राजा राष्ट्रकृतं पापं राज्ञः पापं पुरोहितः।
भर्ता च स्त्रीकृतं पापं शिष्य पापं गुरस्था।।
अर्थात- राष्ट्र के अहित का जिम्मेदार राजा का पाप होता है, राजा के पाप का जिम्मेदार उसका पुरोहित (मन्त्रीगण) होता है, स्त्री के गलत कार्य का जिम्मेदार उसका पति होता है और शिष्य के पाप का जिम्मेदार गुरु होता है। #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #📲LPG वायरल मीम्स🤣 #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें #🆕 ताजा अपडेट