Rekha choudhary
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#🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 - आजुब देखियत है हो प्यारी रंग भरी। मोपै न दुरति चोरी वृषभानु की किशोरी; सिथिल कटि की डोरी नंद के लालन सौं सुरत लरी।। मोतियन लर टूटी चिकुरचंद्रिका छूटी रसिकृ लूट्री सूटनि पीक परी। रहसि नैननि आलस बस अधर बिंब निरस; पुलक प्रेम पस्स हित हुरिवर्श जन खरी। ।8प | | आजुब देखियत है हो प्यारी रंग भरी। मोपै न दुरति चोरी वृषभानु की किशोरी; सिथिल कटि की डोरी नंद के लालन सौं सुरत लरी।। मोतियन लर टूटी चिकुरचंद्रिका छूटी रसिकृ लूट्री सूटनि पीक परी। रहसि नैननि आलस बस अधर बिंब निरस; पुलक प्रेम पस्स हित हुरिवर्श जन खरी। ।8प | | - ShareChat
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🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 - छाँडिदैं मानिनी मान मन धरिबौ| प्रनत सुंदर सुघर प्रानवल्लभ नवल, वचन आधीन सौं इतौ कत करिबौं | 1 जपत हरि विवस तव नाम प्रतिपद विमल , मनसि तव ध्यान ते निमिष नहिं टरिबौ। घटति पलु पलु सुभल सरद्रे की जामीनी, भामिनी सरस अनुससदैसि ढरिबौ। | हौं जु कहति निजुकालसुनो मनि सखि, सुमुखि बिनु काजडनविरनदुख भरी वै। किसलय सयन, मिलत हरिवंश हित % ;8R471|83|| करत कल केलि सुख छाँडिदैं मानिनी मान मन धरिबौ| प्रनत सुंदर सुघर प्रानवल्लभ नवल, वचन आधीन सौं इतौ कत करिबौं | 1 जपत हरि विवस तव नाम प्रतिपद विमल , मनसि तव ध्यान ते निमिष नहिं टरिबौ। घटति पलु पलु सुभल सरद्रे की जामीनी, भामिनी सरस अनुससदैसि ढरिबौ। | हौं जु कहति निजुकालसुनो मनि सखि, सुमुखि बिनु काजडनविरनदुख भरी वै। किसलय सयन, मिलत हरिवंश हित % ;8R471|83|| करत कल केलि सुख - ShareChat
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🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 - नागरता की राशि किसोरी| नव नागर कुल मौलि साँवरी, वर बस कियो चितै मुख मोरी।| रूप रुचिर अंग अंग माधुरी , विनु ' ब्रज गोरी। भूषन भूषित छिन छिन कुसल अंग में, सुधंग सिंधु ' झकोरी। कोक रमस रस चंचल रसिक मधूर्प मौंहन मन. कनक॰ RR केमलऊच कोरी। प्रीतम मैन जुगख्खजन खग 9 ೬ಲಕದಳ3 0 000' अवनी उद चारी मनौं कछुको oನ1೦/ (जै श्री॰ हित हरिवंश पिचत सुंदर वर, सींव सुदृढ़ निगमनि की तोरी। |८२| नागरता की राशि किसोरी| नव नागर कुल मौलि साँवरी, वर बस कियो चितै मुख मोरी।| रूप रुचिर अंग अंग माधुरी , विनु ' ब्रज गोरी। भूषन भूषित छिन छिन कुसल अंग में, सुधंग सिंधु ' झकोरी। कोक रमस रस चंचल रसिक मधूर्प मौंहन मन. कनक॰ RR केमलऊच कोरी। प्रीतम मैन जुगख्खजन खग 9 ೬ಲಕದಳ3 0 000' अवनी उद चारी मनौं कछुको oನ1೦/ (जै श्री॰ हित हरिवंश पिचत सुंदर वर, सींव सुदृढ़ निगमनि की तोरी। |८२| - ShareChat
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🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 - नंदनंदन मनसि मोद उपजावै। | प्रथम मज्जन चारु चीर कज्जल तिलक, श्रवण कुंडल वदन चंदनि लजावै। सुभग नकबेसरी रतन हाटक जरी, अधर बंधूक दसन कुंद चमकावै। | वलय कंकन चारु उरसि राजत हारु, कटिव किंकिनी चरन नूपुर बजावै। ৪ঁম বল যামিনী ভথতিমনন ব্ামিনী, मदयंतिकार नखनि रँचि द्यावे ।। निर्त्त सागर रभसि रहसि नागरि नवल, चंदचाली विक्िधभदृन जनावै। निपुन, कोक विद्या विदित भइू भिनय भू विलासनि मकर केन्ैनि सचावै। | निविड़ कानन भवन बाहु रैजित रवन, सरस आलाप सुख पुंज बरसावै। नंदनंदन मनसि मोद उपजावै। | प्रथम मज्जन चारु चीर कज्जल तिलक, श्रवण कुंडल वदन चंदनि लजावै। सुभग नकबेसरी रतन हाटक जरी, अधर बंधूक दसन कुंद चमकावै। | वलय कंकन चारु उरसि राजत हारु, कटिव किंकिनी चरन नूपुर बजावै। ৪ঁম বল যামিনী ভথতিমনন ব্ামিনী, मदयंतिकार नखनि रँचि द्यावे ।। निर्त्त सागर रभसि रहसि नागरि नवल, चंदचाली विक्िधभदृन जनावै। निपुन, कोक विद्या विदित भइू भिनय भू विलासनि मकर केन्ैनि सचावै। | निविड़ कानन भवन बाहु रैजित रवन, सरस आलाप सुख पुंज बरसावै। - ShareChat
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🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 - वल्लवी सु कनक वल्लरी तमाल स्याम संग , लागि रही अंग अंग मनोभिरामिनी| वदन जोति मनौं मयंक अलका तिलक छबि कलंक, छपति स्याम अंक मूनौं जलद दामिनी। | विगत वास हेम खंभ सनौ ्भुवंग वैनी दंड, पिय के कंठ प्रेम पजकुज कामिनी। (जै श्री) सोभित्त हॅरिवंशम्नारडसाथ सूरत आलस वंत , 8 Kmt उरज कनक |80|| ध्क वल्लवी सु कनक वल्लरी तमाल स्याम संग , लागि रही अंग अंग मनोभिरामिनी| वदन जोति मनौं मयंक अलका तिलक छबि कलंक, छपति स्याम अंक मूनौं जलद दामिनी। | विगत वास हेम खंभ सनौ ्भुवंग वैनी दंड, पिय के कंठ प्रेम पजकुज कामिनी। (जै श्री) सोभित्त हॅरिवंशम्नारडसाथ सूरत आलस वंत , 8 Kmt उरज कनक |80|| ध्क - ShareChat
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🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 - रहसि मोहन पिय के संग री, R लड़ैती अति रस लटकति। सरस सुधंग अंग में नागरि, थेई थेई कहति अवनि पद पटकति। | कोक कला कुल जानि सिरोमनि , मटकति। भूकुटिय अभिनय कुटिल औलि लंपट, प्रीतस विवस भये निरखि करर्ज नापि्पुटन्चटकति M 0٦=? गुन गनु रिझवनि पदिकोहार "४ % श्री॰ हित हखिंश कट पिसीजन , ೦೦೦ ೦ लोचन चषक रसासव विकते। I७९| | रहसि मोहन पिय के संग री, R लड़ैती अति रस लटकति। सरस सुधंग अंग में नागरि, थेई थेई कहति अवनि पद पटकति। | कोक कला कुल जानि सिरोमनि , मटकति। भूकुटिय अभिनय कुटिल औलि लंपट, प्रीतस विवस भये निरखि करर्ज नापि्पुटन्चटकति M 0٦=? गुन गनु रिझवनि पदिकोहार "४ % श्री॰ हित हखिंश कट पिसीजन , ೦೦೦ ೦ लोचन चषक रसासव विकते। I७९| | - ShareChat
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🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 - सुधंग नाचत नवल किसोरी। थेई थेई कहति चहति प्रीतम दिसि, वदन चंद मनौं त्रिषित चकोरी। | तान बंधान नोनम नागरि देखत स्याम कहदूहौँहो होरी। 3, (जै॰श्री॰ हित हरवशङाँधरी अँग बरवस लियो मोहनढेच 1CH78II सुधंग नाचत नवल किसोरी। थेई थेई कहति चहति प्रीतम दिसि, वदन चंद मनौं त्रिषित चकोरी। | तान बंधान नोनम नागरि देखत स्याम कहदूहौँहो होरी। 3, (जै॰श्री॰ हित हरवशङाँधरी अँग बरवस लियो मोहनढेच 1CH78II - ShareChat
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🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 - लटकति फिरति जुवति रस फूली। लता भवन में सरस सकल निसि, पिय सँग सुरत हिंडोरे झूली। | अति अनुराग रसासव जद्दपि पान विवस नाहिंन गति भूली। आलस वलित नैद विंगैलित लट, उर पर कछुक खूली। | मरगजी माल सिशिलू कटि बंधन , चित्रित कज्जुष्ीकृदुकली Gरजर . (जै श्री॰ हित हरिवेर 1] I7711 विथकित स्यामसँ लटकति फिरति जुवति रस फूली। लता भवन में सरस सकल निसि, पिय सँग सुरत हिंडोरे झूली। | अति अनुराग रसासव जद्दपि पान विवस नाहिंन गति भूली। आलस वलित नैद विंगैलित लट, उर पर कछुक खूली। | मरगजी माल सिशिलू कटि बंधन , चित्रित कज्जुष्ीकृदुकली Gरजर . (जै श्री॰ हित हरिवेर 1] I7711 विथकित स्यामसँ - ShareChat
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🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 - निकुंज ऐंन किसलय दल रचित सैंन, RI कोक कला कुसल कुँवरि अति उदार री। सुरत रंग अंग अंग हाव भाव भंग, भृकुटि माधुरी तरंग मृथत कोटि मार री। ٦٨ सुभाव किकनी विचित्र राव, TA मुखर विहार ं विरमि विरमि नाथिदिकवर I लाड़िली क़िशोगा समाज, सींचत हरिवंशे |76|| निकुंज ऐंन किसलय दल रचित सैंन, RI कोक कला कुसल कुँवरि अति उदार री। सुरत रंग अंग अंग हाव भाव भंग, भृकुटि माधुरी तरंग मृथत कोटि मार री। ٦٨ सुभाव किकनी विचित्र राव, TA मुखर विहार ं विरमि विरमि नाथिदिकवर I लाड़िली क़िशोगा समाज, सींचत हरिवंशे |76|| - ShareChat
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🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏 - हौं जु कहति इक बात सखी, सुनि काहे कौं डारत? प्रानरमन सौं क्यौंडब करत , बिनु आरत। | आगस 4 পিয নিনবন নুব वदन तन, निजु RfaI तूँ अधमुख Tಷದ.grFf; वे मृदु चिबुकः भामिनिकरकरूटारति। | विबसू अधीग़ चिस्हः सर विवारकि औसत कछवैन प्रीनम मिलि, श्री॰ हित हरिवंश D००0 प्रतिषारतिII७s| तृषित नैंन काहे + हौं जु कहति इक बात सखी, सुनि काहे कौं डारत? प्रानरमन सौं क्यौंडब करत , बिनु आरत। | आगस 4 পিয নিনবন নুব वदन तन, निजु RfaI तूँ अधमुख Tಷದ.grFf; वे मृदु चिबुकः भामिनिकरकरूटारति। | विबसू अधीग़ चिस्हः सर विवारकि औसत कछवैन प्रीनम मिलि, श्री॰ हित हरिवंश D००0 प्रतिषारतिII७s| तृषित नैंन काहे + - ShareChat