़ाते चलें अखंड ज्योांत 1963 आज का संदचिंतन चाहती है कि उसके की नसन्नस में ತai HId JIII एक नवीन शक्ति ক্রা মমা ৪া| লীঠা মাঃমী নন' कायरता से घृणा करें | संकीर्णता और स्वार्थपरता कायरता आदर्श मार्ग के पर चलते हुए जो कष्ट उठाने के चिह्न हैं पडते हैं, उन्हें प्रसन्नतापूर्वक शिरोधार्य करना ही साहस और वीरता है। कायर घड़ी-घड़ी मरते रहते हैं पर वीर पुरुष केवल एक बार मरते हैं और वह भी शानदार परंपरा स्थापित करते हुए Shantikunj WhatsApp 8439014110 मनुष्य तभी तक मनुष्य है जब तक वह पशु से সবৃনি ऊपर उठने के लिए संघर्ष करता रहता है संसार पर गौरवपूर्ण है पर अपनी दुर्बलताओं ही विजय प्राप्त करना साहित्य, विज्ञान ক্রা সীন লনা মন য নহী নিতয্র ৪ और कला-्कौशल में निष्णात होना अच्छी बात है पर मनुष्य जीवन की समस्याओं , वासनाओं , भावनाओं और आकांक्षाओं को समझना और उन्हें नियन्त्रण करने की विधि जानना सब से बड़ी बात है।आज की सब से बड़ी बनें | संकीर्णता आवश्यकता है कि लोग साहसी स्वार्थपरता और तुच्छता से घृणा करें और महान बनने के लिए साहस पूर्वक कदम बढ़ाते चलें अखंड ज्योांत 1963 - ShareChat
#🇮🇳 देशभक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌞सुप्रभात सन्देश #💕दिल वाली शुभकामनाएं #शुभ मंगलवार
🇮🇳 देशभक्ति - ईश्वर की अनेक शक्तियाँ ईश्वर द्वारा रचित संसार स्थूल और सूक्ष्म दो भागों में बँटा  हुआ है  হথূল संसार में आँखों से दिखाई पड़ने वाले अनेक और सर्दी, गर्मी, वायु, पदार्थ ईथर , परमाणु , रेडियो तरंगें आदि, अदृश्य होते हुए भी दृश्य के समान मौजूद हैं | दीखने वाली अनेक शक्तियाँ इसी प्रकार सूक्ष्म संसार में भी ईश्वर की ऐसी अनेक अदृश्य शक्तियाँ हैं, अपनी सूक्ष्म दिव्य दृष्टि से देखा और गुणों के आधार पर जिन्हें ऋषियों उनका नाम , रूप निश्चित किया है । इन्हीं का नाम देवता है । ईश्वर की धन शक्ति को लक्ष्मी, बुद्धि शक्ति को सरस्वती, युद्ध शक्ति को विष्णु , उत्पादन शक्ति ब्रह्मा, पालन शक्ति संहार शक्ति को शिव, दुर्गा, बल शक्ति को हनुमान् , सिद्धि शक्ति को गणेश , शासन शक्ति को इन्द्र कहते 81 31/2 ತತ  भगवान् की इन अनन्त शक्तियों में से हमारे लिए ক্তঘ 3নুকুল प्रतिकूल होती हैं | भूकम्प , विस्फोट , युद्ध , महामारी , अतिवृष्टि, अग्निकाण्ड आदि से सृष्टि का कोई और प्रयोजन भले ही पूरा होता हो, पर मनुष्य ही मिलता है। সাহ मेंसे अपने लाभ की संसार को अनन्त को हमें ढूँढ़कर वस्तुओं g3 {చ్ే प्राप्त करने में समर्थ उनका उपयोग करना होता है॰ तब हम उनमें होते हैं क्ली ర్ే Shantikunj Rishi Chintan awgpofficial Shantikun] Video Iulitg =WWW8WgDorg IIIlరి  ईश्वर की अनेक शक्तियाँ ईश्वर द्वारा रचित संसार स्थूल और सूक्ष्म दो भागों में बँटा  हुआ है  হথূল संसार में आँखों से दिखाई पड़ने वाले अनेक और सर्दी, गर्मी, वायु, पदार्थ ईथर , परमाणु , रेडियो तरंगें आदि, अदृश्य होते हुए भी दृश्य के समान मौजूद हैं | दीखने वाली अनेक शक्तियाँ इसी प्रकार सूक्ष्म संसार में भी ईश्वर की ऐसी अनेक अदृश्य शक्तियाँ हैं, अपनी सूक्ष्म दिव्य दृष्टि से देखा और गुणों के आधार पर जिन्हें ऋषियों उनका नाम , रूप निश्चित किया है । इन्हीं का नाम देवता है । ईश्वर की धन शक्ति को लक्ष्मी, बुद्धि शक्ति को सरस्वती, युद्ध शक्ति को विष्णु , उत्पादन शक्ति ब्रह्मा, पालन शक्ति संहार शक्ति को शिव, दुर्गा, बल शक्ति को हनुमान् , सिद्धि शक्ति को गणेश , शासन शक्ति को इन्द्र कहते 81 31/2 ತತ  भगवान् की इन अनन्त शक्तियों में से हमारे लिए ক্তঘ 3নুকুল प्रतिकूल होती हैं | भूकम्प , विस्फोट , युद्ध , महामारी , अतिवृष्टि, अग्निकाण्ड आदि से सृष्टि का कोई और प्रयोजन भले ही पूरा होता हो, पर मनुष्य ही मिलता है। সাহ मेंसे अपने लाभ की संसार को अनन्त को हमें ढूँढ़कर वस्तुओं g3 {చ్ే प्राप्त करने में समर्थ उनका उपयोग करना होता है॰ तब हम उनमें होते हैं क्ली ర్ే Shantikunj Rishi Chintan awgpofficial Shantikun] Video Iulitg =WWW8WgDorg IIIlరి - ShareChat
#🇮🇳 देशभक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌞सुप्रभात सन्देश #💕दिल वाली शुभकामनाएं #शुभ मंगलवार
🇮🇳 देशभक्ति - allzzilcilzl शान्तिकुञ्ज  हमें चाहिए कि खान - पान , वाणी , far, faaa, सर्वत्र ही आत्मसंयम का प्रयोग करें। अखण्ड ज्योति , जुलाई १९५७ हम बदलेंगे- युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा  वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी வய 1021 . 4][]#1[ दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial WWW.awgp..rg' 8439014110 YಚuTUBE Shantilunj Rishi Chintan allzzilcilzl शान्तिकुञ्ज  हमें चाहिए कि खान - पान , वाणी , far, faaa, सर्वत्र ही आत्मसंयम का प्रयोग करें। अखण्ड ज्योति , जुलाई १९५७ हम बदलेंगे- युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा  वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी வய 1021 . 4][]#1[ दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial WWW.awgp..rg' 8439014110 YಚuTUBE Shantilunj Rishi Chintan - ShareChat
#🇮🇳 देशभक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏 देवी दर्शन🌸
🇮🇳 देशभक्ति - १० मार्च - शीतला सप्तमी হীস-কম্ূ মী মুকি मंगलवार का महासंयोग सुबह स्नान करके 1 साफ कपड़े पहन लें হীীনলা মানা ক্রী 2 नीम के पत्ते , जल और दीप अर्पित करें 3 11 নাং নীল 11 নাহ বাল शीतलाय F "ऊँ शीतलाये नमः घर में बीमारी और डर समाप्त होगा दैनिक ऐसे पोस्ट पढने के लिए फॉलो करे १० मार्च - शीतला सप्तमी হীস-কম্ূ মী মুকি मंगलवार का महासंयोग सुबह स्नान करके 1 साफ कपड़े पहन लें হীীনলা মানা ক্রী 2 नीम के पत्ते , जल और दीप अर्पित करें 3 11 নাং নীল 11 নাহ বাল शीतलाय F "ऊँ शीतलाये नमः घर में बीमारी और डर समाप्त होगा दैनिक ऐसे पोस्ट पढने के लिए फॉलो करे - ShareChat
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🇮🇳 देशभक्ति - allzzilcilzl शान्तिकुञ्ज  &fے7 মজব-ভংজজ लिए अफीम है। ফ কলে মহেক্কি हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी வய 1021 . 4][]#1[ दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial WWW.awgp..rg' 8439014110 YಚuTUBE Shantilunj Rishi Chintan allzzilcilzl शान्तिकुञ्ज  &fے7 মজব-ভংজজ लिए अफीम है। ফ কলে মহেক্কি हम बदलेंगे - युग बदलेगा , हम सुधरेंगे - युग सुधरेगा वंदनीया माताजी की जन्म शताब्दी வய 1021 . 4][]#1[ दिव्य प्रकाश का महापर्व २०२६ awgpofficial WWW.awgp..rg' 8439014110 YಚuTUBE Shantilunj Rishi Chintan - ShareChat
#🇮🇳 देशभक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
🇮🇳 देशभक्ति - ,464942026`82& आजकसदचिनन॰ शरलिकोऊ | 060?.26 यह संसार कर्न्क्षूति है ~సcఇ ddf केॅरने  कै लिये ही रस धराधाम पर अवतरित . हुआ है | कर्म और निरू्तर केर् ही सिद्दि की   आधार शिला है ।कर्वीर कर्योगी सभृद्धि a तशा कर्ठ ट्यक्त् कितनी ही निः्न स्थिति सापन्य श्रेठी और पिदड़ी डई अवस्था ्ें ಇೆ ನ 03 ೩ 3 ೩z ೧ "೫೧೫೧೫ಷ पवरतत केर   ओपता शिर्दिष्ट स्थ्रन प्राप्त ही कर लैता है | शर्च १t६८, ऐ५ १८ 31605 ಉಿಗ Shantikunj WhatsApp - 8439014110 हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा हम बदलेंगे, युग बदलेगा awgpofficial Shantikunj Rishi Chintan Shantikun] Video WWW awgp org Iulitg A1ulutg ,464942026`82& आजकसदचिनन॰ शरलिकोऊ | 060?.26 यह संसार कर्न्क्षूति है ~సcఇ ddf केॅरने  कै लिये ही रस धराधाम पर अवतरित . हुआ है | कर्म और निरू्तर केर् ही सिद्दि की   आधार शिला है ।कर्वीर कर्योगी सभृद्धि a तशा कर्ठ ट्यक्त् कितनी ही निः्न स्थिति सापन्य श्रेठी और पिदड़ी डई अवस्था ्ें ಇೆ ನ 03 ೩ 3 ೩z ೧ "೫೧೫೧೫ಷ पवरतत केर   ओपता शिर्दिष्ट स्थ्रन प्राप्त ही कर लैता है | शर्च १t६८, ऐ५ १८ 31605 ಉಿಗ Shantikunj WhatsApp - 8439014110 हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा हम बदलेंगे, युग बदलेगा awgpofficial Shantikunj Rishi Chintan Shantikun] Video WWW awgp org Iulitg A1ulutg - ShareChat
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🇮🇳 देशभक्ति - सदविन्तन ू  ஒஏ elsau 82$955` ५ ०६०३ १०१६ 89590!4110  मस्तिष्क को स्वार्थ~परक अपनै चिन्तन   से भुक्त केर उज्ज्वेल खवं उदात्त विचार धारा को स्थोन दीनियो |नौ बुद्िभन ஒ ு& ஈa Rl& கிஈ * 31062 பகி ஔூனளரி चिन्तत &எள் ஈச ஔ வபபாகர छिसका खुफल उन्नति ऐर्व खश कै रप ४ैं ही ऋ्रतिफलित हैता है। अखे्ड जरोतर ठर्च ~१t६८ , ऐ५४ १५ WhatsApp - 8439014110 Shantikunj हम बदलेंगे, युग बदलेगा हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा awgpofficial Shantikunj Rishi Chintan Shantikun] Video ಖ M.awgn.nrg Iulitg A1ulutg सदविन्तन ू  ஒஏ elsau 82$955` ५ ०६०३ १०१६ 89590!4110  मस्तिष्क को स्वार्थ~परक अपनै चिन्तन   से भुक्त केर उज्ज्वेल खवं उदात्त विचार धारा को स्थोन दीनियो |नौ बुद्िभन ஒ ு& ஈa Rl& கிஈ * 31062 பகி ஔூனளரி चिन्तत &எள் ஈச ஔ வபபாகர छिसका खुफल उन्नति ऐर्व खश कै रप ४ैं ही ऋ्रतिफलित हैता है। अखे्ड जरोतर ठर्च ~१t६८ , ऐ५४ १५ WhatsApp - 8439014110 Shantikunj हम बदलेंगे, युग बदलेगा हम सुधरेंगे, युग सुधरेगा awgpofficial Shantikunj Rishi Chintan Shantikun] Video ಖ M.awgn.nrg Iulitg A1ulutg - ShareChat
#🇮🇳 देशभक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🇮🇳 देशभक्ति - यन्मण्डलं विश्वसृजां प्रसिद्धमुत्पत्तिरक्षाप्रलयप्रगल्भम्। यस्मिञ्जगत्संहरतेउखिलञ्च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। ९ || यन्मण्डलं सर्वगतस्य विष्णोरात्मा परं धाम विशुद्धतत्त्वम्।  सूक्ष्मान्तरैर्योगपथानुगम्यं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्I। १० I१ यन्मण्डलं वेदविदो वदन्ति गायन्ति यच्चारणसिद्धसंघाः तत्सवितुर्वरेण्यम् ११  यन्मण्डलं वेदविदः स्मरन्ति पुनातु मां  Il यन्मण्डलं वेदविदोपगीतं यद्योगिनां योगपथानुगम्यम्। तत्सर्ववेदं प्रणमामि सूर्यं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् I। १२ ।I मण्डलाष्टतयं पुण्यं यः पठेत्सततं नरः सर्वपापविशुद्धात्मा   सूर्यलोके   महीयते I। १३I। इति   श्रीमदादित्यहृदये मण्डलाष्टकं सम्पूर्णम्। जो संसारको सृष्टि करनेवाले ब्रह्मा आदिमें प्रसिद्ध हैं; जो संसारको उत्पत्ति, रक्षा और प्रलय करनेमें समर्थ है; और जिसमें समस्त जगत् लीन हो जाता है, बह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे II ९ ।I जो सर्वान्तर्यामो  विष्णुभगवान्का आत्मा तथा विशुद्ध तत्त्ववाला परमधाम है; और जो सूक्ष्म  बुद्धिवालोंके द्वारा योगमार्गसे गमन करनेयोग्य है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करेI। १० II वेदके जाननेवाले जिसका वर्णन करते हैं; चारण और सिद्धगण जिसको गाते हैं; और वेदज्ञलोग जिसका स्मरण करते हैं; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे II ११ II जिनका मण्डल वेदवेत्ताओंके द्वारा गाया गया है; और जो योगियोंसे योगमार्गद्वारा अनुगमन करनेयोग्य हैं; उन सब वेदोंके स्वरूप सूर्यभगवान्को प्रणाम करता हूँ; और सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे।। १२II जो पुरुष परम वह पवित्र इस मण्डलाष्टकस्तोत्रका पाठ सर्वदा करता हैं; वह पापोंसे मुक्त हो॰ विशुद्धचित्त होकर सूर्यलोकमें प्रतिष्ठा पाता है Il १३ II यन्मण्डलं विश्वसृजां प्रसिद्धमुत्पत्तिरक्षाप्रलयप्रगल्भम्। यस्मिञ्जगत्संहरतेउखिलञ्च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। ९ || यन्मण्डलं सर्वगतस्य विष्णोरात्मा परं धाम विशुद्धतत्त्वम्।  सूक्ष्मान्तरैर्योगपथानुगम्यं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्I। १० I१ यन्मण्डलं वेदविदो वदन्ति गायन्ति यच्चारणसिद्धसंघाः तत्सवितुर्वरेण्यम् ११  यन्मण्डलं वेदविदः स्मरन्ति पुनातु मां  Il यन्मण्डलं वेदविदोपगीतं यद्योगिनां योगपथानुगम्यम्। तत्सर्ववेदं प्रणमामि सूर्यं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् I। १२ ।I मण्डलाष्टतयं पुण्यं यः पठेत्सततं नरः सर्वपापविशुद्धात्मा   सूर्यलोके   महीयते I। १३I। इति   श्रीमदादित्यहृदये मण्डलाष्टकं सम्पूर्णम्। जो संसारको सृष्टि करनेवाले ब्रह्मा आदिमें प्रसिद्ध हैं; जो संसारको उत्पत्ति, रक्षा और प्रलय करनेमें समर्थ है; और जिसमें समस्त जगत् लीन हो जाता है, बह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे II ९ ।I जो सर्वान्तर्यामो  विष्णुभगवान्का आत्मा तथा विशुद्ध तत्त्ववाला परमधाम है; और जो सूक्ष्म  बुद्धिवालोंके द्वारा योगमार्गसे गमन करनेयोग्य है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करेI। १० II वेदके जाननेवाले जिसका वर्णन करते हैं; चारण और सिद्धगण जिसको गाते हैं; और वेदज्ञलोग जिसका स्मरण करते हैं; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे II ११ II जिनका मण्डल वेदवेत्ताओंके द्वारा गाया गया है; और जो योगियोंसे योगमार्गद्वारा अनुगमन करनेयोग्य हैं; उन सब वेदोंके स्वरूप सूर्यभगवान्को प्रणाम करता हूँ; और सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे।। १२II जो पुरुष परम वह पवित्र इस मण्डलाष्टकस्तोत्रका पाठ सर्वदा करता हैं; वह पापोंसे मुक्त हो॰ विशुद्धचित्त होकर सूर्यलोकमें प्रतिष्ठा पाता है Il १३ II - ShareChat
#🇮🇳 देशभक्ति #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🇮🇳 देशभक्ति - यन्मण्डलं ज्ञानघनं त्वगम्यं त्रैलोक्यपूज्यं त्रिगुणात्मरूपम्।  तत्सवितुर्वरेण्यम् " समस्ततेजोमयदिव्यरूपं पुनातु मां ١١ ٧ ١١ यन्मण्डलं गूढमतिप्रबोधं धर्मस्य वृद्धं  कुरुते " जनानाम्। यत्सर्वपापक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।I ५ II यन्मण्डलं व्याधिविनाशदक्षं यदूग्यजुःसामसु संप्रगीतम्।  प्रकाशितं येन च भूर्भुवः स्वः पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् II ६ Il यन्मण्डलं वेदविदो वदन्ति गायन्ति यच्चारणसिद्धसंघाः यद्योगिनो योगजुषां च संघाः पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्।। ७।। सर्वजनेषु 7 पूजितं ज्योतिश्च कुर्यादिह मर्त्यलोके यन्मण्डलं यत्कालकल्पक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। ८ II त्रिलोकोपूज्य, त्रिगुणस्वरूप पूर्ण तेजोमय और  जो ज्ञानघन अगम्य सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे ।। ४II जो दिव्यरूप है d बुद्धिसे जाननेयोग्य है और सम्पूर्ण मनुष्योंके धर्मकी वृद्धि करता  মুঃস कारण है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ है तथा जो सबके पापोंके नाशका मण्डल मुझे पवित्र करे।।५II जो रोगोंका विनाश करनेमें समर्थ है॰ जो यजू और साम- इन तीनों वेदोंमें सम्यक प्रकारसे गाया गया है ऋक तथा जिसने भूः भुवः और स्वः- इन तीनों लोकोंको प्रकाशित किया है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे।।६।I वेदज्ञाता लोग जिसका वर्णन करते हैं; चारणों और सिद्धोंका समूह जिसका गान किया करता है तथा योगका सेवन करनेवाले और योगीलोग जिसका गुणगान करते हैं; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ ಫ II ಅ Il   sif मण्डल मुझ  पवित्र समस्त जनोंमें पूजित है और इस मर्त्यलोकमें प्रकाश करता है तथा जो काल और कल्पके क्षयका कारण भी है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे।।८ Il यन्मण्डलं ज्ञानघनं त्वगम्यं त्रैलोक्यपूज्यं त्रिगुणात्मरूपम्।  तत्सवितुर्वरेण्यम् " समस्ततेजोमयदिव्यरूपं पुनातु मां ١١ ٧ ١١ यन्मण्डलं गूढमतिप्रबोधं धर्मस्य वृद्धं  कुरुते " जनानाम्। यत्सर्वपापक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।I ५ II यन्मण्डलं व्याधिविनाशदक्षं यदूग्यजुःसामसु संप्रगीतम्।  प्रकाशितं येन च भूर्भुवः स्वः पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् II ६ Il यन्मण्डलं वेदविदो वदन्ति गायन्ति यच्चारणसिद्धसंघाः यद्योगिनो योगजुषां च संघाः पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्।। ७।। सर्वजनेषु 7 पूजितं ज्योतिश्च कुर्यादिह मर्त्यलोके यन्मण्डलं यत्कालकल्पक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ।। ८ II त्रिलोकोपूज्य, त्रिगुणस्वरूप पूर्ण तेजोमय और  जो ज्ञानघन अगम्य सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे ।। ४II जो दिव्यरूप है d बुद्धिसे जाननेयोग्य है और सम्पूर्ण मनुष्योंके धर्मकी वृद्धि करता  মুঃস कारण है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ है तथा जो सबके पापोंके नाशका मण्डल मुझे पवित्र करे।।५II जो रोगोंका विनाश करनेमें समर्थ है॰ जो यजू और साम- इन तीनों वेदोंमें सम्यक प्रकारसे गाया गया है ऋक तथा जिसने भूः भुवः और स्वः- इन तीनों लोकोंको प्रकाशित किया है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे।।६।I वेदज्ञाता लोग जिसका वर्णन करते हैं; चारणों और सिद्धोंका समूह जिसका गान किया करता है तथा योगका सेवन करनेवाले और योगीलोग जिसका गुणगान करते हैं; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ ಫ II ಅ Il   sif मण्डल मुझ  पवित्र समस्त जनोंमें पूजित है और इस मर्त्यलोकमें प्रकाश करता है तथा जो काल और कल्पके क्षयका कारण भी है; वह सूर्यभगवान्का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करे।।८ Il - ShareChat
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🇮🇳 देशभक्ति - श्रीसूर्यमण्डलाष्टकम् ६३ नमः सवित्रे जगदेकचक्षुषे जगत्प्रसूतिस्थितिनाशहेतवे त्रयीमयाय त्रिगुणात्मधारिणे विरञ्चिनारायणशङ्करात्मने II १ ।। यन्मण्डलं दीप्तिकरं विशालं रत्नप्रभं तीव्रमनादिरूपम्। दारिद्र्यदुःखक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्।I २ I। यन्मण्डलं देवगणैः विप्रैः स्तुतं भावनमुक्तिकोविदम्। सुपूजितं " तं देवदेवं प्रणमामि सूर्यं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्।। ३।l सूर्यदेवको, जो जगत्के नायक हैं সান; নিসান নখা সাঃন্চা 'I उन देते हैं॰ साथ ही जो बड़े बड़े पापोंको भो हर लेते हैं॰ मैं प्रणाम करता हूँ ।।८ ।l प्रकाशक ) हें; संसारको उत्पत्ति, स्थित जो जिगतूके एकमात्र नेत्र और नाशके कारण हैं; उन वेदत्रयीस्वरूप सत्त्वादि तीनों गुणोंके अनुसार विष्गु और महेश नामक तीन रूप धारण करनेवाले सूर्यभगवान्को  9٤٨, करनेवाला रत्नोंके जो विशाल #Il ' I মমান नमस्कार प्रकाश ग्रभावाला, तीव्र, अनादिरूप और दारिद्र्यदुःखके नाशका कारण है; वह सूर्यभगवानका जिनका ಈ Il ? Il श्रेष्ठ मुझे পিস गण्डल मण्डल देवगणोंसे अच्छी प्रकार पूजित है; ब्राह्मणोंसे स्तुत है और भक्तोंको मुक्ति देनेवाला है; उन देवाधिदेव सूर्यभगवान्को मैं प्रणाम हूँ और वह करता सूर्यभगवान्का   श्रेष्ठ मुझे   पवित्र করং Il ও Il मण्डल श्रीसूर्यमण्डलाष्टकम् ६३ नमः सवित्रे जगदेकचक्षुषे जगत्प्रसूतिस्थितिनाशहेतवे त्रयीमयाय त्रिगुणात्मधारिणे विरञ्चिनारायणशङ्करात्मने II १ ।। यन्मण्डलं दीप्तिकरं विशालं रत्नप्रभं तीव्रमनादिरूपम्। दारिद्र्यदुःखक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्।I २ I। यन्मण्डलं देवगणैः विप्रैः स्तुतं भावनमुक्तिकोविदम्। सुपूजितं " तं देवदेवं प्रणमामि सूर्यं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम्।। ३।l सूर्यदेवको, जो जगत्के नायक हैं সান; নিসান নখা সাঃন্চা 'I उन देते हैं॰ साथ ही जो बड़े बड़े पापोंको भो हर लेते हैं॰ मैं प्रणाम करता हूँ ।।८ ।l प्रकाशक ) हें; संसारको उत्पत्ति, स्थित जो जिगतूके एकमात्र नेत्र और नाशके कारण हैं; उन वेदत्रयीस्वरूप सत्त्वादि तीनों गुणोंके अनुसार विष्गु और महेश नामक तीन रूप धारण करनेवाले सूर्यभगवान्को  9٤٨, करनेवाला रत्नोंके जो विशाल #Il ' I মমান नमस्कार प्रकाश ग्रभावाला, तीव्र, अनादिरूप और दारिद्र्यदुःखके नाशका कारण है; वह सूर्यभगवानका जिनका ಈ Il ? Il श्रेष्ठ मुझे পিস गण्डल मण्डल देवगणोंसे अच्छी प्रकार पूजित है; ब्राह्मणोंसे स्तुत है और भक्तोंको मुक्ति देनेवाला है; उन देवाधिदेव सूर्यभगवान्को मैं प्रणाम हूँ और वह करता सूर्यभगवान्का   श्रेष्ठ मुझे   पवित्र করং Il ও Il मण्डल - ShareChat