Kannojia
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💁‍♂️मेरा स्टेटस - कभी कभी हमारे पास शब्द नहीं होता है, ये बताने को कि हम क्या महसूस कर रहे हैं। रेत की मछली भारती नान्ता कभी कभी हमारे पास शब्द नहीं होता है, ये बताने को कि हम क्या महसूस कर रहे हैं। रेत की मछली भारती नान्ता - ShareChat
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💁‍♂️मेरा स्टेटस - गणशसह कवर अध्याय १८ जब डर पूरी तरह चला जाए (When Fear Finally Leaves) शोर नहीं करता। कई बार वह बहुत शांति से दिल স ঐঠা চসংা  डर रहता है - हर फैसले से पहले, हर नज़दीकी के बाद, हर खुश पल के  पीछे। वह पूछता रहता है कि कहीं  अस्थायी तो नहीं  कर्ही यह  यह ு इंसान भी वही न निकले। जब डर पूरी तरह जाता है, तब इंसान  अचानक बहादुर नहीं बनता -वह बस हल्का हो जाता है। पहले डर रिश्ते को चलाता था। कौनन्सा शब्द बोले जाए॰ कितनी  उम्मीद रखी जाए॰ कितना पास जाया जाए सब कुछ डर तय करता  था। अब डर के जाने के बाद फैसले शांति से होते हैं। दिल भागता नहीं  रुककर सुनता है। और यह रुकना कमजोरी नहीं, भरोसे का पहला संकेत होता हे। जब डर चला जाता है॰ तब रिश्ते में चुप्पी बदल जाती है। पहले  चुप्पी सवाल बनती थी, अब वह आराम बन जाती है। पहले देर बेचैनी लाती थी, अब देर भी सामान्य लगती है। क्योंकि अब यक़ीन होता है कि जुड़ाव मौजूद  है -भले ही हर पल दिखे नहीं। डर के जाने के साथ एक और  u लौटती हे आत्मसम्मान। आप खुद को छोटा करके प्यार नहीं माँगते। आप अपनी सीमाएँ सा़फ़ रखते  हैं और उनसे शर्मिंदा नहीं होते। आप जानते हैं कि जो रिश्ता = आपको खोने का  दिखाकर चलाया जाए॰ वह रिश्ता नहीं , दबाव होता है। 57 गणशसह कवर अध्याय १८ जब डर पूरी तरह चला जाए (When Fear Finally Leaves) शोर नहीं करता। कई बार वह बहुत शांति से दिल স ঐঠা চসংা  डर रहता है - हर फैसले से पहले, हर नज़दीकी के बाद, हर खुश पल के  पीछे। वह पूछता रहता है कि कहीं  अस्थायी तो नहीं  कर्ही यह  यह ு इंसान भी वही न निकले। जब डर पूरी तरह जाता है, तब इंसान  अचानक बहादुर नहीं बनता -वह बस हल्का हो जाता है। पहले डर रिश्ते को चलाता था। कौनन्सा शब्द बोले जाए॰ कितनी  उम्मीद रखी जाए॰ कितना पास जाया जाए सब कुछ डर तय करता  था। अब डर के जाने के बाद फैसले शांति से होते हैं। दिल भागता नहीं  रुककर सुनता है। और यह रुकना कमजोरी नहीं, भरोसे का पहला संकेत होता हे। जब डर चला जाता है॰ तब रिश्ते में चुप्पी बदल जाती है। पहले  चुप्पी सवाल बनती थी, अब वह आराम बन जाती है। पहले देर बेचैनी लाती थी, अब देर भी सामान्य लगती है। क्योंकि अब यक़ीन होता है कि जुड़ाव मौजूद  है -भले ही हर पल दिखे नहीं। डर के जाने के साथ एक और  u लौटती हे आत्मसम्मान। आप खुद को छोटा करके प्यार नहीं माँगते। आप अपनी सीमाएँ सा़फ़ रखते  हैं और उनसे शर्मिंदा नहीं होते। आप जानते हैं कि जो रिश्ता = आपको खोने का  दिखाकर चलाया जाए॰ वह रिश्ता नहीं , दबाव होता है। 57 - ShareChat