Manjula Kushwaha
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00:33
#🙏श्री तिरुपति बालाजी 🚩 #👌अच्छी और रोचक जानकारी😇
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00:52
राम नाम की महिमा: कलियुग में रक्षा का दिव्य आधार भक्ति साहित्य में “राम नाम” की महिमा अनंत मानी गई है। गोस्वामी गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस की यह चौपाई— “राम नाम नर केसरी कनक कसिपु कलि काल। जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहि दलि सुरपाल॥” केवल काव्य सौंदर्य नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक सत्य को व्यक्त करती है। इस एक चौपाई में तुलसीदास जी ने राम नाम की शक्ति, कलियुग की स्थिति और भक्त की सुरक्षा—तीनों का अत्यंत प्रभावशाली चित्र प्रस्तुत किया है। पौराणिक प्रतीक और उनका संदेश चौपाई में “नर केसरी” अर्थात नृसिंह का संकेत है। जब भक्त प्रह्लाद को उसके अत्याचारी पिता हिरण्यकशिपु ने असंख्य कष्ट दिए, तब भगवान नृसिंह अवतार लेकर प्रकट हुए और हिरण्यकशिपु का वध कर प्रह्लाद की रक्षा की। तुलसीदास जी इसी प्रसंग को आधार बनाकर कहते हैं कि जैसे नृसिंह ने प्रह्लाद की रक्षा की, वैसे ही राम नाम कलियुग रूपी हिरण्यकशिपु का विनाश कर भक्तों की रक्षा करेगा। यहाँ “कनक कसिपु” (हिरण्यकशिपु) अत्याचार, अहंकार और अधर्म का प्रतीक है, जबकि “कलि काल” वर्तमान युग की बुराइयों का संकेत देता है। कलियुग में लोभ, क्रोध, मोह, ईर्ष्या, अन्याय और भ्रम का बोलबाला है। मनुष्य का मन ही आज का रणक्षेत्र बन चुका है। राम नाम: आंतरिक शक्ति का स्रोत तुलसीदास जी का संदेश स्पष्ट है—राम का नाम केवल उच्चारण नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति है। जो व्यक्ति श्रद्धा और विश्वास के साथ राम नाम का जप करता है, वह प्रह्लाद के समान निर्भय और सुरक्षित हो जाता है। राम नाम मन के विकारों को नष्ट करता है। यह अहंकार को शांत करता है। यह भय और असुरक्षा की भावना को समाप्त करता है। जैसे नृसिंह ने हिरण्यकशिपु का अंत किया, वैसे ही राम नाम मन के भीतर छिपे नकारात्मक विचारों का विनाश करता है। कलियुग में राम नाम का महत्व आज का समय मानसिक तनाव, प्रतिस्पर्धा और नैतिक संकटों से भरा हुआ है। परिवारों में विघटन, समाज में अविश्वास और जीवन में अस्थिरता—ये सब कलियुग के ही रूप हैं। ऐसे समय में राम नाम एक सरल और सुलभ उपाय है। यह किसी विशेष स्थान, साधन या परिस्थिति पर निर्भर नहीं। यह हर व्यक्ति के लिए उपलब्ध है। सिर्फ सच्चे मन से स्मरण करना ही पर्याप्त है। राम नाम व्यक्ति को भीतर से सशक्त बनाता है। जब मन स्थिर और शुद्ध होता है, तब बाहरी संकट भी कमजोर पड़ जाते हैं। निष्कर्ष यह चौपाई केवल पौराणिक कथा का स्मरण नहीं, बल्कि जीवन का मार्गदर्शन है। तुलसीदास जी हमें यह विश्वास दिलाते हैं कि यदि हम श्रद्धा के साथ राम नाम का जप करें, तो कलियुग की कोई भी बुराई हमें परास्त नहीं कर सकती। राम नाम स्वयं नरसिंह है, कलियुग हिरण्यकशिपु है, और भक्त प्रह्लाद है। जहाँ राम नाम है, वहाँ भय नहीं। जहाँ श्रद्धा है, वहाँ सुरक्षा निश्चित है। अतः जीवन की हर चुनौती में राम नाम को अपना आधार बनाना ही इस चौपाई का वास्तविक संदेश है। #रामनाम #नरसिंहभगवान #प्रह्लादभक्ति #😊होलिका दहन मुहूर्त एवं कथाएं🙏🔥
😊होलिका दहन मुहूर्त एवं कथाएं🙏🔥 - "राम नामनरकेसरी कनक कसिपु कलि काल। जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहिदलि सरपाल।।' "राम नामनरकेसरी कनक कसिपु कलि काल। जापक जन प्रहलाद जिमि पालिहिदलि सरपाल।।' - ShareChat
विश्वनाथ मम नाथ पुरारी। त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी॥ हे विश्वनाथ! हे त्रिपुरारि (त्रिपुरासुर का वध करने वाले)! आप मेरे स्वामी हैं। आपकी महिमा तीनों लोकों (आकाश, पाताल और मृत्युलोक) में प्रसिद्ध है, आप हम पर कृपा करें.. हर हर महादेव 🙏 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - हरि शरणं विश्वनाथ मम नाथ gIT त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी (Agr का वध करने वाले)! आप मेरे हे विश्वनाथ! हे त्रिपुरारि स्वामी हैं। आपकी महिमा तीनों लोकों ( आकाश, पाताल और में प्रसिद्ध है, आप हम पर कृपा करें মূন্তুলীব্ধ)  हरि शरणं विश्वनाथ मम नाथ gIT त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी (Agr का वध करने वाले)! आप मेरे हे विश्वनाथ! हे त्रिपुरारि स्वामी हैं। आपकी महिमा तीनों लोकों ( आकाश, पाताल और में प्रसिद्ध है, आप हम पर कृपा करें মূন্তুলীব্ধ) - ShareChat
गगन चढ़इ रज पवन प्रसंगा। कीच मिलइ नीच जल संगा॥ हवा का साथ पाकर धूल आकाश पर चढ़ जाती है, लेकिन वही धूल जब नीचे बहते हुए गंदे पानी का साथ पाती है, तो कीचड़ बन जाती है। यानी हमारी उन्नति और अवनति हमारी संगति पर निर्भर करती है। जय सियाराम 🙏 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - हरि शरणं गगन चढ़इ रज पवन प्रसंगा कीच मिलइ नीच जल संगा का साथ पाकर धूल आकाश पर चढ़ जाती है॰ लेकिन हवा वही धूल जब नीचे बहते हुए गंदे पानी का साथ पाती है, कीचड़ बन जाती है। यानी हमारी उन्नति और अवनति ता हमारी संगति पर निर्भर करती है। हरि शरणं गगन चढ़इ रज पवन प्रसंगा कीच मिलइ नीच जल संगा का साथ पाकर धूल आकाश पर चढ़ जाती है॰ लेकिन हवा वही धूल जब नीचे बहते हुए गंदे पानी का साथ पाती है, कीचड़ बन जाती है। यानी हमारी उन्नति और अवनति ता हमारी संगति पर निर्भर करती है। - ShareChat
भाग्य को कोसने से कुछ नहीं बदलता, लेकिन कर्म करने से सब कुछ बदल सकता है। गीता का संदेश हमें याद दिलाता है कि हमारे जीवन की दिशा हमारे अपने कर्म तय करते हैं। इसलिए आज का दिन शिकायत में नहीं, बल्कि संकल्प और प्रयास में बिताएं। आपका कर्म ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है!💯 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏गीता ज्ञान🛕 - JAGRAN Josh इंसान हमेशा अपने भाग्य को कोसता है यह जानते हुए भी कि भाग्य से भी ऊंचा उसका कर्म है॰ जो उसके स्वयं के हाथों में है। JAGRAN Josh इंसान हमेशा अपने भाग्य को कोसता है यह जानते हुए भी कि भाग्य से भी ऊंचा उसका कर्म है॰ जो उसके स्वयं के हाथों में है। - ShareChat
#🌞 Good Morning🌞
🌞 Good Morning🌞 - চ ೯ फरवरी < 16 ज्ञान के बिना प्रेम मोह बन जाता है॰ और बिना प्रेमके ज्ञान शून्यतामें चला जाता है! ೯ = চ # ೪ 5 1 ೭ # 5 6 शुभष सोसवार @ % = 3 7: fiar | श्रीजी की चरण सेवा 0 চ ೯ फरवरी < 16 ज्ञान के बिना प्रेम मोह बन जाता है॰ और बिना प्रेमके ज्ञान शून्यतामें चला जाता है! ೯ = চ # ೪ 5 1 ೭ # 5 6 शुभष सोसवार @ % = 3 7: fiar | श्रीजी की चरण सेवा 0 - ShareChat
तब लगि कुसल न जीव कहुँ सपनेहुँ मन बिश्राम। जब लगि भजत न राम कहुँ सोक धाम तजि काम॥ तब तक जीव की कुशल नहीं और न स्वप्न में भी उसके मन को शांति है, जब तक वह शोक के घर काम (विषय-कामना) को छोड़कर श्री रामजी को नहीं भजता.. जय सियाराम 🙏 #🔊सुन्दर कांड🕉️
🔊सुन्दर कांड🕉️ - ओम नमो नारायणाय !! 4 तब लगि कुसल न जीव कहुँ सपनेहुँ मन बिश्राम कहुँ सोक धाम तजि काम जब लगि भजत न राम तब तक जीव की कुशल नहीं और न स्वप्न में भी उसके मन को जब तक वह शोक के घर काम |विषय-्कामना) को शांति है, छोड़कर श्री रामजी को नहीं भजता श्रीरामचरितमानस, सुंदरकांड ४६ ओम नमो नारायणाय !! 4 तब लगि कुसल न जीव कहुँ सपनेहुँ मन बिश्राम कहुँ सोक धाम तजि काम जब लगि भजत न राम तब तक जीव की कुशल नहीं और न स्वप्न में भी उसके मन को जब तक वह शोक के घर काम |विषय-्कामना) को शांति है, छोड़कर श्री रामजी को नहीं भजता श्रीरामचरितमानस, सुंदरकांड ४६ - ShareChat
#👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 - ऊँ श्री परमात्मने नमः प्राणी अभागे नहीं होते। सच तो यह है दुःखी कि अभागे वही हैंजो सुखी है। क्योकि दिलतअजनर्ख को आनन्दघन भगवान् दुःखी छतेखावजखनजरनककी को भोग। गहराई से देखिए कोलिया और க Thd सामग्री; 3Z हुई। हाँ, दुःखी उँसी समय तक अभाँगा है जब तक संसार की ओर देखता है। संसार से हॅस दुःज्हनी हरिद्नेक सच्ची निराशा होते अँनेक अवश्य हर लेते है ऐसा घटनाओं से अनुभव हुआ है। स्वामीजी श्री शरणानन्दजी महाराजजी ऊँ श्री परमात्मने नमः प्राणी अभागे नहीं होते। सच तो यह है दुःखी कि अभागे वही हैंजो सुखी है। क्योकि दिलतअजनर्ख को आनन्दघन भगवान् दुःखी छतेखावजखनजरनककी को भोग। गहराई से देखिए कोलिया और க Thd सामग्री; 3Z हुई। हाँ, दुःखी उँसी समय तक अभाँगा है जब तक संसार की ओर देखता है। संसार से हॅस दुःज्हनी हरिद्नेक सच्ची निराशा होते अँनेक अवश्य हर लेते है ऐसा घटनाओं से अनुभव हुआ है। स्वामीजी श्री शरणानन्दजी महाराजजी - ShareChat
यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात् । विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे ॥ जिन्‍होंने संपूर्ण विश्‍व की रचना की है, जिनके स्‍मरण मात्र से मनुष्‍य जन्‍म-मृत्‍यु के बंधन से मुक्‍त हो जाता है, ऐसे श्री विष्‍णु को मैं बार-बार नमस्‍कार करता हूं । #repeatedly #salute #LordVishnu #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 - यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात् विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे II जिन्होंने संपूर्ण विश्व की रचना की है, जिनके स्मरण मात्र से मनुष्य जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है, ऐसे श्री विष्णु को मैं बार-बार नमस्कार करता हूं | यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसारबन्धनात् विमुच्यते नमस्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे II जिन्होंने संपूर्ण विश्व की रचना की है, जिनके स्मरण मात्र से मनुष्य जन्म मृत्यु के बंधन से मुक्त हो जाता है, ऐसे श्री विष्णु को मैं बार-बार नमस्कार करता हूं | - ShareChat