#🪔भौम प्रदोष व्रत🙏📿 #🚀SC बूस्ट के साथ Views को सुपरचार्ज करें #🌷शुभ रविवार #🪔शुभ शनिवार🙏 एक राजस्थानी लोक दोहा देखिए
“इश्क, मुश्क, खाँसी, खुशी, खैर, खून, मदपान ।
इता छिपायां न छिपै, परगट होत निदान ॥”
इससे मिलता जुलता दोहा रहीम जी भी है
खैर खून खांसी खुशी
बैर प्रीति मद्यपान।
रहिमन छिपाए ना छिपे
जाने सकल जहान।।
प्रेम (इश्क), इत्र की सुगंध (मुश्क), खाँसी, खुशी, भलाई (खैर), खून और मदपान (शराब पीना) — ये सात बातें ऐसी हैं जिन्हें कितना भी छिपाने की कोशिश करो, अंत में प्रकट होकर ही रहती हैं।
जैसे प्रेम हो तो चेहरे से झलकता है,
खुशी आँखों में दिख जाती है,
इत्र की खुशबू हवा में फैल जाती है,
खाँसी दबाए नहीं रुकती,
खून कहीं न कहीं दिखाई देता है,
भलाई (अच्छा कर्म) और नशा (मदपान) भी अंततः प्रकट हो ही जाते हैं।