अंधियारे में जो ज्योति बनें, वो काली महाकाली हैं,
भय के हर एक साये को हरें, वो शक्ति निराली हैं।
गले में मुण्डों की माला, आँखों में अग्नि का प्रकाश,
अन्याय का जो अंत करें, वही माँ का दिव्य स्वरूप खास।
भक्तों की रक्षा करतीं, दुष्टों का करतीं संहार,
उनके चरणों में झुक जाए, सारा यह जगत अपार।
जब-जब बढ़ता है अंधकार, माँ लेतीं विकराल रूप,
एक गर्जना से कांप उठे, पाप और अधर्म का स्वरूप।
ममता भी हैं, क्रोध भी हैं, दोनों का अद्भुत संगम,
उनके बिना अधूरा है, सृष्टि का हर एक प्रांगण।
हे माँ काली, महाकाली, रखना हम पर अपना हाथ,
तेरी भक्ति में बीते जीवन, तू ही मंज़िल, तू ही साथ।
पंडित आशीष गौड़
पुजारी सिद्धपीठ कालका मंदिर दिल्ली
wednesday29april2026🙏🌹❤️ ranikalka bhawani #meri maa kalika devimaa #माई🙏🌹❤️💐💞 #🙏 माँ वैष्णो देवी