kailash devi
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#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🇮🇳 देशभक्ति #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏कर्म क्या है❓
🙏गीता ज्ञान🛕 - कल्कि ज्ञान सागर अहिंसा परमोधर्म मानव सेवा संस्थान आत्मा की सबसे बड़ी भूल यही होती है कि वह अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान नहीं पाती यह ज्ञान केवल आत्मबोध से ही संभव है जिनेंद्र जय कल्कि साधक कैलाश मोहन अनेकता में एकता हिन्द की विशेषता हिन्द की विशेषता बने विश्व की विशेषता। सबकी सेवा सबसे प्यार। । हम सब एक है सबका स्वामी एक। Bahubali Colony Banswara Rajasthan 327OO7 India kalkigyansagarcom 9602604410 WN कल्कि ज्ञान सागर अहिंसा परमोधर्म मानव सेवा संस्थान आत्मा की सबसे बड़ी भूल यही होती है कि वह अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान नहीं पाती यह ज्ञान केवल आत्मबोध से ही संभव है जिनेंद्र जय कल्कि साधक कैलाश मोहन अनेकता में एकता हिन्द की विशेषता हिन्द की विशेषता बने विश्व की विशेषता। सबकी सेवा सबसे प्यार। । हम सब एक है सबका स्वामी एक। Bahubali Colony Banswara Rajasthan 327OO7 India kalkigyansagarcom 9602604410 WN - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓ #🇮🇳 देशभक्ति #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏कर्म क्या है❓ - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्मभूमि पर अपना आत्मकल्पाण करने केलिए विदेही भाव मेंनिष्काम कर्मयोगी वनना जररीहै। कल्कि साधक  फलाश माहन जीवन में धर्म को धारण करो , ईमान से करो अर्थ को अर्जित | सर्व मनोकामनाएं पहले पूर्ण करों , फिर मोक्ष के लिए विदेही भाव में निष्काम कर्मयोगी बनकर बनों महावीर | अद्भुत रहस्मय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार सृष्टि में ८४ लाख योनियों के जीव -्जीवात्मा विचरण करते है , जिसमें एक मानव ही ऐसा प्राणी है, जिसे सगुण परमात्मा परब्रह्म की सर्वश्रेष्ठ कृति , सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना जाता है। ज्ञात रहे सृष्टि के सभी देवी -्देवता व मानव निर्गुण  ईश्वर का सगुण स्वरूप है।जिस प्रकार देवी - देवता व मानव एक ही सिक्के के दो पहलु है, उसी प्रकार सगुण मानव व निर्गुण ईश्वर भी एक ही सिक्के के दो पहलु है। देवलोक से कर्मभूमि पर सगुण परब्रह्म स्वरूप मनुष्यरूपी जीवात्मा का अवतरण कर्मभूमि पर सत्कर्मी बनकर स्वर्ग सुख का आनन्द ন লিব; লুন ভ্ভূব মৃচ্ছি ক্ষী স্বাসামা को पराजित करने  अपने सगुण मायावी  जीवात्मस्वरूप को त्यागकर विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम के लिए हुआ हैं ।स्वयं के सत्यस्वरूप कर्मयोगी बनकर आत्मकल्याण करने  को जानों अपना मानव जीवन सार्थक बनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्मभूमि पर अपना आत्मकल्पाण करने केलिए विदेही भाव मेंनिष्काम कर्मयोगी वनना जररीहै। कल्कि साधक  फलाश माहन जीवन में धर्म को धारण करो , ईमान से करो अर्थ को अर्जित | सर्व मनोकामनाएं पहले पूर्ण करों , फिर मोक्ष के लिए विदेही भाव में निष्काम कर्मयोगी बनकर बनों महावीर | अद्भुत रहस्मय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ईश्वरीय ज्ञानानुसार सृष्टि में ८४ लाख योनियों के जीव -्जीवात्मा विचरण करते है , जिसमें एक मानव ही ऐसा प्राणी है, जिसे सगुण परमात्मा परब्रह्म की सर्वश्रेष्ठ कृति , सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी माना जाता है। ज्ञात रहे सृष्टि के सभी देवी -्देवता व मानव निर्गुण  ईश्वर का सगुण स्वरूप है।जिस प्रकार देवी - देवता व मानव एक ही सिक्के के दो पहलु है, उसी प्रकार सगुण मानव व निर्गुण ईश्वर भी एक ही सिक्के के दो पहलु है। देवलोक से कर्मभूमि पर सगुण परब्रह्म स्वरूप मनुष्यरूपी जीवात्मा का अवतरण कर्मभूमि पर सत्कर्मी बनकर स्वर्ग सुख का आनन्द ন লিব; লুন ভ্ভূব মৃচ্ছি ক্ষী স্বাসামা को पराजित करने  अपने सगुण मायावी  जीवात्मस्वरूप को त्यागकर विदेही भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम के लिए हुआ हैं ।स्वयं के सत्यस्वरूप कर्मयोगी बनकर आत्मकल्याण करने  को जानों अपना मानव जीवन सार्थक बनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat
मानव स्वयं के वर्तमान जीवन को देखकर अपने पूर्व के कर्म व भविष्य को जान सकता है… https://kalkigyansagar.com?p=2062 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🇮🇳 देशभक्ति
हिन्दुत्व नहीं हिन्दत्व की भावना से मिटेगा सम्प्रदायवाद, राष्ट्रीय एकता से बनेगा भारत पुनः विश्व धर्म गुरु… https://kalkigyansagar.com?p=1872 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏 माँ वैष्णो देवी #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🇮🇳 देशभक्ति #🙏गीता ज्ञान🛕
कम संतान सुखी इंसान बच्चे दो ही अच्छे संतान कम होगी तो उनकी परवरिश अच्छी होगी… https://kalkigyansagar.com?p=1833 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🇮🇳 देशभक्ति #🙏 माँ वैष्णो देवी
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🙏गीता ज्ञान🛕 - ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्भूनिपर ागुण पर्ह्मका अवतार हेने केवाद  हृवपनेंनिर्गुणपरमव्रह्मल कर्मपोगीक का अवतरण होताहै| कल्कि साधक  फलाश माहन कर्मभूमि पर जब कोई कर्मयोगी राम, रहीम, ईसा, गुरूनानक, बौद्ध, লিব  विदेही महावीर , मोहम्मद, कृष्ण , कबीर की तरह जन कल्याण के भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बन जाता है, तब उस कर्मयोगी जीवात्मा के भीतर सगुण परब्रह्म का अवतार स्वरूप प्राकट्य  निर्गुण आत्मा के भीतर निर्गुण होता है, बाद उस साधक की इसके परमब्रह्म का ज्ञान व आत्मशक्ति स्वरुप भव्य अवतरण होता है ।निष्काम कर्मयोगी साधक के भीतर जब निर्गुण आत्मा व सगुण जीवात्मा का एकाकार हो जाता है, उस साधक के भीतर निर्गुण -सगुण का भेद मिटकर  वो साधक परमसत्य बन जाता है, तब उस निष्काम कर्मयोगी साधक के भीतर निर्गुण परमब्रह्म अपने स्वरूप को रचते है সানন অান ঊ লীযা निर्गुण परमब्रह्म को ईश्वर व सगुण परब्रह्म को अवतार मान सकते है ईश्वर एकही सिक्के के दो पहलू है जिसका प्राकट्य मानव तन अवतारव के भीतर आत्मा व जीवात्मा के अंदर होता है, उनके लिए मानव तन एक रथ के समान है तो भला मानव के नश्वर तन को भगवान मानकर नश्वरता की पूजा करना कैसे सार्थक हो सकता है ? पूजा उस सगुण  निर्गुण परमब्रह्म की परब्रह्म के प्रतिक शिवलिंग की करो और साधना उस  करों , जिसकी राम -कृष्ण समेत सभी निष्काम कर्मयोगी किया करते थे सत्यको जानों , सत्यवादी बनों , अपना मानव जीवन सार्थकबनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें ऊँ विश्व शांति सत्यमेव जयते अहिंसा जय नवीन विश्व धर्म कल्कि ज्ञान सागर सतयुगी विश्व अहिंसा परमोधर्म का संदेश कर्भूनिपर ागुण पर्ह्मका अवतार हेने केवाद  हृवपनेंनिर्गुणपरमव्रह्मल कर्मपोगीक का अवतरण होताहै| कल्कि साधक  फलाश माहन कर्मभूमि पर जब कोई कर्मयोगी राम, रहीम, ईसा, गुरूनानक, बौद्ध, লিব  विदेही महावीर , मोहम्मद, कृष्ण , कबीर की तरह जन कल्याण के भाव में विराट आत्मस्वरूप निष्काम कर्मयोगी बन जाता है, तब उस कर्मयोगी जीवात्मा के भीतर सगुण परब्रह्म का अवतार स्वरूप प्राकट्य  निर्गुण आत्मा के भीतर निर्गुण होता है, बाद उस साधक की इसके परमब्रह्म का ज्ञान व आत्मशक्ति स्वरुप भव्य अवतरण होता है ।निष्काम कर्मयोगी साधक के भीतर जब निर्गुण आत्मा व सगुण जीवात्मा का एकाकार हो जाता है, उस साधक के भीतर निर्गुण -सगुण का भेद मिटकर  वो साधक परमसत्य बन जाता है, तब उस निष्काम कर्मयोगी साधक के भीतर निर्गुण परमब्रह्म अपने स्वरूप को रचते है সানন অান ঊ লীযা निर्गुण परमब्रह्म को ईश्वर व सगुण परब्रह्म को अवतार मान सकते है ईश्वर एकही सिक्के के दो पहलू है जिसका प्राकट्य मानव तन अवतारव के भीतर आत्मा व जीवात्मा के अंदर होता है, उनके लिए मानव तन एक रथ के समान है तो भला मानव के नश्वर तन को भगवान मानकर नश्वरता की पूजा करना कैसे सार्थक हो सकता है ? पूजा उस सगुण  निर्गुण परमब्रह्म की परब्रह्म के प्रतिक शिवलिंग की करो और साधना उस  करों , जिसकी राम -कृष्ण समेत सभी निष्काम कर्मयोगी किया करते थे सत्यको जानों , सत्यवादी बनों , अपना मानव जीवन सार्थकबनाओं अधिक जानकारी के लिए Kalki Gyan Sagar एप डाउनलॉड करें - ShareChat
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🙏कर्म क्या है❓ - कल्कि ज्ञान सागर अहिंसा परमोधर्म मानव सेवा संस्थान आत्मा की सबसे बड़ी भूल यही होती है कि वह अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान नहीं पाती यह ज्ञान केवल आत्मबोध से ही संभव है जिनेंद्र जय कल्कि साधक कैलाश मोहन अनेकता में एकता हिन्द की विशेषता हिन्द की विशेषता बने विश्व की विशेषता। सबकी सेवा सबसे प्यार। । हम सब एक है सबका स्वामी एक। Bahubali Colony Banswara Rajasthan 327OO7 India kalkigyansagarcom 9602604410 WN कल्कि ज्ञान सागर अहिंसा परमोधर्म मानव सेवा संस्थान आत्मा की सबसे बड़ी भूल यही होती है कि वह अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान नहीं पाती यह ज्ञान केवल आत्मबोध से ही संभव है जिनेंद्र जय कल्कि साधक कैलाश मोहन अनेकता में एकता हिन्द की विशेषता हिन्द की विशेषता बने विश्व की विशेषता। सबकी सेवा सबसे प्यार। । हम सब एक है सबका स्वामी एक। Bahubali Colony Banswara Rajasthan 327OO7 India kalkigyansagarcom 9602604410 WN - ShareChat