लाखों-करोड़ों में, एक तुमको चुनते हैं
हर ख़याल, हर ख्वाब तेरा ही बुनते हैं
अब कहाँ जरूरत रही दिमाग की हमें
तेरे इश्क़ में हम बस दिल की सुनते हैं
तेरी यादों में खोए रहते, हम हर लम्हा
हिज़्र की तन्हाइयों में, जलते-भुनते हैं
तुझपर अपना, सबकुछ निसार किया
तेरे लिए जिए, तेरे लिए मरते-घुनते हैं
तेरी मोहब्बत का, ये असर हुआ 'नीर'
सुना है वो, तेरी लिखी ग़ज़लें गुनते हैं।
Saba Parveen ✍🏻 #💓 मोहब्बत दिल से