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#BREAKING NEWS #indoriatimes #news #🔴 क्राइम अपडेट #samachar #editorial #Nagar Parishad #kotputli
BREAKING NEWS - Editorial सुशासन की पहचान कोटपूतली - बहरोड़़ की यूडी टैक्स वसूली की नगर परिषद स्थिति सिर्फ आंकड़ों की नाकामी नहीं, बल्कि प्रशासनिक कमजोरी ক লঃয का खुला प्रमाण है। वित्तीय वर्ष २०२५-२६ में 3 करोड़ रुपये के सामने अब तक केवल १.११ करोड़ रुपये की वसूली यह सा़फ दर्शाती है कि परिषद न तो अपनी प्राथमिकताएं तय कर पाई और न ही इच्छाशक्ति दिखा सकी । के आंकड़े कोटपूतली- यूडी टैक्स নমুলী बहरोड़ नगर परिषद की प्रशासनिक सच्चाई उजागर कर रहे हैं। 3 करोड़ के लक्ष्य के सामने सिर्फ १ ९१ करोड़ की वसूली और १० बड़ी संपत्तियों पर १.३० करोड़ का बकाया यह साबित करता है कि समस्या डॉ. राकेश থIম संसाधनों की नहीं , इच्छाशक्ति की है। छोटे करदाता समय पर भुगतान कर रहे हैं, लेकिन करोडों दबाए बैठे बडे बकायेदार अब तक कार्रवाई से बाहर हैं बार-बार नोटिस और अंतिम अवसर की चेतावनियां तब सवालों के घेरे में आती हैं जब सीजिंग और जैसी ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती | कुर्की  सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि सिर्फ १० बड़ी संपत्तियों पर १.३० करोड़ रुपये का बकाया लंबे समय से अटका हुआ है। यह लाजमी है कि॰ छोटे दुकानदार और सवाल TMN उठना जव गृहस्वामी समय पर टैक्स जमा कर रहे हैँ, तब करोड़ों दबाए बैठे लोग अब तक कार्रवाई से बाहर क्यों हैं ? नगर परिषद यह तर्क दे सकती है कि नोटिस दिए गए, मौके पर टीमें भेजी गईं, अंतिम अवसर दिया जा रहा है। लेकिन प्रशासन का काम सिर्फ चेतावनी देना नहीं , कार्रवाई करना होता है। अगर बार- बार नोटिस के बावजूद बकाया जमा नहीं हो रहा, तो इसका अर्थ सा़फ है-या तो प्रशासन दबाव में है,या फिर बड़े बकायेदारों को संरक्षण प्राप्त है। यह स्थिति शहर के विकास को सीधे प्रभावित करती है। सड़कें , नालियां, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और स्वच्छता जैसे मूलभूत कार्य यूडी  टैक्स की राशि पर ही निर्भर होते हैं । जब वही राशि वसूल नहीं होगी, तो विकास कार्य ठप होना तय है और इसकी कीमत आम नागरिक चुकाता है अध्यक्ष और आयुक्त की भूमिका ऐसे समय में नगर परिषद निर्णायक होनी चाहिए थी। नेतृत्व का अर्थ है कठिन फैसले लेना, न कि फाइलों को तारीखों के बोझ तले दबाना १० बडी संपत्तियों पर होना इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक नियंत्रण सख्त कार्रवाई कमजोर पडा है। गौरतलब बात यह है कि आगामी २८ जनवरी की समय-्सीमा तय की गई है। यह तारीख केवल कैलेंडर पर दर्ज एक और दिन बनकर रह जाएगी या शहर की आवश्यकता के अनुरूप अपेक्षाओं पर और कानूनी खरी उतरेगी है।यदि इसके बाद भी सीजिंग, कुर्की कार्रवाई नहीं होती, तो यह सा़फ है कि नगर परिषद बड़े बकायेदारों के सामने नतमस्तक है यह तो स्पष्ट है कि कर व्यवस्था का सम्मान डर से नहीं, निष्पक्ष कार्रवाई से होता है। जब तक बड़े और छोटे करदाताओं के लिए एक ही मापदंड नहीं होगा, तब तक यह व्यवस्था भरोसे के लायक नहीं बन अब निर्णय नगर परिषद के हाथ में है या तो प्रशासन मजबूत सकती बने, या फिर बडे बकायेदारों की कमजोरी का पर्याय बनकर रह जाए ही सुशासन की पहचान है। निष्पक्ष कर वसूली Editorial सुशासन की पहचान कोटपूतली - बहरोड़़ की यूडी टैक्स वसूली की नगर परिषद स्थिति सिर्फ आंकड़ों की नाकामी नहीं, बल्कि प्रशासनिक कमजोरी ক লঃয का खुला प्रमाण है। वित्तीय वर्ष २०२५-२६ में 3 करोड़ रुपये के सामने अब तक केवल १.११ करोड़ रुपये की वसूली यह सा़फ दर्शाती है कि परिषद न तो अपनी प्राथमिकताएं तय कर पाई और न ही इच्छाशक्ति दिखा सकी । के आंकड़े कोटपूतली- यूडी टैक्स নমুলী बहरोड़ नगर परिषद की प्रशासनिक सच्चाई उजागर कर रहे हैं। 3 करोड़ के लक्ष्य के सामने सिर्फ १ ९१ करोड़ की वसूली और १० बड़ी संपत्तियों पर १.३० करोड़ का बकाया यह साबित करता है कि समस्या डॉ. राकेश থIম संसाधनों की नहीं , इच्छाशक्ति की है। छोटे करदाता समय पर भुगतान कर रहे हैं, लेकिन करोडों दबाए बैठे बडे बकायेदार अब तक कार्रवाई से बाहर हैं बार-बार नोटिस और अंतिम अवसर की चेतावनियां तब सवालों के घेरे में आती हैं जब सीजिंग और जैसी ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती | कुर्की  सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि सिर्फ १० बड़ी संपत्तियों पर १.३० करोड़ रुपये का बकाया लंबे समय से अटका हुआ है। यह लाजमी है कि॰ छोटे दुकानदार और सवाल TMN उठना जव गृहस्वामी समय पर टैक्स जमा कर रहे हैँ, तब करोड़ों दबाए बैठे लोग अब तक कार्रवाई से बाहर क्यों हैं ? नगर परिषद यह तर्क दे सकती है कि नोटिस दिए गए, मौके पर टीमें भेजी गईं, अंतिम अवसर दिया जा रहा है। लेकिन प्रशासन का काम सिर्फ चेतावनी देना नहीं , कार्रवाई करना होता है। अगर बार- बार नोटिस के बावजूद बकाया जमा नहीं हो रहा, तो इसका अर्थ सा़फ है-या तो प्रशासन दबाव में है,या फिर बड़े बकायेदारों को संरक्षण प्राप्त है। यह स्थिति शहर के विकास को सीधे प्रभावित करती है। सड़कें , नालियां, स्ट्रीट लाइट, पेयजल और स्वच्छता जैसे मूलभूत कार्य यूडी  टैक्स की राशि पर ही निर्भर होते हैं । जब वही राशि वसूल नहीं होगी, तो विकास कार्य ठप होना तय है और इसकी कीमत आम नागरिक चुकाता है अध्यक्ष और आयुक्त की भूमिका ऐसे समय में नगर परिषद निर्णायक होनी चाहिए थी। नेतृत्व का अर्थ है कठिन फैसले लेना, न कि फाइलों को तारीखों के बोझ तले दबाना १० बडी संपत्तियों पर होना इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक नियंत्रण सख्त कार्रवाई कमजोर पडा है। गौरतलब बात यह है कि आगामी २८ जनवरी की समय-्सीमा तय की गई है। यह तारीख केवल कैलेंडर पर दर्ज एक और दिन बनकर रह जाएगी या शहर की आवश्यकता के अनुरूप अपेक्षाओं पर और कानूनी खरी उतरेगी है।यदि इसके बाद भी सीजिंग, कुर्की कार्रवाई नहीं होती, तो यह सा़फ है कि नगर परिषद बड़े बकायेदारों के सामने नतमस्तक है यह तो स्पष्ट है कि कर व्यवस्था का सम्मान डर से नहीं, निष्पक्ष कार्रवाई से होता है। जब तक बड़े और छोटे करदाताओं के लिए एक ही मापदंड नहीं होगा, तब तक यह व्यवस्था भरोसे के लायक नहीं बन अब निर्णय नगर परिषद के हाथ में है या तो प्रशासन मजबूत सकती बने, या फिर बडे बकायेदारों की कमजोरी का पर्याय बनकर रह जाए ही सुशासन की पहचान है। निष्पक्ष कर वसूली - ShareChat
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samachar - Editoriall बेटी बचाओ ' केवल नारा नहीं छिटपुट  भ्रूण लिंग जांच कोई अपराध नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित तंत्र है कोटपूतली - बहरोड़़ जैसे नवगठित जिले में भ्रूण लिंग जांच गिरोह का बेखौफ पनपना प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर రాని 3 पीसीपीएनडीटी ೯| কনো संवेदनशील कानून का प्रभावी क्रियान्वयन केवल अधिसूचनाओं और समितियों तक নী  হমন্ধা   মীখা সীসিন रह   जाए लाभ अपराधी नेटवर्क को मिलता हैजो यहां स्पष्ट रूप से दिख रहा है। समस्या की जड़ निगरानी, समन्वय और डॉ. राकेश शर्मा त्वरित कार्रवाई में आई शिथिलता है। नए जिला व्यवस्था जिले के गठन के बाद भी लंबे समय तक पुरानी के तहत संचालन, जिम्मेदारियों की अस्पष्टता और संसाधनों की कमी ने प्रवर्तन को कमजोर किया परिणामस्वरूप  संगठित गिरोह तकनीक, डिजिटल भुगतान और अंतर  राज्यीय नेटवर्क आगे निकलते रहे। कानून से का लाभ उठाकर कोटपूतली बहरोड़ जिले में भ्रूण लिंग जांच गिरोह का बेधड़क फलना- फूलना केवल अपराध की खबर नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का खुला प्रमाण है। सवाल सीधा है क्या कानून केवल कागजों में लागू होता है ? पीसीपीएनडीटी जैसा कठोर कानून यदि जमीन पर निष्क्रिय रहे, तो अपराधियों का हौसला बढ़ना स्वाभाविक है। इस ढिलाई ने भ्रूण हत्या के सौदागरों को सा़फ संदेश दे दिया कि यहां डरने की जरूरत नहीं | यही कारण है कि गिरोह संगठित रूप से॰ तकनीक और डिजिटल लेन- देन के सहारे   प्रशासन को में धूल  आंखों झोंकते रहे। चूक नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध के यह कोई मामूली प्रति असंवेदनशीलता है। बेटी के जन्म से पहले ही उसका सौदा होना सभ्य समाज पर कलंक है, और इससे भी बड़ा कलंक यह है कि जिम्मेदार महकमे तमाशबीन बने रहें | केवल छापे और प्रेस नोट जारी कर जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाडा़ जा सकता यह भी स्पष्ट है कि भ्रूण लिंग जांच कोई छिटपुट अपराध नहीं बल्कि सुव्यवस्थित तंत्र है॰ जिसमें उपकरण   एजेंट फर्जी शामिल हैं | ऐसे में केवल छापे पहचान और चिकित्सा दुरुपयोग या गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं | बल्कि समाज और चिकित्सा जगत की नैतिक जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है मांग आपूर्ति जब तक की श्रृंखला टूटेगी नहीं, तब तक कानून का भय सीमित रहेगा | आवश्यकता है जिला स्तर पर समर्पित पीसीपीएनडीटी सेल, नियमित  ऑडिट डेटा आधारित   निगरानी, अंतर- विभागीय तय होनी चाहिए। दोषी डॉक्टर, तालमेल और जवाबदेही बिचौलिए और संरक्षण देने वाले अधिकारी ~ सब पर एक समान जैसे अभियान हथौडा चलना चाहिए बेटी बचाओ ননো खोखले नारे बनकर रह जाएंगे | Editoriall बेटी बचाओ ' केवल नारा नहीं छिटपुट  भ्रूण लिंग जांच कोई अपराध नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित तंत्र है कोटपूतली - बहरोड़़ जैसे नवगठित जिले में भ्रूण लिंग जांच गिरोह का बेखौफ पनपना प्रशासनिक सतर्कता पर गंभीर రాని 3 पीसीपीएनडीटी ೯| কনো संवेदनशील कानून का प्रभावी क्रियान्वयन केवल अधिसूचनाओं और समितियों तक নী  হমন্ধা   মীখা সীসিন रह   जाए लाभ अपराधी नेटवर्क को मिलता हैजो यहां स्पष्ट रूप से दिख रहा है। समस्या की जड़ निगरानी, समन्वय और डॉ. राकेश शर्मा त्वरित कार्रवाई में आई शिथिलता है। नए जिला व्यवस्था जिले के गठन के बाद भी लंबे समय तक पुरानी के तहत संचालन, जिम्मेदारियों की अस्पष्टता और संसाधनों की कमी ने प्रवर्तन को कमजोर किया परिणामस्वरूप  संगठित गिरोह तकनीक, डिजिटल भुगतान और अंतर  राज्यीय नेटवर्क आगे निकलते रहे। कानून से का लाभ उठाकर कोटपूतली बहरोड़ जिले में भ्रूण लिंग जांच गिरोह का बेधड़क फलना- फूलना केवल अपराध की खबर नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का खुला प्रमाण है। सवाल सीधा है क्या कानून केवल कागजों में लागू होता है ? पीसीपीएनडीटी जैसा कठोर कानून यदि जमीन पर निष्क्रिय रहे, तो अपराधियों का हौसला बढ़ना स्वाभाविक है। इस ढिलाई ने भ्रूण हत्या के सौदागरों को सा़फ संदेश दे दिया कि यहां डरने की जरूरत नहीं | यही कारण है कि गिरोह संगठित रूप से॰ तकनीक और डिजिटल लेन- देन के सहारे   प्रशासन को में धूल  आंखों झोंकते रहे। चूक नहीं, बल्कि सामाजिक अपराध के यह कोई मामूली प्रति असंवेदनशीलता है। बेटी के जन्म से पहले ही उसका सौदा होना सभ्य समाज पर कलंक है, और इससे भी बड़ा कलंक यह है कि जिम्मेदार महकमे तमाशबीन बने रहें | केवल छापे और प्रेस नोट जारी कर जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाडा़ जा सकता यह भी स्पष्ट है कि भ्रूण लिंग जांच कोई छिटपुट अपराध नहीं बल्कि सुव्यवस्थित तंत्र है॰ जिसमें उपकरण   एजेंट फर्जी शामिल हैं | ऐसे में केवल छापे पहचान और चिकित्सा दुरुपयोग या गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं | बल्कि समाज और चिकित्सा जगत की नैतिक जिम्मेदारी भी उतनी ही अहम है मांग आपूर्ति जब तक की श्रृंखला टूटेगी नहीं, तब तक कानून का भय सीमित रहेगा | आवश्यकता है जिला स्तर पर समर्पित पीसीपीएनडीटी सेल, नियमित  ऑडिट डेटा आधारित   निगरानी, अंतर- विभागीय तय होनी चाहिए। दोषी डॉक्टर, तालमेल और जवाबदेही बिचौलिए और संरक्षण देने वाले अधिकारी ~ सब पर एक समान जैसे अभियान हथौडा चलना चाहिए बेटी बचाओ ননো खोखले नारे बनकर रह जाएंगे | - ShareChat
#indoriatimes #BREAKING NEWS #news #🔴 क्राइम अपडेट #samachar
indoriatimes - Editorial सशक्त, पारदर्शी , जवाबदेह लोकतंत्र की बुनियाद लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता आज ऐसे दौर से गुजर रही है, जहाँ उससे निष्पक्षता, निर्भीकता और जनहितकारी भूमिका की अपेक्षा तो की जाती है, लेकिन उसके अनुरूप सुविधाएं, सुरक्षा और ल्सीऔत अब भी पर्याप्त नहीं हैं। जिला सम्मान कार्यरत ತತ स्तर पर पत्रकार मोईँ মমাঙনী স সহামন সা মসাত ক নীব बनकर कार्य कर रहे हैं किंतु उनके लिए 7 स्थायी और व्यवस्थित कार्यस्थल उपलब्ध नहीं डॉ राकेश शर्मा होना गंभीर चिंता का विषय है। सरकार और प्रशासन से यह अपेक्षा की जाती है कि॰वे पत्रकारिता की जमीनी आवश्यकताओं को समझें। प्रत्येक जिला एवं उपखंड मुख्यालय पर प्रेस क्लब कार्यालय की स्थापना केवल पत्रकारों की सुविधा का विषय नहीं , बल्कि सूचना तंत्र को मजबूत करने का आधार है। प्रेस क्लब पत्रकारों को संगठित मंच देता है, जिससे समाचार संकलन , प्रेस वार्ता, दस्तावेजी कार्य और प्रशासन से संवाद अधिक प्रभावी और पारदर्शी हो पाता है। प्रेस क्लब की मौजूदगी से प्रशासन और मीडिया के बीच ा है और जनसूचना " होता है, अफवाहों पर नियंत्रण रहता সনান बेहतर  प्रणाली अधिक विश्वसनीय बनती है। साथ ही यह जिम्मेदार पत्रकारिता को प्रोत्साहित करता है और फर्जी पत्रकारिता पर प्रभावी अंकुश लगाने में सहायक सिद्ध होता है।  पत्रकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक आज जब संरक्षण को लेकर लगातार प्रश्न खड़े हो रहे हैं॰ तब प्रेस क्लब आपात सहायता, प्रशिक्षण और अधिकार संरक्षण का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। संगठित पत्रकार ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं । अतः सरकार एवं प्रशासन से यह संपादकीय अपील है कि॰ लोकतंत्र को सशक्त, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक जिला एवं उपखंड मुख्यालय पर प्रेस क्लब कार्यालय की स्थापना को प्राथमिकता दें । यह निर्णय न केवल पत्रकारों के हित में होगा, बल्कि जनहित और सुशासन की दिशा में एक निर्णायक  सिद्ध होगा । कदम Editorial सशक्त, पारदर्शी , जवाबदेह लोकतंत्र की बुनियाद लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कही जाने वाली पत्रकारिता आज ऐसे दौर से गुजर रही है, जहाँ उससे निष्पक्षता, निर्भीकता और जनहितकारी भूमिका की अपेक्षा तो की जाती है, लेकिन उसके अनुरूप सुविधाएं, सुरक्षा और ल्सीऔत अब भी पर्याप्त नहीं हैं। जिला सम्मान कार्यरत ತತ स्तर पर पत्रकार मोईँ মমাঙনী স সহামন সা মসাত ক নীব बनकर कार्य कर रहे हैं किंतु उनके लिए 7 स्थायी और व्यवस्थित कार्यस्थल उपलब्ध नहीं डॉ राकेश शर्मा होना गंभीर चिंता का विषय है। सरकार और प्रशासन से यह अपेक्षा की जाती है कि॰वे पत्रकारिता की जमीनी आवश्यकताओं को समझें। प्रत्येक जिला एवं उपखंड मुख्यालय पर प्रेस क्लब कार्यालय की स्थापना केवल पत्रकारों की सुविधा का विषय नहीं , बल्कि सूचना तंत्र को मजबूत करने का आधार है। प्रेस क्लब पत्रकारों को संगठित मंच देता है, जिससे समाचार संकलन , प्रेस वार्ता, दस्तावेजी कार्य और प्रशासन से संवाद अधिक प्रभावी और पारदर्शी हो पाता है। प्रेस क्लब की मौजूदगी से प्रशासन और मीडिया के बीच ा है और जनसूचना " होता है, अफवाहों पर नियंत्रण रहता সনান बेहतर  प्रणाली अधिक विश्वसनीय बनती है। साथ ही यह जिम्मेदार पत्रकारिता को प्रोत्साहित करता है और फर्जी पत्रकारिता पर प्रभावी अंकुश लगाने में सहायक सिद्ध होता है।  पत्रकारों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक आज जब संरक्षण को लेकर लगातार प्रश्न खड़े हो रहे हैं॰ तब प्रेस क्लब आपात सहायता, प्रशिक्षण और अधिकार संरक्षण का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। संगठित पत्रकार ही लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं । अतः सरकार एवं प्रशासन से यह संपादकीय अपील है कि॰ लोकतंत्र को सशक्त, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से प्रत्येक जिला एवं उपखंड मुख्यालय पर प्रेस क्लब कार्यालय की स्थापना को प्राथमिकता दें । यह निर्णय न केवल पत्रकारों के हित में होगा, बल्कि जनहित और सुशासन की दिशा में एक निर्णायक  सिद्ध होगा । कदम - ShareChat
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BREAKING NEWS - Editorial जिम्मेदार कौन ? महत्वपूर्ण यह नहीं है कि कोटपूतली नगर परिषद क्षेत्र में सम्मिलित १५ ग्राम पंचायतों में विगत वित्तीय वर्ष के दौरान स्वीकृत 7 हुए और उनकी कुल स्वीकृत राशि कितने विकास कार्य प्रश्न यह है कि इन ক্িননী थी असल स्वीकृत 7 कार्यों के लिए अब तक कितनी राशि वास्तव में जारी की गई और उसमें से कितनी राशि का वास्तविक उपयोग संबंधित विकास कायों पर हुआ | कार्य पूर्ण हो चुके स्थिति यह है कि अनेक हैं, अभियंताओं द्वारा नापजोख कर बिल भी डॉ. राकेश থম तैयार कर दिए गए हैं फिर भी ठेकेदारों को गया। यह स्थिति नहीं   किया न केवल प्रशासनिक भुगतान लापरवाही की ओर संकेत करती है, बल्कि वित्तीय प्रबंधन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। यदि यह तथ्य सही है कि विकास मद विधायक कोष एवं डीएमएफटी को राशि को अन्य मदों में व्यय किया गया, तो फिर भुगतान के अभाव में अधूरे पडे़ स्कूल भवनों , सड़कों एवं नालियों की जिम्मेदारी किस अधिकारी अथवा संस्था की है ? जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने का उत्तरदायित्व आखिर कौन लेगा ? इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार स्वतंत्र वित्तीय एवं प्रशासनिक जांच कराने का विचार रखती है ? यदि हां, तो अब तक जांच एजेंसी और समयसीमा क्यों निर्धारित नहीं की गई ? पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर यह देरी स्वयं में संदेह पैदा करती है। यदि नगर परिषद द्वारा विकास मद की राशि को अन्य मदों में स्थानांतरित किया गया है, तो उससे संबंधित प्रस्ताव संख्या एवं स्वीकृति आदेश सार्वजनिक किए जाने चाहिए थे बिना स्पष्ट अनुमोदन के राशि का स्थानांतरण वित्तीय अनुशासन का खुला उल्लंघन माना जाएगा | भुगतान नहीं होने के कारण अधूरे पडे़ विकास कार्यों से आमजन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। टूटे रास्ते, अधूरे नाले और अधूरे स्कूल भवन केवल निर्माण की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बनते जा रहे हैं| ऐसे में जनता को हुई असुविधा की जिम्मेदारी कौन लेगा, अनुत्तरित है। यह प्रश्न सबसे अंत में, भविष्य में इस प्रकार की वित्तीय अनियमितता -से ठोस सुधारात्मक कदम दोबारा न हो, इसके लिए अब तक कौन- सुदृढ़ की गई है, क्या भुगतान उठाए गए हैं ? क्या निगरानी व्यवस्था प्रणाली को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया गया है ? जब तक इन सवालों के स्पष्ट उत्तर नहीं मिलते নিন্চাম' কনল নন নন্ধ कागजों में सिमट कर रह जाएगा | यह संपादकीय केवल आरोप नहीं   बल्कि जवाबदेही की मांग है- क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना जनता का अधिकार है और उनका उत्तर देना शासन की जिम्मेदारी | Editorial जिम्मेदार कौन ? महत्वपूर्ण यह नहीं है कि कोटपूतली नगर परिषद क्षेत्र में सम्मिलित १५ ग्राम पंचायतों में विगत वित्तीय वर्ष के दौरान स्वीकृत 7 हुए और उनकी कुल स्वीकृत राशि कितने विकास कार्य प्रश्न यह है कि इन ক্িননী थी असल स्वीकृत 7 कार्यों के लिए अब तक कितनी राशि वास्तव में जारी की गई और उसमें से कितनी राशि का वास्तविक उपयोग संबंधित विकास कायों पर हुआ | कार्य पूर्ण हो चुके स्थिति यह है कि अनेक हैं, अभियंताओं द्वारा नापजोख कर बिल भी डॉ. राकेश থম तैयार कर दिए गए हैं फिर भी ठेकेदारों को गया। यह स्थिति नहीं   किया न केवल प्रशासनिक भुगतान लापरवाही की ओर संकेत करती है, बल्कि वित्तीय प्रबंधन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। यदि यह तथ्य सही है कि विकास मद विधायक कोष एवं डीएमएफटी को राशि को अन्य मदों में व्यय किया गया, तो फिर भुगतान के अभाव में अधूरे पडे़ स्कूल भवनों , सड़कों एवं नालियों की जिम्मेदारी किस अधिकारी अथवा संस्था की है ? जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखने का उत्तरदायित्व आखिर कौन लेगा ? इस पूरे प्रकरण में सबसे अहम सवाल यह है कि क्या राज्य सरकार स्वतंत्र वित्तीय एवं प्रशासनिक जांच कराने का विचार रखती है ? यदि हां, तो अब तक जांच एजेंसी और समयसीमा क्यों निर्धारित नहीं की गई ? पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी पर यह देरी स्वयं में संदेह पैदा करती है। यदि नगर परिषद द्वारा विकास मद की राशि को अन्य मदों में स्थानांतरित किया गया है, तो उससे संबंधित प्रस्ताव संख्या एवं स्वीकृति आदेश सार्वजनिक किए जाने चाहिए थे बिना स्पष्ट अनुमोदन के राशि का स्थानांतरण वित्तीय अनुशासन का खुला उल्लंघन माना जाएगा | भुगतान नहीं होने के कारण अधूरे पडे़ विकास कार्यों से आमजन को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। टूटे रास्ते, अधूरे नाले और अधूरे स्कूल भवन केवल निर्माण की विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का प्रतीक बनते जा रहे हैं| ऐसे में जनता को हुई असुविधा की जिम्मेदारी कौन लेगा, अनुत्तरित है। यह प्रश्न सबसे अंत में, भविष्य में इस प्रकार की वित्तीय अनियमितता -से ठोस सुधारात्मक कदम दोबारा न हो, इसके लिए अब तक कौन- सुदृढ़ की गई है, क्या भुगतान उठाए गए हैं ? क्या निगरानी व्यवस्था प्रणाली को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया गया है ? जब तक इन सवालों के स्पष्ट उत्तर नहीं मिलते নিন্চাম' কনল নন নন্ধ कागजों में सिमट कर रह जाएगा | यह संपादकीय केवल आरोप नहीं   बल्कि जवाबदेही की मांग है- क्योंकि लोकतंत्र में सवाल पूछना जनता का अधिकार है और उनका उत्तर देना शासन की जिम्मेदारी | - ShareChat
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BREAKING NEWS - एडीएम कोटपूतली ने खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली का लिया जायजा इन्दौरिया न्यूज। ब्यूरो कोटपूतली बहरोड  जिता रसद अधिकार 050 ~ న अतिरिक्त जिला कलेक्टर ओमप्रकाश सहारण ने शुक्रवार को जिला रसद कार्यालय का औचक निरीक्षण कर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आमजन को दीजा रही सुविधाओं एवं परिवाद निस्तारण व्यवस्था की সপীঃা ক্ষী | एडीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य सुरक्षा एवं एनएफएसए योजनाओं की सराहना करते हुए इसे और अधिक प्रभावी " की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचे | उन्होंने विशेष परिवाद अनुभाग  बनाने तथा कार्यालय में आने वाले परिवादियों करने पर जोर दिया। एडीएम कोटपूतली ने खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली का लिया जायजा इन्दौरिया न्यूज। ब्यूरो कोटपूतली बहरोड  जिता रसद अधिकार 050 ~ న अतिरिक्त जिला कलेक्टर ओमप्रकाश सहारण ने शुक्रवार को जिला रसद कार्यालय का औचक निरीक्षण कर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने आमजन को दीजा रही सुविधाओं एवं परिवाद निस्तारण व्यवस्था की সপীঃা ক্ষী | एडीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खाद्य सुरक्षा एवं एनएफएसए योजनाओं की सराहना करते हुए इसे और अधिक प्रभावी " की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध रूप से पहुंचे | उन्होंने विशेष परिवाद अनुभाग  बनाने तथा कार्यालय में आने वाले परिवादियों करने पर जोर दिया। - ShareChat
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indoriatimes - इन्दौरिया समाचार जगत Editorial मंडावा की आत्मा विरासत है तो उसका विस्तार पर्यटन सभी देशवासियों को नव वर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई के उपरांत आज हम बात करेंगे शेखावाटी अंचल क्या आप जानते हैं के हवेलियों के शहर मंडावा की সভানা ন্ধী মনম নভী পম্নান ওমন্ধী समृद्ध विरासत है।यही विरासत मंडावा की आत्मा है और इसी ने उसे देश ही नहीं  बल्कि अंतरराष्टीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट स्थान दिलाया है। शेखावाटी अंचल के हृदय में बसा मंडावा अपने डॉ. राकेश থম ऐतिहासिक किले, हवेलियों, भित्ति भव्य चित्रों और पारंपरिक लोक संस्कृति के कारण एक जीवंत विरासत नगर के रूप में जाना जाता है । पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि केवल সভানা ক্িলা इतिहास, शौर्य और स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है। वहीं , शहर की हवेलियाँ अपने  भित्ति चित्रों के कारण ؟0791 मंडावा को ओपन आर्ट गैलरी का दर्जा दिलाती हैं। यह विरासत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की पहचान और भविष्य की संभावनाओं की नींव है। इसी विरासत के विस्तार का नाम पर्यटन है। देशररविदेश से आने वाले सैलानी मंडावा की ऐतिहासिक धरोहर, लोक संगीत, पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं हेरिटेज होटल, फेस्टिवल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने को रोजगार के नए अवसर भी दिए हैं । 397317 हालांकि, यह भी आवश्यक है कि पर्यटन विकास के साथरसाथ विरासत संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अनियंत्रित निर्माण, उपेक्षा और व्यावसायिक दोहन से विरासत को खतरा हो सकता है। सरकार , प्रशासन, स्थानीय समुदाय और पर्यटन उद्योग- सभी को मिलकर संतुलित और सतत विकास का मॉडल अपनाना होगा मुझे चूंकि मंडावा में काफी समय बिताने का मौका मिला तभी मैं कह सकता हूं कि मंडावा की आत्मा उसकी विरासत में बसती है और पर्यटन उसका स्वाभाविक विस्तार है।यदि इस विरासत को संवेदनशीलता और के दूरदर्शिता " साथ संरक्षित किया गया, तो मंडावा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संस्कृति, इतिहास और समृद्ध पर्यटन का उज्च्वल प्रतीक बना रहेगा | इन्दौरिया समाचार जगत Editorial मंडावा की आत्मा विरासत है तो उसका विस्तार पर्यटन सभी देशवासियों को नव वर्ष पर हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई के उपरांत आज हम बात करेंगे शेखावाटी अंचल क्या आप जानते हैं के हवेलियों के शहर मंडावा की সভানা ন্ধী মনম নভী পম্নান ওমন্ধী समृद्ध विरासत है।यही विरासत मंडावा की आत्मा है और इसी ने उसे देश ही नहीं  बल्कि अंतरराष्टीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट स्थान दिलाया है। शेखावाटी अंचल के हृदय में बसा मंडावा अपने डॉ. राकेश থম ऐतिहासिक किले, हवेलियों, भित्ति भव्य चित्रों और पारंपरिक लोक संस्कृति के कारण एक जीवंत विरासत नगर के रूप में जाना जाता है । पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि केवल সভানা ক্িলা इतिहास, शौर्य और स्थापत्य कला का जीवंत उदाहरण है। वहीं , शहर की हवेलियाँ अपने  भित्ति चित्रों के कारण ؟0791 मंडावा को ओपन आर्ट गैलरी का दर्जा दिलाती हैं। यह विरासत केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि वर्तमान की पहचान और भविष्य की संभावनाओं की नींव है। इसी विरासत के विस्तार का नाम पर्यटन है। देशररविदेश से आने वाले सैलानी मंडावा की ऐतिहासिक धरोहर, लोक संगीत, पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक आयोजनों से जुड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं हेरिटेज होटल, फेस्टिवल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने को रोजगार के नए अवसर भी दिए हैं । 397317 हालांकि, यह भी आवश्यक है कि पर्यटन विकास के साथरसाथ विरासत संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। अनियंत्रित निर्माण, उपेक्षा और व्यावसायिक दोहन से विरासत को खतरा हो सकता है। सरकार , प्रशासन, स्थानीय समुदाय और पर्यटन उद्योग- सभी को मिलकर संतुलित और सतत विकास का मॉडल अपनाना होगा मुझे चूंकि मंडावा में काफी समय बिताने का मौका मिला तभी मैं कह सकता हूं कि मंडावा की आत्मा उसकी विरासत में बसती है और पर्यटन उसका स्वाभाविक विस्तार है।यदि इस विरासत को संवेदनशीलता और के दूरदर्शिता " साथ संरक्षित किया गया, तो मंडावा आने वाली पीढ़ियों के लिए भी संस्कृति, इतिहास और समृद्ध पर्यटन का उज्च्वल प्रतीक बना रहेगा | - ShareChat