VIRAT KUMAR ARORA
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#🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #❤️अस्सलामु अलैकुम #🌞 Good Morning🌞 #🌷शुभ रविवार #🌙 गुड नाईट
🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 - क्या रूह (आत्मा) दुनिया में भटकती है? হমলাম ক্ধা নড়ইয়া आम तौर पर लोग समझते हैं कि मरने के बाद रूहें दुनिया में भटकती हैं या बदला लेने आती हैं लेकिन इस्लाम इस बात को सिरे से नकारता है। १. मौत के बाद का पर्दा (बरज़ख) कुरआन साफ कहता है कि मरने के बाद इंसान और के बीच एक दीवार (आड़) है, जिसे दुनिया इस 'बरज़ख' कहा जाता है। वहां से कोई वापस नहीं आ सकता।उस दिन तक के लिए जब वे दोबारा उठाए जाएंगे।" ~ (सूरह अल-मुअमिनून, आयतः १००) २. रूह का ठिकाना (हदीस का हवाला) नबी-ए-करीम ८६ ने बताया कि मौत के बाद मोमिन (नेक) की रूह को इज़्ज़त के साथ ' इल्लीिन' में और गुनहगार की रूह को 'सिज्जीन' में रखा जाता है। भटकने का सवाल ही पैदा नहीं होता। (सुनन नसाईः १८३३, मुसनद अहमद) ३. फिर ये साये और आवाजें क्या हैं? हदीस के मुताबिक, हर इंसान के साथ एक ' क़रीन' (हमज़ाद / शैतान जिन्न) होता है। जब इंसान मर जाता है, तो वह जिन्न ज़िंदा रहता है और अक्सर लिए वही लोगों को डराने या गुमराह करने के aaal -बेवक़्त नज़र आता है या आवाज़ें निकालता है। (सहीह मुस्लिमः २८१४) इससे बचने के लिए और 'सूरह आयतुल कुर्सी' फलक व नास' का विर्द करें। क्या रूह (आत्मा) दुनिया में भटकती है? হমলাম ক্ধা নড়ইয়া आम तौर पर लोग समझते हैं कि मरने के बाद रूहें दुनिया में भटकती हैं या बदला लेने आती हैं लेकिन इस्लाम इस बात को सिरे से नकारता है। १. मौत के बाद का पर्दा (बरज़ख) कुरआन साफ कहता है कि मरने के बाद इंसान और के बीच एक दीवार (आड़) है, जिसे दुनिया इस 'बरज़ख' कहा जाता है। वहां से कोई वापस नहीं आ सकता।उस दिन तक के लिए जब वे दोबारा उठाए जाएंगे।" ~ (सूरह अल-मुअमिनून, आयतः १००) २. रूह का ठिकाना (हदीस का हवाला) नबी-ए-करीम ८६ ने बताया कि मौत के बाद मोमिन (नेक) की रूह को इज़्ज़त के साथ ' इल्लीिन' में और गुनहगार की रूह को 'सिज्जीन' में रखा जाता है। भटकने का सवाल ही पैदा नहीं होता। (सुनन नसाईः १८३३, मुसनद अहमद) ३. फिर ये साये और आवाजें क्या हैं? हदीस के मुताबिक, हर इंसान के साथ एक ' क़रीन' (हमज़ाद / शैतान जिन्न) होता है। जब इंसान मर जाता है, तो वह जिन्न ज़िंदा रहता है और अक्सर लिए वही लोगों को डराने या गुमराह करने के aaal -बेवक़्त नज़र आता है या आवाज़ें निकालता है। (सहीह मुस्लिमः २८१४) इससे बचने के लिए और 'सूरह आयतुल कुर्सी' फलक व नास' का विर्द करें। - ShareChat
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🌞 Good Morning🌞 - हज़रत बिलाल (रज़ि. ): तौहीद और बराबरी की मिसाल  १७ कर्बला का पूरा वाकया (विस्तार से) पृष्ठभूमि (वजह)ः 1. मुआविया के इंतकाल के बाद, यज़ीद ने खुद को खलीफा घोषित कर दिया। यज़ीद का व्यवहार इस्लामी  खिलाफ था। उसने उसूलों के मदीना के गवर्नर को आदेश दिया कि वह हज़रत (अ.स. ) से उसकी खिलाफत की हुसैन इमाम बैअत (सॅमर्थन/निष्ठा) ले। इमाम (अ.स. ) ने ক্মীন यज़ीद की बैअत करने से सा़फ इनकार कर दिया क्योंकि वे यज़ीद की गलत नीतियों और ज़ुल्म का समर्थन नहीं करना थे। चाहते औईमान हज़रत बिलाल (रज़ि. ): तौहीद और बराबरी की मिसाल  १७ कर्बला का पूरा वाकया (विस्तार से) पृष्ठभूमि (वजह)ः 1. मुआविया के इंतकाल के बाद, यज़ीद ने खुद को खलीफा घोषित कर दिया। यज़ीद का व्यवहार इस्लामी  खिलाफ था। उसने उसूलों के मदीना के गवर्नर को आदेश दिया कि वह हज़रत (अ.स. ) से उसकी खिलाफत की हुसैन इमाम बैअत (सॅमर्थन/निष्ठा) ले। इमाम (अ.स. ) ने ক্মীন यज़ीद की बैअत करने से सा़फ इनकार कर दिया क्योंकि वे यज़ीद की गलत नीतियों और ज़ुल्म का समर्थन नहीं करना थे। चाहते औईमान - ShareChat
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🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 - 7/7 सब्र और रज़ा ए इलाहीः (अ.स. ) हर परिस्थिति में ক্মীন इमाम अल्लाह की रज़ा (मर्ज़ी) के साथ थे। कर्बला की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि इमाम ने अपनी हर प्रार्थना में कहा, "हे अल्लाह, जो तू चाहता है, मैं वही चाहता हूँ। " अटूट भरोसे के कारण अल्लाह ने इसी उन्हें इस सबसे कठिन इम्तिहान के लिए चुना। सव्र ३ैर र्ईमान 7/7 सब्र और रज़ा ए इलाहीः (अ.स. ) हर परिस्थिति में ক্মীন इमाम अल्लाह की रज़ा (मर्ज़ी) के साथ थे। कर्बला की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि इमाम ने अपनी हर प्रार्थना में कहा, "हे अल्लाह, जो तू चाहता है, मैं वही चाहता हूँ। " अटूट भरोसे के कारण अल्लाह ने इसी उन्हें इस सबसे कठिन इम्तिहान के लिए चुना। सव्र ३ैर र्ईमान - ShareChat
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🌷शुभ रविवार - 6/7 दीन ए इस्लाम की हिफाजतः दुरुपयोग उस समय यज़ीद सत्ता का करके इस्लाम के मूल नियमों को बदल रहा था। अगर उस समय कोई बड़ा और प्रभावशाली व्यक्ति (जो इमाम के पद पर हो) आवाज़ नहीं उठाता , तो लोग इस्लाम को गलत समझ लेते। ক্রী বুনা अल्लाह ने इमाम (अ.स.) हुसैन ताकि वे अपनी शहादत से इस्लाम की असली रूह को ज़िंदा रखें। सव्र ३ैर ईमान 6/7 दीन ए इस्लाम की हिफाजतः दुरुपयोग उस समय यज़ीद सत्ता का करके इस्लाम के मूल नियमों को बदल रहा था। अगर उस समय कोई बड़ा और प्रभावशाली व्यक्ति (जो इमाम के पद पर हो) आवाज़ नहीं उठाता , तो लोग इस्लाम को गलत समझ लेते। ক্রী বুনা अल्लाह ने इमाम (अ.स.) हुसैन ताकि वे अपनी शहादत से इस्लाम की असली रूह को ज़िंदा रखें। सव्र ३ैर ईमान - ShareChat
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❤️अस्सलामु अलैकुम - 5/7 (आशूरा ) के दिन की घटनाएँ 10 मुहर्रम १. अंतिम जंग (शहादत की शुरुआत): सुबह की नमाज़ के बाद, यज़ीद की हज़ारों की फौज ने हमला शुरू किया। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स. ) के साथ केवल ७२ लोग थे (जिनमें उनके परिवार के सदस्य और वफादार साथी शामिल थे)। एक॰एक करके , इन सभी साथियों ने साहस के साथ  बहादुरी  दिखाई। वे सब इमाम हुसैन (अ.स. ) के नज़दीने यह साबित किया कि अपने इमाम के लिए जान देने को तैयार हैं। 3ণনী সান उन्होंने कुर्बान कर दी, जिससे मैदान ए॰कर्बला शहादतों से भर गया। इमाम हुसैन (अ.स. ) की शहादत (वफा/सजदा): जब इमाम हुसैन (अ.स. ) अकेले रह गए, तो वे भी मैदान में उतरे। वे जानते थे कि उनकी शहादत तय है, लेकिन उन्होंने अपने से उसूलों  समझौता नहीं किया। वे अंरक अपने दीन (इस्लाम ) की रक्षा के लिए लड़ते रहे। (अ.स. ) बुरी तरह जख्मी हो गए सजदे की हालतः जब इमाम 87 और गिर पडे़, तो उस आखिरी घड़ी में भी उन्होंने अल्लाह के सामने सिर झुकाय। जिस समय वे अल्लाह के हुजूर (सजदे में ) नमाज़ पढ़ रहे थे, हालत में उन पर हमला किया गया और उन्हें शहीद कर दिया गया। 26 5/7 (आशूरा ) के दिन की घटनाएँ 10 मुहर्रम १. अंतिम जंग (शहादत की शुरुआत): सुबह की नमाज़ के बाद, यज़ीद की हज़ारों की फौज ने हमला शुरू किया। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स. ) के साथ केवल ७२ लोग थे (जिनमें उनके परिवार के सदस्य और वफादार साथी शामिल थे)। एक॰एक करके , इन सभी साथियों ने साहस के साथ  बहादुरी  दिखाई। वे सब इमाम हुसैन (अ.स. ) के नज़दीने यह साबित किया कि अपने इमाम के लिए जान देने को तैयार हैं। 3ণনী সান उन्होंने कुर्बान कर दी, जिससे मैदान ए॰कर्बला शहादतों से भर गया। इमाम हुसैन (अ.स. ) की शहादत (वफा/सजदा): जब इमाम हुसैन (अ.स. ) अकेले रह गए, तो वे भी मैदान में उतरे। वे जानते थे कि उनकी शहादत तय है, लेकिन उन्होंने अपने से उसूलों  समझौता नहीं किया। वे अंरक अपने दीन (इस्लाम ) की रक्षा के लिए लड़ते रहे। (अ.स. ) बुरी तरह जख्मी हो गए सजदे की हालतः जब इमाम 87 और गिर पडे़, तो उस आखिरी घड़ी में भी उन्होंने अल्लाह के सामने सिर झुकाय। जिस समय वे अल्लाह के हुजूर (सजदे में ) नमाज़ पढ़ रहे थे, हालत में उन पर हमला किया गया और उन्हें शहीद कर दिया गया। 26 - ShareChat
#🌷शुभ रविवार #🌙 गुड नाईट #🌞 Good Morning🌞 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #❤️अस्सलामु अलैकुम
🌷शुभ रविवार - 4/7 'अशूरा' की रात की इबादत १० मुहर्रम (आशूरा) की रात को इमाम हुसैन (अ.स. ) ने अपने साथियों के साथ पूरी रात इबादत में गुज़ारी। उन्होंने अपने साथियों से कहा था कि जो जाना चाहे वह जा सकता है, क्योंकि सुबह सबकी शहादत तय है। লকিন 3নক সঞ্ী 72 সা্থিয়ী ন अंतिम सांस तक साथ निभाने का वादा किया। यह वफादारी और दोस्ती की सबसे बड़ी मिसाल है। 4/7 'अशूरा' की रात की इबादत १० मुहर्रम (आशूरा) की रात को इमाम हुसैन (अ.स. ) ने अपने साथियों के साथ पूरी रात इबादत में गुज़ारी। उन्होंने अपने साथियों से कहा था कि जो जाना चाहे वह जा सकता है, क्योंकि सुबह सबकी शहादत तय है। লকিন 3নক সঞ্ী 72 সা্থিয়ী ন अंतिम सांस तक साथ निभाने का वादा किया। यह वफादारी और दोस्ती की सबसे बड़ी मिसाल है। - ShareChat
#🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #❤️अस्सलामु अलैकुम #🌞 Good Morning🌞 #🌙 गुड नाईट #🌷शुभ रविवार
🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 - 3/7 कर्बला का मैदान और घेराबंदीः (अ.स. ) का काफिला 2 हुसैन इमाम मैदान मुहर्रम, ६१ हिजरी को कर्बला के #ugaIl वहाँ यज़ीद की हज़ारों की बड़ी फ़ौज ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। ४. पानी की पाबंदीः को यज़ीद की फ़ौज ने फुरात मुहर्रम 7 दरिया (नदी) का रास्ता रोक दिया, (3.ஈ.)$3## जिससे इमाम हुसैन की सप्लाई बंद हो गई। छोटे बच्चों और और औरतों तक को तीन दिनों तक भीषण गर्मी में प्यासा रखा गया। 3٩ 3/7 कर्बला का मैदान और घेराबंदीः (अ.स. ) का काफिला 2 हुसैन इमाम मैदान मुहर्रम, ६१ हिजरी को कर्बला के #ugaIl वहाँ यज़ीद की हज़ारों की बड़ी फ़ौज ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। ४. पानी की पाबंदीः को यज़ीद की फ़ौज ने फुरात मुहर्रम 7 दरिया (नदी) का रास्ता रोक दिया, (3.ஈ.)$3## जिससे इमाम हुसैन की सप्लाई बंद हो गई। छोटे बच्चों और और औरतों तक को तीन दिनों तक भीषण गर्मी में प्यासा रखा गया। 3٩ - ShareChat
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🌞 Good Morning🌞 - 2/7 कर्बला का पूरा वाकया (विस्तार से) २. कूफा की यात्राः ஜ कूफा (इराक) के लोगों ने इमाम (अ.स. ) को खत लिखकर बुलाया उनके पास आएं ताकि वे ज़ुल्म खिलाफ उनका साथ दे सकें। जब इमाम हुसैन (अ.स. ) अपने परिवार और थोड़े से वफादार साथियों कुल् (कुल ७२ लोग) के साथ कूफा की ओर बढ़े, तो रास्ते में उन्हें पता चला कि कूफा के लोगों ने यज़ीद के डर से तोड़ दिया है। अपना वादा ैरईमान 2/7 कर्बला का पूरा वाकया (विस्तार से) २. कूफा की यात्राः ஜ कूफा (इराक) के लोगों ने इमाम (अ.स. ) को खत लिखकर बुलाया उनके पास आएं ताकि वे ज़ुल्म खिलाफ उनका साथ दे सकें। जब इमाम हुसैन (अ.स. ) अपने परिवार और थोड़े से वफादार साथियों कुल् (कुल ७२ लोग) के साथ कूफा की ओर बढ़े, तो रास्ते में उन्हें पता चला कि कूफा के लोगों ने यज़ीद के डर से तोड़ दिया है। अपना वादा ैरईमान - ShareChat