बिना विवेक से गीता बांचे, चेतन को लगी नहीं चटकी।
कहें कबीर सुनो भाई साधो, आवागमन में रिया भटकी।।
kabir Ke dohe
भावार्थ: कबीर साहब कहते हैं कि यदि हृदय में विवेक और वैराग्य का उदय नहीं हुआ है तो गीता पढ़ने से भी उसका क्या भला होगा? जब तक मन को सत्य का झटका नहीं लगेगा और हमारी चेतना पूरी तरह से जागृत नहीं होगी, तब तक आत्मा-परमात्मा की अनुभूति नहीं होगी। कबीर साहब फरमाते हैं कि मन ही बंधन और मोक्ष का मूल कारण है। जब तक मन को नियंत्रित नहीं करोगे और आत्मा की अनुभूति नहीं प्राप्त करोगे, तब तक संसार में आने-जाने का चक्र नहीं रुकेगा। आत्मा के द्वारा ही परमात्मा की भी अनुभूति प्राप्त होती है।#परमेश्वर_का_सार_संदेश #संतरामपालजी #सतलोकआश्रम #कबीरसाहेब #SantRampalJiMaharaj #prameshwarkesarsandesh #💓 मोहब्बत दिल से