@241136453
@241136453

varun azad

🙂🙂🙂

हिमालय शीतल और हसीन वादियों में छूट्टीयों का आनंद लेनेके लिए सादर निमंत्रण *ओशो ध्यान साधना शिविर* *अहा !! जिंदगी* वसंत की रमणीय बेला में *अप्रैल 23 संध्या से 26 अप्रैल 2020 तक* इस शिविर का *संचालन स्वामी अशोक भारती* के प्रेम पूर्ण सानिध्य में संपन्न होगा । यह साधना शिविर शिमला के अत्यंत ही सुविधा संपन्न *वाटिका रिसोर्ट* में आयोजित होने जा रहा है जहां के मनोरम दृश्यों की छटा के दर्शन मात्र से सहज ही विस्मरण के लोक में प्रवेश हो जाता है । इस स्वर्णिम वसंत की बेला में शिमला की हसीन वादियों पर ओशो की रसधार में भीगने के इस मौके को हाथ से न जाने दे और शीघ्र ही पधारें । 🌷 Osho " Aha Jindagi " Meditation Camp (ओशो "अहा जिंदगी" महोत्सव ) 🌷 2020 April 23 - 26, Shimla, Himachal Pradesh ( २०२० अप्रैल २३ - २६, शिमला, हिमाचल प्रदेश ) 🌷 Swami Ashok Bharti Ji ( स्वामी अशोक भारती जी ) 🌷 Contact ( सम्पर्क ) : 8091765890, 7018512893 ( ०८०९१७६५८९०, ०७०१८५१२८९३) 🌷 Venue ( शिविर स्थल ) : Vatika Resort, Shoghi, Shimla, Himachal Pradesh, India ( वाटिका रिसोर्ट, शोघी, शिमला, हिमाचल प्रदेश, भारत ) 🌷 Contribution ( शिविर सहयोग राशि ) : Rs 3500 ( Four Sharing ), Rs 4500 ( Three Sharing ) & Rs 6200 (Two Sharing) per person (Including Stay & Food ) [ ३५०० रुपये ( ४ व्यक्ति प्रति कमरा ), ४५०० रुपये ( ३ व्यक्ति प्रति कमरा ) , ६२०० रुपये ( २ व्यक्ति प्रति कमरा ) प्रति व्यक्ति ( आवास एवं भोजन सहित ) ] 🌷 Bank Details ( बैंक विवरण ) : IDBI Ac/No. 0730104000058849, IFSC Code IBKL0000730 (आई डी बी आई अकॉउंट नम्बर ०७३०१०४००००५८८४९, आई एफ एस सी कोड IBKL००००७३०) #🙏 भक्ति
#

🙏 भक्ति

🙏 भक्ति - In Simla अहा जिंदगी ! ओशो महोत्सव | 23 - 26 अप्रैल 2020 शिविर उदघाटन : 23 अप्रैल 2020 शाम 6 : 30 बजे से समापन : 26 अप्रैल 2020 दोपहर सन्यास दीक्षा महोत्सव तक Camp Venue : Vatika Resort Shoghi , Shimla प्रेम पूर्ण सान्निध्य स्वामी अशोक भारती Charges Account No - IDBI Double Sharing Room : 6200 / - Per Person Triple Sharing Room : 4500 / - Per Person 20730104000058849 Quad Sharing Room : 3500 / - Per Person IFSC - IBKL00007301 Contact : 8091765890 Maa jyotika Bharti Contact : 7018512893 Swami Dhyan Alok | - ShareChat
98 ने देखा
5 घंटे पहले
*हृदय में झांकना सीख लो* जब तक तुम मानव के हृदय में झांकना न सीखोगे, तब तक तुम पिघलोगे भी नहीं, गलोगे भी नहीं, तब तक तुम मिटोगे भी नहीं, तब तक तुम्हारे अहंकार से छुटकारा बहुत मुश्किल है। तुम दूसरे के हृदय में बहो, तो धीरे— धीरे तुम्हारा अहंकार अपने आप गल जाएगा। क्योंकि तुम पाओगे कि तुम्हारा जैसा ही हृदय दूसरों में भी धड़कता है। तब तुम पाओगे कि ठीक तुम ही, दूसरे के भीतर भी बैठे हुए हो। तब तुम्हें अपना जो दंभ है, वह व्यर्थ दिखाई पड़ने लगेगा। तब तुम्हें यह भी दिखाई पड़ना साफ हो जाएगा, यह भी दिखाई पडने लगेगा कि व्यक्ति—व्यक्ति के जो फासले हैं, वह बहुत ऊपरी हैं। भीतर शायद एक ही महा—हृदय धड़क रहा है। अगर हृदय में झांकना तुम सीख लो तो हृदय की जो शुद्धतम गहराई है, वह तुम्हें दिखाई पड़नी शुरू हो जाएगी। तब तुम पाओगे कि एक ही हृदय धड़क रहा है बहुत हृदयों में। फेफड़े बहुत होंगे, हृदय शायद एक ही है। और यह प्रतीति तुम्हें परमात्मा की तरफ ले जाने में एक बहुत बड़ा कदम सिद्ध होगी... *- ओशो* #👍 Motivational Quotes✌
#

👍 Motivational Quotes✌

👍 Motivational Quotes✌ - ShareChat
121 ने देखा
10 दिन पहले
स्त्री और पुरुष के संबंध में भारतीय मन में एक ही धारणा रही है कि एक ही संबंध हो सकता है वह है कामवासना का। स्त्री और पुरुष के बीच मैत्री भी हो सकती है मित्रता भी हो सकती है यह भारतीय परंपरा का अंग नहीं रही। भारतीय परंपरा ने कभी साहस नहीं किया कि स्त्री और पुरुष के बीच मैत्री की धारणा को जन्म दे सके। यौन तो स्त्री-पुरुष के बीच एक संबंध है। यही सब कुछ नहीं है। मैत्री भी हो सकती है। और मैत्री होनी चाहिए। एक सुंदर सुसंस्कृत व्यक्तित्व में इतनी क्षमता तो होनी चाहिए कि वह किसी स्त्री के साथ भी मैत्री बना सके किसी पुरुष के साथ मैत्री बना सके। मैत्री का अर्थ है कि कोई शारीरिक लेन-देन का सवाल नहीं है एक आत्मिक नाता है। लेकिन पश्चिम में यह घटना घटती है। एक पुरुष और एक स्त्री के बीच इस तरह की दोस्ती हो सकती है जैसे दो पुरुषों के बीच होती है या दो स्त्रियों के बीच होती है। मैत्री का आधार बौद्धिक हो सकता है। दोनों के बीच एक बौद्धिक तालमेल हो सकता है। दोनों के बीच रुचियों का एक सम्मिलन हो सकता है। दोनों में संगीत के प्रति लगाव हो सकता है। दोनों में शास्त्रीय संगीत में अभिरुचि हो सकती हैं। यह जरूरी नहीं है कि जिस स्त्री के शरीर से तुम्हारा संबंध है उससे तुम्हारा बौद्धिक मेल भी खाए। यह जरूरी नहीं है कि जिस स्त्री के शरीर में तुम्हें रुचि है उसमें और तुम्हारे बीच संगीत के संबंध में भी समानता हो। हो सकता है उसे संगीत में बिलकुल रस न हो । हो सकता है तुम्हें संगीत में बिलकुल रस न हो उसे रस हो। हो सकता है उसे नृत्य में अभिरुचि हो और तुम्हें दर्शनशास्त्र में। तो ठीक है कि वह अपनी मैत्री बनाएगी उन लोगों के साथ जिनको नृत्य में रुचि है और तुम उनके साथ मैत्री बनाओगे जिन्हें दर्शन में रुचि है। पश्चिम में शरीर का संबंध ही एकमात्र संबंध नहीं है। यह श्रेष्ठकर बात है ध्यान रखना। शरीर का संबंध ही एकमात्र संबंध अगर है तो इसका अर्थ हुआ कि फिर आदमी के भीतर मन नहीं आत्मा नहीं परमात्मा नहीं कुछ भी नहीं सिर्फ शरीर ही शरीर है। अगर आदमी के भीतर शरीर के ऊपर मन है और मन के ऊपर आत्मा है और आत्मा के ऊपर परमात्मा हैं शरीर के तल पर किसी और से संबंध हो सकते हैं। क्योंकि यह हो सकता है एक स्त्री के चेहरे में तुम्हें रस न हो उसका चेहरा तुम्हें न भाए उसकी देह तुम्हें न भाए लेकिन उसकी मन की गरिमा तुम्हें मोहित करे। और यह भी हो सकता है एक स्त्री की देह तुम्हें आकृष्ट करे चुंबक की तरह खींचे मगर उसके मन में तुम्हें कोई रुचि न हो कोई रस न हो। फिर क्या करोगे? भारत में तो एक ही उपाय है कि एक चीज से राजी हो जाओ दूसरे की चिंता छोड़ दो। इससे तो नुकसान होनेवाला है। इससे तुम्हारी एक दशा अवरुद्ध रह जाएगी। Osho #🕛 शुभ दोपहर☺
#

🕛 शुभ दोपहर☺

🕛 शुभ दोपहर☺ - ShareChat
107 ने देखा
11 दिन पहले
अन्य एप्स पर शेयर करें
Facebook
WhatsApp
लिंक कॉपी करें
डिलीट करें
Embed
मैं इस पोस्ट का विरोध करता हूँ, क्योंकि ये पोस्ट...
Embed Post
अन्य एप्स पर शेयर करें
Facebook
WhatsApp
अनफ़ॉलो
लिंक कॉपी करें
शिकायत करें
ब्लॉक करें
रिपोर्ट करने की वजह: