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#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - चार धाम यात्रा के दौरान क्या लाना चाहिए? १. बद्रीनाथः विष्णु  सत्ययुग का प्रतीक और भगवान 3 समर्पित यहां से वैजयंती माला और ক্ী ரி माला लाना शुभ माना जाता है रामेश्वरम्ः 2. T का प्रतीक और भगवान शिव को समर्पित यहां से पवित्र जल लाने की मान्यता है। ३. द्वारकाधीशः द्वापर युग का प्रतीक और भगवान कृष्ण को समर्पित यहां से गोपी चंदन और मोरपंख लाने की परंपरा है पुरीः 4 সমলাথ कलियुग का निवास स्थान माना जाता है यहां से नारियल की छड़ी लाने की मान्यता dనimuhAliinfE चार धाम यात्रा के दौरान क्या लाना चाहिए? १. बद्रीनाथः विष्णु  सत्ययुग का प्रतीक और भगवान 3 समर्पित यहां से वैजयंती माला और ক্ী ரி माला लाना शुभ माना जाता है रामेश्वरम्ः 2. T का प्रतीक और भगवान शिव को समर्पित यहां से पवित्र जल लाने की मान्यता है। ३. द्वारकाधीशः द्वापर युग का प्रतीक और भगवान कृष्ण को समर्पित यहां से गोपी चंदन और मोरपंख लाने की परंपरा है पुरीः 4 সমলাথ कलियुग का निवास स्थान माना जाता है यहां से नारियल की छड़ी लाने की मान्यता dనimuhAliinfE - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - aRIffa राजयोग और उनका फल वैदिक ज्योतिष में गुरू (बृहस्पति) को ज्ञान, धर्म, भाग्य, समृद्धि कुंडली में शुभ और शुभता का कारक माना गया है। जब गुरू स्थिति में होकर विशेष योगों का निर्माण करता है, तब व्यक्ति के जीवन में सफलता , सम्मान और उन्नति के द्वार खुलते हैं।  गुरु और चंद्रमा के शुभ संबंध से गजकेसरी योग बनने वाला यह योग व्यकि को बुद्धिमान, यशस्वी, सम्मानित और धनवान बनाता हैे। जब गुरुू अपनी राशि या उच्च राशि  में केंद्र भाव में स्थित हो, तब यह योग  २ हंस महापुरूष योग है। इससे व्यक्ति को उच्च पद, बनता प्रतिष्ठा , आध्यात्मिक उन्नति और सुख प्राप्त होता है। भाग्य और कर्म भाव के स्वामियों के ३ धर्म-्कर्माधिपति संबंध में गुरू " সমান চী নী নদিন का को करियर में सफलता, पद और II योग सम्मान प्राप्त होता है। गुरु की शुभ दृष्टि या स्थिति से बनने राजलक्ष्मी योग वैभव, संपत्ति और वाला यह योग धन जीवन में विशेष उन्नति प्रदान करता हैे। दशम भाव पर गुरु का शुभ प्रभाव अमला योग व्यकि को समाज में प्रतिष्ठा, सम्मान 5 और स्थायी सफलता दिलाता है। देते हैं जब गुरू बलवान हो विशेषः गुरू द्वारा निर्मित राजयोग तभी श्रेष्ठ फल ' तथा पाप ग्रहों से अत्यधिक प्रभाबित न हो। Astrofrlend NareshChand Zns aRIffa राजयोग और उनका फल वैदिक ज्योतिष में गुरू (बृहस्पति) को ज्ञान, धर्म, भाग्य, समृद्धि कुंडली में शुभ और शुभता का कारक माना गया है। जब गुरू स्थिति में होकर विशेष योगों का निर्माण करता है, तब व्यक्ति के जीवन में सफलता , सम्मान और उन्नति के द्वार खुलते हैं।  गुरु और चंद्रमा के शुभ संबंध से गजकेसरी योग बनने वाला यह योग व्यकि को बुद्धिमान, यशस्वी, सम्मानित और धनवान बनाता हैे। जब गुरुू अपनी राशि या उच्च राशि  में केंद्र भाव में स्थित हो, तब यह योग  २ हंस महापुरूष योग है। इससे व्यक्ति को उच्च पद, बनता प्रतिष्ठा , आध्यात्मिक उन्नति और सुख प्राप्त होता है। भाग्य और कर्म भाव के स्वामियों के ३ धर्म-्कर्माधिपति संबंध में गुरू " সমান চী নী নদিন का को करियर में सफलता, पद और II योग सम्मान प्राप्त होता है। गुरु की शुभ दृष्टि या स्थिति से बनने राजलक्ष्मी योग वैभव, संपत्ति और वाला यह योग धन जीवन में विशेष उन्नति प्रदान करता हैे। दशम भाव पर गुरु का शुभ प्रभाव अमला योग व्यकि को समाज में प्रतिष्ठा, सम्मान 5 और स्थायी सफलता दिलाता है। देते हैं जब गुरू बलवान हो विशेषः गुरू द्वारा निर्मित राजयोग तभी श्रेष्ठ फल ' तथा पाप ग्रहों से अत्यधिक प्रभाबित न हो। Astrofrlend NareshChand Zns - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - शादी का निमंत्रण सबसे पहले किसे और क्यों देना चाहिएः पहला निमंत्रण गणेश जी को दिया जाता है ताकि विवाह में सभी देवताओं , कोई विघ्न न आए। पितरों और परिवार आशीर्वाद का दूसरा निमंत्रण विष्णु जी और विवाह को सफल 2 लक्ष्मी को दिया जाता है और मंगलमय TT बनाता है। बिना कोई भी क्योंकि $ मांगलिक कार्य पूर्ण नहीं होता। নীমযা নিরমন্সতা মনুমান সী ক্রী 3 दिया जाता है ताकि बुरी शक्तियों का प्रभाव न पडे़। चौथा निमंत्रण कुलदेवी या 4 कुलदेवता को दिँया जाता है जो पूरे कुल की रक्षा करते हैं। पांचवां निमंत्रण पितरों के लिए 5 78 पीपल के पेड़ के नीचे रखा जाता है ताकि उनका आशीर्वाद बना रहे। इसके बाद, निमंत्रण मामा के घर दिया 6 সানা ঔ সন নম্ন সান লকয মামক সানী ষI Astrofrlend NareshChand Zns शादी का निमंत्रण सबसे पहले किसे और क्यों देना चाहिएः पहला निमंत्रण गणेश जी को दिया जाता है ताकि विवाह में सभी देवताओं , कोई विघ्न न आए। पितरों और परिवार आशीर्वाद का दूसरा निमंत्रण विष्णु जी और विवाह को सफल 2 लक्ष्मी को दिया जाता है और मंगलमय TT बनाता है। बिना कोई भी क्योंकि $ मांगलिक कार्य पूर्ण नहीं होता। নীমযা নিরমন্সতা মনুমান সী ক্রী 3 दिया जाता है ताकि बुरी शक्तियों का प्रभाव न पडे़। चौथा निमंत्रण कुलदेवी या 4 कुलदेवता को दिँया जाता है जो पूरे कुल की रक्षा करते हैं। पांचवां निमंत्रण पितरों के लिए 5 78 पीपल के पेड़ के नीचे रखा जाता है ताकि उनका आशीर्वाद बना रहे। इसके बाद, निमंत्रण मामा के घर दिया 6 সানা ঔ সন নম্ন সান লকয মামক সানী ষI Astrofrlend NareshChand Zns - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - भगवान शिव की वंश परंपरा Astrofriend Naresh handeIns उत्पत्ति 30 "त्रिमूर्ति में संहार के देव " आदि शिव (स्वयंभू, अनादि) विष्णु {] CEII (Glig) सहर  ((a ননী @uauml पत्नी १ः सती पत्नी २ः पार्वती "हिमवान और मेना की पुत्री " দননকয] भैरव (*mq) अशोकसुंदरी SIuui ११ रुद्र రాగా Mor भगवान शिव की वंश परंपरा Astrofriend Naresh handeIns उत्पत्ति 30 "त्रिमूर्ति में संहार के देव " आदि शिव (स्वयंभू, अनादि) विष्णु {] CEII (Glig) सहर  ((a ননী @uauml पत्नी १ः सती पत्नी २ः पार्वती "हिमवान और मेना की पुत्री " দননকয] भैरव (*mq) अशोकसुंदरी SIuui ११ रुद्र రాగా Mor - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - गुर्रु की महिमा अपर्म्पान्ट Astrofriend Naresh Chand 7ns तिहारी সভিসা अपरम्पार बेड़ा दो कर पार। T6ut چ 7 9೯೯ ೫ ೯ ಕ प्रेम है दुनिया की हर शक्ति में तू है।  ஈ்ச் க எ ஈT # 7 8 जीवन के कण-कण में तू है।l [ तिहारी महिमा सुख संसार बेड़ा कर दो बार। गुरुजी # 7  8 ஈ # है सुर নাল है ೯೯ ध्यान सत्य   में तू है धर्म में तू है में तू है। जीवन की हर जोत तिहारीं महिमा अपरम्पार . बेड़ा कर दो बाबा बार। [ विभूति 4 अद्भुत 5 ೫ मोक्ष का मार्ग মিলনা | इनसे निशदिन करते अचरज बहुतेरे अनहोनी को होनी में बदलते। সাং   লয স হযা  নিষ্ত্রী के जयकारे। बोलो गुरुजी বুদ্ধাই 37 धन श्रद्वा पास मधुर   मधुर वाणी येबोले। चलना   सिखलाये सत्पथ पर साँसें faಷT # షౌ बचाये।। Astrofriend Naresh Chand Zns गुर्रु की महिमा अपर्म्पान्ट Astrofriend Naresh Chand 7ns तिहारी সভিসা अपरम्पार बेड़ा दो कर पार। T6ut چ 7 9೯೯ ೫ ೯ ಕ प्रेम है दुनिया की हर शक्ति में तू है।  ஈ்ச் க எ ஈT # 7 8 जीवन के कण-कण में तू है।l [ तिहारी महिमा सुख संसार बेड़ा कर दो बार। गुरुजी # 7  8 ஈ # है सुर নাল है ೯೯ ध्यान सत्य   में तू है धर्म में तू है में तू है। जीवन की हर जोत तिहारीं महिमा अपरम्पार . बेड़ा कर दो बाबा बार। [ विभूति 4 अद्भुत 5 ೫ मोक्ष का मार्ग মিলনা | इनसे निशदिन करते अचरज बहुतेरे अनहोनी को होनी में बदलते। সাং   লয স হযা  নিষ্ত্রী के जयकारे। बोलो गुरुजी বুদ্ধাই 37 धन श्रद्वा पास मधुर   मधुर वाणी येबोले। चलना   सिखलाये सत्पथ पर साँसें faಷT # షౌ बचाये।। Astrofriend Naresh Chand Zns - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - पोथी पढ़-पढ जग मुआ पंडित भया न कोय। ढाई अक्षर प्रेम के पढ़े सो पंडित होय।। Ahddlukelin अब पता लगा है कि, ढाई अक्षर हैं क्या ? ढाई अक्षर के ब्रह्मा' और , ढाई अक्षर की মৃছি' विष्णु और ढाई अक्षर की ढाई अक्षर के लक्ष्मीः ढाई अक्षर की और ढाई अक्षर की शक्तिः 3f ढाई अक्षर की 'श्रद्वा' और ढाई अक्षर की भक्तिः ढाई अक्षर का त्याग' और ढाई अक्षर का ध्यान. ढाई अक्षर की 'इच्छा' और ढाई अक्षर की तुष्टि. ढाई अक्षर का धर्म और ढाई अक्षर का कर्मः और , ढाई अक्षर का भाग्य ढाई अक्षर की व्यथाः ढाई अक्षर का  ग्रन्थ और ढाई अक्षर का सन्तः ढाई अक्षर का 'शब्द और ढाई अक्षर का 'अर्थः ढाई अक्षर का सत्य और ढाई अक्षर की मिथ्याः ढाई अक्षर की 377 815 318  'ಟf'' 'श्रुति ढाई अक्षर की ' अग्नि' और ढाई अक्षर का कुण्डः ढाई अक्षर का " मन्त्र' और ढाई अक्षर का यन्त्रः. ढाई अक्षर की 'श्वांस' और ढाई अक्षर के 'प्राण ढाई अक्षर का जन्म' और ढाई अक्षर की ' मृत्युः ढाई अक्षर की 'अस्थि' और ढाई अक्षर की 'अर्थीः ढाई अक्षर का 'प्यार' और ढाई अक्षर का 'युद्ध ढाई अक्षर का 'मित्र और, ढाई अक्षर का '2|3: ढाई अक्षर का 'प्रेम' और ढाई अक्षर की घृणाः जन्म' से लेकर ' मृत्यु' तक हम , बंधे हैं ढाई अक्षर में. हैं ढाई अक्षर ही 'वक़्त' में और ढाई अक्षर ही ' अन्त' में. * महापुरुषों की गूढ़ रहस्यों से भरी भाषा को शत-शत नमन * Astrofriend Naresh Chand 7ns पोथी पढ़-पढ जग मुआ पंडित भया न कोय। ढाई अक्षर प्रेम के पढ़े सो पंडित होय।। Ahddlukelin अब पता लगा है कि, ढाई अक्षर हैं क्या ? ढाई अक्षर के ब्रह्मा' और , ढाई अक्षर की মৃছি' विष्णु और ढाई अक्षर की ढाई अक्षर के लक्ष्मीः ढाई अक्षर की और ढाई अक्षर की शक्तिः 3f ढाई अक्षर की 'श्रद्वा' और ढाई अक्षर की भक्तिः ढाई अक्षर का त्याग' और ढाई अक्षर का ध्यान. ढाई अक्षर की 'इच्छा' और ढाई अक्षर की तुष्टि. ढाई अक्षर का धर्म और ढाई अक्षर का कर्मः और , ढाई अक्षर का भाग्य ढाई अक्षर की व्यथाः ढाई अक्षर का  ग्रन्थ और ढाई अक्षर का सन्तः ढाई अक्षर का 'शब्द और ढाई अक्षर का 'अर्थः ढाई अक्षर का सत्य और ढाई अक्षर की मिथ्याः ढाई अक्षर की 377 815 318  'ಟf'' 'श्रुति ढाई अक्षर की ' अग्नि' और ढाई अक्षर का कुण्डः ढाई अक्षर का " मन्त्र' और ढाई अक्षर का यन्त्रः. ढाई अक्षर की 'श्वांस' और ढाई अक्षर के 'प्राण ढाई अक्षर का जन्म' और ढाई अक्षर की ' मृत्युः ढाई अक्षर की 'अस्थि' और ढाई अक्षर की 'अर्थीः ढाई अक्षर का 'प्यार' और ढाई अक्षर का 'युद्ध ढाई अक्षर का 'मित्र और, ढाई अक्षर का '2|3: ढाई अक्षर का 'प्रेम' और ढाई अक्षर की घृणाः जन्म' से लेकर ' मृत्यु' तक हम , बंधे हैं ढाई अक्षर में. हैं ढाई अक्षर ही 'वक़्त' में और ढाई अक्षर ही ' अन्त' में. * महापुरुषों की गूढ़ रहस्यों से भरी भाषा को शत-शत नमन * Astrofriend Naresh Chand 7ns - ShareChat
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#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - 7ns নীন ঔমুল্থ নান समय , मौत और ग्राहक किसी का इन्तज़ार नहीं करते | माता , पिता और यौवन বঁ বন্ধ ही बार मिलते हैं | जीवन तीर कमान से , बात जबान से , जान शरीर से निकल कर वापिस नहीं लौटते | कुसंगति , निन्दा और स्वार्थ इनसे हमेशा बचना चाहिए। ईश्वर , उद्योग और विद्या मन लगाने से उन्नति होती है। इनमें क़र्ज़ , फ़र्ज़ और मर्ज़ प्रति लापरवाही ठीक नहीं | इनके माता , पिता और गुरु चाहिए। इनका सदा सम्मान करना काम और लोभ A, इनको सदा वश में रखना चाहिए। और अपाहिज 9 बालक , चाहिए इन पर सदा दया करना [ srotendhareshMhand Zn 7ns নীন ঔমুল্থ নান समय , मौत और ग्राहक किसी का इन्तज़ार नहीं करते | माता , पिता और यौवन বঁ বন্ধ ही बार मिलते हैं | जीवन तीर कमान से , बात जबान से , जान शरीर से निकल कर वापिस नहीं लौटते | कुसंगति , निन्दा और स्वार्थ इनसे हमेशा बचना चाहिए। ईश्वर , उद्योग और विद्या मन लगाने से उन्नति होती है। इनमें क़र्ज़ , फ़र्ज़ और मर्ज़ प्रति लापरवाही ठीक नहीं | इनके माता , पिता और गुरु चाहिए। इनका सदा सम्मान करना काम और लोभ A, इनको सदा वश में रखना चाहिए। और अपाहिज 9 बालक , चाहिए इन पर सदा दया करना [ srotendhareshMhand Zn - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - चार वेद जीवन के चार स्तम्भ AstrofriendNaresh Chand 7n3 ऋग्वेद (Rigveda ): 1 यह ज्ञान और भक्ति का वेद है। इसमें देवताओं के स्त्रोत हैं। यजुर्वेद (Yqjuruedq): 2. यह कर्म और अनुष्ठान का वेद है। इसमें यज्ञ करने की विधियाँ बताई गई हैं। 3. =IHd& (Samaueda): यह भक्ति और आनंद का वेद है। इसमें संगीत और स्वर का रहस्य 81 अथर्ववेद (Atharvaveda ): 4. यह व्यवहार और रक्षा का वेद है। इसमें जीवन , स्वास्थ्य और तंत्र॰मंत्र के ज्ञान हैं। चार वेद जीवन के चार स्तम्भ AstrofriendNaresh Chand 7n3 ऋग्वेद (Rigveda ): 1 यह ज्ञान और भक्ति का वेद है। इसमें देवताओं के स्त्रोत हैं। यजुर्वेद (Yqjuruedq): 2. यह कर्म और अनुष्ठान का वेद है। इसमें यज्ञ करने की विधियाँ बताई गई हैं। 3. =IHd& (Samaueda): यह भक्ति और आनंद का वेद है। इसमें संगीत और स्वर का रहस्य 81 अथर्ववेद (Atharvaveda ): 4. यह व्यवहार और रक्षा का वेद है। इसमें जीवन , स्वास्थ्य और तंत्र॰मंत्र के ज्ञान हैं। - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓
🙏कर्म क्या है❓ - ।। सत्यनाम ।। मांसाहार निषेध Astrofriend Naresh Chand 7ns बकरी पाती खात है , ताकी काढ़ी खाल । जो नर बकरी खात हैं , ताको कौन हवाल ॥1 ॥ काजी का बेटा मुआ , उर में सालै पीर । वह साहेब सबका पिता , भला न मानै बीर ॥2 ॥ गला काटि बिस्मिल करै , ते काफिर वेबूझ । औरों को काफिर कहै , अपना कुफर न सूझ ॥3 ॥ जोर करे और जबह करै , मुख सो कहे हलाल । साहेब लेखा मांगसी , होगी कौन हबाल ॥4 ॥ कहता हूं कहि जात हूं , कहा जो मान हमार । जाका गला तुम काटिहो , सो फिर काटे तुम्हार ॥ 5 ॥ पर पीर । तेई पीर है , जो जाने जो पर पीर न जानई , सो काफिर वे पीर ॥6 ॥ मुस्लमान मारे करद सो , हिन्दु मारे तलवार । कहैं कबीर दोनों मिलि , जैइहैं यम के द्वार ॥7 ॥ हिन्दु के दया नहीं , मेहर तुरुक के नाहिं । कहैं कबीर दोनों गया , लख चौरासी मांहि ॥ 8 ॥ हिन्दु व्रत एकादसी साधे , दूध सिंगारा सेती । अन्न को त्यागे मन को न हटके , पारन करै सगौती ॥9 ॥ दया दिल में राखिये , तूं क्यों निर्दय होय । साईं के सब जीव हैं , कीड़ी कुंजर दोय ॥10 ॥ - ShareChat