Haricharan Mali
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भगवत गीता हमें जीवन में शांति, स्थिरता एवं स्पष्टता का अनुभव प्रदान करता #🙏गीता ज्ञान🛕 है।
🙏गीता ज्ञान🛕 - PRABHAT PRAKASHAN भगवद्गीता அfி86# भगवद्गीता? भगवद्गीता जीवन जीने का एक संपूर्ण मार्गदर्शक है। यह हमें तनाव, दबाव, अवसाद , संघर्ष और चिंता जैसी परिस्थितियों से निपटने की स्पष्ट दिशा देती है। गीता अस्तित्व को एक सुंदर जीवन-कला में बदल देती है। గెHT यह हमें बताती है कि कर्म क्यों आवश्यक हैं उनका मूल स्रोत क्या है, और किस भावना से कर्म करना चाहिए। ही, गीता प्रेम और भक्ति के स्वरूप का अद्भुत ज्ञान प्रदान সাথ करती है। यह केवल एक ग्रंथ नहीं एक ऐसा अनुभव है जो जीवन को स्थिरता, स्पष्टता और शांति देता है। PRABHAT PRAKASHAN भगवद्गीता அfி86# भगवद्गीता? भगवद्गीता जीवन जीने का एक संपूर्ण मार्गदर्शक है। यह हमें तनाव, दबाव, अवसाद , संघर्ष और चिंता जैसी परिस्थितियों से निपटने की स्पष्ट दिशा देती है। गीता अस्तित्व को एक सुंदर जीवन-कला में बदल देती है। గెHT यह हमें बताती है कि कर्म क्यों आवश्यक हैं उनका मूल स्रोत क्या है, और किस भावना से कर्म करना चाहिए। ही, गीता प्रेम और भक्ति के स्वरूप का अद्भुत ज्ञान प्रदान সাথ करती है। यह केवल एक ग्रंथ नहीं एक ऐसा अनुभव है जो जीवन को स्थिरता, स्पष्टता और शांति देता है। - ShareChat
#📲मेरा पहला पोस्ट😍 हम जैसा कर्म करते हैं वैसा ही प्रतिफल प्राप्त होता है ।
📲मेरा पहला पोस्ट😍 - समय पत्रिका हम जैसा करते वैसा 8; چ7 लौटता है कर्म के तीन प्रकार हैं पहला, संचित कर्म, वह उसी तरह है, जिस तरह बैंक में हमारा जमा धन | जन्म से पूर्व किए गए कर्म , जो संचित हैं | दूसरे, कर्म क्रियामान कर्म क्रियामान कर्म का है, जो जन्म लिये जाने के बाद किए जा रहे हैं | यह तीन मतलब तरह के होते हैं | शारीरिक, यह दूसरी श्रेणी के क्रियामान कर्म हैं यह वे कर्म हैं, जो हम जन्म के बाद से कर रहे हैं | शरीर से किया गया कर्म भी कर्म है । मन से किया गया कर्म भी कर्म है, जो मन से सोचते हैं व योजना बनाते हैं, और कुछ बोलते हैं, वह भी कर्म है, क्योंकि उसकी वाइब्रेशन हमारे ऑरा का निर्माण करती है । शारीरिक , मानसिक व वाचिक यह सब क्रियामान कर्म हैं, जो हर ফ ৯ तीसरा जो कर्म है, वह प्रारब्ध है, जो कि समय भाग्य बना हमने कर्म किए हैं, उसका फल मिलना तय है और संचित व क्रियामान कर्म मिलकर प्रारब्ध कर्म बनते हैं और यह प्रारब्ध कर्म कर रहे हैं । দল ই, নী #স ওপশীয  स्वरय की खोज प्रभात प्रकाशन समय पत्रिका हम जैसा करते वैसा 8; چ7 लौटता है कर्म के तीन प्रकार हैं पहला, संचित कर्म, वह उसी तरह है, जिस तरह बैंक में हमारा जमा धन | जन्म से पूर्व किए गए कर्म , जो संचित हैं | दूसरे, कर्म क्रियामान कर्म क्रियामान कर्म का है, जो जन्म लिये जाने के बाद किए जा रहे हैं | यह तीन मतलब तरह के होते हैं | शारीरिक, यह दूसरी श्रेणी के क्रियामान कर्म हैं यह वे कर्म हैं, जो हम जन्म के बाद से कर रहे हैं | शरीर से किया गया कर्म भी कर्म है । मन से किया गया कर्म भी कर्म है, जो मन से सोचते हैं व योजना बनाते हैं, और कुछ बोलते हैं, वह भी कर्म है, क्योंकि उसकी वाइब्रेशन हमारे ऑरा का निर्माण करती है । शारीरिक , मानसिक व वाचिक यह सब क्रियामान कर्म हैं, जो हर ফ ৯ तीसरा जो कर्म है, वह प्रारब्ध है, जो कि समय भाग्य बना हमने कर्म किए हैं, उसका फल मिलना तय है और संचित व क्रियामान कर्म मिलकर प्रारब्ध कर्म बनते हैं और यह प्रारब्ध कर्म कर रहे हैं । দল ই, নী #স ওপশীয  स्वरय की खोज प्रभात प्रकाशन - ShareChat