#जीवनदान_का_संकल्प
जीवन बचाने की अनूठी पहल
सतलोक आश्रम खमाणों (पंजाब) में 127 यूनिट रक्तदान।
संत रामपाल जी महाराज का मिशन —
लाखों जिंदगियाँ बचाने की प्रेरणा।
Sant Rampal Ji Maharaj #🙏गुरु महिमा😇
#जीवनदान_का_संकल्प
163 यूनिट रक्तदान
मानवता की ऊँचाई का प्रतीक।
जिंदगी बचाने का महाअभियान
सतलोक आश्रम सोजत (राजस्थान) में 163 यूनिट रक्तदान।
Sant Rampal Ji Maharaj #🙏गुरु महिमा😇
#जीवनदान_का_संकल्प
संत रामपाल जी के अनुयायी
मानवता के प्रहरी।
सेवा परमो धर्म
सतलोक आश्रम सीतापुर (UP) में 65 यूनिट रक्तदान।
Sant Rampal Ji Maharaj #🙏गुरु महिमा😇
#जीवनदान_का_संकल्प
मानवता की मिसाल: 283 यूनिट रक्तदान!
सतलोक आश्रम बैतूल (मध्य प्रदेश) में संत रामपाल जी महाराज के शिष्यों ने रचा इतिहास। महादान कर दिया समाज को जीवनदान। ब्लड बैंक की टीम ने भी की सराहना।
♦️ एक-एक बूंद, जिंदगी के नाम!
विशाल रक्तदान शिविर: सतलोक आश्रम धनाना धाम, सोनीपत (हरियाणा) में 243 यूनिट रक्तदान। संत रामपाल जी के सान्निध्य में शिष्यों ने निभाया मानव धर्म।
♦️ जीवन बचाने की अनूठी पहल!
सतलोक आश्रम खमाणों (पंजाब) में आयोजित शिविर में अनुयायियों ने किया 127 यूनिट रक्तदान। लाखों जिंदगियाँ बचाने के संत रामपाल जी महाराज के मिशन को मिली नई शक्ति।
[♦️ रक्तदान: मानवता की सर्वोच्च सेवा
जीवनदान के महत्व को समझते हुए सतलोक आश्रम धुरी (पंजाब) में शिष्यों ने किया 81 यूनिट रक्तदान। संत रामपाल जी के अनुयायियों का सराहनीय कदम।
♦️ मानव सेवा ही परम धर्म!
कबीर परमेश्वर के निर्वाण दिवस पर सतलोक आश्रम इंदौर (मध्य प्रदेश) में 79 यूनिट रक्तदान। संत रामपाल जी की प्रेरणा से शिष्यों ने पेश की परोपकार की अनूठी नज़ीर।
♦️ धर्मनगरी में मानवता का उदाहरण!
कबीर परमेश्वर निर्वाण दिवस पर सतलोक आश्रम कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में 155 यूनिट रक्तदान। शिष्यों ने सिद्ध किया - रक्त की हर बूंद में है जीवन देने की शक्ति।
♦️ रक्तदान ही महादान है!
सतलोक आश्रम भिवानी (हरियाणा) में संत रामपाल जी की प्रेरणा से 21 यूनिट रक्तदान। छोटी सी कोशिश बनी मानवता की बड़ी सेवा।
♦️ विशाल रक्तदान: 366 यूनिट!
सतलोक आश्रम धवलपुरी (महाराष्ट्र) में सेवा का महाकुंभ। मेडिकल टीम भी हुई नतमस्तक। संत रामपाल जी के शिष्यों ने पेश किया सेवा का अद्भुत उदाहरण।
♦️ जिंदगी बचाने का महाअभियान!
सतलोक आश्रम सोजत (राजस्थान) में समागम के दौरान 163 यूनिट रक्तदान। संत रामपाल जी के अनुयायी बने मानवता के सच्चे प्रहरी।
♦️ सेवा परमो धर्म:
सतलोक आश्रम सीतापुर (उत्तर प्रदेश) में मानवता के लिए आगे आए हाथ, 65 यूनिट रक्तदान। संत रामपाल जी महाराज की प्रेरणा बनी जीवनदायिनी।
♦️ अमूल्य सेवा, अटूट विश्वास!
सतलोक आश्रम शामली (उत्तर प्रदेश) में संत रामपाल जी के शिष्यों ने 52 यूनिट रक्तदान कर दिया अपना अमूल्य योगदान। गुरु की शिक्षाओं से प्रेरित होकर की जनसेवा।
♦️ सरहदों से परे मानवता की सेवा!
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर योगदान: नेपाल के सतलोक आश्रम धनुषा में 57 यूनिट रक्तदान। संत रामपाल जी महाराज का संदेश - मानव सेवा ही परम धर्म है।
Sant Rampal Ji Maharaj #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
#न_जन्मा_न_मरा
परमेश्वर स्वरूप सतगुरु रामपाल जी महाराज के सानिध्य में "परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी के 508वें निर्वाण दिवस" के उपलक्ष्य में 27 से 29 जनवरी 2026 तक अमरग्रन्थ साहेब का 3 दिवसीय अखंड पाठ किया जा रहा है। मास माघ, शुक्ल पक्ष, तिथि एकादशी वि. स. 1575 सन् 1518 को परमेश्वर कबीर बंदीछोड़ जी ने मगहर कस्बे से सशरीर सतलोक प्रस्थान किया था। इसी उपलक्ष्य में सतलोक आश्रमों में विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। इसमें निःशुल्क नामदीक्षा, रक्तदान शिविर, दहेज व आडंबर रहित आदर्श विवाह आदि का भी आयोजन किया जा रहा है। इस विशाल भंडारे में आप सभी सादर आमंत्रित हैं।
ऐसे धर्म भंडारों में भोजन ग्रहण करने से श्रद्धालुओं को मुक्ति प्राप्ति, पापों का नाश, सुख-समृद्धि व अगले जन्म में उत्तम फल प्राप्त होता है।
आज से लगभग 507 वर्ष पूर्व (मास माघ, शुक्ल पक्ष, तिथि एकादशी वि. स. 1575 सन् 1518 को) परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी ने उत्तरप्रदेश के मगहर कस्बे से लाखों लोगों के सामने सशरीर सतलोक (ऋतधाम) को प्रस्थान किया था। वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में 27 से 29 जनवरी 2026 तक निर्वाण दिवस सतलोक आश्रमों में मनाया जा रहा है। इस उपलक्ष्य में तीन दिवसीय शुद्ध देसी घी से निर्मित निःशुल्क विशाल भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें आप सभी सह परिवार सादर आमंत्रित हैं।
इन समागमों में भोजन प्राप्त करने वाले श्रद्धालुओं को गीता में वर्णित पांचो यज्ञों का फल प्राप्त होता है ।
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508th God Kabir NirvanDiwas #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
#न_जन्मा_न_मरा
परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी के 508वें निर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में सतगुरु रामपाल जी महाराज के सानिध्य में 27 से 29 जनवरी 2026 को अमरग्रन्थ साहेब के 3 दिवसीय अखंड पाठ का आयोजन किया जा रहा है।
आप सभी सहपरिवार सादर आमंत्रित हैं।
धर्म तो धसकै नहीं, धसकै तीनों लोक।
खैरायत में खैर है, कीजै आत्म पोख ।।
पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी ने स्वयं को परमेश्वर सिद्ध करने के लिए अनेकों लीलाएं व चमत्कार किए। आज से लगभग 508 वर्ष पूर्व (मास माघ, शुक्ल पक्ष, तिथि एकादशी वि. स. 1575 सन् 1518 को) परमेश्वर कबीर बंदी छोड़ जी ने उत्तरप्रदेश के मगहर कस्बे से लाखों लोगों के सामने सशरीर सतलोक (ऋतधाम) को प्रस्थान किया था। इसी उपलक्ष्य में वर्तमान में कबीर परमेश्वर के अवतार संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में तीन दिवसीय अद्भुत भंडारे का आयोजन 27 से 29 जनवरी 2026 तक सतलोक आश्रमों में किया जा रहा है। जिसमें आप सभी सहपरिवार सादर आमंत्रित हैं।
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#न_जन्मा_न_मरा
आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज ने परमेश्वर कबीर साहेब जी द्वारा माघ माह शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी विक्रमी संवत 1575 (सन् 1518) को मगहर से लाखों लोगों के सामने से सशरीर सतलोक जाने का वर्णन करते हुए कहा है कि -
देख्या मगहर जहूरा सतगुरु, देख्या मगहर जहूरा हो।
काशी में कीर्ति कर चाले, झिलमिल देही नूरा हो।
कीन्हा मगहर पियाना सतगुरु, कीन्हा मगहर पियाना हो।
दोनो दीन चले संग जाके, हिन्दू-मुसलमाना हो।।
माघ महीने की शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि.सं. 1575 सन् 1518 को अविनाशी परमात्मा कबीर साहेब जी मगहर से सशरीर सतलोक गये। उनके शरीर के स्थान पर केवल सुगन्धित पुष्प मिले थे।
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#न_जन्मा_न_मरा
508 वर्ष पहले परमेश्वर कबीर साहेब जी ने एक ऐसी लीला की जो इतिहास बन गई और इस तरह की लीला परमात्मा स्वयं ही करते हैं।
कबीर साहेब जी 120 वर्ष की आयु में मगहर में शरीर त्यागने की बात कह कर लाखों लोगों समेत मगहर गए और सफेद चादर ओढ़कर लेट गए।
तभी आकाशवाणी करते हैं -
"उठा लो पर्दा, नहीं है मुर्दा।"
और हुआ भी वैसा ही चादर उठाने पर, शरीर के स्थान पर सुगंधित फूल मिले। और कबीर परमात्मा सशरीर अपने सतलोक गए।
इस भ्रम को तोड़ने के लिए कि जो मगहर में मरता है वह गधा बनता है और काशी में मरने वाला स्वर्ग जाता है। कबीर परमात्मा मगहर गए।
कबीर साहेब के मगहर पहुँचने के बाद बिजली खाँ ने कहा कि महाराज जी स्नान करो। कबीर साहेब ने कहा कि बहते पानी में स्नान करूँगा। बिजली खान ने कहा कि सतगुरू देव यहाँ पर साथ में एक आमी नदी है, वह भगवान शिव के श्राप से सूखी पड़ी है। उसमें पानी नहीं है।
उस नदी पर जा कर साहेब ने हाथ से ऐसे इशारा किया था जैसे यातायात (ट्रैफिक) का सिपाही रूकी हुई गाड़ियों को जाने का संकेत करता है। वह आमी नदी पूरी भरकर चल पड़ी। (यह आमी नदी वहाँ पर अभी भी विद्यमान है) सब ने जय जयकार की।
-परम संत रामपाल जी महाराज
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#न_जन्मा_न_मरा
मगहर में मरने वाला गधा बनता है— इस अंधविश्वास को मिटाने के लिए परमेश्वर कबीर साहेब जी ने मगहर से सशरीर सतलोक गमन किया।
संत गरीबदास जी महाराज अपनी वाणी में बताते हैं -
गरीब,भूमि भरोसे डूब है, कल्पत है दोहू दीन
सब का सतगुरु कुल धनी, मगहर भये ल्यौलीन।।
कबीर साहेब वि.स. 1575 सन् 1518 माघ महीने की शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी को धार्मिक सामंजस्य और भाईचारे की जो विरासत छोड़कर गए हैं, उसे मगहर में आज भी जीवंत रूप में देखा जा सकता है। मगहर में जहाँ से कबीर जी सहशरीर सतलोक गए थे, वहां आज भी यादगार मौजूद है।
कबीर, विहंसी कहयो तब तीनसै, मजार करो संभार।
हिन्दू तुरक नहीं हौ, ऐसा वचन हमार।।
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#न_जन्मा_न_मरा
दो चादर और फूल मिले—शरीर नहीं।
यही सत्य था।
हिंदू-मुस्लिम विवाद युद्ध में बदल सकता था, पर कबीर साहेब ने उसे रोका।
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