Sib Sandesh
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मे आत्मा,शारीर नेही में driver, गाड़ी नेही
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🤲 दुआएं #🙏कर्म क्या है❓
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#🙏कर्म क्या है❓ #🤲 दुआएं #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏कर्म क्या है❓ - प्रातःमुरलीओम् शान्ति " अव्यक्त-बापदा दा" 01-02-26 रिवाइजः 1 ५ १ २ ०८ मधुबन एक राज्य, एक धर्म, लॉ एण्ड आर्डर की स्थापना के समय का परिवर्तन कर विश्व परिवर्तक बनो q वरदानः-परिवर्तन शक्ति द्वारा सर्व की के पात्र शुक्रिया  बनने वाले विघ्न जीत भव यदि आपका कोई अपकार करे तो आप एक सेकण्ड में अपकार को उपकार में परिवर्तित कर दो, कोई अपने संस्कार स्वभाव के रूप में परीक्षा बनकर सामने आये तो स्मृति से ऐसी आत्मा के प्रति भी रहमदिल के आप एक की श्रेष्ठ संस्कार स्वभाव धारण कर लो, कोई देहधारी दृष्टि से सामने आये तो उनकी दृष्टि को आत्मिक दृष्टि में परिवर्तित कर लो, ऐसे परिवर्तन करने की युक्ति आ जाए तो विघ्न जीत जायेंगे। फिर सम्पर्क में आने वाली सर्व आत्मायें आपका बन स्लोगनः अनुभवों का स्वरूप बन जाओ शुक्रिया मानेंगी। तो चेहरे से खुशनसीबी की झलक दिखाई देगी।ये एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा इशारे 3Tam सफलता सम्पन्न बनोःअनेक देश, अनेक भाषायें, अनेक रूपररंग होते भी सबके दिल में एकता दिखाई दे क्योंकि एक बाप के बच्चे हो। सब एक ही वृक्ष की डालियां एक की श्रीमत पर चलने वाले हो। भिन्नता में एकता दिखाना, बिगड़ी को बनाना, अनेकता में एकता लाना, ये सबसे बड़ी सेवा है। यही कमाल है और यही सफलता का आधार है। Created with Mi Notes प्रातःमुरलीओम् शान्ति " अव्यक्त-बापदा दा" 01-02-26 रिवाइजः 1 ५ १ २ ०८ मधुबन एक राज्य, एक धर्म, लॉ एण्ड आर्डर की स्थापना के समय का परिवर्तन कर विश्व परिवर्तक बनो q वरदानः-परिवर्तन शक्ति द्वारा सर्व की के पात्र शुक्रिया  बनने वाले विघ्न जीत भव यदि आपका कोई अपकार करे तो आप एक सेकण्ड में अपकार को उपकार में परिवर्तित कर दो, कोई अपने संस्कार स्वभाव के रूप में परीक्षा बनकर सामने आये तो स्मृति से ऐसी आत्मा के प्रति भी रहमदिल के आप एक की श्रेष्ठ संस्कार स्वभाव धारण कर लो, कोई देहधारी दृष्टि से सामने आये तो उनकी दृष्टि को आत्मिक दृष्टि में परिवर्तित कर लो, ऐसे परिवर्तन करने की युक्ति आ जाए तो विघ्न जीत जायेंगे। फिर सम्पर्क में आने वाली सर्व आत्मायें आपका बन स्लोगनः अनुभवों का स्वरूप बन जाओ शुक्रिया मानेंगी। तो चेहरे से खुशनसीबी की झलक दिखाई देगी।ये एकता और विश्वास की विशेषता द्वारा इशारे 3Tam सफलता सम्पन्न बनोःअनेक देश, अनेक भाषायें, अनेक रूपररंग होते भी सबके दिल में एकता दिखाई दे क्योंकि एक बाप के बच्चे हो। सब एक ही वृक्ष की डालियां एक की श्रीमत पर चलने वाले हो। भिन्नता में एकता दिखाना, बिगड़ी को बनाना, अनेकता में एकता लाना, ये सबसे बड़ी सेवा है। यही कमाल है और यही सफलता का आधार है। Created with Mi Notes - ShareChat
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🙏गुरु महिमा😇 - २५ ०१-२६  प्रातःमुरलीओम् शान्ति" अव्यक्त बापदादा" रिवाइजः ०२ ०४ ०8 मधुबनः इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ वरदानः-धर्म और कर्म दोनों का ठीक बैलेन्स रखने वाले दिव्य  बुद्धिवान भव वा श्रेष्ठ कर्म करते समय धर्म अर्थात् धारणा भी सम्पूर्ण हो तो धर्म और कर्म दोनों का बैलेन्स ठीक होने से प्रभाव बढ़ेगा। ऐसे नहीं जब कर्म समाप्त हो तब धारणा स्मृति में आये। बुद्धि में दोनों बातों बैलेन्स ठीक हो तब कहेंगे श्रेष्ठ वा दिव्य बुद्धिवान। नहीं तो কা बुद्धि, कर्म भी साधारण धारणायें भी साधारण होती हैं। साधारण तो साधारणता में समानता नहीं लानी है लेकिन श्रेष्ठता में समानता हो। जैसे कर्म श्रेष्ठ वैसे धारणा भी श्रेष्ठ हो स्लोगनः-अपने मन-बुद्धि को अनुभव की सीट पर सेट कर दो तो कभी अपसेट नहीं होंगे। अव्यक्त इशारे इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करोः- ज्ञान-स्वरुप मास्टर नॉलेजफुल, मास्टर सर्वशक्तिमान होने के बाद अगर कोई ऐसा कर्म जो युक्तियुक्त नहीं है, वह कर लेते हो तो इस कर्म का बन्धन अज्ञान काल के कर्मबन्धन से पदमगुणा ज्यादा है। इस कारण बन्धनयुक्त आत्मा स्वतन्त्र न होने कारण जो चाहे वह नहीं कर पाती इसलिए युक्तियुक्त कर्म द्वारा मुक्ति को प्राप्त करो। २५ ०१-२६  प्रातःमुरलीओम् शान्ति" अव्यक्त बापदादा" रिवाइजः ०२ ०४ ०8 मधुबनः इस वर्ष चारों ही सब्जेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बनो, लक्ष्य और लक्षण को समान बनाओ वरदानः-धर्म और कर्म दोनों का ठीक बैलेन्स रखने वाले दिव्य  बुद्धिवान भव वा श्रेष्ठ कर्म करते समय धर्म अर्थात् धारणा भी सम्पूर्ण हो तो धर्म और कर्म दोनों का बैलेन्स ठीक होने से प्रभाव बढ़ेगा। ऐसे नहीं जब कर्म समाप्त हो तब धारणा स्मृति में आये। बुद्धि में दोनों बातों बैलेन्स ठीक हो तब कहेंगे श्रेष्ठ वा दिव्य बुद्धिवान। नहीं तो কা बुद्धि, कर्म भी साधारण धारणायें भी साधारण होती हैं। साधारण तो साधारणता में समानता नहीं लानी है लेकिन श्रेष्ठता में समानता हो। जैसे कर्म श्रेष्ठ वैसे धारणा भी श्रेष्ठ हो स्लोगनः-अपने मन-बुद्धि को अनुभव की सीट पर सेट कर दो तो कभी अपसेट नहीं होंगे। अव्यक्त इशारे इस अव्यक्ति मास में बन्धनमुक्त रह जीवनमुक्त स्थिति का अनुभव करोः- ज्ञान-स्वरुप मास्टर नॉलेजफुल, मास्टर सर्वशक्तिमान होने के बाद अगर कोई ऐसा कर्म जो युक्तियुक्त नहीं है, वह कर लेते हो तो इस कर्म का बन्धन अज्ञान काल के कर्मबन्धन से पदमगुणा ज्यादा है। इस कारण बन्धनयुक्त आत्मा स्वतन्त्र न होने कारण जो चाहे वह नहीं कर पाती इसलिए युक्तियुक्त कर्म द्वारा मुक्ति को प्राप्त करो। - ShareChat
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