#🪔कब है मौनी अमावस्या❓
*|| कल मौनी अमावस्या तिथि है ||*
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*मौनी अमावस्या पर बना दुर्लभ अर्धोदय योग, स्कंदपुराण में बताया गया है इसका बड़ा लाभ, जानकर मन खुश हो जाएगा मौनी अमावस्या पर स्नान, दान और पितरों के तर्पण का विशेष महत्व होता है। वहीं, इस बार मौनी अमावस्या पर अर्धोदय योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। स्कंदपुराण के अनुसार, इस योग में स्नान, दान आदि पुण्य कार्य करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है और आप गंगा नदी में स्नान के लिए नहीं जा पाएं तो घर पर भी स्नान दान करने से गंगा स्नान का पुण्य मिल जाता है।*
*मौनी अमावस्या बेहद शुभ योग में होने जा रहा है।दरअसल अबकी बार मौनी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अर्धोदय योग का भी संयोग बनने जा रहा है। माघ मास में पड़ने वाली अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन स्नान,दान और पितरों का तर्पण करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है।मान्यता है कि मौनी अमावस्या पर पवित्र में जल में स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है। वहीं, इस बार मौनी अमावस्या पर अर्धोदय योग का बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। स्कंदपुराण अनुसार इस योग में स्नान,दान आदि कार्य करने से मेरू समान फल प्राप्त होता है यानी पर्वत समान महान दान का फल मिलता है।*
*मौनी अमावस्या पर बना दुर्लभ अर्धोदय योग-*
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*मौनी अमावस्या 18 जनवरी, रविवार के दिन रहेगी। माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि इस बार रविवार के दिन पड़ने और साथ में व्यतीपात योग भी होने से दुर्लभ अर्धोदय योग बनेगा। स्कंदपुराण में इस योग को बहुत पुण्यदायी बताया गया है। स्कंद पुराण के अनुसार, अर्धोदय योग में सभी स्थानों का जल गंगा के जल के समान हो जाता है और सभी ब्रह्म के समान शुद्धात्मा वाले हो जाते हैं। साथ ही, इस अर्धोदय योग में स्नान दान आदि पुण्य कार्य करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है।*
*अर्धोदय योग वाली अमावस्या का दान-*
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*स्कंदपुराण के अनुसार, अगर अमावस्या तिथि पर अर्धोदय योग बन रहा हो तो इस दिन चांदी और स्वर्ण दान करने का भी बहुत खास महत्व होता है। ऐसे में आप सामर्थ्य अनुसार, किसी जरूरतमंद को स्वर्ण या चांदी का दान कर सकते हैं। साथ ही, पृथ्वी पर अक्षतों का अष्टदल लिखकर उसपर ब्रह्मा, विष्णु और शिव स्वरूप उपर्युक्त पात्र को स्थापित करके धूप, दीप, पुष्प आदि से पूजा करें। फिर, पुरोहित को दे दें। मान्यता है कि ऐसा करने से पृथ्वी दान करने के बराबर फल की प्राप्ति होती है। पुराण के अनुसार, इस योग में गोदान, शय्यादान आदि जो भी देय द्रव्य हों वे तीन-तीन होने चाहिए।अर्धोदय योग के अवसर पर सतयुग में वसिष्ठजी ने, त्रेता में श्रीरामचंद्र जी ने, द्वापर में धर्मराज ने और कलियुग में पूर्णोदर ने कई प्रकार के दिन धर्म किए थे। ऐसे में मौनी अमावस्या पर दान करने से अत्यंत पुण्य फल की प्राप्ति हो सकती है।*
*अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। ऐसे में इस दिन पिंडदान और पितरों के लिए तर्पण अवश्य करना चाहिए। इससे पितर प्रसन्न होते हैं और इनकी कृपा परिवार के सदस्यों पर बनी रहती है। साथ ही, जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।*
*|| मौनी अमावस्या पर्व ||*
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