Akanksha Mishra pandey
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Akanksha Mishra pandey
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siya Ram ji ki dasi 💓💖💕💗♥️🩷❤️💞🙏
#😊आज के सुविचार👌 #❤️जीवन के सीख #🔱हर हर महादेव🔱 #☝अनमोल ज्ञान
😊आज के सुविचार👌 - ShareChat
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#❤️जीवन के सीख #😊आज के सुविचार👌 #☝अनमोल ज्ञान
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#😊आज के सुविचार👌 #☝अनमोल ज्ञान #❤️जीवन के सीख #🙏 सम्मान सर्वोपरि
😊आज के सुविचार👌 - afడui पलट पलट कर देखती हैं मायके की गलियां !! ना जाने कब दोबारा आना होगा यहां" !! कैसे कह देते हैं न लोग कि बेटा बेटी बराबर हैं. afడui पलट पलट कर देखती हैं मायके की गलियां !! ना जाने कब दोबारा आना होगा यहां" !! कैसे कह देते हैं न लोग कि बेटा बेटी बराबर हैं. - ShareChat
#🙏ईश्वर एक रूप अनेक #🔱महाकाल के दीवाने #🔱हर हर महादेव🔱
🙏ईश्वर एक रूप अनेक - शुभ गोपाष्टमी || गौवंश की सेवा एवं रक्षा भी भगवान श्रीकृष्ण के प्रमुख उद्देश्य इस धरा धाम पर अवतरण का एक रहा है। श्री बालकृष्ण प्रभु के प्रथम गौचारण उत्सव को ही गोपाष्टमी महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जिस ब्रह्म की चरण रज के लिए ब्रह्मा-शंकर तक तरसते हैं वो चरण गौमाता की लिए कंकड़ पत्थर और कुंज निकुंजों में মীণা ক विचरण करते हैं| गौमाता भगवान श्रीकृष्ण को अति प्रिय हैं इसलिए स्वयं कष्ट सहकर भी प्रभु ने करने का प्रयास किया है। गौमाता को सुखी गौमाता की सेवा के कारण ही प्रभु का नाम गोपाल पडा। गौ माता की सेवा परिवार में सुख-्शांति, समृद्धि एवं पूर्वजों को सद्गति प्रदायक होती है। गोपाल के साथ-साथ गौमाताओं की सेवा हम समस्त सनातन धर्मावलंबियों का प्रधान कर्तव्य है। गौ सेवा ही गोपाल को रिझाने का मूल मंत्र है। गोपाष्टमी के पावन दिवस पर यथा सामर्थ्य गौमाताओं की सेवा के संकल्प के साथ इस पावन पर्व को सार्थक बनाने का प्रयास अवश्य करें। राधे राधे राधे शुभ गोपाष्टमी || गौवंश की सेवा एवं रक्षा भी भगवान श्रीकृष्ण के प्रमुख उद्देश्य इस धरा धाम पर अवतरण का एक रहा है। श्री बालकृष्ण प्रभु के प्रथम गौचारण उत्सव को ही गोपाष्टमी महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। जिस ब्रह्म की चरण रज के लिए ब्रह्मा-शंकर तक तरसते हैं वो चरण गौमाता की लिए कंकड़ पत्थर और कुंज निकुंजों में মীণা ক विचरण करते हैं| गौमाता भगवान श्रीकृष्ण को अति प्रिय हैं इसलिए स्वयं कष्ट सहकर भी प्रभु ने करने का प्रयास किया है। गौमाता को सुखी गौमाता की सेवा के कारण ही प्रभु का नाम गोपाल पडा। गौ माता की सेवा परिवार में सुख-्शांति, समृद्धि एवं पूर्वजों को सद्गति प्रदायक होती है। गोपाल के साथ-साथ गौमाताओं की सेवा हम समस्त सनातन धर्मावलंबियों का प्रधान कर्तव्य है। गौ सेवा ही गोपाल को रिझाने का मूल मंत्र है। गोपाष्टमी के पावन दिवस पर यथा सामर्थ्य गौमाताओं की सेवा के संकल्प के साथ इस पावन पर्व को सार्थक बनाने का प्रयास अवश्य करें। राधे राधे राधे - ShareChat
#🙏ईश्वर एक रूप अनेक #🔱हर हर महादेव🔱
🙏ईश्वर एक रूप अनेक - Iut TI ।Iश्री राधारमणो विजयते।। श्री गिरिजा स्तुति II (श्री रामचरित्रमानस में श्री सिया जी के द्वारा माँ गौरी की स्तुति है इन चौपाईयों का विश्वास से पाठ करने पर श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ का फल मिलता है जय महेस मुख चंद चकोरी II गिरिबरराज किसोरी जयःजय जगत जननि दामिनि दृति गाता  ।I जय गजबदन षडानन माता नहिं तव आदि मध्य अवसाना अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना II बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि भव भव बिभव पराभव कारिनि पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख  महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष Il सेवत तोहि सुलभ फल चारी fq3mt Il बरदायनी 1 দ্রুযহি देबि पूजि पद कमल  सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे तुम्हारे मनोरथु 7 उर पुर सबही कें II जानहु नीकें मोर बसहु  सदा अस कहि चरन गहे बैदेहीं II कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं बिनय प्रेम बस भई भवानी खसी माल मूरति मुसुकानी II बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ II सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ सुनु सिय सत्य असीस हमारी पूजिहि मन कामना  तुम्हारी M सुचि साचा  सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा II नारद बचन सदा  मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो  মীলু निधान सुजान ` सनेहु जानत राबरो II करुता एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली  II तुलसी  जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि সনুল সঁাল সুল বাস 3ঁ কংকেন লী Il Iut TI ।Iश्री राधारमणो विजयते।। श्री गिरिजा स्तुति II (श्री रामचरित्रमानस में श्री सिया जी के द्वारा माँ गौरी की स्तुति है इन चौपाईयों का विश्वास से पाठ करने पर श्री दुर्गा सप्तशती के पाठ का फल मिलता है जय महेस मुख चंद चकोरी II गिरिबरराज किसोरी जयःजय जगत जननि दामिनि दृति गाता  ।I जय गजबदन षडानन माता नहिं तव आदि मध्य अवसाना अमित प्रभाउ बेदु नहिं जाना II बिस्व बिमोहनि स्वबस बिहारिनि भव भव बिभव पराभव कारिनि पतिदेवता सुतीय महुँ मातु प्रथम तव रेख  महिमा अमित न सकहिं कहि सहस सारदा सेष Il सेवत तोहि सुलभ फल चारी fq3mt Il बरदायनी 1 দ্রুযহি देबि पूजि पद कमल  सुर नर मुनि सब होहिं सुखारे तुम्हारे मनोरथु 7 उर पुर सबही कें II जानहु नीकें मोर बसहु  सदा अस कहि चरन गहे बैदेहीं II कीन्हेउँ प्रगट न कारन तेहीं बिनय प्रेम बस भई भवानी खसी माल मूरति मुसुकानी II बोली गौरि हरषु हियँ भरेऊ II सादर सियँ प्रसादु सिर धरेऊ सुनु सिय सत्य असीस हमारी पूजिहि मन कामना  तुम्हारी M सुचि साचा  सो बरु मिलिहि जाहिं मनु राचा II नारद बचन सदा  मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो  মীলু निधान सुजान ` सनेहु जानत राबरो II करुता एहि भाँति गौरि असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली  II तुलसी  जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि সনুল সঁাল সুল বাস 3ঁ কংকেন লী Il - ShareChat
#🔱हर हर महादेव🔱 #🔱महाकाल के दीवाने #🙏ईश्वर एक रूप अनेक #🙏विष्णु लक्ष्मी🌸
🔱हर हर महादेव🔱 - श्रितकमला कुच मंडल घृत कुंडल ए कलित ललित वनमाल जय जय देव हरे दीनमणि मंडल भव खंडन ए मानस हंस जय जय देव हरे मुनिजन कलियविषधर भंजन जन रंजन ए यदुकुल नलिन दिनेश जय जय देव हरे मधुमुर नरक विनासन गरुड़ासन ए सुरकुलकेलि निदान जय जय देव हरे अमल कमल दल लोचन भव मोचन त्रिभुवन भवन निधान जय जय देव हनो जनक  सुता कृत भूषण जित दूषण ए समरशमित दसकंठ जय जय देव हरेबlke अभिनव जलधर   सुंदर घृत मंदर ए श्री मुख चंद्र चकोर जिय जय देव हरे १७ तव चरणए प्रणता वयम इति भाव ए कुरु कुशलम   प्रणतेषु जय जय देव Share श्रितकमला कुच मंडल घृत कुंडल ए कलित ललित वनमाल जय जय देव हरे दीनमणि मंडल भव खंडन ए मानस हंस जय जय देव हरे मुनिजन कलियविषधर भंजन जन रंजन ए यदुकुल नलिन दिनेश जय जय देव हरे मधुमुर नरक विनासन गरुड़ासन ए सुरकुलकेलि निदान जय जय देव हरे अमल कमल दल लोचन भव मोचन त्रिभुवन भवन निधान जय जय देव हनो जनक  सुता कृत भूषण जित दूषण ए समरशमित दसकंठ जय जय देव हरेबlke अभिनव जलधर   सुंदर घृत मंदर ए श्री मुख चंद्र चकोर जिय जय देव हरे १७ तव चरणए प्रणता वयम इति भाव ए कुरु कुशलम   प्रणतेषु जय जय देव Share - ShareChat
#🔱महाकाल के दीवाने #🙏विष्णु लक्ष्मी🌸 #🔱हर हर महादेव🔱 #🙏ईश्वर एक रूप अनेक
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#🔱हर हर महादेव🔱 #🙏विष्णु लक्ष्मी🌸 #🙏ईश्वर एक रूप अनेक #🔱महाकाल के दीवाने
🔱हर हर महादेव🔱 - ।जिय गौर।। ।Iश्री राधारमणो विजयते।।  स्तुति Il मो सम दीन न दीन हित तुम्ह समान रघुवीर 1 अस बिचारि रघुबंस मनि हरहु विषम भव भीर II कामिहि नारि पिआरि जिमि लोभिहि प्रिय जिमि दाम  तिमि रघुनाथ निरंतर प्रिय लागहु मोहि राम II सिंधु 7 रघुवंश मनि करुणा எRf प्रनतपाल गए शरण प्रभु राखिहों सब अपराध बिसारि Il कोटि कल्प काशी बसे मथुरा कल्प हजार एक निमिष सरयू बसे तुले न तुलसी दास II राम नगरिया राम की वसै सरजु ( गंग ) के तीर अचल राज महाराज की चौकी हनुमत वीर  II कहा कहौं छवि आपकी भले विराजेउ नाथ  मस्तक तव नवै , जब धनुष वाण लेव हाथ II ரி कित  चंद्रिका , कित गोपियन के साथ कित मुरली ஓிதன अपने जन के कारणें , भये रघुनाथ Il अवधधाम धामाधिपति , अवतारन पति राम सकलसिद्धि पति जानकी , दासन पति हनुमान II चढाइयो , चकित भए सब भूप  কয ম্হি খনু৭ भई श्री जानकी देख राम जी को रूप Il मगन एक घडी आधी घड़ी , आधी की पुनि आध तुलसी संगत साधु की, काटे कोटि अपराध @laashnase सियावर रामचंद्र जी की जय Il ।जिय गौर।। ।Iश्री राधारमणो विजयते।।  स्तुति Il मो सम दीन न दीन हित तुम्ह समान रघुवीर 1 अस बिचारि रघुबंस मनि हरहु विषम भव भीर II कामिहि नारि पिआरि जिमि लोभिहि प्रिय जिमि दाम  तिमि रघुनाथ निरंतर प्रिय लागहु मोहि राम II सिंधु 7 रघुवंश मनि करुणा எRf प्रनतपाल गए शरण प्रभु राखिहों सब अपराध बिसारि Il कोटि कल्प काशी बसे मथुरा कल्प हजार एक निमिष सरयू बसे तुले न तुलसी दास II राम नगरिया राम की वसै सरजु ( गंग ) के तीर अचल राज महाराज की चौकी हनुमत वीर  II कहा कहौं छवि आपकी भले विराजेउ नाथ  मस्तक तव नवै , जब धनुष वाण लेव हाथ II ரி कित  चंद्रिका , कित गोपियन के साथ कित मुरली ஓிதன अपने जन के कारणें , भये रघुनाथ Il अवधधाम धामाधिपति , अवतारन पति राम सकलसिद्धि पति जानकी , दासन पति हनुमान II चढाइयो , चकित भए सब भूप  কয ম্হি খনু৭ भई श्री जानकी देख राम जी को रूप Il मगन एक घडी आधी घड़ी , आधी की पुनि आध तुलसी संगत साधु की, काटे कोटि अपराध @laashnase सियावर रामचंद्र जी की जय Il - ShareChat
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