#🙏radh krishna 🙏 #🙏🙏🌷radh e radhe🌷🙏🙏 #ॐ कहते हैं- हे अर्जुन, जो इस आत्मा को अजन्मा, अविनाशी इस प्रकार जानता है l अनुवाद में मैंने कई जगह पढ़ा है कि हे अर्जुन जो इस आत्मा को अजन्मा, अविनाशी इस प्रकार मानता है l एक गलत अनुवाद से पूरे श्लोक का भाव बदल जाता है l आत्मा को जानना और आत्मा को मानना दोनों में बहुत अन्तर है l कृष्ण जैसी हस्तियां भी मानने की बात करने लगें तो उनकी ऊंचाई ही क्या रह जाएगी ? लेकिन हमारी भी मजबूरी है, हम शास्त्र को पढ़कर कैसे समझें? समझने का जो साधन है, वह हमारी बुद्धि है, जो जितनी हमारी बुद्धि है, उतना हम शास्त्र को समझ लेते हैं l
जैसे तैराकी की हजार किताबें पढ़ने से आप तैरना नहीं सीख सकते, बैसे ही आत्मा के बारे में अध्ययन करने से,पढ़ने या सुनने से आप आत्मा को नहीं जान सकते l ध्यान, साक्षी और समाधि उस आत्मा को जानने का उपाय है l
जय श्री कृष्ण..
स्वामी आनंद देव...