Sib Sandesh
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मे आत्मा,शारीर नेही में driver, गाड़ी नेही
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🤲 दुआएं #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓
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#🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🤲 दुआएं #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇
🙏कर्म क्या है❓ - प्रातःमुरलीओम् शान्ति' अव्यक्त बापदादा ' रिवाइजः 22-03-26` 07-04-09 মঙুনন रह चलन और चेहरे से मुक्ति देने वाले मुक्तिदाता बनो, ঊী ম্ুন कारण शब्द सेवा के उमंग उत्साह के साथ सदा बेहद की वैराग्य वृत्ति में रहोवरदानः कर्म करते हुए कर्म के बन्धन से मुक्त रहने वाले सहजयोगी स्वतः योगी भव जो महावीर बच्चे हैं उन्हें साकारी दुनिया की कोई भी आकर्षण अपनी आकर्षित नहीं कर सकती| वे स्वयं को एक सेकण्ड में न्यारा और तरफ हैं। डायरेक्शन मिलते ही शरीर से परे अशरीरी , बाप का प्यारा बना सकते आत्म-अभिमानी , बन्धन-मुक्त, योगयुक्त स्थिति का अनुभव करने वाले ही सहजयोगी , स्वतः योगी , सदा योगी , कर्मयोगी और श्रेष्ठ योगी हैं । वह जब चाहें , जितना समय चाहें अपने संकल्प , श्वांस को एक प्राणेश्वर बाप की याद में स्थित कर सकते हैं। स्लोगनः एकरस स्थिति के श्रेष्ठ आसन पर विराजमान रहना - यही तपस्वी आत्मा की निशानी है। अव्यक्त इशारे- "निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो" :-यह निश्चय व स्मृति और समर्थी रखो कि अनेक बार बाप के बने हैं व मायाजीत बने हैं , तो अब बनना क्या मुश्किल है! क्या यह स्मृति स्पष्ट नहीं है कि मुझ श्रेष्ठ आत्मा ने विजयी बनने का पार्ट अनेक बार स्पष्ट नहीं है तो इससे सिद्ध है कि बाप के आगे बजाया है? अगर স্সূনি स्वयं को स्पष्ट नहीं किया है। प्रातःमुरलीओम् शान्ति' अव्यक्त बापदादा ' रिवाइजः 22-03-26` 07-04-09 মঙুনন रह चलन और चेहरे से मुक्ति देने वाले मुक्तिदाता बनो, ঊী ম্ুন कारण शब्द सेवा के उमंग उत्साह के साथ सदा बेहद की वैराग्य वृत्ति में रहोवरदानः कर्म करते हुए कर्म के बन्धन से मुक्त रहने वाले सहजयोगी स्वतः योगी भव जो महावीर बच्चे हैं उन्हें साकारी दुनिया की कोई भी आकर्षण अपनी आकर्षित नहीं कर सकती| वे स्वयं को एक सेकण्ड में न्यारा और तरफ हैं। डायरेक्शन मिलते ही शरीर से परे अशरीरी , बाप का प्यारा बना सकते आत्म-अभिमानी , बन्धन-मुक्त, योगयुक्त स्थिति का अनुभव करने वाले ही सहजयोगी , स्वतः योगी , सदा योगी , कर्मयोगी और श्रेष्ठ योगी हैं । वह जब चाहें , जितना समय चाहें अपने संकल्प , श्वांस को एक प्राणेश्वर बाप की याद में स्थित कर सकते हैं। स्लोगनः एकरस स्थिति के श्रेष्ठ आसन पर विराजमान रहना - यही तपस्वी आत्मा की निशानी है। अव्यक्त इशारे- "निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और निश्चिंत रहो" :-यह निश्चय व स्मृति और समर्थी रखो कि अनेक बार बाप के बने हैं व मायाजीत बने हैं , तो अब बनना क्या मुश्किल है! क्या यह स्मृति स्पष्ट नहीं है कि मुझ श्रेष्ठ आत्मा ने विजयी बनने का पार्ट अनेक बार स्पष्ट नहीं है तो इससे सिद्ध है कि बाप के आगे बजाया है? अगर স্সূনি स्वयं को स्पष्ट नहीं किया है। - ShareChat
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🙏गुरु महिमा😇 - प्रातःमुरलीओम् शान्ति अव्यक्त बापदादा ' रिवाइजः 15-03-26 २4-03-09 मधुबन Fag9 खजानों को स्वयं में समाकर कार्य में लगाओ, बापदादा द्वारा अनुभव की अथॉरिटी बनो वरदानः मास्टर त्रिकालदर्शी बन हर कर्म युक्तियुक्त करने वाले कर्मबन्धन मुक्त भव जो भी संकल्प , बोल वा कर्म करते हो  वह मास्टर त्रिकालदर्शी बनकर करो तो कोई भी कर्म व्यर्थचा अनर्थ नहीं हो सकता। त्रिकालदर्शी अर्थात् साक्षीपन की स्थिति में स्थित होकर , कर्मों की गुह्य गति को जान-कर इन कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म कराओ तो कभी भी कर्म के बन्धन में नहीं बंधेंगे। हर कर्म करते कर्मबन्धन मुक्त , कर्मातीत स्थिति का अनुभव करते रहेंगे। स्लोगनः जिनके पास हद के इच्छाओं की अविद्या है वही महान सम्पत्तिवान हैं।  इशारे- " निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और अव्यक्त निश्चिंत रहो":-जैसे पहरे वाला चौकीदार अगर शस्त्रधारी होता है और उसको निश्चय है कि मेरा शस्त्र दुश्मन को भगाने वाला है, हार खिलाने वाला है तो वह कितना निर्भय हो करके चलता रहता है। तो आप के पास भी सर्व शक्तियों रूपी शस्त्र सदा साथ हैं, सिर्फ आवाह्न करो अर्थात् मालिक बन आर्डर करो तो सफलता सदा हुई पड़ी है। प्रातःमुरलीओम् शान्ति अव्यक्त बापदादा ' रिवाइजः 15-03-26 २4-03-09 मधुबन Fag9 खजानों को स्वयं में समाकर कार्य में लगाओ, बापदादा द्वारा अनुभव की अथॉरिटी बनो वरदानः मास्टर त्रिकालदर्शी बन हर कर्म युक्तियुक्त करने वाले कर्मबन्धन मुक्त भव जो भी संकल्प , बोल वा कर्म करते हो  वह मास्टर त्रिकालदर्शी बनकर करो तो कोई भी कर्म व्यर्थचा अनर्थ नहीं हो सकता। त्रिकालदर्शी अर्थात् साक्षीपन की स्थिति में स्थित होकर , कर्मों की गुह्य गति को जान-कर इन कर्मेन्द्रियों द्वारा कर्म कराओ तो कभी भी कर्म के बन्धन में नहीं बंधेंगे। हर कर्म करते कर्मबन्धन मुक्त , कर्मातीत स्थिति का अनुभव करते रहेंगे। स्लोगनः जिनके पास हद के इच्छाओं की अविद्या है वही महान सम्पत्तिवान हैं।  इशारे- " निश्चय के फाउण्डेशन को मजबूत कर सदा निर्भय और अव्यक्त निश्चिंत रहो":-जैसे पहरे वाला चौकीदार अगर शस्त्रधारी होता है और उसको निश्चय है कि मेरा शस्त्र दुश्मन को भगाने वाला है, हार खिलाने वाला है तो वह कितना निर्भय हो करके चलता रहता है। तो आप के पास भी सर्व शक्तियों रूपी शस्त्र सदा साथ हैं, सिर्फ आवाह्न करो अर्थात् मालिक बन आर्डर करो तो सफलता सदा हुई पड़ी है। - ShareChat
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