Dinesh Akodiya
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🌐 राष्ट्रीय अपडेट - ননিকমাকয HTTI -F सबसे पहले दैनिक भास्कर में देखिए -ऐसा होगा भार्कर एक्सक्लसिच भोपाल  २०२८ तक होगा तैयार का कैंपस... बरखेड़ा नाथू में IIIT नॉलेज इन्फॉर्मेशन एवं ९ मंजिला प्रशासनिक एवं शैक्षणिक भवन ऑडिटोरियम कॉम्प्लेक्स ४३,५८६ वर्गमीटर में बनेगा , ५९४ कमरे 6 মসিলা মবন চ্ীসা ७ मंजिला टीचिंग ब्लॉक 6 बड़े हाल हर मंजिल पर ७ मंजिला लैबोरेटरी ब्लॉक ३६९६ विद्यार्थियों की क्षमता १२ लैब हर मंजिल पर ३२४८ विद्यार्थियों को सुविधा ६४७.७ करोड़ लागत २.४६ लाख वर्गमीटर में निर्माण हमारे IIIT कैंपस में दिखेगी नालंदा -्ज्यूरिख की झलक गिरीश उपाध्याय भोपाल भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान भोपाल ( आईआईआईटी ) को २०२८ तक बरखेड़ा नाथू के पास अपना स्थायी परिसर मिल जाएगा। संस्थान के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने ही इसकी रूपरेखा तैयार की है। इसके लिए ईटीएच ज्यूरिख और नालंदा ईटीएच ज्यूरिख नालंदा : कैंपस का विश्वविद्यालय के नए परिसर की डिजाइन से प्रेरणा ली गई है। गोलाई लिए डिजाइन और 9 মতিলা হসানে केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने भी इसे मंजूरी दे दी है। और आधुनिक लैब बीच का बड़ा गुंबद प्राचीन परिसर का निर्माण चरणबद्ध तरीके से होगा। अभी संस्थान वाले ब्लॉक कैंपस नालंदा विश्वविद्यालय जैसी मैनिट परिसर में संचालित हो रहा है संस्थान के निदेशक हाईटेक बनाएंगे। झलक देगा। को प्रो॰ आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि यह पूरी तरह ग्रीन कैंपस होगा। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम वाले प्रवेश द्वार होंगे। १९६ विद्यार्थियों की क्षमता होगी। रिसर्च सेंटर में उन्नत शोध, आइडेंटिटी बेस्ड इंट्रेंस और एग्जिट होंगे। प्रशासनिक भवन सहयोगी परियोजनाएं और नवाचार आधारित गतिविधियां के पीछे की ओर तीन मंजिला रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर व स्टार्टअप एंड इन्क्यूबेशन सेंटर भी बनाए जाएंगे। प्रत्येक में होंगी। ননিকমাকয HTTI -F सबसे पहले दैनिक भास्कर में देखिए -ऐसा होगा भार्कर एक्सक्लसिच भोपाल  २०२८ तक होगा तैयार का कैंपस... बरखेड़ा नाथू में IIIT नॉलेज इन्फॉर्मेशन एवं ९ मंजिला प्रशासनिक एवं शैक्षणिक भवन ऑडिटोरियम कॉम्प्लेक्स ४३,५८६ वर्गमीटर में बनेगा , ५९४ कमरे 6 মসিলা মবন চ্ীসা ७ मंजिला टीचिंग ब्लॉक 6 बड़े हाल हर मंजिल पर ७ मंजिला लैबोरेटरी ब्लॉक ३६९६ विद्यार्थियों की क्षमता १२ लैब हर मंजिल पर ३२४८ विद्यार्थियों को सुविधा ६४७.७ करोड़ लागत २.४६ लाख वर्गमीटर में निर्माण हमारे IIIT कैंपस में दिखेगी नालंदा -्ज्यूरिख की झलक गिरीश उपाध्याय भोपाल भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान भोपाल ( आईआईआईटी ) को २०२८ तक बरखेड़ा नाथू के पास अपना स्थायी परिसर मिल जाएगा। संस्थान के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने ही इसकी रूपरेखा तैयार की है। इसके लिए ईटीएच ज्यूरिख और नालंदा ईटीएच ज्यूरिख नालंदा : कैंपस का विश्वविद्यालय के नए परिसर की डिजाइन से प्रेरणा ली गई है। गोलाई लिए डिजाइन और 9 মতিলা হসানে केंद्रीय लोक निर्माण विभाग ने भी इसे मंजूरी दे दी है। और आधुनिक लैब बीच का बड़ा गुंबद प्राचीन परिसर का निर्माण चरणबद्ध तरीके से होगा। अभी संस्थान वाले ब्लॉक कैंपस नालंदा विश्वविद्यालय जैसी मैनिट परिसर में संचालित हो रहा है संस्थान के निदेशक हाईटेक बनाएंगे। झलक देगा। को प्रो॰ आशुतोष कुमार सिंह ने बताया कि यह पूरी तरह ग्रीन कैंपस होगा। इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम वाले प्रवेश द्वार होंगे। १९६ विद्यार्थियों की क्षमता होगी। रिसर्च सेंटर में उन्नत शोध, आइडेंटिटी बेस्ड इंट्रेंस और एग्जिट होंगे। प्रशासनिक भवन सहयोगी परियोजनाएं और नवाचार आधारित गतिविधियां के पीछे की ओर तीन मंजिला रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर व स्टार्टअप एंड इन्क्यूबेशन सेंटर भी बनाए जाएंगे। प्रत्येक में होंगी। - ShareChat
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🌐 राष्ट्रीय अपडेट - एन. रंगासामी ५्वींबार के मुख्यमंत्री बने ತತಾಗೆ एन. रंगासामी ५्वींबार के मुख्यमंत्री बने ತತಾಗೆ - ShareChat
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🌐 राष्ट्रीय अपडेट - दैनिक भास्कर बेधड़क सच्ची बात, भास्कर नॉलेज दिल्ली में बैरियर -्लेस टोलः जानें कैसे काम करती है यह तकनीक नई दिल्ली | दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-II ' पर  पूर्ण बैरियर-लेस स्थित मुंडका टोल प्लाजा देश का पहला टोल बन गया है। इससे पहले सूरत में इसका पायलट प्रोजेक्ट किया गया था। जानें इसमें क्या खास है... यह सामान्य टोल से कैसे अलग है ? पारंपरिक टोल प्लाजा पर वाहनों को रुकना पड़ता है और बैरियर हटने का इंतजार करना पड़ता है। इसके विपरीत, मल्टी-्लेन फ्री फ्लो' सिस्टम में कोई बैरियर नहीं होता। वाहन अपनी सामान्य गति ( लेन स्पीड लिमिट ) से प्लाजा से गुजर सकते हैं और टोल टैक्स अपने आप कट जाता है। यह तकनीक काम कैसे करती है ? इसमें हाई-स्पीड ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' कैमरे और उन्नत आरएफआईडी रीडर्स का उपयोग होता है। वाहन गुजरता है, तो ये सेंसर फास्टैग और नंबर प्लेट को स्कैन कर वॉलेट से पैसे काट लेते हैं। यह इतनी तेजी से होता है कि वाहन धीमा करने की जरूरत नहीं पड़ती। कोहरे -अंधेरे में क्या ये कैमरे काम करेंगे ? इस सिस्टम में उपयोग किए जाने वाले कैमरे ` इंफ्रारेड' तकनीक से लैस होते हैं। ये रात के अंधेरे , भारी बारिश या घने कोहरे में भी नंबर प्लेट और फास्टैग को स्कैन कर सकते हैं। इनकी ' एक्यूरेसी' ११% से अधिक है। क्या ये पूरे देश में लागू होगा ? इस साल के अंत तक लगभग २५ और नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर इस सिस्टम को लागू करने की तैयारी है। वाहन मालिकों - कंपनियों को क्या फायदा है ? वाहन मालिकों के समय व ईंधन की बचत होती है। टोल कंपनियों के लागत में ४% तक की कमी आती है। फास्टैग न हो या उसमें बैलेंस न हो क्या होगा ? फास्टैग में बैलेंस कम है, तो ७२ घंटे का ई-्नोटिस जाता भुगतान न करने पर दोगुना टोल वसूला जा सकता 8 है। फास्टैग न होने पर ये नंबर प्लेट से सारी निकाल लेता है और तय प्रक्रिया के अनुसार चालान भेजा जाता है। दैनिक भास्कर बेधड़क सच्ची बात, भास्कर नॉलेज दिल्ली में बैरियर -्लेस टोलः जानें कैसे काम करती है यह तकनीक नई दिल्ली | दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-II ' पर  पूर्ण बैरियर-लेस स्थित मुंडका टोल प्लाजा देश का पहला टोल बन गया है। इससे पहले सूरत में इसका पायलट प्रोजेक्ट किया गया था। जानें इसमें क्या खास है... यह सामान्य टोल से कैसे अलग है ? पारंपरिक टोल प्लाजा पर वाहनों को रुकना पड़ता है और बैरियर हटने का इंतजार करना पड़ता है। इसके विपरीत, मल्टी-्लेन फ्री फ्लो' सिस्टम में कोई बैरियर नहीं होता। वाहन अपनी सामान्य गति ( लेन स्पीड लिमिट ) से प्लाजा से गुजर सकते हैं और टोल टैक्स अपने आप कट जाता है। यह तकनीक काम कैसे करती है ? इसमें हाई-स्पीड ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन' कैमरे और उन्नत आरएफआईडी रीडर्स का उपयोग होता है। वाहन गुजरता है, तो ये सेंसर फास्टैग और नंबर प्लेट को स्कैन कर वॉलेट से पैसे काट लेते हैं। यह इतनी तेजी से होता है कि वाहन धीमा करने की जरूरत नहीं पड़ती। कोहरे -अंधेरे में क्या ये कैमरे काम करेंगे ? इस सिस्टम में उपयोग किए जाने वाले कैमरे ` इंफ्रारेड' तकनीक से लैस होते हैं। ये रात के अंधेरे , भारी बारिश या घने कोहरे में भी नंबर प्लेट और फास्टैग को स्कैन कर सकते हैं। इनकी ' एक्यूरेसी' ११% से अधिक है। क्या ये पूरे देश में लागू होगा ? इस साल के अंत तक लगभग २५ और नेशनल हाईवे टोल प्लाजा पर इस सिस्टम को लागू करने की तैयारी है। वाहन मालिकों - कंपनियों को क्या फायदा है ? वाहन मालिकों के समय व ईंधन की बचत होती है। टोल कंपनियों के लागत में ४% तक की कमी आती है। फास्टैग न हो या उसमें बैलेंस न हो क्या होगा ? फास्टैग में बैलेंस कम है, तो ७२ घंटे का ई-्नोटिस जाता भुगतान न करने पर दोगुना टोल वसूला जा सकता 8 है। फास्टैग न होने पर ये नंबर प्लेट से सारी निकाल लेता है और तय प्रक्रिया के अनुसार चालान भेजा जाता है। - ShareChat