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#🙏धार्मिक पर्यटन स्थल🛕
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*✰कलयुग में सतयुग की शुरूआत भाग - 5✰* जल्द आ रही है *Factful Debates* YouTube Channel पर. #🙏🏻गुरबानी #video #positive #Always Live Positive #social
🙏🏻गुरबानी - ShareChat
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#🤗जया किशोरी जी🕉️ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇
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#🙏 माँ वैष्णो देवी #🌸श्री स्वामी समर्थ🙏 #☀ जय सूर्यदेव
🌸श्री स्वामी समर्थ🙏 - ओन उपासना   सास्विधिम  वर्तत  r]u7` mmiiri: . न सः सिदिम, अवाजीति  अग्नि लगा दिया जब लम्बा , फूंक दिया उस ठांही| पराम. गतिम।। २३।  मखम न परुप ससिग िटिकी शासविथिम দন্নণাখক্hী 3TaTCITTT সাদ ঢালী 7 तत्पन्य गव पुराण उठा फिर पंडित आए, पीछे गरूड़ पढ़ाई। |arn সদলী  पगम TNTT م   गतिको ( गार ) गनिन आावरण कात U- 711 TUII ' ಊT1-r Tvl ] प्रेत शिला पर जा विराजे , पितरों पिण्ड भराई | तस्माच्छास् प्रमा्ण ते का्याकार्यव्यवस्य्ता | शास्तविधानोक कर्म कर्नमिराईसि ।। २४। कामका्यव्गवस्यिती शासनम प्रमाणम शास्ययिधानोनम अरस | २४ | कतम बहुर श्राद्ध खाने कूं आए, काग भए कलि माहीं | ٧ ٧٣٧٢٥    fm মান] 1 মামেণিখিয নিণন Vll कर्म (चो ) dndeufa ' जै सतगुरू की संगति करते , सकल कर्म कटि जाई। ir v EITTMETIITITTINI WTrIITTI TIIITIIT D देपामासम्पनचभागमोगो  अमरपुरी पर आसन होता , जहाँ धूप न छांई। IIITIIJIIT TIT7 T: ~71 Tಐ: TTait ' सूक्ष्मवेद (तत्वज्ञान ) में तथा चारों वेदों तथा इन चारों वेदों के सारांश गीता जी में स्पष्ट किया है कि आन -उपासना (जैसे श्राद्ध कर्म ) नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये शास्त्रों में वर्णित न होने से मनमाना आचरण है जो गीता अध्याय १६ श्लोक २३, २४ में व्यर्थ बताया है। सर्व हिन्दू समाज यह आन -उपासना (श्राद्ध, पितर पूजा ) करते हैं जिससे भक्ति सफलता नहीं होती। जिस कारण से नरकगामी होते हैं तथा प्रेत -पितर, पशु-पक्षी आदि के शरीरों में महाकष्ट उठाते हैं। लिए अधिक जानकारी के چف Sant Rampal Ji Maharaj YouTubel Yonoe Channel @SaintRampalJiMaharaj 2.29M subscribers fl SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD ORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ ओन उपासना   सास्विधिम  वर्तत  r]u7` mmiiri: . न सः सिदिम, अवाजीति  अग्नि लगा दिया जब लम्बा , फूंक दिया उस ठांही| पराम. गतिम।। २३।  मखम न परुप ससिग िटिकी शासविथिम দন্নণাখক্hী 3TaTCITTT সাদ ঢালী 7 तत्पन्य गव पुराण उठा फिर पंडित आए, पीछे गरूड़ पढ़ाई। |arn সদলী  पगम TNTT م   गतिको ( गार ) गनिन आावरण कात U- 711 TUII ' ಊT1-r Tvl ] प्रेत शिला पर जा विराजे , पितरों पिण्ड भराई | तस्माच्छास् प्रमा्ण ते का्याकार्यव्यवस्य्ता | शास्तविधानोक कर्म कर्नमिराईसि ।। २४। कामका्यव्गवस्यिती शासनम प्रमाणम शास्ययिधानोनम अरस | २४ | कतम बहुर श्राद्ध खाने कूं आए, काग भए कलि माहीं | ٧ ٧٣٧٢٥    fm মান] 1 মামেণিখিয নিণন Vll कर्म (चो ) dndeufa ' जै सतगुरू की संगति करते , सकल कर्म कटि जाई। ir v EITTMETIITITTINI WTrIITTI TIIITIIT D देपामासम्पनचभागमोगो  अमरपुरी पर आसन होता , जहाँ धूप न छांई। IIITIIJIIT TIT7 T: ~71 Tಐ: TTait ' सूक्ष्मवेद (तत्वज्ञान ) में तथा चारों वेदों तथा इन चारों वेदों के सारांश गीता जी में स्पष्ट किया है कि आन -उपासना (जैसे श्राद्ध कर्म ) नहीं करनी चाहिए क्योंकि ये शास्त्रों में वर्णित न होने से मनमाना आचरण है जो गीता अध्याय १६ श्लोक २३, २४ में व्यर्थ बताया है। सर्व हिन्दू समाज यह आन -उपासना (श्राद्ध, पितर पूजा ) करते हैं जिससे भक्ति सफलता नहीं होती। जिस कारण से नरकगामी होते हैं तथा प्रेत -पितर, पशु-पक्षी आदि के शरीरों में महाकष्ट उठाते हैं। लिए अधिक जानकारी के چف Sant Rampal Ji Maharaj YouTubel Yonoe Channel @SaintRampalJiMaharaj 2.29M subscribers fl SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL Jl @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD ORG SAINT RAMPAL Jl MAHARAJ - ShareChat
#🙏🏻गुरबानी #🙏शाम की आरती🪔 #🌸श्री स्वामी समर्थ🙏 #🙏माँ लक्ष्मी महामंत्र🌺 #📝गणपति भक्ति स्टेटस🌺
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