Ruchi yadvanshi
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#☝ मेरे विचार
☝ मेरे विचार - [ आराम की लालसा के जुनून को मार आत्मा देती हैं ! [ आराम की लालसा के जुनून को मार आत्मा देती हैं ! - ShareChat
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☝ मेरे विचार - 0 सब कुछ तमाशा है, कि वो दूसरे के জন নক্ साथ हो रहे है.! 0 सब कुछ तमाशा है, कि वो दूसरे के জন নক্ साथ हो रहे है.! - ShareChat
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☝ मेरे विचार - धागा और रिश्ता दोनों ही बड़े नाजुक होते हैं फर्क बस इतना होता है 837 धागा खींचने से टूटजाता है और | 4, R37zzs ` कनसीख लिया करो, इसलिए अकड़़ ही अक्सर दरयाँ बढ़ा देती है ! বথীকি धागा और रिश्ता दोनों ही बड़े नाजुक होते हैं फर्क बस इतना होता है 837 धागा खींचने से टूटजाता है और | 4, R37zzs ` कनसीख लिया करो, इसलिए अकड़़ ही अक्सर दरयाँ बढ़ा देती है ! বথীকি - ShareChat
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🔱🕉 har har mahade🕉🔱 - ShareChat riddhi. beaut कैसे कह दूं कि भगवान मेरी नहीं सुनते उन्होंने वो सारी बाजियां पलटी है जहां मेरी हार पहले से ही लिख दी गई थी..!! rKsulgawriter31 ShareChat riddhi. beaut कैसे कह दूं कि भगवान मेरी नहीं सुनते उन्होंने वो सारी बाजियां पलटी है जहां मेरी हार पहले से ही लिख दी गई थी..!! rKsulgawriter31 - ShareChat
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☝ मेरे विचार - ShareChat @Surabhi Sharma श्रीमद्रगवद्नीता ने सिखाया, संसार में कोई तुम्हारा नहीं है, केवल कर्म ही साथ रहेंगे। तुम्हारे तुम्हारे शिव पुराण ने सिखाया, अंत में सब भस्म हो जाना है, इसलिए अहंकार का कोई स्थान नहीं है। चाणक्य नीति ने सिखाया, जरूरत से ज्यादा सीधा होना खुद के विनाश का कारण बन जाता है। हनुमान चालीसा ने सिखाया, अटूट विश्वास और समर्पण से असंभव कार्य भी सुगम हो जाते हैं। ShareChat @Surabhi Sharma श्रीमद्रगवद्नीता ने सिखाया, संसार में कोई तुम्हारा नहीं है, केवल कर्म ही साथ रहेंगे। तुम्हारे तुम्हारे शिव पुराण ने सिखाया, अंत में सब भस्म हो जाना है, इसलिए अहंकार का कोई स्थान नहीं है। चाणक्य नीति ने सिखाया, जरूरत से ज्यादा सीधा होना खुद के विनाश का कारण बन जाता है। हनुमान चालीसा ने सिखाया, अटूट विश्वास और समर्पण से असंभव कार्य भी सुगम हो जाते हैं। - ShareChat
#☝ मेरे विचार Radhe Radhe 🙏🙏🙏❤️❤️🥰🥰
☝ मेरे विचार - Sharechats @Pradeep Singln मनुष्य का 'भाग्य' एक आदमी ने नारदमुनि से पूछा मेरे भाग्य में कितना धन है ? नारदमुनि ने कहा भगवान विष्णु से पूछकर कल बताऊंगा| नारदमुनि ने में है। कहा 1 रुपया रोज तुम्हारे भाग्य आदमी बहुत खुश रहने लगा, उसकी रुपये में पूरी हो जाती थी। एक जरूरतें दिन उसके मित्र ने कहा मैं तुम्हारे सादगी भरे जीवन को देखकर बहुत खुश और प्रभावित हुआ हूँ और अपनी बहन की शादी तुमसे  हूँ। करना चाहता आदमी ने कहा मेरी कमाई 1 रुपया रोज की है इसको ध्यान में रखना। इसी में से ही गुजर बसर करना पड़ेगा  बहन को मित्र ने कहा कोई बात नहीं मुझे तुम्हारी  रिश्ता मंजूर है। अगले दिन उस आदमी की कमाई ११ रुपया हो गई। उसने नारदमुनि से पूछा की हे मुनिवर मेरे भाग्य में 1 रुपया लिखा है फिर ११ रुपये क्यों मिल रहे है ? कहा- तुम्हारा किसी से रिश्ता या सगाई हुई है क्या? हाँ हुई है, उसने नारदमुनि ने जवाब दिया। तो यह तुम्हको १० रुपये उसके भाग के मिल रहे है, इसको जोड़ना विवाह शुरू करो में काम आएंगे नारद जी ने जवाब दिया। तुम्हारे एक दिन की पत्नी गर्भवती हुई और उसकी कमाई ३१ रुपये होने लगी। फिर नारदमुनि से पूछां है मुनिवर मेरी और मेरी पत्नी के भाग्य के ११ रुपये ওমন मिल रहे थे लेकिन अभी ३१ रुपये क्यों मिल रहे है। क्या में कोई अपराध कर पे हो रहा है? मुनिवर ने कहा- यह तेरे बच्चे के भाग्य के रहा हूँ या किसी लुटवेश " २० रुपये मिल रहे है। हर मनुष्य को उसका प्रारब्ध (भाग्य ) मिलता है। किसके भाग्य से घर में धन दौलत आती है हमको नहीं पता। लेकिन मनुष्य अहंकार करता है कि मैंने बनाया , मैंने कमाया , मेरा है, मेरी मेहनत है, में कमा रहा हूँ , मेरी वजह से हो रहा है। मगर वास्तव में किसी को पता नहीं की हम किसके भाग्य का खा रहे हैं, इसलिए अपनी उपलब्धियों पर अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। a श्री कृष्ण  जय [ Sharechats @Pradeep Singln मनुष्य का 'भाग्य' एक आदमी ने नारदमुनि से पूछा मेरे भाग्य में कितना धन है ? नारदमुनि ने कहा भगवान विष्णु से पूछकर कल बताऊंगा| नारदमुनि ने में है। कहा 1 रुपया रोज तुम्हारे भाग्य आदमी बहुत खुश रहने लगा, उसकी रुपये में पूरी हो जाती थी। एक जरूरतें दिन उसके मित्र ने कहा मैं तुम्हारे सादगी भरे जीवन को देखकर बहुत खुश और प्रभावित हुआ हूँ और अपनी बहन की शादी तुमसे  हूँ। करना चाहता आदमी ने कहा मेरी कमाई 1 रुपया रोज की है इसको ध्यान में रखना। इसी में से ही गुजर बसर करना पड़ेगा  बहन को मित्र ने कहा कोई बात नहीं मुझे तुम्हारी  रिश्ता मंजूर है। अगले दिन उस आदमी की कमाई ११ रुपया हो गई। उसने नारदमुनि से पूछा की हे मुनिवर मेरे भाग्य में 1 रुपया लिखा है फिर ११ रुपये क्यों मिल रहे है ? कहा- तुम्हारा किसी से रिश्ता या सगाई हुई है क्या? हाँ हुई है, उसने नारदमुनि ने जवाब दिया। तो यह तुम्हको १० रुपये उसके भाग के मिल रहे है, इसको जोड़ना विवाह शुरू करो में काम आएंगे नारद जी ने जवाब दिया। तुम्हारे एक दिन की पत्नी गर्भवती हुई और उसकी कमाई ३१ रुपये होने लगी। फिर नारदमुनि से पूछां है मुनिवर मेरी और मेरी पत्नी के भाग्य के ११ रुपये ওমন मिल रहे थे लेकिन अभी ३१ रुपये क्यों मिल रहे है। क्या में कोई अपराध कर पे हो रहा है? मुनिवर ने कहा- यह तेरे बच्चे के भाग्य के रहा हूँ या किसी लुटवेश " २० रुपये मिल रहे है। हर मनुष्य को उसका प्रारब्ध (भाग्य ) मिलता है। किसके भाग्य से घर में धन दौलत आती है हमको नहीं पता। लेकिन मनुष्य अहंकार करता है कि मैंने बनाया , मैंने कमाया , मेरा है, मेरी मेहनत है, में कमा रहा हूँ , मेरी वजह से हो रहा है। मगर वास्तव में किसी को पता नहीं की हम किसके भाग्य का खा रहे हैं, इसलिए अपनी उपलब्धियों पर अहंकार कभी नहीं करना चाहिए। a श्री कृष्ण  जय [ - ShareChat
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☝ मेरे विचार - 0 जब तक तुम किसी को प्रभावित करना चाहते हो, तब तक तुम अहंकार से ग्रस्त हो.! 0 जब तक तुम किसी को प्रभावित करना चाहते हो, तब तक तुम अहंकार से ग्रस्त हो.! - ShareChat
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🔱🕉 har har mahade🕉🔱 - Gharedhaपारीक्षाओं से तुम्हें बिना खरोंच के निकाल लाया. तुम्हें लगता है वो तुम्हें हारने देगा ? Likes Gharedhaपारीक्षाओं से तुम्हें बिना खरोंच के निकाल लाया. तुम्हें लगता है वो तुम्हें हारने देगा ? Likes - ShareChat