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जिस महिला डॉक्टर नुसरत परवीन का हिजाब एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा हटाया गया, उस घटना के बाद नुसरत ने बिहार छोड़ दिया है।
नुसरत अब अपने परिवार के साथ कोलकाता में रह रही हैं।
यह घटना 15 दिसंबर की बताई जा रही है।
इसके ठीक अगले दिन नुसरत बिहार से रवाना हो गईं।
पढ़ाई में बेहद मेधावी नुसरत का सपना डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना था, लेकिन जिस तरह एक महिला की व्यक्तिगत आस्था और सम्मान को सार्वजनिक रूप से ठेस पहुँचाई गई, उसने न सिर्फ नुसरत को, बल्कि पूरे समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
फिलहाल नुसरत बिहार सरकार की नौकरी जॉइन नहीं करेंगी।
परिवार उन्हें समझाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन नुसरत अभी बिहार लौटकर नौकरी शुरू करने का साहस नहीं जुटा पा रही हैं।
👉 सवाल सिर्फ एक लड़की का नहीं है,
सवाल है संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता,
महिलाओं की गरिमा,
और राज्य में अल्पसंख्यकों के लिए सुरक्षित माहौल का।
AIMIM का मानना है कि
किसी भी महिला की आस्था, पहचान और पहनावे पर हाथ डालना
संवैधानिक मूल्यों के ख़िलाफ़ है।
✊ सम्मान, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकार — समझौते का विषय नहीं।
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