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#❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🙏 माँ वैष्णो देवी #देश भक्ति #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #माता वैष्णोदेवी
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्मभूमि पर विदेहीभाव में मैं से मुक्त होने पर मानव को जन्म-्मरण से मुक्ति मिल जाती है कल्कि साधक  फलाग माहन अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार मानव  का भौतिक शरीर तीन लोकका संगम स्थल हैं | मानव के तीन स्वरूप है वो तीन लोक के वासी है। मनुष्यरूपी जीवात्मा देवलोकवासी है, जो देवलोकसे कर्मभूमि पर अवतरित होने के लिएप्रकृति के पंचतत्वों से बने भौतिक   शरीर भौतिक   शरीर करता   है। को धारण মানল ct पृथ्वीलोकवासी है, जिसके भीतर विद्यमान पवित्र आत्मा सतलोकवासी  है। कर्मभूमि पर जिसने अपने विराट आत्मस्वरूप को जान लिया, जो मैं স সুনল  होकर विराट आत्मस्वरूप में निष्काम कर्मयोगी बन गया , उसके লিব HTar स्वतःही खुल जाते है, उसे कर्मभूमि पर जन्म -्मरण से ন ব্লাং  मुक्ति मिल जाती है।ज्ञात रहे मानव का भौतिक शरीर पृथ्वीलोकवासी है मनुष्यरूपी सगुण जीवात्मा देवलोकवासी है और इसे धारण करने वाला   निर्गुण  आत्मा विद्यमान रहतीं है, वो मनुष्यरूपी सगुण जीवात्मा के भीतर " सतलोकवासी है।निर्गुण आत्मा को कर्मभूमि पर आत्मकल्याण के लिए देहभाव से मुक्त होकर , देवलोक के जीवात्मस्वरूप को त्यागकर विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बनना होता है। ऐसे कर्मयोगी के लिए मुक्ति के द्वार स्वतःही खुल जाते है तब कर्मयोगी सतलोक में बिना कोई कर्म किये शाश्वत सुख पाता है। आत्मज्ञानी  निष्काम कर्मयोगी बनों अपना मानव जीवन सार्थकबनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्मभूमि पर विदेहीभाव में मैं से मुक्त होने पर मानव को जन्म-्मरण से मुक्ति मिल जाती है कल्कि साधक  फलाग माहन अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार मानव  का भौतिक शरीर तीन लोकका संगम स्थल हैं | मानव के तीन स्वरूप है वो तीन लोक के वासी है। मनुष्यरूपी जीवात्मा देवलोकवासी है, जो देवलोकसे कर्मभूमि पर अवतरित होने के लिएप्रकृति के पंचतत्वों से बने भौतिक   शरीर भौतिक   शरीर करता   है। को धारण মানল ct पृथ्वीलोकवासी है, जिसके भीतर विद्यमान पवित्र आत्मा सतलोकवासी  है। कर्मभूमि पर जिसने अपने विराट आत्मस्वरूप को जान लिया, जो मैं স সুনল  होकर विराट आत्मस्वरूप में निष्काम कर्मयोगी बन गया , उसके লিব HTar स्वतःही खुल जाते है, उसे कर्मभूमि पर जन्म -्मरण से ন ব্লাং  मुक्ति मिल जाती है।ज्ञात रहे मानव का भौतिक शरीर पृथ्वीलोकवासी है मनुष्यरूपी सगुण जीवात्मा देवलोकवासी है और इसे धारण करने वाला   निर्गुण  आत्मा विद्यमान रहतीं है, वो मनुष्यरूपी सगुण जीवात्मा के भीतर " सतलोकवासी है।निर्गुण आत्मा को कर्मभूमि पर आत्मकल्याण के लिए देहभाव से मुक्त होकर , देवलोक के जीवात्मस्वरूप को त्यागकर विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बनना होता है। ऐसे कर्मयोगी के लिए मुक्ति के द्वार स्वतःही खुल जाते है तब कर्मयोगी सतलोक में बिना कोई कर्म किये शाश्वत सुख पाता है। आत्मज्ञानी  निष्काम कर्मयोगी बनों अपना मानव जीवन सार्थकबनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat
#देश भक्ति #माता वैष्णोदेवी #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #🙏 माँ वैष्णो देवी
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https://youtube.com/watch?v=G2FXN_iw3V8&si=ZvjiYUeZUdkUtrAL #🙏 माँ वैष्णो देवी #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #देश भक्ति #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #माता वैष्णोदेवी
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#देश भक्ति #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी। #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🙏 माँ वैष्णो देवी #माता वैष्णोदेवी
देश भक्ति - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश मनुष्य रुपी जीवात्मा का कर्मभूमि पर होता रहता है , तब तक आवागमन जब तक आत्मकल्याण नहीं कर लेता | कल्का माष्वनक मनुष्यरूपी जीवात्मा का देवलोक से कर्मभूमि पर आत्मकल्याण  प्रकृति के पंचतत्वों से बने भौतिक शरीर के भीतर लिए करने के अवतरण होता हैव उसके कर्मों के अनुसार तन परिवर्तन होता रहता है।कर्मभूमि पर आत्मकल्याण करने के लिए मनुष्य रूपी जीवात्मा को सर्वप्रथम कर्मभूमि पर महामाया की मोहमाया को पराजित कर्मभूमि पर अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को करना होता है त्यागकर विदेही भाव में विराट निर्गुण आत्मस्वरूप बनना होता है, मानव महामाया की मोहमाया से प्रभावित होकर अपने सत्य ন্িল্ু विराट आत्मस्वरूप को भुल जाता है व जीवन भर अपने नश्वर शरीर के लिए कर्म करता रहता है, किन्तु आत्मज्ञानी बनकर अपना आत्मकल्याण करने की भावना का उसमें नितांत अभाव रहता है भक्तिमार्ग में अपने ज्ञात रहे कर्मभूमि मानव-्मात्र को पर जन्मदाता , पालनहार परम माता-पिता परमात्मा परब्रह्म के प्रतिक লিব शिवलिंग की पूजा करते हुए, आत्मकल्याण के अपने परम चाहिए आत्मज्ञानी बनों गुरूवर परमब्रह्म की साधना करना अपना मानव जीवन सार्थक बनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश मनुष्य रुपी जीवात्मा का कर्मभूमि पर होता रहता है , तब तक आवागमन जब तक आत्मकल्याण नहीं कर लेता | कल्का माष्वनक मनुष्यरूपी जीवात्मा का देवलोक से कर्मभूमि पर आत्मकल्याण  प्रकृति के पंचतत्वों से बने भौतिक शरीर के भीतर लिए करने के अवतरण होता हैव उसके कर्मों के अनुसार तन परिवर्तन होता रहता है।कर्मभूमि पर आत्मकल्याण करने के लिए मनुष्य रूपी जीवात्मा को सर्वप्रथम कर्मभूमि पर महामाया की मोहमाया को पराजित कर्मभूमि पर अपने सगुण जीवात्मस्वरूप को करना होता है त्यागकर विदेही भाव में विराट निर्गुण आत्मस्वरूप बनना होता है, मानव महामाया की मोहमाया से प्रभावित होकर अपने सत्य ন্িল্ু विराट आत्मस्वरूप को भुल जाता है व जीवन भर अपने नश्वर शरीर के लिए कर्म करता रहता है, किन्तु आत्मज्ञानी बनकर अपना आत्मकल्याण करने की भावना का उसमें नितांत अभाव रहता है भक्तिमार्ग में अपने ज्ञात रहे कर्मभूमि मानव-्मात्र को पर जन्मदाता , पालनहार परम माता-पिता परमात्मा परब्रह्म के प्रतिक লিব शिवलिंग की पूजा करते हुए, आत्मकल्याण के अपने परम चाहिए आत्मज्ञानी बनों गुरूवर परमब्रह्म की साधना करना अपना मानव जीवन सार्थक बनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat
भारत की पावन भूमि पर जाति-संप्रदाय व धार्मिक स्थल रहित कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म की स्थापना…. https://kalkigyansagar.com?p=478 #🙏 माँ वैष्णो देवी #माता वैष्णोदेवी #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #देश भक्ति #🪔जय मां दुर्गा शक्ति,जय माता दी।