Vijay mane.
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मैत्री, मस्ती आणि शेअरचॅट 👌
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - चलते रहे कदम तो किनारा जरुर मिलेगा अन्धकार से लड़ते रहे तो सवेरा जरुर खिलेगा जब ठान लिया मंजिल पर जाना रास्ता जरुर मिलेगा ए राही न थक, चलता चल एक दिन वक्त जरूर बदलेगा হ্রুঞ্ছভ্ঙ্ঘান  चलते रहे कदम तो किनारा जरुर मिलेगा अन्धकार से लड़ते रहे तो सवेरा जरुर खिलेगा जब ठान लिया मंजिल पर जाना रास्ता जरुर मिलेगा ए राही न थक, चलता चल एक दिन वक्त जरूर बदलेगा হ্রুঞ্ছভ্ঙ্ঘান - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - प्रतिष्ठा म्हणजे एक भाकड ओझं.. డై कधी योग्यता नसताना मिळते तर कधी चूक  निघुन जाते.. नसताना @व "म्हणून " मिरवु नये आणि 3মনানা नसताना खचु नये..!! प्रतिष्ठा म्हणजे एक भाकड ओझं.. డై कधी योग्यता नसताना मिळते तर कधी चूक  निघुन जाते.. नसताना @व "म्हणून " मिरवु नये आणि 3মনানা नसताना खचु नये..!! - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - को देते हैं जो हम মুসবী वही हमें वापस मिलता है, দ্ি২ বাষ্ট নী মম্সান কী যা धोखा| !श्री स्वामी समर्थ ! को देते हैं जो हम মুসবী वही हमें वापस मिलता है, দ্ি২ বাষ্ট নী মম্সান কী যা धोखा| !श्री स्वामी समर्थ ! - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - 3TR :ಾ जाती भुलाई यादें.. ! तो हंस कर कोई ग़म ना छुपाता..!! Il राम राम | 3TR :ಾ जाती भुलाई यादें.. ! तो हंस कर कोई ग़म ना छुपाता..!! Il राम राम | - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - कभी हँसी की बारिश है तो कभी आँसुओं का समंदर ೯; ज़िन्दगी का हर एक पल किसी इम्तिहान का मंज़र है; कभी सपनों के फूल खिले हैं, तो कभी रेगिस्तान सी बंजर है; नहीं ऐ पर थकना मुसाफिर ये जिन्दगी अवसरों का समंदर है।। सुप्रभात कभी हँसी की बारिश है तो कभी आँसुओं का समंदर ೯; ज़िन्दगी का हर एक पल किसी इम्तिहान का मंज़र है; कभी सपनों के फूल खिले हैं, तो कभी रेगिस्तान सी बंजर है; नहीं ऐ पर थकना मुसाफिर ये जिन्दगी अवसरों का समंदर है।। सुप्रभात - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - आर्थिक स्थिति মতনুন ম্ী যা না ম্কী खुश रहने के लिए मानसिक स्थिति मजबूत होना बहुत जरुरी है। आर्थिक स्थिति মতনুন ম্ী যা না ম্কী खुश रहने के लिए मानसिक स्थिति मजबूत होना बहुत जरुरी है। - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - बात सच्ची गरीबी वह 'तेज़ाब' है, जिसमें खून के रिश्ते भी 'जल जाते' हैं और ' पैसा' वह ' चुंबक है॰ जो दुश्मनों को भी 'दोस्त बना लेता है। बात सच्ची गरीबी वह 'तेज़ाब' है, जिसमें खून के रिश्ते भी 'जल जाते' हैं और ' पैसा' वह ' चुंबक है॰ जो दुश्मनों को भी 'दोस्त बना लेता है। - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - अपनी जाति के सफल लोगों को ढूंढ़कर बधाई देने  वाले लोग সপনী আানি के गरीब लोगों को 869< सहायता क्यों नहीं करते? अपनी जाति के सफल लोगों को ढूंढ़कर बधाई देने  वाले लोग সপনী আানি के गरीब लोगों को 869< सहायता क्यों नहीं करते? - ShareChat
#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - ஆஆஒஜி Vijay 7738543522 ஆஆஒஜி Vijay 7738543522 - ShareChat