"देश हमारा कहाँ जा रहा, कहो नरेंदर मजा आ रहा"
उपरोक्त पंक्ति वाला एक गाना खूब वायरल हो रहा है। यह गाना एक सांस्कृतिक कार्यक्रम में युवाओं द्वारा गाया गया, जो वाराणसी में आयोजित एक पुस्तक मेले से जुड़ा था। इसके बोल वर्तमान सामाजिक-आर्थिक स्थितियों पर टिप्पणी करते प्रतीत होते हैं।
गाने की विषयवस्तु और प्रस्तुति
गीत के बोल विभिन्न मुद्दों को छूते हैं, जैसे शहरों के नाम परिवर्तन (इलाहाबाद से प्रयागराज), मुद्रा के मूल्य में गिरावट (डॉलर के सामने रुपये की स्थिति), और कथित तौर पर आम जनता की चुनौतियाँ। इसे एक आकर्षक और आसानी से याद हो जाने वाले रैप शैली में पेश किया गया है, जिसकी धुन को "ट्रेंडी" और "आदत बनाने वाला" बताया जा रहा है। इसने सोशल मीडिया पर व्यापक ध्यान आकर्षित किया है।
गाने का संदर्भ और प्रतिक्रियाएं
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि यह गाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में आयोजित एक पुस्तक मेले में "GenZ जनरेशन" द्वारा प्रस्तुत किया गया था। वीडियो में "सांस्कृतिक मुहिम" और "वैचारिक प्रोजेक्ट" जैसे बैनर दिखाई देते हैं।
कांग्रेस नेता भूपेश बघेल सहित कई यूजर्स ने इस क्लिप को साझा किया है। जनता की प्रतिक्रियाओं में गीत की प्रशंसा, साथ ही बेरोजगारी, महंगाई और अन्य सामाजिक आर्थिक चिंताओं पर टिप्पणी शामिल है। कुछ यूजर्स ने इसकी तुलना राष्ट्रकवि दिनकर की रचनाओं से भी की है।
चर्चा का केंद्र
यह गाना इस व्यापक बहस का हिस्सा बन गया है कि क्या सत्तारूढ़ दल द्वारा किए गए वादे पूरे हो रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि सरकार हिंदू-मुस्लिम जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जबकि युवाओं के सामने बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों में देरी या घोटाले जैसी गंभीर समस्याएं हैं। इस गाने को आम जनता की निराशा और हताशा की अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है, जो पुराने और युवा, दोनों वर्गों के बीच लोकप्रिय हो रहा है।
यह गाना मनोरंजन नहीं, चेतावनी है। सवाल यह नहीं कि “मज़ा आ रहा या नहीं”, सवाल यह है कि देश किस दिशा में धकेला जा रहा है—और क्यों?
पूरा गीत निम्नवत है—
देश हमारा कहाँ जा रहा,
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
जनता भूखी मर रही है,
तुमको क्या मज़ा आ रहा?
इलाहाबाद प्रयाग हो गया
और बनारस टूटा,
धनी राम का खेत बिक गया,
तार बजाना लौटा।
टूटी चप्पल पहन के मनसुख,
बोरा उठा रहा है,
और हमारा देसी नीरो,
बंसी बजा रहा है।
देश हमारा कहाँ जा रहा,
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
डॉलर सर पर पाँव जमाए,
मुँह बल पड़ा रुपैया भैया,
डॉलर सर पर पाँव जमाए,
मुँह बल पड़ा रुपैया।
और भक्त चिल्लाए रहे हैं
जय गंगा, जय गैया!
और भक्त चिल्लाए रहे हैं
जय गंगा, जय गैया!
जो गंगा के लिए लड़ा,
वो जीवन गँवा रहा है,
और इधर मनमा ,
जीवन की बातें सुना रहा है।
देश हमारा कहाँ जा रहा,
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
महंगाई ने कमर तोड़ दी,
सुख-सुविधा सब पीछे छोड़ दी।
तेल, गैस के दाम बढ़ रहे,
आम आदमी अब रो रहा।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
बेरोजगारी चरम पे है,
युवा डिग्री लेकर खड़ा है।
नौकरी का कहीं पता नहीं,
भविष्य अंधकार में पड़ा है।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
भाई को भाई से लड़वाया,
नफरत का ये बीज उगाया।
संविधान अब खतरे में है,
लोकतंत्र का गला दबाया।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा?
अन्नदाता सड़कों पर बैठा,
हक अपना वो मांग रहा।
लाठी और आंसू गैस मिली,
किसान बेचारा जाग रहा।
कहो नरेंद्र मज़ा आ रहा? #विंदा वन धाम 🌹🙏🙏