jiya
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#🌙 गुड नाईट
🌙 गुड नाईट - night Good खुदा ना करे की ऐसा दिन आए तुम हे याद करे ओर तुम हे नींद आए हम नेहा लेखक night Good खुदा ना करे की ऐसा दिन आए तुम हे याद करे ओर तुम हे नींद आए हम नेहा लेखक - ShareChat
Good morning 🌄 all family #goo🌞d morning☀️
goo🌞d morning☀️ - Good morning 30/11/2025 Sunday परिवार को मालिक बनकर नहीं माली बनकर संभालो क्योंकि जिस बगिया का মালী अच्छा होता है वहाँ हर फूल महकता है gRamram walia Good morning 30/11/2025 Sunday परिवार को मालिक बनकर नहीं माली बनकर संभालो क्योंकि जिस बगिया का মালী अच्छा होता है वहाँ हर फूल महकता है gRamram walia - ShareChat
😮😮kiya hai ye #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👍 डर के आगे जीत👌 #❤️जीवन की सीख
📖जीवन का लक्ष्य🤔 - ShareChat
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12000 sal baad 😔 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #👍 डर के आगे जीत👌
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00:11
#🖼3D Painting 🖌️🎨
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#🌹🙏जय गुरु जी शुक्राना गुरुजी महाराज 🌹
🌹🙏जय गुरु जी शुक्राना गुरुजी महाराज 🌹 - 0^ 8&%~4" 0^ 8&%~4" - ShareChat
#jaimaadurga👣🌺🌼🏵️🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🏵️🏵️🌸🌸
jaimaadurga👣🌺🌼🏵️🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌺🌺🌺🌺🌺🌺🏵️🏵️🌸🌸 - चालीसा W दुर्गा नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्चे दुःख हरनी।।  निराकार है ज्योति तुम्हारी। तिहू लोक फैली उजियारीI।  शशि ललाट मुख महा विशाला। नेग्र लाल भृकुटि विकराला ।l रूप मातु को अधिक दरश करत जन अतिः सुख पावे। dहावे  तुम ससार शक्ति लय कीना। पालन हेत अन्न घन दीना। तुमही आदि सुन्दरी बाला।l अन्नपरना हुई जिग पाला हारी। तुम गौरी शिव शकर प्यारी। সলয কাল ম৭ নাহান शिव योगी तुम्हरे गुण गारवे तुम्हे नित ध्यावै । au =107 सरस्वती को तम घारा। दे तबद्धि ऋषि मुनिन उबारा। 40e नरसिह को अम्वा। परगट भई फाड कर खम्वा।। ஏ77 रक्षा करि प्रहलाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो। लद्ष्मी रूपघरो जग माही श्री नारायण अग समाही । क्षीरसिंघु॰मे करत चिलासा। दयासिंघु दीजै मन आसा।। हिगलाज म तम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी ।l मातगी धूमावती माता। भुचनेश्वरि बगला सुख दाता। श्री भेरव तारा जग तारिणी। क्षिन्न लाल भवदुख निवारिणी।l केहरि चाहन सोहे भवानी লাম়য বরীয বলল সমানানীIl करमे खप्पर खडग विराजे जाको देखकाल डर भाजे। सोहे अस्त्र और त्रिसूला। जाते उठत हियःशूला। 214 নযক্ষৌৎ ৭ विराजत। तिह लोक मे डका बाजत।  तम्ही  शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे रक्तवीज शखन सहारे। महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघभार मही अकुलानी। रूप कराल काली को घारा। सेन सहित तुम तिहि सहारा।  परी गाढ सन्तन परजव जव। भई सहाय मात तम तव तब। पुरी औरों सव लोका। तव महिमा सय रहे अशोका।  37 ज्वाला मै हे ज्योति तम्हारी। तम्हे सदा पूरजै नरनारी। प्रेम रभक्ति से॰जोजस गावे। दुःख दारिद्र निकट नही आवै। प्यावे तम्ह जी नरमन लाई। जन्म मरणताको छुट जाई। जोगी सर मुनि कहत पुकारी। योग नहोयिन शक्ति तम्हारी१।  शकर आचारज तप ठीनो। काम कोध जीति राच लीनो ।l निशि दिन ध्यान घरो शकर को। TTlIl কাল ন্চি ক্ষাচ समिरो शक्त रूपःको मरम नःपायो। शक्ति गरई तय मन पछतायो। हुई कीर्ति बखानी। जिजेजै जगदम्ब भवानी  शरणागत भई प्रसन्न आदि जगदम्या। दई शक्ति नहि कीन विलम्या। चिन कोन हरे दुःख मेरो।।  मोको मातु कष्ट अति घेरो। तम आशा तृष्णा निपट सतावे  रिप मूरख मोहि अति डर पावे शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरीं इकचित तुम्हे भवानी।l करो कृपाह मातु दयाला। ऋद्धि सिद्धि दे करहु निहाला। जव लगि जियो दया फल पाऊ  जसनैसदा सुनाऊ। तम्हरो  चालीसा जोकोई गा्वे सव सुख भोग परम पद पावे दगा देवीदास शरण निज जानी। करहु कृूपा जगदम्ब भवानी।l चालीसा W दुर्गा नमो नमो दुर्गे सुख करनी। नमो नमो अम्चे दुःख हरनी।।  निराकार है ज्योति तुम्हारी। तिहू लोक फैली उजियारीI।  शशि ललाट मुख महा विशाला। नेग्र लाल भृकुटि विकराला ।l रूप मातु को अधिक दरश करत जन अतिः सुख पावे। dहावे  तुम ससार शक्ति लय कीना। पालन हेत अन्न घन दीना। तुमही आदि सुन्दरी बाला।l अन्नपरना हुई जिग पाला हारी। तुम गौरी शिव शकर प्यारी। সলয কাল ম৭ নাহান शिव योगी तुम्हरे गुण गारवे तुम्हे नित ध्यावै । au =107 सरस्वती को तम घारा। दे तबद्धि ऋषि मुनिन उबारा। 40e नरसिह को अम्वा। परगट भई फाड कर खम्वा।। ஏ77 रक्षा करि प्रहलाद बचायो। हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो। लद्ष्मी रूपघरो जग माही श्री नारायण अग समाही । क्षीरसिंघु॰मे करत चिलासा। दयासिंघु दीजै मन आसा।। हिगलाज म तम्हीं भवानी। महिमा अमित न जात बखानी ।l मातगी धूमावती माता। भुचनेश्वरि बगला सुख दाता। श्री भेरव तारा जग तारिणी। क्षिन्न लाल भवदुख निवारिणी।l केहरि चाहन सोहे भवानी লাম়য বরীয বলল সমানানীIl करमे खप्पर खडग विराजे जाको देखकाल डर भाजे। सोहे अस्त्र और त्रिसूला। जाते उठत हियःशूला। 214 নযক্ষৌৎ ৭ विराजत। तिह लोक मे डका बाजत।  तम्ही  शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे रक्तवीज शखन सहारे। महिषासुर नृप अति अभिमानी। जेहि अघभार मही अकुलानी। रूप कराल काली को घारा। सेन सहित तुम तिहि सहारा।  परी गाढ सन्तन परजव जव। भई सहाय मात तम तव तब। पुरी औरों सव लोका। तव महिमा सय रहे अशोका।  37 ज्वाला मै हे ज्योति तम्हारी। तम्हे सदा पूरजै नरनारी। प्रेम रभक्ति से॰जोजस गावे। दुःख दारिद्र निकट नही आवै। प्यावे तम्ह जी नरमन लाई। जन्म मरणताको छुट जाई। जोगी सर मुनि कहत पुकारी। योग नहोयिन शक्ति तम्हारी१।  शकर आचारज तप ठीनो। काम कोध जीति राच लीनो ।l निशि दिन ध्यान घरो शकर को। TTlIl কাল ন্চি ক্ষাচ समिरो शक्त रूपःको मरम नःपायो। शक्ति गरई तय मन पछतायो। हुई कीर्ति बखानी। जिजेजै जगदम्ब भवानी  शरणागत भई प्रसन्न आदि जगदम्या। दई शक्ति नहि कीन विलम्या। चिन कोन हरे दुःख मेरो।।  मोको मातु कष्ट अति घेरो। तम आशा तृष्णा निपट सतावे  रिप मूरख मोहि अति डर पावे शत्रु नाश कीजै महारानी। सुमिरीं इकचित तुम्हे भवानी।l करो कृपाह मातु दयाला। ऋद्धि सिद्धि दे करहु निहाला। जव लगि जियो दया फल पाऊ  जसनैसदा सुनाऊ। तम्हरो  चालीसा जोकोई गा्वे सव सुख भोग परम पद पावे दगा देवीदास शरण निज जानी। करहु कृूपा जगदम्ब भवानी।l - ShareChat
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