#दुर्लभ_दर्शन_संत_के करलो किस्मत वालों
Sant Rampal Ji Maharaj #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
#🙏कर्म क्या है❓ #😇मन शांत करने के उपाय #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
#Durlabh_Darshan_Sant_Ke
. मनुष्य का उम्र
वैसे तो अध्यात्म में मनुष्य का जन्म दिन उस तारीख को माना जाता है जिस तारीख को वह सदगुरु से नाम दीक्षा प्राप्त करता है और इसी जन्म दिन के अनुसार उसकी उम्र का निर्धारण होता है। परन्तु ऐसी भी मान्यता है कि भजन कीर्तन, सत्संग, नाम सुमिरण की अवधि के आधार पर भी उम्र का निर्धारण होता है।
एक आदमी किसी गाँव की श्मशान भूमि के पास से गुजर रहा था जहाँ पत्थरों पर मरने वाले की उम्र लिखी हुई देखी 5 वर्ष, 8 वर्ष,10 वर्ष और 20 वर्ष। उस आदमी ने सोचा कि इस गांव में सभी की मृत्यु अल्प आयु में ही हो जाती है। पूछने पर गांव वाले कहने लगे कि हमारे गांव में रिवाज़ है कि आदमी सारा दिन काम काज करके, फिर भगवान का भजन कीर्तन, जीव की सेवा करके, रात को भोजन करने के बाद, जब वह सोने जाता है, तब वो अपनी डायरी के अंदर यह बात लिखता है कि आज कितना समय भगवान का सत्संग, भजन सुमिरन किया।
जब उस आदमी की मृत्यु होती है, तब उसकी लिखी हुई डायरी लेकर उसके द्वारा किए हुए भजन सिमरन के समय को जोड़ कर हम उसे महीने और साल बनाकर उसे पत्थरों पर लिख देते हैं क्योंकि इंसान की असली आयु तो वही है जो उसने भगवान के भजन सुमिरन में बिताई है, इंसान का बाकी जीवन तो दुनिया-दारी में ही व्यर्थ चला गया।
दुसरी बात ये कि व्यक्ति मे परमात्मा के प्रति श्रद्धा और दया धर्म जन्म के साथ बच्चों मे भावना भर दी जानी चाहिए। तीन बर्ष का बच्चा नाम सुमरन के लायक हो जाता है। तीन साल के बच्चे को परमात्मा के नामदान से जोड देना चाहिये ताकि उसका परमात्मा पर विश्वास रहे। छोटे बच्चों मे जैसी भावना डाली जायेगी, बडा होकर वैसा ही आचरण ग्रहण करता है।
कुछ पंथ व समाज के लोग कह देते है कि भक्ति तो बुढापा मे होनी चाहिए। बच्चों की उम्र तो खेलने और पढने की होती है। कुछ हद तक हम जैसे संस्कार बच्चों को देते है वैसे बडा होने पर होता है। यदि बचपन मे परमात्मा के प्रति श्रद्धा और विश्वास नही हो तो बाद मे विश्वास होना और भक्ति करना मुश्किल होता है। फिर हमे अपनी-अपनी जिन्दगी का नही पता। शरीर नश्वर है। कब प्राण निकल जाये। जीवन बुढापा आने तक इंतजार नही करेगा।
Darshan Karlo Kismat Walo
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सच्चे संत के दर्शन मन को शांति और आत्मा को सच्चा आनंद प्रदान करते हैं।
संत रामपाल जी महाराज द्वारा दिया गया तत्वज्ञान लाखों लोगों का जीवन बदल रहा है।
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“दर्शन साधु का, परमात्मा आवै याद।”
संत के दर्शन से मन में ईश्वर की भक्ति जागती है और जीवन सफल बनता है।
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संत रामपाल जी महाराज के संदेश से हजारों परिवार नशा और बुराइयों से दूर हुए हैं।
कबीर साहेब कहते हैं — संत मिलन सबसे बड़ा पुण्य है।
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जब पूर्ण संत मिल जाएं तो जीवन का उद्देश्य पूरा हो जाता है। संतों की वाणी मानव जीवन को सही दिशा देने वाली दिव्य रोशनी है।
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कबीर साहेब ने कहा —
“संत मिलन कूँ जाइए, दिन में कई-कई बार।”
संत संगति मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा लाभ है।
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#GodNightMonday
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धरम धसकत है नहीं, धसकें तीनूं लोक!
खैरायत में खैर हैं, कीजै आत्म पोष!!
धर्म कभी नष्ट नहीं होता तीनों लोक नष्ट हो जाते हैं (खैरायत) दान-धर्म करने से (खैर) बचाव है। इसलिए धर्म-भण्डारा (लंगर) करके धर्म करना चाहिए।
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तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
#🙏शाम की आरती🪔 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गुरु महिमा😇 #😇मन शांत करने के उपाय













