
Pt,Akash kr,Pandey
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🔥🚩वैदिक ब्राह्मण 🙏 पुराण प्रवक्ता🚩🙏धर्मगुरु🙏
#💼बजट 2026 की 10 बड़ी बातें🗞️ को कहि सकइ प्रयाग प्रभाऊ । कलुष पुंज कुंजर मृगराऊ ।।
श्रीरामचरितमानस
(प्रयागराज का प्रभाव कौन कह सकता है? यदि पाप मदमस्त हाथियों जैसा है श्री तीर्थराज उनका वध सिंह की तरह कर सकता है) #🪔पापांकुशा एकादशी🌸 #📢5 अक्टूबर के अपडेट 📰 #🪔गणाधिप संकष्टी चतुर्थी🌺 #❤️जीवन की सीख
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तीरथपति पुनि देखु प्रयागा। निरखत जन्म कोटि अघ भागा॥
देखु परम पावनि पुनि बेनी। हरनि सोक हरि लोक निसेनी॥4॥
पुनि देखु अवधपुरि अति पावनि। त्रिबिध ताप भव रोग नसावनि॥5॥
भावार्थ
फिर तीर्थराज प्रयाग को देखो, जिसके दर्शन से ही करोड़ों जन्मों के पाप भाग जाते हैं। फिर परम पवित्र त्रिवेणीजी के दर्शन करो, जो शोकों को हरने वाली और श्री हरि के परम धाम (पहुँचने) के लिए सीढ़ी के समान है। फिर अत्यंत पवित्र अयोध्यापुरी के दर्शन करो, जो तीनों प्रकार के तापों और भव (आवागमन रूपी) रोग का नाश करने वाली है॥4-5॥
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#🪔शुभ शनिवार🙏 श्री वेणी माधव मान्धर
सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ने सृष्टि कार्य पूर्ण होने के बाद प्रयाग में प्रथम यज्ञ किया था। पुराणों के अनुसार प्रयाग सभी तीर्थो का उद्गम है। इस पावन नगरी के अधिष्ठाता भगवान श्री विष्णु स्वयं और वे यहाँ भगवान श्री वेणी माधव रूप में विराजमान है। भगवान के प्रयाग में बारह स्वरूप विद्यमान हैं, जिन्हें द्वादश माधव कहा जाता है। जिनमें से भगवान श्री वेणी माधव प्रयाग के प्रधान देवता माने गए हैं क्योंकि इनका निवास गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के संगम से बने त्रिवेणी क्षेत्र के मध्य में स्थित है। संगम स्नान पर्यंत भगवान श्री वेणी माधर्द जी का दर्शन करने से ही पूर्ण पुण्य की प्राप्ति होती है ऐसी मान्यता पुराणों और रामचरित मानस में वर्णित है। इस प्राचीनतम मन्दिर के प्रांगण में श्री चैतन्य महाप्रभु जी वेणी माधव जी का दर्शन करते हुए संकीर्तन एवं नृत्य किया करते थे।
पूजहिं माधव पद जलजाता। परसि अखय बटु हरषहिं गाता॥
भरद्वाज आश्रम अति पावन। परम रम्य मुनिबर मन भावन॥
भावार्थ-
वेणीमाधव के चरणकमलों को पूजते हैं और अक्षयवट का स्पर्श कर उनके शरीर पुलकित होते हैं। भरद्वाज का आश्रम बहुत ही पवित्र, परम रमणीय और श्रेष्ठ मुनियों के मन को भाने वाला है। #📒 मेरी डायरी #🪔पापांकुशा एकादशी🌸 #🌷शुभ रविवार #🏡मेरी जीवन शैली
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#📢अविमुक्तेश्वरानंद का CM योगी को अल्टीमेटम 😮 पातालपुरी अक्षय वट दर्शन संगम प्रयागराज।
बटु बिस्वास अचल निज धरमा। तीरथराज समाज सुकरमा॥
सबहि सुलभ सब दिन सब देसा। सेवत सादर समन कलेसा॥6॥
भावार्थ-
(उस संत समाज रूपी प्रयाग में) अपने धर्म में जो अटल विश्वास है, वह अक्षयवट है और शुभ कर्म ही उस तीर्थराज का समाज (परिकर) है। वह (संत समाज रूपी प्रयागराज) सब देशों में, सब समय सभी को सहज ही में प्राप्त हो सकता है और आदरपूर्वक सेवन करने से क्लेशों को नष्ट करने वाला है॥6॥ #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें #moj_content












