
Sameer Dharmik
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#🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🕉 #om #bhakti #16 february *किसकी भक्ति करें और क्यों करें* ✨🌼
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मनुष्य के जीवन में भक्ति का बहुत बड़ा स्थान है। हर व्यक्ति किसी न किसी की भक्ति करता ही है—कोई धन की, कोई पद की, कोई किसी व्यक्ति की, और कोई परमात्मा की। पर शास्त्र हमें समझाते हैं कि भक्ति उसी की करनी चाहिए जो पूर्ण, शुद्ध और सच्चा हो। क्योंकि जिस चीज़ का हम बार-बार स्मरण करते हैं, धीरे-धीरे हमारा मन उसी जैसा बन जाता है। जैसे लोहे का गोला अग्नि में रहकर लाल हो जाता है, वैसे ही मन जिस पर टिकता है, उसका स्वभाव ग्रहण कर लेता है। अगर हम केवल धन, वस्तु या मनुष्य की पूजा करेंगे तो हमारा मन भी उन्हीं सीमित चीज़ों में उलझा रहेगा। लेकिन यदि हम परमात्मा की भक्ति करेंगे, तो हमारे भीतर प्रेम, सत्य, धैर्य और शांति जैसे गुण जागेंगे। इसी कारण वेद और उपनिषद कहते हैं कि परमात्मा ही भक्ति के योग्य है, क्योंकि वही सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान और सबका कल्याण करने वाला है।
वेदों में बार-बार यह शिक्षा मिलती है कि मनुष्य को सत्य, ज्ञान और ईश्वर के मार्ग पर चलना चाहिए। यजुर्वेद में कहा गया है—“अन्धन्तमः प्रविशन्ति…” अर्थात जो अज्ञान में फँसे रहते हैं, वे अंधकार में जाते हैं। इसका अर्थ है कि केवल जड़ वस्तुओं में उलझकर जीवन का सच्चा उद्देश्य नहीं मिलता। वहीं केनोपनिषद बताता है—“श्रोत्रस्य श्रोत्रम्…” यानी परमात्मा ही इन्द्रियों का भी आधार है। इसका अर्थ है कि जो शक्ति हमें देखने-सुनने-सोचने की क्षमता देती है, वही परमात्मा है। इसलिए उसी का स्मरण करने से आत्मा को बल मिलता है। जैसे एक बच्चा अपने अच्छे गुरु से सीखकर संस्कारी बनता है, वैसे ही परमात्मा का ध्यान करने से मन शुद्ध होता है। जब हम भोजन से पहले प्रार्थना करते हैं, किसी की मदद करते हैं, या सत्य बोलते हैं—तो यह सब परमात्मा की भक्ति ही है।
भक्ति का अर्थ केवल मंदिर जाना नहीं है, बल्कि अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाना है। माता-पिता की सेवा करना, गरीब की मदद करना, सच्चाई बोलना, और अपने मन को शांत रखना—ये सब सच्ची भक्ति के उदाहरण हैं। जैसे कठोपनिषद में कहा गया है कि परमात्मा ही आत्मा का सच्चा आधार है। जब मनुष्य परमात्मा पर भरोसा करता है, तो कठिन समय में भी हिम्मत नहीं हारता। भक्ति से मन को शांति मिलती है, क्रोध कम होता है और जीवन सरल बनता है। इसलिए शास्त्र हमें सिखाते हैं कि भक्ति का अर्थ है—परम सत्य को याद रखना और उसके गुण अपने जीवन में उतारना। जब हम प्रेम, दया और सत्य को अपनाते हैं, तभी हमारी भक्ति सफल होती है। यही सच्चा धर्म है, यही सच्चा सुख है।
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🌼✨ *सार* ✨🌼
*जिसकी भक्ति करते हैं, हम धीरे-धीरे उसी जैसे बन जाते हैं—इसलिए परम सत्य और परमात्मा की ही भक्ति करें।*
*सच्ची भक्ति वही है जो हमारे जीवन में प्रेम, सत्य और शांति लाए।*
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#🛕महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं🚩 #🔱महाशिवरात्रि Status 🪔 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🕉 शिव भजन #🔱बम बम भोले🙏
#★ स्वामी दयानन्द सरस्वती जयन्ती #स्वामी दयानन्द सरस्वती जयंती ##🌺महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती🌹 #💐स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती💐 #महर्षि
#good morning #🌞 Good Morning🌞 #🙏प्रातः वंदन #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🌞सुप्रभात सन्देश
#मेरे #राम #कैसे #हैं #जय श्रीराम *मेरे राम कैसे हैं*🚩
एक दिन एक दंपत्ति अपने 10 साल के बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास आया। उन्होंने फ़ाइल डॉक्टर साहब की टेबल पर रखी। डॉक्टर ने फ़ाइल देखी और बच्चे की जाँच की। फिर डॉक्टर ने बच्चे से कहा, “बेटा, तुम थोड़ा बाहर बैठो, मैं तुम्हारे मम्मी-पापा से बात करता हूँ।”
माता-पिता बोले, “साहब, उसे सब पता है, इसलिए आप हमारी चर्चा उसी के सामने कर सकते हैं।”
डॉक्टर बोले, “मैंने पहली बार ऐसा परिवार देखा है जिनके चेहरे पर डर नहीं है।”
उन्होंने कहा, “साहब, शुरू में हम भी बहुत परेशान थे, लेकिन धीरे-धीरे भगवान पर भरोसे और विश्वास से हम तीनों का मनोबल मजबूत होता गया।”
डॉक्टर ने कहा, “देखिए, बच्चे के दिल की सर्जरी करनी पड़ेगी। मामला गंभीर है। 50-50 संभावना है। अगर सफल हुआ तो ज़िंदगी भर दिल की तकलीफ़ नहीं होगी, और अगर सफल न हुआ… तो आप समझ ही रहे हैं…”
माता-पिता बोले, “तो हमें क्या करना चाहिए?”
डॉक्टर ने कहा, “मेरे अनुसार मरते-मरते जीने से बेहतर है कि एक बार जोखिम उठा लिया जाए।”
वे डॉक्टर से सहमत हो गए।
जब उन्होंने डॉक्टर से शुल्क पूछा, तो डॉक्टर बोले, “आम तौर पर मैं एडवांस लेता हूँ, लेकिन आपके केस में ऑपरेशन के बाद बात करेंगे।” और उन्होंने तारीख दे दी।
ऑपरेशन के दिन बच्चा और माता-पिता समय पर पहुँचे। किसी के चेहरे पर डर नहीं था। वे बहुत शांत थे। यह केस डॉक्टर के जीवन का एक उदाहरण बन गया।
ऑपरेशन थिएटर में बच्चे को टेबल पर लिटाया गया। एनेस्थीसिया देने से पहले डॉक्टर ने उसके सिर पर हाथ फेरते हुए प्यार से पूछा,
“बेटा, तुम्हारा नाम क्या है?”
बच्चे ने मुस्कुराकर कहा, “आनंद।”
डॉक्टर ने मज़ाक में कहा, “बेटा, तुम्हारे नाम की तरह ही तुम हमेशा आनंद में रहो। ऑपरेशन शुरू करने से पहले कुछ कहना है?”
बच्चा बोला, “साहब, दिल क्या होता है?”
डॉक्टर बोले, “बेटा, दिल यानी हृदय, जिसकी सर्जरी आज हम करेंगे।”
बच्चा बोला, “साहब, मम्मी-पापा हमेशा कहते हैं कि हर इंसान के दिल में राम रहते हैं।
तो जब आप मेरा दिल खोलें, तो ज़रा देखना कि मेरे अंदर बैठे राम कैसे हैं, फिर मुझे बताना कि वे कैसे दिखते हैं।”
डॉक्टर की आँखें भर आईं।
डॉक्टर ने अपने स्टाफ को पूरा केस पहले ही समझा दिया था, इसलिए सबकी आँखें नम हो गईं।
डॉक्टर बोले, “हज़ारों ऑपरेशन मैंने किए हैं, लेकिन पता नहीं क्यों, इस बच्चे का ऑपरेशन करते हुए मेरा मन और हाथ काँप रहे हैं।”
उन्होंने आँखें बंद कीं और भगवान से प्रार्थना की—
“अब तक मैंने हर ऑपरेशन को पेशे की तरह किया है,
पर यह ऑपरेशन श्रद्धा और विश्वास पर आधारित है।
मैं तो बस दिल की सर्जरी करता हूँ,
पर तू ही उसका सर्जन है।
मेरे इस प्रयास को सफल बना।”
कहकर उन्होंने ऑपरेशन शुरू किया।
ऑपरेशन आगे बढ़ रहा था, सफलता की पूरी संभावना थी,
लेकिन अचानक बच्चे का ब्लड प्रेशर गिरने लगा, शरीर ठंडा पड़ने लगा, और अंत में… सब शांत हो गया।
डॉक्टर की आँखों में आँसू आ गए —
“हे भगवान! तू जीत गया, मैं हार गया…”
कहकर उन्होंने थिएटर की सारी लाइटें ऑन कीं और हाथ धोने लगे।
तभी अचानक उन्हें बच्चे के शब्द याद आए —
“जब मेरा दिल खोलो तो देखना, राम कैसे हैं…”
डॉक्टर तुरंत बच्चे के दिल की ओर देखे और ज़ोर से बोले —
“क्या तुम्हें राम दिख रहे हैं?”
इतना कहते ही एक अद्भुत चेतना बच्चे के दिल में लौट आई,
दिल फिर से धड़कने लगा!
पूरा स्टाफ खुशी से चिल्ला उठा —
“जय श्री राम!”
ऑपरेशन पूरा हुआ और बच्चा बच गया।
डॉक्टर ने फीस नहीं ली और कहा —
“हज़ारों ऑपरेशन किए,
पर कभी यह नहीं सोचा कि राम कहाँ हैं?
इस बच्चे ने आज मुझे दिखा दिया कि राम हमारे दिल में रहते हैं।”
जब हम अपनी बुद्धि के दरवाज़े बंद करते हैं, तब भगवान अपने दरवाज़े खोलता है।
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#💐स्वामी दयानंद सरस्वती की जयंती💐 #महर्षि ##🌺महर्षि दयानन्द सरस्वती जयंती🌹 #स्वामी दयानन्द सरस्वती जयंती की ओर लौटने का आह्वान करने वाले सत्य और स्वाभिमान के पुजारी*🍁
महर्षि दयानंद सरस्वती ने समाज को अंधविश्वास से मुक्त कर
ज्ञान, तर्क और धर्म की
नवचेतना प्रदान की।
उनका जीवन केवल एक संत का जीवन नहीं,
बल्कि एक क्रांति था—
विचारों की, आत्मसम्मान की और
भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण की।
*महर्षि दयानंद सरस्वती जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि प्रणाम।*🙏🙏 #★ स्वामी दयानन्द सरस्वती जयन्ती
#🌸 सत्य वचन #👌 अच्छी सोच👍 #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान *धन का सदुपयोग और सरल जीवन का मार्ग* ❗
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आजकल मनुष्य अपनी आवश्यकताओं को आवश्यकता से अधिक बढ़ा रहा है। जितनी कृत्रिम जरूरतें बढ़ती हैं, उतना ही खर्च और तंगी का अनुभव होता है। ऐश-आराम, दिखावा, फैशन, मिथ्या गर्व और फिजूलखर्ची क्षणिक सुख तो देते हैं, पर अंत में चिंता और आर्थिक बोझ बढ़ाते हैं। जब आय का बड़ा भाग इन बनावटी वस्तुओं पर खर्च हो जाता है, तब आवश्यक वस्तुएँ भी महँगी लगने लगती हैं।
वास्तव में मनुष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण उसका शरीर और परिवार का स्वास्थ्य है। भोजन, वस्त्र और मकान जीवन की मूल आवश्यकताएँ हैं। सादा और पौष्टिक भोजन, स्वच्छ वस्त्र तथा सुरक्षित व हवादार निवास जीवन को संतुलित रखते हैं। निरोग शरीर से कार्यशक्ति, उत्साह और दीर्घायु का लाभ मिलता है।
धन का सदुपयोग यही है कि पहले आवश्यक और स्वास्थ्यवर्धक वस्तुओं पर ध्यान दिया जाए। आय शेष बचे तो सीमित और संयमित रूप से आराम की वस्तुएँ ली जाएँ। विलासिता और दिखावे से दूर रहकर सरल जीवन अपनाना ही सच्ची समृद्धि और स्थायी सुख का मार्ग है।
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