मंत्रो में है आपका भविष्य आचार्य हरिन्द्र नारायण
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#आज पंचांग 🙏 #मंत्रो में है आपका भविष्य #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
आज पंचांग 🙏 - ShareChat Sara ?uizidr दिनांक १५ मई २०२६ চ্চ मास दिन - शुक्रवार पक्ष - कृष्ण पक्ष হক মনন शुभ प्रभात 1948 विक्रम संवत - २०८३ ऑपका दिन शुभ हो दिशाशूल - பfSசு 08:31 AM নক্ ক্িয तिथि त्रयोदशी agfen नक्षत्र - अश्विनी  08.14 PM dq fొడ arcuft अभिजित 11:50 AM ম 12:44 PM নক্ मुहूर्त - 10:35 AM ম 12:17 PM নক্ राहु काल  05:16 PM ম 06:10 PM নক यमघण्ट मासिक शिवरात्रि সাল কানন वृषभ संक्रांति आचार्य हरिन्द्र नारायण त्रिपाठी 95964881 न.9935099945, ShareChat Sara ?uizidr दिनांक १५ मई २०२६ চ্চ मास दिन - शुक्रवार पक्ष - कृष्ण पक्ष হক মনন शुभ प्रभात 1948 विक्रम संवत - २०८३ ऑपका दिन शुभ हो दिशाशूल - பfSசு 08:31 AM নক্ ক্িয तिथि त्रयोदशी agfen नक्षत्र - अश्विनी  08.14 PM dq fొడ arcuft अभिजित 11:50 AM ম 12:44 PM নক্ मुहूर्त - 10:35 AM ম 12:17 PM নক্ राहु काल  05:16 PM ম 06:10 PM নক यमघण्ट मासिक शिवरात्रि সাল কানন वृषभ संक्रांति आचार्य हरिन्द्र नारायण त्रिपाठी 95964881 न.9935099945, - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #मंत्रो में है आपका भविष्य
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मंत्रो में है आपका भविष्य - ಗ್೬aಗಲೆ B5hareC al Qjha ಗ Deovrat W ETERNAL TRUTH १५ म्ई २०२६ दिनांक एवं वार 15 #$ 2026, g%qR ~ त्रयोदशी ०८:३१ ए एम तक तत्पश्चात चतुर्दशी तिथि पक्ष, ज्येष्ठ मास पक्ष एवं मास कृष्ण अश्विनी ०८ः१४ पी एम तक तत्पश्चात भरणी नक्षत्र आयुष्मान ०२ः२१ पी एम तक तत्पश्चात सौभाग्य योग वणिज ०८:३१ ए एम तक, करण विष्टि ०६:५४ पी एम तक तत्पश्चात शकुनि _؟٦f٦٩ +g ग्रीष्म ४ उत्तरायन विक्रम सम्वत २०८३ (रौद्र ) १९४८ (पराभव ) शक सम्वत মুর্যীবয ०७:०५ पी एम 05:30 T 71 _ सूयास्त चंद्रोदय ~४:४१ ए एम (१६ मई)D चंद्रास्त ~ ५३१ पी एम सूर्य राशिः मेष 06:28 হ ৎস নক ননংান বুষ चन्द्र राशि मेष ~११:५० ए एम से १२:४५ पी एम ( शुभ) अभिजीत मुहूर्त १०:३६ ए एम से १२:१८ पी एम (अशुभ ) राहुकाल दिशाशूल ~१२:१8 पी एम पश्चिम मध्याह्न व्रत एवं त्योहार वृषभ संक्रान्ति, मासिक शिवरात्रि (*द्रिक पञ्चाङ्ग, नई दिल्ली, भारत के अनुसार) ಗ್೬aಗಲೆ B5hareC al Qjha ಗ Deovrat W ETERNAL TRUTH १५ म्ई २०२६ दिनांक एवं वार 15 #$ 2026, g%qR ~ त्रयोदशी ०८:३१ ए एम तक तत्पश्चात चतुर्दशी तिथि पक्ष, ज्येष्ठ मास पक्ष एवं मास कृष्ण अश्विनी ०८ः१४ पी एम तक तत्पश्चात भरणी नक्षत्र आयुष्मान ०२ः२१ पी एम तक तत्पश्चात सौभाग्य योग वणिज ०८:३१ ए एम तक, करण विष्टि ०६:५४ पी एम तक तत्पश्चात शकुनि _؟٦f٦٩ +g ग्रीष्म ४ उत्तरायन विक्रम सम्वत २०८३ (रौद्र ) १९४८ (पराभव ) शक सम्वत মুর্যীবয ०७:०५ पी एम 05:30 T 71 _ सूयास्त चंद्रोदय ~४:४१ ए एम (१६ मई)D चंद्रास्त ~ ५३१ पी एम सूर्य राशिः मेष 06:28 হ ৎস নক ননংান বুষ चन्द्र राशि मेष ~११:५० ए एम से १२:४५ पी एम ( शुभ) अभिजीत मुहूर्त १०:३६ ए एम से १२:१८ पी एम (अशुभ ) राहुकाल दिशाशूल ~१२:१8 पी एम पश्चिम मध्याह्न व्रत एवं त्योहार वृषभ संक्रान्ति, मासिक शिवरात्रि (*द्रिक पञ्चाङ्ग, नई दिल्ली, भारत के अनुसार) - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - Iaड्य NEhareChal 50 Deoyrat Qiha फ@ ETERNAL TRUTH १५ मई २०२६, शुक्रवार दिन का चौघड़िया ०५:३० ए एम से ०७ः१२ एएम (सामान्य ) য২ লাস---(ওন্ননি) ०७:१२ ए एम से ०८:५४ ए एम (सर्वोत्तम ) 08:५४ ए एम से १०:३६ ए एम 3Td-- (हानि)- 10:36 হ ৎস মী 12:18 দী ৎস কাল १२:१८ पी एम से ०१:५९ पी एम (ওলস) gI 0१:५९ पी एम से ०३:४१ पी एम (अमंगल ) रोग -03:41 9ী ৎস মী 05:23 দী ৎস (अशुभ)- ತಣ -05:23 দী ৎস মী 07:05 দী ৎস (सामान्य) चर रात का चौघड़िया ०७:०५ पी एम से ०८ः२३ पी एम (3{1) रोग (हानि) ०८:२३ पी एम से ०९:४१ पी एम कालः लाभ- - ( उन्नति ) 09:41 97؟?710:59 97؟ उद्वेग - ( अशुभ )v---१०:५९ पी एम से १२:१७ ए एम (१६ मई ) (ওলস) ---12:17 হ ৎস মী 01:35 হ ৎস (16 সন) 9೫: ( सर्वोत्तम ) ०१:३५ ए एम से ०२:५४ ए एम (१६ मई ) अमृत (सामान्य ) --०२:५४ ए एम से ४:१२ ए एम (१६ मई ) चर रोग - (अमंगल ) - -०४:१२ ए एम से ०५:३० ए एम (१६ मई ) द्रिक पञ्चाङ्ग नई दिल्ली, भारत के अनुसार Iaड्य NEhareChal 50 Deoyrat Qiha फ@ ETERNAL TRUTH १५ मई २०२६, शुक्रवार दिन का चौघड़िया ०५:३० ए एम से ०७ः१२ एएम (सामान्य ) য২ লাস---(ওন্ননি) ०७:१२ ए एम से ०८:५४ ए एम (सर्वोत्तम ) 08:५४ ए एम से १०:३६ ए एम 3Td-- (हानि)- 10:36 হ ৎস মী 12:18 দী ৎস কাল १२:१८ पी एम से ०१:५९ पी एम (ওলস) gI 0१:५९ पी एम से ०३:४१ पी एम (अमंगल ) रोग -03:41 9ী ৎস মী 05:23 দী ৎস (अशुभ)- ತಣ -05:23 দী ৎস মী 07:05 দী ৎস (सामान्य) चर रात का चौघड़िया ०७:०५ पी एम से ०८ः२३ पी एम (3{1) रोग (हानि) ०८:२३ पी एम से ०९:४१ पी एम कालः लाभ- - ( उन्नति ) 09:41 97؟?710:59 97؟ उद्वेग - ( अशुभ )v---१०:५९ पी एम से १२:१७ ए एम (१६ मई ) (ওলস) ---12:17 হ ৎস মী 01:35 হ ৎস (16 সন) 9೫: ( सर्वोत्तम ) ०१:३५ ए एम से ०२:५४ ए एम (१६ मई ) अमृत (सामान्य ) --०२:५४ ए एम से ४:१२ ए एम (१६ मई ) चर रोग - (अमंगल ) - -०४:१२ ए एम से ०५:३० ए एम (१६ मई ) द्रिक पञ्चाङ्ग नई दिल्ली, भारत के अनुसार - ShareChat
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मंत्रो में है आपका भविष्य - ShareChat वास्तु सूत्र पूजा घर व शौचालय , सीढ़ी के नीचे न बनायें। पूर्व में रखें। शयन करते समय सिर दक्षिण या अन्नागार , गोशाला , रसोड़घर, गुरुस्थल व पूजा घर के ऊपर शयन कक्ष न बनाएं। पूजा घर में देव प्रतिमा एक बीते (बाए इंच ) से बड़ी न रखें, किसी भी देवता की एक से अधिक ؟ न रखें। या पूर्व की भोजन करते या बनाते समय मुख उत्तर तरफ रखें। शयनकक्ष में युगल पक्षियों का जोड़ा प्रेम मुद्रा में रखें। जिस मकान में सूर्य की किरणें नहीं पड़ती व वायु का प्रवेश नहीं होता वह अशुभ होता है। जो घर पूर्व व उत्तर में नीचा तथा दक्षिण व पश्चिम में उठान वाला होता है वह उन्नतिकारक होता है। ShareChat वास्तु सूत्र पूजा घर व शौचालय , सीढ़ी के नीचे न बनायें। पूर्व में रखें। शयन करते समय सिर दक्षिण या अन्नागार , गोशाला , रसोड़घर, गुरुस्थल व पूजा घर के ऊपर शयन कक्ष न बनाएं। पूजा घर में देव प्रतिमा एक बीते (बाए इंच ) से बड़ी न रखें, किसी भी देवता की एक से अधिक ؟ न रखें। या पूर्व की भोजन करते या बनाते समय मुख उत्तर तरफ रखें। शयनकक्ष में युगल पक्षियों का जोड़ा प्रेम मुद्रा में रखें। जिस मकान में सूर्य की किरणें नहीं पड़ती व वायु का प्रवेश नहीं होता वह अशुभ होता है। जो घर पूर्व व उत्तर में नीचा तथा दक्षिण व पश्चिम में उठान वाला होता है वह उन्नतिकारक होता है। - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ஜகசிர் राहु की संयोगवश जातक को गुंप्त खजाना प्राप्त हो सकता है बृहस्पति मंगल /शुक्रः २. ६/८ भाव में जीवनसाथी के साथ अंडरस्टैंडिंग नहीं बन ३. यदि ७ २.१२ को बृहस्पति कमजोर है और कोई ग्रह नहीं है तो जीवन में ज्यादा सहायता नहीं मिलेगी। बृहस्पति, केतु और शनि राहुः ४. सातवें भाव में जातक निम्न श्रेणी का सेवक बन सकता है ५. यदि बृहस्पति और सूर्य उच्च राशि में होंः जातक पुण्य और धार्मिक स्वभाव का होगा। बृहस्पति और शनि की युति और केतु की 6. संगतिः जातक को दैवीय आशीर्वाद प्राप्त है। बृहस्पति और बुध के ७. 9 या १२+ भावों में जातक किसी शैक्षणिक भावों पर ae: संस्थान में काम करेगा | बृहस्पति से अगले 4 भावों में 2 अशुभ 8. यदि ग्रह आ जाएं तो संन्यास योग बनता है। ९. सिंह राशि में बृहस्पतिः जातक शासन करने की इच्छा रखेगा , यदि नकारात्मक प्रभाव हो तो राजसी जीवन व्यतीत करेगा| १०. मंगल और बृहस्पति तुला राशि में हों और शुक्र बृहस्पति के साथ राशि परिवर्तन कर रहे होंः जातक के एकाधिक प्रेम संबंध होंग ஜகசிர் राहु की संयोगवश जातक को गुंप्त खजाना प्राप्त हो सकता है बृहस्पति मंगल /शुक्रः २. ६/८ भाव में जीवनसाथी के साथ अंडरस्टैंडिंग नहीं बन ३. यदि ७ २.१२ को बृहस्पति कमजोर है और कोई ग्रह नहीं है तो जीवन में ज्यादा सहायता नहीं मिलेगी। बृहस्पति, केतु और शनि राहुः ४. सातवें भाव में जातक निम्न श्रेणी का सेवक बन सकता है ५. यदि बृहस्पति और सूर्य उच्च राशि में होंः जातक पुण्य और धार्मिक स्वभाव का होगा। बृहस्पति और शनि की युति और केतु की 6. संगतिः जातक को दैवीय आशीर्वाद प्राप्त है। बृहस्पति और बुध के ७. 9 या १२+ भावों में जातक किसी शैक्षणिक भावों पर ae: संस्थान में काम करेगा | बृहस्पति से अगले 4 भावों में 2 अशुभ 8. यदि ग्रह आ जाएं तो संन्यास योग बनता है। ९. सिंह राशि में बृहस्पतिः जातक शासन करने की इच्छा रखेगा , यदि नकारात्मक प्रभाव हो तो राजसी जीवन व्यतीत करेगा| १०. मंगल और बृहस्पति तुला राशि में हों और शुक्र बृहस्पति के साथ राशि परिवर्तन कर रहे होंः जातक के एकाधिक प्रेम संबंध होंग - ShareChat
#मंत्रो में है आपका भविष्य #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
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मंत्रो में है आपका भविष्य - ShareChat @Deovarojha [ 15-05-26 वृषभ संक्रान्ति शुक़्रवार वृषभ संक्रांति के दिन खगोलीय परिवर्तन होता है, इस परिवर्तन में सूर्यदेव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं इसलिए वृषभ संक्रांति कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव के ऋषभ रूद्र इस की आराधना श्रेयष्कर मानी गई है। स्वरूप और भगवान सूर्य  ShareChat @Deovarojha [ 15-05-26 वृषभ संक्रान्ति शुक़्रवार वृषभ संक्रांति के दिन खगोलीय परिवर्तन होता है, इस परिवर्तन में सूर्यदेव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं इसलिए वृषभ संक्रांति कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव के ऋषभ रूद्र इस की आराधना श्रेयष्कर मानी गई है। स्वरूप और भगवान सूर्य - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #मंत्रो में है आपका भविष्य
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - ShareChat Deovatगथभ शिव के @ प्रमू ख गण U भेरव 1, 1 भक्ति ओर साहस का प्रतीकनभयओर नकारात्मकता कानाश करते ८ वीरभद्र  2 2 पर्मःकी रका आरअन्याय क विनाश  के लिए प्रकट हए। 3 Tfoiag 3 पनः समुद्रि ओर ऐश्टर्य के रक्षक  भगी को भनोकामनाए पूर्ण करते ७ चंदिस पदमा के समान शीतल ओर कल्याणकारी मनःको शाति प्रदान करते हl ச 5 5 भगवान शिवःक परम भफतओर चाहन निष्ठा ओर समर्पण के प्रतीक  ६. श्रींगी 6 जञान ओरतपःके प्रतीक शिव भक्तिःमे लीन रहने चाले रपि भूगिरिटी  7 7 गहन तप ओर त्याग के प्रतीक  शिव तत्व के जाता ৪; হীল 8 Fரசபகாக शिव के गणो मे प्रमुख ९. गोकर्ण  9. Vaur J7 H41 4 H6r ದ1 दशाने वाले शिव कया के प्रेमी।  १०. घंटाकर्ण  १० सदेव जागत रहने चाले भक्तो की वारह प्रमःख माण पुकार सुनने याले गण भगवान शिव के दिव्य गण हें॰ 11 जिय जो भक्तों की रक्षा करते हे 11. विजय ओरसफलता प्रदान करने वाले  ओर सभी कष्टों का नाश करते हैं। पर्ममागके रक्षक १२. विजय 12 सर्व प्रकार की गपाओ पर विजय दिलाने याले शिव गणा Il ೯೯ Tarಷa Il ShareChat Deovatगथभ शिव के @ प्रमू ख गण U भेरव 1, 1 भक्ति ओर साहस का प्रतीकनभयओर नकारात्मकता कानाश करते ८ वीरभद्र  2 2 पर्मःकी रका आरअन्याय क विनाश  के लिए प्रकट हए। 3 Tfoiag 3 पनः समुद्रि ओर ऐश्टर्य के रक्षक  भगी को भनोकामनाए पूर्ण करते ७ चंदिस पदमा के समान शीतल ओर कल्याणकारी मनःको शाति प्रदान करते हl ச 5 5 भगवान शिवःक परम भफतओर चाहन निष्ठा ओर समर्पण के प्रतीक  ६. श्रींगी 6 जञान ओरतपःके प्रतीक शिव भक्तिःमे लीन रहने चाले रपि भूगिरिटी  7 7 गहन तप ओर त्याग के प्रतीक  शिव तत्व के जाता ৪; হীল 8 Fரசபகாக शिव के गणो मे प्रमुख ९. गोकर्ण  9. Vaur J7 H41 4 H6r ದ1 दशाने वाले शिव कया के प्रेमी।  १०. घंटाकर्ण  १० सदेव जागत रहने चाले भक्तो की वारह प्रमःख माण पुकार सुनने याले गण भगवान शिव के दिव्य गण हें॰ 11 जिय जो भक्तों की रक्षा करते हे 11. विजय ओरसफलता प्रदान करने वाले  ओर सभी कष्टों का नाश करते हैं। पर्ममागके रक्षक १२. विजय 12 सर्व प्रकार की गपाओ पर विजय दिलाने याले शिव गणा Il ೯೯ Tarಷa Il - ShareChat