Doman Sahu
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Kabir saheb ji ki jay ho #kabir
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00:30
Sant rampal ji maharaj #kabir
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00:28
Sant rampal ji maharaj #kabir
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01:06
#tuta jo kabi tara #kabir
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#किसान_रत्न_सम्मान संकटग्रस्त किसानों के रक्षक: संत रामपाल जी महाराज। किसानों ने अपनी जान बचाने वाले इस महापुरुष को 'किसान मसीहा' और 'मानवता रक्षक' 'किसान रत्न' की उपाधियों से सम्मानित कर अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त की है। धन्य है वह महापुरुष जो दीन-दुखियों का सहारा बना! Sant Rampal Ji Maharaj #kabir
kabir - किसानों को बचाया करोड़ों के मोटर पाइप देकर। डूबते वजह से उनको इसी गांव डाया, हिसार में भारतीय किसान यूनियन (अ) द्वारा  किसान रत्न सम्मान दिया गया।   Ranಡ   a किसानों को बचाया करोड़ों के मोटर पाइप देकर। डूबते वजह से उनको इसी गांव डाया, हिसार में भारतीय किसान यूनियन (अ) द्वारा  किसान रत्न सम्मान दिया गया।   Ranಡ   a - ShareChat
#किसान_रत्न_सम्मान किसानों के जीवन में छाई हताशा को दूर कर उन्हें नवजीवन प्रदान करने वाले संत रामपाल जी महाराज को किसान समुदाय ने 'मानवता रक्षक', 'किसान रत्न' एवं 'धनाना रत्न' के गौरवपूर्ण सम्मानों से अलंकृत किया है। यह सम्मान उनके प्रति जन-जन के अटूट विश्वास का प्रतीक है। Sant Rampal Ji Maharaj #kabir
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00:51
#आयाहै_आयाहै_केशोबंजारा कबीर परमात्मा ने सन 1513 में अजब लीला की थी। एक गरीब जुलाहे की भूमिका करते हुए 18 लाख साधुओं को तीन दिन तक मोहन भंडारा कराया था। आज वही कबीर परमात्मा संत रामपाल जी महाराज जी के रूप में आये हैं और पूरे देश के गरीब असहाय परिवारों को मुफ्त राशन और सुदामा का महल बनाकर दे रहे हैं। 2Days Left Divya Dharma Yagya #kabir
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00:51
#सन1513_का_दिव्य_काशीभंडारा एक शेखतकी नाम के मुस्लिम पीर ने झूठी चिट्ठी लिखकर 18 लाख साधु संतों को आंमत्रण भिजवा दिया कि इस दिन कबीर सेठ भंडारा कराएंगे। परमेश्वर कबीर बंदीछोड़ जी ने सतलोक जाकर केशव बंजारा(व्यापारी) रुप बनाया फिर वहीं के हंसात्माओं(मनुष्यों) को बैल बनाकर खाने पीने का समान लादकर लाए और अद्भुत भंडारा कराया था। 3Days Left Divya Dharma Yagya #kabir
kabir - कबीर   पउमात्मा की लीला: काशी का f asI केशव बंजारा के रूप में परमेश्वर कबीर साहिब जी ने काशी में एक अद्भुत भंडारा साधु संतों और जनसमुदाय ने तीन दिन तक दिव्य आयोजित किया। १८ लाख बिना पकाए ही मिठाई लड्डू जलेबी व अन्य पकवानों के पकवानों का स्वाद चखा अंबार लग रहे थे। चावल खीर और हलवे के कड़ाहे कभी खाली नहीं हुए, और सबने तृप्त होकर परमात्मा का गुणगान किया। यह के खजाने सा असीमित कुबेर जहाँ भोजन और दक्षिणा निरंतर बँटती रही| SR [, Sant Rampal Ji YOUTUBE Free Book : Maharaj CHANNEL 7496801825 @SaintRampalJiMaharaj @ SPIRITUAL LEADER  SANT RAMPAL JI X @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD ORG @09 SAINT PAMPAL JI MAHARA] कबीर   पउमात्मा की लीला: काशी का f asI केशव बंजारा के रूप में परमेश्वर कबीर साहिब जी ने काशी में एक अद्भुत भंडारा साधु संतों और जनसमुदाय ने तीन दिन तक दिव्य आयोजित किया। १८ लाख बिना पकाए ही मिठाई लड्डू जलेबी व अन्य पकवानों के पकवानों का स्वाद चखा अंबार लग रहे थे। चावल खीर और हलवे के कड़ाहे कभी खाली नहीं हुए, और सबने तृप्त होकर परमात्मा का गुणगान किया। यह के खजाने सा असीमित कुबेर जहाँ भोजन और दक्षिणा निरंतर बँटती रही| SR [, Sant Rampal Ji YOUTUBE Free Book : Maharaj CHANNEL 7496801825 @SaintRampalJiMaharaj @ SPIRITUAL LEADER  SANT RAMPAL JI X @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD ORG @09 SAINT PAMPAL JI MAHARA] - ShareChat
#गीताजी_का_ज्ञान_किसने_बोला गीता ज्ञान श्री कृष्ण ने नहीं कहा:- जब कुरुक्षेत्र के मैदान में पवित्र गीता जी का ज्ञान सुनाते समय अध्याय 11 श्लोक 32 में पवित्र गीता बोलने वाला प्रभु कह रहा है कि ‘अर्जुन मैं बढ़ा हुआ काल हूँ। अब सर्व लोकों को खाने के लिए प्रकट हुआ हूँ।‘ जरा सोचें कि श्री कृष्ण जी तो पहले से ही श्री अर्जुन जी के साथ थे। यदि पवित्र गीता जी के ज्ञान को श्री कृष्ण जी बोल रहे होते तो यह नहीं कहते कि अब प्रवृत्त हुआ हूँ। - जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज Sant RampalJi YT Channel #kabir
kabir - 0 का ज्ञान किशन बोला काल भगवान जो इक्कीस ब्रहाण्ड का प्रमु अध्याय ११ का श्लोक ३२ है॰ उसने प्रतिज्ञा की है कि मैं स्थूल शरीर में व्यक्त(मानव सदृश अपने वास्तविक) रूप में सबक सामने नहीं आऊँगा| उसी ने झाल॰ भरिमि लोझक्षयकृत प्वद , लोझान समाहतुम ३६ प्रवृतः  सूक्ष्म शरीर बना कर प्रेत की तरह श्री ऋते, अपि त्वाम न भविष्यत्ति सर्वैे य अवस्यिता , प्रत्यनीकपु पौधान] १२२१ ] कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके पवित्र যীনা তী কা গান নী সচীবনা কা সাং) (भगवान उवाचं) लिए भी க ஈg 9= கபரக अटकल बाजी में कसर नहीं छोड़ी | अनवादः (लोकक्षयकृत ) लोको का नाश करने  (प्रवृद्ध ) वढा हुआ (कालः ) काल (अस्मि ) हू।  নানা तत्वदर्शी Gloldor? (इह ) इस समय ( लोकान ) इन लोको को शत शमपाल जो महाशज (समाहर्तुम ) नष्ट करने के लिये ( प्रवृत्तः ) प्रकट हुआ हूॅ इसलिये (ये) जो (प्रत्यनीकेषु) प्रतिपक्षियों की सेना मे ( अवस्थिताः ) स्थित ( योधाः ) योद्धा लोग हेः (ते) वे (सवे ) सव (त्वाम) संत रामपाल जी महाराज जी से तेरे ( ऋते ) विना (अपि) भी (न ) नही  व निःशुल्क निःशुल्क नामदीक्षा ` o 0 का ज्ञान किशन बोला काल भगवान जो इक्कीस ब्रहाण्ड का प्रमु अध्याय ११ का श्लोक ३२ है॰ उसने प्रतिज्ञा की है कि मैं स्थूल शरीर में व्यक्त(मानव सदृश अपने वास्तविक) रूप में सबक सामने नहीं आऊँगा| उसी ने झाल॰ भरिमि लोझक्षयकृत प्वद , लोझान समाहतुम ३६ प्रवृतः  सूक्ष्म शरीर बना कर प्रेत की तरह श्री ऋते, अपि त्वाम न भविष्यत्ति सर्वैे य अवस्यिता , प्रत्यनीकपु पौधान] १२२१ ] कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके पवित्र যীনা তী কা গান নী সচীবনা কা সাং) (भगवान उवाचं) लिए भी க ஈg 9= கபரக अटकल बाजी में कसर नहीं छोड़ी | अनवादः (लोकक्षयकृत ) लोको का नाश करने  (प्रवृद्ध ) वढा हुआ (कालः ) काल (अस्मि ) हू।  নানা तत्वदर्शी Gloldor? (इह ) इस समय ( लोकान ) इन लोको को शत शमपाल जो महाशज (समाहर्तुम ) नष्ट करने के लिये ( प्रवृत्तः ) प्रकट हुआ हूॅ इसलिये (ये) जो (प्रत्यनीकेषु) प्रतिपक्षियों की सेना मे ( अवस्थिताः ) स्थित ( योधाः ) योद्धा लोग हेः (ते) वे (सवे ) सव (त्वाम) संत रामपाल जी महाराज जी से तेरे ( ऋते ) विना (अपि) भी (न ) नही  व निःशुल्क निःशुल्क नामदीक्षा ` o - ShareChat