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AMIT YADAV

शेयरचैट गलै मजा आ गया

#RadhaSoami_Exposed राधास्वामी पंथ शहर आगरा पन्नी गली निवासी श्री शिव दयाल सिंह जी से चला है। राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक श्री शिव दयाल जी का कोई गुरु जी नहीं था। प्रमाण :- पुस्तक ’’जीवन चरित्र स्वामी जी महाराज’’ पृष्ठ 28 श्री शिव दयाल सिंह जी ने 17 वर्ष तक कोठे में कोठा अर्थात् बन्द स्थान पर बैठ कर हठ योग किया। जो किसी भी संत की साधना से मेल नहीं खाता। सन् 1856 में बाबा जयमल सिंह जी ने श्री शिवदयाल जी से उपदेश (नाम प्राप्त) किया। इससे सिद्ध यह हुआ कि जिस समय बाबा जयमल सिंह जी को श्री शिवदयाल सिंह जी (राधास्वामी) ने नाम दान किया। उस समय तक तो श्री शिवदयाल जी साधक थे। पूरे संत नहीं हुए थे, अधूरे थे। अवश्य देखिए साधना चैनल पर शाम 7:30 बजे #🙏🏼प्रार्थना #🙏वाहेगुरु #🌦हैप्पी सावन #🎆 त्यौहार #🕺अक्षय कुमार
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🙏🏼प्रार्थना

🙏🏼प्रार्थना - | राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक श्री शिवदयाल जीभूत योनि को प्राप्त हुए । क्योंकि उनकी साधना शास्त्रविरुद्धथी FREE ao पुस्तक - जीवन चरित्र स्वामी । जी महाराज में प्रमाण है कि वह अपनी शिष्या बुक्की में प्रवेश करके आदेश दिया करते थे , और हुक्का भी पीते थे । ( ७१ ) अब बुक्कीनी का कि जो शिवानी की ओटी बहिनधी , थोड़ा सा हाल जिल्ला आता है । यह शिवाणी से अरे बाद स्वामी महाराज केशलों में आई थी । अब इन्होंने कुछ दिन सतसंग किया और वनस्वामी महाराज केमुनेर । धन में मगध में की अशी थी कि अब स्वामीजी महाराज वक्षन या 3rd पोधियों का करते , तब इनकी आंखे सुख अंगारा सी हो जाती थी और अम् िउरावर टपकते राहते थे वहुत देर तक यानी पंटों वनों का । ना बना रहता था और फिर अपस्यामीजी महाराज कथा में फुर्सत कर हा पीते थे या अभ्यास । । । । । अवश्य पढ़ें पवित्र पुस्तक ' ज्ञान गंगा , जिसे निःशुल्क प्राप्त करें । अपना नाम , पूरा पता , मोबाइल नंबर हमें Whatsapp करें + 917496801825 जबकि हकीकत ये है कि सतगुरु पुरूष कबीर हैं , चारों युग प्रमाण झूठे गुरु मर गए हो गए भूत मसान । ON SPIRITUAL LEADER SAINT RAMPAL JI @ SAINTRAMPALJIM SANT RAMPAL JI A MAHARAJ है sUPREMEGOD . ORG - ShareChat
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2 दिन पहला
#RadhaSoami_Exposed परमात्मा साकार है आैर उनका नाम कबीर है जाे कि सतलाेक में विराजमान है। लेकिन राधास्वामी पंथ वाले अंधकार में जी रहे है क्याेकि राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक काे पूर्ण ज्ञान नहीं है क्याेंकि सारवचन वार्तिक पृष्ठ 8 वचन 12 में लिखा है कि आत्माए सतलाेक में सत्पुरुष ( परमात्मा) का दर्शन करती है ताे साेचिये फिर परमात्मा निराकार कैसे हुये? लेकिन ये पंथ वाले कहते है परमात्मा निराकार है जाे कि अज्ञान है देखे साधना चैनल शाम 7:30 से 8:3 तक #🙏🏼प्रार्थना #📺 TV सीरीयल और नाटक #राधाकृष्ण सीरीयल #हरियाणवी व्हाट्सएप्प स्टिकर्स
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🙏🏼प्रार्थना

🙏🏼प्रार्थना - राधास्वामी पंथ के प्रवर्तक श्री शिवढ्याल जी भूत योनि को प्राप्त हुए । क्योंकि उनकी साधना | शास्त्रविरूद्ध थी । पुस्तक - जीवन चणि स्वामी जी महाराज में प्रमाण है कि वह अपनी शिष्या बुक्की जी में प्रवेश करके आदेश दिया करते थे , और हुक्का भी पीते थे । । का रस लेते हुए या कथा कहने को बैठते थे , तो रहती थी । क़रीब डेढ़ महीने के यह हाल रहा । सब । बुक्कीजी महाराज के चरनों का अंगूठा मुंह में रखे को ख़ौफ़ हुआ कि शायद इनकी देह छूट जावे । हुए घंटों चरनामृत का रस लेती रहती थीं । और तब स्वामीजी महाराज ने इनको दर्शन दिये और जब कोई मत्था टेकने के वास्ते हटाना चाहता तो फ़रमाया कि जिस तरह तुमसेवा पेश्तर किया करती वे चरन नहीं छोड़ना चाहती थीं । तब मत्था टेकने ! थी , उसी तरह से करो । और फिर उसी रोज़ से वाले से कह दिया जाता था कि तुम दूसरे चरन पर बुक्कीजीभोगभी तैयार करती थीं और मेरे पन्नीगली मत्था टेक लो और उस प्यासी को मत हटाओ । । के मकान पर पहिलेदस्तूर के माफ़िकपनंग बिछाती और वह बयान किया करती थीं कि मुझे इसमें ! और हुम्का भरती थीं । वह पलंग अभी तक बिछ ऐसा रस आता है कि जैसे कोई दूध पीता है । इनके रहता है । गुरज़ कि जिस तरह से कि पेश्तर सेवा भजन का यह हाल था कि आठ घंटे नौ घंटे रोज़ किया करती थीं , उसी तरह से कुल काम करने लगीं भजन किया करती थीं । इन को स्वामीजी महाराज ! । और स्वामीजी महाराज उनको ध्यान के समय में के दर्शनों का पूरा आधार हो गया था और सुरत भी प्रगट दर्शन देते थे और कुल सेवा उसी तरह क़बूल ऊँचे देश में पहुँचती थी । जब स्वामीजी महाराज फ़रमाते थे , जैसा कि अंतद्धन होने के पेश्तर करते अंतर्धान हुए , तब बुक्कीजी की यह कैफ़ियत हुई ! थे । बुक्कीजी को महाराज उनके अख़ीर दम तक कि दिन रात बेहोश पड़ी रहती थीं और दो दो दिन प्रगट रहे , यहाँ तक कि जिस किसी को जब कोई हाजात जरूरी ' को भी रफ़ा करने नहीं जाती थीं । बात स्वामीजी महाराज से अर्ज करनी होती थी तो और सुरत स्वामीजी महाराज के चरणों में लगी ; वे बुक्कीजी के ज़रिये से दरियाफ़्त कर लिया करते . - . . - . . - . . - . - . . - . . - . - . . - . . - . . . - ! \ थे , यानी बुक्किजी अभ्यास के समय स्वामीजी 4 * । अधिक जानकारी के लिए पवित्र पुस्तक ' ज्ञान गंगा ' निःशुल्क प्राप्त करें । | अपना नाम , पूरा पता , मोबाइल नंबर हमें Whatsapp करें + 91 7496801823 % SPIRITUAL LEADER । y @ SAINTRAMPALJIM SAINT RAMPAL JI SANT RAMPAL JI ASUPREMEGOD . ORG MAHARAJ - ShareChat
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3 दिन पहला
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