Jai Ganpati Bappa
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#Happy chocolate day #🎶हैप्पी रोमांटिक स्टेटस #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🎵जितनी दफा देखूं तुझे🎶 #💓 मोहब्बत दिल से
Happy chocolate day - ShareChat
00:14
#💓 मोहब्बत दिल से #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🎶हैप्पी रोमांटिक स्टेटस #🎵जितनी दफा देखूं तुझे🎶 #Happy chocolate day
💓 मोहब्बत दिल से - ShareChat
00:20
#💓 मोहब्बत दिल से #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🐦Bird लवर #🌼 मेरा बगीचा 🌸
#🙏गुरु महिमा😇 #🥰Express Emotion #🙏कर्म क्या है❓ #👍 डर के आगे जीत👌 #❤️जीवन की सीख
🙏गुरु महिमा😇 - दपण सच को, सफ़र वदलाव को লিং  February २०२६ जयपुर राजस्थान खबरों के ஈக5 9358182958  कंचन बाई मेघवाल को मिले राष्ट्रीय सम्मान मधुमक्खी हमले में बच्चों की ढाल बनी कंचन बाई मेघवाल का त्याग राष्ट्रीय सम्मान का हकदार हे नीमच प्रदेश के नीमच जिले से मष्य सामने आई घटना   केवल 6 ٥٥ साहसिक कार्य   नही बल्कि   भारतीय समाज की आत्मा को झकझोर देने वाली प्रेरक गाथा हे। अनुसूचित जाति से आने वाली॰ एक गरीब परिवार की आंगनवाडी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल ने यह सिद्घ कर दिया कि साहस करुणा ओर कर्तव्य কিমী মপন্ননা যা মুনিধা ক সীচনাত पद नहीं होते। मधुमक्खियों के अचानक हुए भीषण हमले के समय आंगनवाड़ी केंद्र मे ಗತ್ಕೇ २० मासूम बच्चे भयभीत ओर असहाय थे। उस क्षण कंचन बाईनेन अपने परिवार की चिंता की॰ न अपनी जान की। एक मां की तरह उन्होंने चटाइयों और तिरपाल से बर्च्चों को ढक लिया और स्वयं उनके ऊपर ढाल बनकर खडी हो गई।  सेकड़ों डंक सहते हुए भी उनका संकल्प अडिग रहा- पहले बच्चे बाद में रमे। यह बलिदान इसलिए ओर भी बड़ा हो जाता हे क्योकि कंचन बाई उस वर्ग से आती हे जिसे जीवन भर संघर्ष और अभावों से जूझना पड़ता है। एक गरीब अनुसूचित जाति  परिवार की महिला होकर भी उन्होने यह नहीं सोचा कि॰ यदि उन्हें कुछ हो गया तो  उनके घर का क्या होगा। उन्होने उस पल केवल मानवता, मातृत्व ओर कर्तव्य को चुना। यही सच्चा नारी सशक्तिकरण हे-जो न नारों में हे न मंचों पर बल्कि ऐसे मोन बलिदानों में जीवित हे। कंचन बाई का यह त्याग हर्में इतिहास की अमर गाथा पन्नाधाय की दिलाता है। जैसे पन्नाधाय ने राजकुमार की रक्षा के लिए अपने पुत्र का याट बलिदान दिया थाः वैसे ही कंचन बाई ने अपने शरीर को ढाल बनाकर २० बच्चों के प्राणों की रक्षा की। यह आधुनिक भारत की पन्नाधाय हे-्जहाँ तलवार नहीं डंक हें महल नहीं, आंगनवाड़ी केंद्र हेः लेकिन त्याग और साहस उतना ही महान हे। आज यह प्रश्न पूरे देश के सामने खड़ा हे कि ऐसे परिवारों को हम किस दृष्टि से देखते हें। कंचन बाई मेघवाल और उनके परिवार को केवल प्रशंसा नहीं बल्कि देश का सबसे बड़ा सम्मान ओर पुरस्कार मिलना चाहिए क्योकि वे इसके वास्तविक हकदार हे। ऐसे लोग  नेतिक  ही राष्ट्र की रीढ़ होते हे॰ जिनके त्याग पर समाज सुरक्षित रहता हे। नीमच की यह आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अब केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि उस भारत की प्रतीक चुकी हे जहॉ एक गरीब अनुसूचित जाति की महिला अपने प्राणों की परवाह बन ক্িয बिना बर्च्चों के लिए पन्नाधाय बन जाती हे। उनका यह बलिदान सदैव स्मरणीय  रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाता रहेगा कि सच्चा राष्ट्र निर्माण पद से नर्ही त्याग से होता हे। दपण सच को, सफ़र वदलाव को লিং  February २०२६ जयपुर राजस्थान खबरों के ஈக5 9358182958  कंचन बाई मेघवाल को मिले राष्ट्रीय सम्मान मधुमक्खी हमले में बच्चों की ढाल बनी कंचन बाई मेघवाल का त्याग राष्ट्रीय सम्मान का हकदार हे नीमच प्रदेश के नीमच जिले से मष्य सामने आई घटना   केवल 6 ٥٥ साहसिक कार्य   नही बल्कि   भारतीय समाज की आत्मा को झकझोर देने वाली प्रेरक गाथा हे। अनुसूचित जाति से आने वाली॰ एक गरीब परिवार की आंगनवाडी कार्यकर्ता कंचन बाई मेघवाल ने यह सिद्घ कर दिया कि साहस करुणा ओर कर्तव्य কিমী মপন্ননা যা মুনিধা ক সীচনাত पद नहीं होते। मधुमक्खियों के अचानक हुए भीषण हमले के समय आंगनवाड़ी केंद्र मे ಗತ್ಕೇ २० मासूम बच्चे भयभीत ओर असहाय थे। उस क्षण कंचन बाईनेन अपने परिवार की चिंता की॰ न अपनी जान की। एक मां की तरह उन्होंने चटाइयों और तिरपाल से बर्च्चों को ढक लिया और स्वयं उनके ऊपर ढाल बनकर खडी हो गई।  सेकड़ों डंक सहते हुए भी उनका संकल्प अडिग रहा- पहले बच्चे बाद में रमे। यह बलिदान इसलिए ओर भी बड़ा हो जाता हे क्योकि कंचन बाई उस वर्ग से आती हे जिसे जीवन भर संघर्ष और अभावों से जूझना पड़ता है। एक गरीब अनुसूचित जाति  परिवार की महिला होकर भी उन्होने यह नहीं सोचा कि॰ यदि उन्हें कुछ हो गया तो  उनके घर का क्या होगा। उन्होने उस पल केवल मानवता, मातृत्व ओर कर्तव्य को चुना। यही सच्चा नारी सशक्तिकरण हे-जो न नारों में हे न मंचों पर बल्कि ऐसे मोन बलिदानों में जीवित हे। कंचन बाई का यह त्याग हर्में इतिहास की अमर गाथा पन्नाधाय की दिलाता है। जैसे पन्नाधाय ने राजकुमार की रक्षा के लिए अपने पुत्र का याट बलिदान दिया थाः वैसे ही कंचन बाई ने अपने शरीर को ढाल बनाकर २० बच्चों के प्राणों की रक्षा की। यह आधुनिक भारत की पन्नाधाय हे-्जहाँ तलवार नहीं डंक हें महल नहीं, आंगनवाड़ी केंद्र हेः लेकिन त्याग और साहस उतना ही महान हे। आज यह प्रश्न पूरे देश के सामने खड़ा हे कि ऐसे परिवारों को हम किस दृष्टि से देखते हें। कंचन बाई मेघवाल और उनके परिवार को केवल प्रशंसा नहीं बल्कि देश का सबसे बड़ा सम्मान ओर पुरस्कार मिलना चाहिए क्योकि वे इसके वास्तविक हकदार हे। ऐसे लोग  नेतिक  ही राष्ट्र की रीढ़ होते हे॰ जिनके त्याग पर समाज सुरक्षित रहता हे। नीमच की यह आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अब केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि उस भारत की प्रतीक चुकी हे जहॉ एक गरीब अनुसूचित जाति की महिला अपने प्राणों की परवाह बन ক্িয बिना बर्च्चों के लिए पन्नाधाय बन जाती हे। उनका यह बलिदान सदैव स्मरणीय  रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाता रहेगा कि सच्चा राष्ट्र निर्माण पद से नर्ही त्याग से होता हे। - ShareChat
#🎵जितनी दफा देखूं तुझे🎶 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🌞 Good Morning🌞 #ॐ नमः शिवाय
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#😍रोमांटिक गाने🎶 #💿पुराने गाने #🎵जितनी दफा देखूं तुझे🎶 #💓 मोहब्बत दिल से #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
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