
Sameer Dharmik
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#वाणी #की #मधुरता #अत्यंत #प्रभावी की मधुरता - अत्यंत प्रभावी*
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👉 *एक बात ध्यान रखने की है कि "वाणी" की मधुरता का उपयोग संपर्क में आने वाले की प्रसन्नता वृद्धि के साथ-साथ हित कामना के लिए भी किया जा सकता है।* किसी को सत्परामर्श देने के लिए भी यह आवश्यक है कि पहले उसकी अनुकूलता अर्जित की जाए। प्रतिकूलता का मनोमालिन्य बन जाने पर तो हितकारी परामर्श स्वीकारने एवं सहयोग लेने में भी आनाकानी होती देखी गई है।
👉 *व्यक्ति को "अनुकूल" बनाने के लिए सबसे सरल और प्रभावोत्पादक उपाय है कि उसके "गुणों" को तलाश करके वर्णन प्रकाशन किया जाए।* इस प्रकार की कथनी प्रायः मित्रवर्ग में ही होती है। स्वजन शुभेच्छु ही प्रशंसा करते हैं, जिनके मन में कटुत्ता एवं द्वेष भावना होती है, वे प्रायः निंदा करते ही देखे गए हैं। *मोटी बुद्धि अपने पराए का, मित्र-शत्रु का अनुमान प्रस्तुत की गई "प्रशंसा" या "निंदा" के आधार पर ही लगा पाती है।*
👉 *संसार में सर्वथा "गुण विहीन" व्यक्ति कोई भी नहीं। तलाश करने पर बुरा दीखने वाले व्यक्ति में भी कुछ न कुछ "गुण" मिल सकते है।* बिना झूठ बोले भी हर व्यक्ति में जो प्रत्यक्ष-परोक्ष गुण दीख पड़े, पिछले जीवन में उससे जो सत्कर्म बन पड़े हों, उनकी चर्चा कर देना अपनी सद्भावना का प्रकटीकरण है, जिसत्ते व्यक्ति अनुकूल भी बनता है। नरम पड़ने पर अपनी ओर झुकने पर उन परामर्शों को भी दिया और स्वीकार कराया जा सकता है. जो उसके लिए उपयोगी एवं आवश्यक हैं। साथ ही जिसके चरितार्थ होने पर अपना आदर्शवादी उद्देश्य भी पूरा होता है। यह आत्मा की भूख की आंशिक पूर्ति भी है। *"प्रशंसा" के माध्यम से प्रोत्साहन मार्गदर्शन के आधार पर किसी को आगे बढ़ाना, ऊँचा उठाना जितना सरल है, उतना और किसी प्रकार नहीं।* प्रशंसा के उपरांत यह परामर्श भी दिया जा सकता है कि उसमें जो थोड़े-बहुत दोष-दुर्गुण हैं, उन्हें किस प्रकार छोडे, अधिक प्रतिभवान् बनें। *यह कार्य उस दशा में नहीं हो सकता, जिसमें "निंदा" को प्राथमिकता दी जाए, उसे बढ़ा-चढ़ाकर कटु शब्दों में कहा जाए।* इससे चिढ़ एवं दुर्भावना पैदा होती है। *निंदा से खीजा हुआ मनुष्य उस कथन को अपना अपमान मानता है और जो अनुचित करता रहा है, उसी को करते रहने में अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लेता है।* इस प्रकार' निंदा उस उद्देश्य की पूर्ति नहीं करती, जिसका प्रयोजन बुराई को छुड़ा लेना था।
👉 एक चूड़ी बेचने वाला घोड़ी पर चुड़ियाँ लादकर गाँवों में बेचने जा रहा था। *समय-समय पर वह "घोड़ी" को रास्ते में "बेटी-बहन", "देवी-मुन्नी" आदि शब्दों से संबोधित करता जाता था।* रास्ते में मिले व्यक्तियों ने "घोड़ी" को इतना मान देने का कारण पूछा, तो उसने कहा-"मैं अपनी वाणी को परिमार्जित कर रहा हूँ, ताकि जिन महिलाओं के बीच मुझे व्यापार करना है, उनसे मीठा बोलकर अधिक बेचकर, अधिक लाभ प्राप्त कर सकूँ। *यह प्रवृत्ति हम में से प्रत्येक को पैदा करनी चाहिए। प्रशंसा करने का अवसर जब भी मिले, उसे व्यक्त करने का अवसर चूकना नहीं चाहिए।* इससे अपनी प्रतिष्ठा बढ़ती है, श्रेय मिलता है एवं अतिरिक्त इस आधार पर उनका मार्गदर्शन एवं दोष-निराकरण भी संभव हो सकता है।
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*मानव जीवन - एक बहुमूल्य उपहार पृष्ठ २५* *CODE VN 40*
*🍁।।पं श्रीराम शर्मा आचार्य।।🍁*
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Psychological strength isn’t built in public. It’s built in the quiet decisions you make every day.
I saw a list of “psychological truths” recently. Nothing groundbreaking. But very few people actually live them.
🔹Silence is often more powerful than proving your point.
🔹When trust is broken, words don’t fix it. Changed behaviour does.
🔹Control your actions. React less.
🔹Honesty filters people out. That’s alignment, not loss.
🔹Character matters more than charm.
🔹You can’t control everything. Trying to will drain you.
🔹A small circle and a clear mind create peace.
We spend too much time managing how we’re perceived and not enough time managing our responses.
Trying to win every argument.
Saying sorry without changing behaviour.
Responding emotionally and calling it passion.
Keeping people around out of habit instead of standards.
That isn’t strength. It’s a lack of discipline.
Real growth is quieter than people think.
It looks like holding your tongue when you could prove a point.
Following through when no one is watching.
Letting certain relationships fade instead of forcing them.
Accepting what you can’t control and focusing on what you can.
Self-leadership shows up in your reactions, your boundaries, and your consistency.
Which of these are you currently getting right and where are you still slipping? #7 #psychological #truth #in #life
#जय श्री साँवरिया सेठ💐 #जय श्री साँवरिया जी सेठ #लो कर लो ♥️साँवरिया सेठ♥️ के दिदार🙏 #भक्ति #जय श्री श्याम के श्रृंगार दर्शन प्रभु श्री सांवलिया सेठ जी के मंडफिया धाम चित्तौड़गढ़ राजस्थान से*
#suprabhat #🌞 Good Morning🌞 #🌞सुप्रभात सन्देश #🙏प्रातः वंदन #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं
#जय श्री साँवरिया जी सेठ #लो कर लो ♥️साँवरिया सेठ♥️ के दिदार🙏 #जय श्री साँवरिया सेठ💐 #जय श्री श्याम #भक्ति सुचना
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समस्त भक्तजनों को सुचीत किया जाता है की आगामी 3 मार्च 2026 को चंद्रग्रहण सुतक के कारण प्रभु श्री सांवलिया सेठ जी के दर्शन बंद रहेगें एवं रंगोत्सव दिनांक 04 मार्च 2026 को मनाया जायेगा। अतः आप सभी श्रद्धालुओं से निवेदन है की भगवान के दर्शन के लिए 3 मार्च 2026 को नही पधारे।
श्री सांवलिया जी मंदिर मण्डल, मण्डफिया, चित्तौड़गढ़ राज.
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