५४ ह व्ह्यू · ३ ह प्रतिक्रिया | 👩🏫 माता सावित्रीबाई फुले का योगदान माता सावित्रीबाई फुले का भारतीय समाज, खासकर महिला शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्हें निम्नलिखित उपलब्धियों के लिए याद किया जाता है: भारत की पहली महिला शिक्षिका: वह 1848 में भारत की पहली महिला शिक्षिका बनीं। बालिका विद्यालय की स्थापना: उन्होंने अपने पति, ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर 1848 में पुणे के भिडेवाड़ा में लड़कियों के लिए भारत का पहला विद्यालय (कन्या विद्यालय) स्थापित किया। शिक्षा का प्रसार: उन्होंने लड़कियों और समाज के बहिष्कृत हिस्सों के लोगों को शिक्षा प्रदान करने में अग्रणी भूमिका निभाई और कुल 18 से अधिक स्कूलों की स्थापना की। दलितों और अछूतों का उत्थान: उन्होंने हमेशा शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं और अछूतों के उत्थान के लिए काम किया। सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष: उन्होंने बाल-विवाह, सती प्रथा, और जातिगत भेदभाव जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज़ उठाई। विधवाओं के लिए कार्य: उन्होंने विधवा पुनर्विवाह की परंपरा शुरू की और 1853 में गर्भवती बलात्कार पीड़ितों और विधवाओं के लिए 'बाल हत्या प्रतिबंधक गृह' की स्थापना की, ताकि कन्या शिशु हत्या को रोका जा सके। सत्यशोधक समाज: उन्होंने अपने पति के साथ 1873 में 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसका उद्देश्य सामाजिक समानता को बढ़ावा देना था। मराठी काव्य में योगदान: उन्हें आधुनिक मराठी काव्य की अग्रदूत भी माना जाता है। उनका कविता संग्रह 'काव्यफुले' (1854) में प्रकाशित हुआ था। उनका जीवन और कार्य भारतीय समाज में सामाजिक सुधार और महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। 👉 माता सावित्रीबाई फुले के योगदान को महिला एवं शोषित वंचित समाज को समाज को कभी नहीं भूलना चाहिए.... #ambedkar #babasahebambedkar #jaybhim #phule #buddha | Victor Sultanpuri
👩🏫 माता सावित्रीबाई फुले का योगदान
माता सावित्रीबाई फुले का भारतीय समाज, खासकर महिला शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा...