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#🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 - ५एक टन सि्द्धांत की तुलना में एक औंस काम की ज्यादा कीमत होती है।" - फ्रेडरिक एंगेल्स इसका सरल अर्थ है = केवल बातें, सिद्धांत या योजनाएँ बनाना पर्याप्त नहीं है। असली महत्व काम करने का है, चाहे वह थोड़ा ही क्यों न हो। आसान शब्दों में समझेंः अगर कोई व्यक्ति घंटों भाषण दे कि मेहनत करनी चाहिए, लेकिन खुद मेहनत न करे - तो उसका कोई लाभ नहीं] वहीं दूसरा व्यक्ति कम बोलता है, लेकिन ईमानदारी से काम करता है = वही वास्तव में सफल होता है। जीवन में प्रयोगः पढ़ाई में ~ केवल "मैं टॉपर बनूँगा " कहना काफी नहीं , रोज़ पढ़ना ಕಗ೯ಾಗಿ ಕl भक्ति में - केवल चर्चा नहीं , बल्कि नियमित साधना और आचरण भी 81 आवश्यक सेवा में - केवल विचार नहीं , बल्कि वास्तविक कार्य अधिक समाज प्रभावी होता है। @SudeerDass संदेश साफ है काम हमेशा शब्दों से बड़ा होता है। ५एक टन सि्द्धांत की तुलना में एक औंस काम की ज्यादा कीमत होती है।" - फ्रेडरिक एंगेल्स इसका सरल अर्थ है = केवल बातें, सिद्धांत या योजनाएँ बनाना पर्याप्त नहीं है। असली महत्व काम करने का है, चाहे वह थोड़ा ही क्यों न हो। आसान शब्दों में समझेंः अगर कोई व्यक्ति घंटों भाषण दे कि मेहनत करनी चाहिए, लेकिन खुद मेहनत न करे - तो उसका कोई लाभ नहीं] वहीं दूसरा व्यक्ति कम बोलता है, लेकिन ईमानदारी से काम करता है = वही वास्तव में सफल होता है। जीवन में प्रयोगः पढ़ाई में ~ केवल "मैं टॉपर बनूँगा " कहना काफी नहीं , रोज़ पढ़ना ಕಗ೯ಾಗಿ ಕl भक्ति में - केवल चर्चा नहीं , बल्कि नियमित साधना और आचरण भी 81 आवश्यक सेवा में - केवल विचार नहीं , बल्कि वास्तविक कार्य अधिक समाज प्रभावी होता है। @SudeerDass संदेश साफ है काम हमेशा शब्दों से बड़ा होता है। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - OsudneerDass কল্পনা (Visualiisationl-3 असली सवाल यह है - क्या २१ दिनों की सचेत प्रैक्टिस जीवन को बेहतर बनाने की बहुत बड़ी कीमत है? बिल्कुल नहीं| २१ दिन कोई लंबा समय नहीं है, लेकिन इसे नियमित और ईमानदारी से निभाना ही असली चुनौती है। सिद्धांत सुनने में आसान लगता i बदलाव का पर उसे रोज़ निभाना ही प्रतिबद्ध lcommitted) लोगों का काम గేI सफल वही होते हैं जो कहते कम हैं और करते ज़्यादा हैं। निष्कर्षः सिर्फ जानना काफी नहीं, लगातार २१ दिन अमल करना ही जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाता है। आप चाहें तो आज से ही इसे आज़मा सकते हैं - छोटा संकल्प, बड़ा बदलाव। % OsudneerDass কল্পনা (Visualiisationl-3 असली सवाल यह है - क्या २१ दिनों की सचेत प्रैक्टिस जीवन को बेहतर बनाने की बहुत बड़ी कीमत है? बिल्कुल नहीं| २१ दिन कोई लंबा समय नहीं है, लेकिन इसे नियमित और ईमानदारी से निभाना ही असली चुनौती है। सिद्धांत सुनने में आसान लगता i बदलाव का पर उसे रोज़ निभाना ही प्रतिबद्ध lcommitted) लोगों का काम గేI सफल वही होते हैं जो कहते कम हैं और करते ज़्यादा हैं। निष्कर्षः सिर्फ जानना काफी नहीं, लगातार २१ दिन अमल करना ही जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाता है। आप चाहें तो आज से ही इसे आज़मा सकते हैं - छोटा संकल्प, बड़ा बदलाव। % - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - कल्पना VISUALISATIONQ मन नई सकारात्मक बात को तुरंत स्वीकार नहीं करता, क्योंकि वह विश्वासों का आदी होता है। पुराने ` यदि लंबे समय से हम खुदको कमजोर मानते रहे हैं, तो अचानक ॰मैं सक्षम हूँ " कहना मन को अजनबी लगता है। किसी भी पुरानी सोच या आदत को बदलने के लिए लगातार अभ्यास ज़रूरी है। लगभग २१ दिन तक नियमित और सच्चे प्रयास से नई सोच मजबूत होने लगती है। दोहराया गया सकारात्मक विचार धीरे धीरे अवचेतन मन बार्बार में बैठकर विश्वास बन जाता है। निष्कर्षः शुरुआत में मन विरोध करता लेकिन निरंतर अभ्यास से वही नया विचार हमारी सच्चाई बन 7 सकता @sucreebass कल्पना VISUALISATIONQ मन नई सकारात्मक बात को तुरंत स्वीकार नहीं करता, क्योंकि वह विश्वासों का आदी होता है। पुराने ` यदि लंबे समय से हम खुदको कमजोर मानते रहे हैं, तो अचानक ॰मैं सक्षम हूँ " कहना मन को अजनबी लगता है। किसी भी पुरानी सोच या आदत को बदलने के लिए लगातार अभ्यास ज़रूरी है। लगभग २१ दिन तक नियमित और सच्चे प्रयास से नई सोच मजबूत होने लगती है। दोहराया गया सकारात्मक विचार धीरे धीरे अवचेतन मन बार्बार में बैठकर विश्वास बन जाता है। निष्कर्षः शुरुआत में मन विरोध करता लेकिन निरंतर अभ्यास से वही नया विचार हमारी सच्चाई बन 7 सकता @sucreebass - ShareChat
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🙏गुरु महिमा😇 - @suceertass कल्पना (VSUALISATION) - 1 प्रक्रिया है जिसमें कल्पना वह हम जो पाना , करना या बनना चाहते हैं, उसकी स्पष्ट छवि अपने मन में बनाते हैं और उसे देखते हैं। आत्मसुझाव और कल्पना हमेशा साथनसाथ चलते हैं। कल्पना के बिना आत्मसुझाव सिर्फ मशीन की तरह वाक्य दोहराने जैसा हो जाता है, जिसका प्रभाव बहुत सीमित होता है। सही परिणाम पाने के लिए आदर्श आत्मसुझाव के साथ हमारी इच्छाएँ भावनाएँ और सजीव कल्पना जुड़ी होनी चाहिए। जब हम किसी लक्ष्य को मन में देखते भी हैं और महसूस भी करते हैं तो अवचेतन मन उसे हकीकत में बदलने की दिशा में काम करने लगता है। इसलिए याद रखें- जुड़ती है, जह्ा कल्पना वहीं आत्मसुझाव प्रभावी बनता है।९४ * ९ @suceertass कल्पना (VSUALISATION) - 1 प्रक्रिया है जिसमें कल्पना वह हम जो पाना , करना या बनना चाहते हैं, उसकी स्पष्ट छवि अपने मन में बनाते हैं और उसे देखते हैं। आत्मसुझाव और कल्पना हमेशा साथनसाथ चलते हैं। कल्पना के बिना आत्मसुझाव सिर्फ मशीन की तरह वाक्य दोहराने जैसा हो जाता है, जिसका प्रभाव बहुत सीमित होता है। सही परिणाम पाने के लिए आदर्श आत्मसुझाव के साथ हमारी इच्छाएँ भावनाएँ और सजीव कल्पना जुड़ी होनी चाहिए। जब हम किसी लक्ष्य को मन में देखते भी हैं और महसूस भी करते हैं तो अवचेतन मन उसे हकीकत में बदलने की दिशा में काम करने लगता है। इसलिए याद रखें- जुड़ती है, जह्ा कल्पना वहीं आत्मसुझाव प्रभावी बनता है।९४ * ९ - ShareChat
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🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 - अवचेतन मन को तैयार करें ddneerDass (Prepare the Subconscious)-4 कल्पना केबिना आत्मसुझाव निष्फल होता है। केवल शब्द दोहराने से परिणाम नहीं मिलते , जब तक कि उनके साथ स्पष्ट कल्पना न जुड़ी हो। जब हम कोई आत्मसुझाव पहली बार अपने मन को देते हैं, तो मन अक्सर उसे अस्वीकार कर देता है, क्योंकि वह हमारी पुरानी सोच और आदतों के विपरीत होता है। लेकिन यदि हम उसी सुझाव को पूरे विश्वास के साथ सजीव कल्पना के साथ बार-्बार दोहराते हैं तो अवचेतन मन धीरे धीरे उसे स्वीकार करने लगता है। याद रखें इस बात पर निर्भर करती है कि सफलता किसी विचार या लक्ष्य को हम कितनी बार, कितनी भावना से और कितनी स्पष्ट कल्पना के साथ अपने मन में दोहराते हैं। जुड़ जाती है, जहाँ कल्पना + भावना + निरंतरता : वहीं अवचेतन मन तैयार होता है- और वहीं से वास्तविक परिवर्तन शुरू होता है। Y अवचेतन मन को तैयार करें ddneerDass (Prepare the Subconscious)-4 कल्पना केबिना आत्मसुझाव निष्फल होता है। केवल शब्द दोहराने से परिणाम नहीं मिलते , जब तक कि उनके साथ स्पष्ट कल्पना न जुड़ी हो। जब हम कोई आत्मसुझाव पहली बार अपने मन को देते हैं, तो मन अक्सर उसे अस्वीकार कर देता है, क्योंकि वह हमारी पुरानी सोच और आदतों के विपरीत होता है। लेकिन यदि हम उसी सुझाव को पूरे विश्वास के साथ सजीव कल्पना के साथ बार-्बार दोहराते हैं तो अवचेतन मन धीरे धीरे उसे स्वीकार करने लगता है। याद रखें इस बात पर निर्भर करती है कि सफलता किसी विचार या लक्ष्य को हम कितनी बार, कितनी भावना से और कितनी स्पष्ट कल्पना के साथ अपने मन में दोहराते हैं। जुड़ जाती है, जहाँ कल्पना + भावना + निरंतरता : वहीं अवचेतन मन तैयार होता है- और वहीं से वास्तविक परिवर्तन शुरू होता है। Y - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - अवचेतन मन को तैयार करें (Prepare the Subconscious) - 3 आत्मसुझाव केवल शब्दों को बार-बार दोहराने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसके द्वारा हम अपने अवचेतन मन को सकारात्मक दिशा में ढालते हैं। जब हम सकारात्मक सुझाव नियमित रूप से दोहराते हैं और उनके साथ भावना व एहसास जोड़ते हैं, वे सुझाव सिर्फ विचार नहीं रहते, dq बल्कि धीरे धीरे वास्तविकता का रूप लेने लगते हैं। ಟಗ೯ बिना भावना के शब्द कमजोर होते हैं, लेकिन भावना के साथ दोहराया गया आत्मसुझाव अवचेतन मन पर गहरी छाप छोड़ता है। इसलिए आत्मसुझाव कहते समय उसे महसूस करें, मानो वह बात पहले से ही सच हो चुकी हो- यही अवचेतन मन को तैयार करने का सही तरीका है। ' Y @SudheerDass अवचेतन मन को तैयार करें (Prepare the Subconscious) - 3 आत्मसुझाव केवल शब्दों को बार-बार दोहराने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर प्रक्रिया है, जिसके द्वारा हम अपने अवचेतन मन को सकारात्मक दिशा में ढालते हैं। जब हम सकारात्मक सुझाव नियमित रूप से दोहराते हैं और उनके साथ भावना व एहसास जोड़ते हैं, वे सुझाव सिर्फ विचार नहीं रहते, dq बल्कि धीरे धीरे वास्तविकता का रूप लेने लगते हैं। ಟಗ೯ बिना भावना के शब्द कमजोर होते हैं, लेकिन भावना के साथ दोहराया गया आत्मसुझाव अवचेतन मन पर गहरी छाप छोड़ता है। इसलिए आत्मसुझाव कहते समय उसे महसूस करें, मानो वह बात पहले से ही सच हो चुकी हो- यही अवचेतन मन को तैयार करने का सही तरीका है। ' Y @SudheerDass - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - अवचेतन मन को तैयार करें (Prepare the Subconscious) = 2 आत्मसुझाव वह रास्ता है, जिसके माध्यम से हम अपने दिमाग को इस तरह प्रोग्राम करते हैं कि कोई साधारण ्सा वाक्य धीरे ्धीरे हकीकत में बदलने लगे। जब कोई विचार या कथन बार बारदोहराया जाता है॰ विश्वास के साथ कहा जाता है, तो वह अवचेतन मन में बैठ जाता है और हमारे व्यवहार, निर्णय और आदतों को दिशा देने लगता है। अर्थात् जो बात हम अपने मन को बार्बार सिखाते हैं॰ अवचेतन मन उसे सच मानकर वैसा ही परिणाम देने लगता @SudheerDass 81 अवचेतन मन को तैयार करें (Prepare the Subconscious) = 2 आत्मसुझाव वह रास्ता है, जिसके माध्यम से हम अपने दिमाग को इस तरह प्रोग्राम करते हैं कि कोई साधारण ्सा वाक्य धीरे ्धीरे हकीकत में बदलने लगे। जब कोई विचार या कथन बार बारदोहराया जाता है॰ विश्वास के साथ कहा जाता है, तो वह अवचेतन मन में बैठ जाता है और हमारे व्यवहार, निर्णय और आदतों को दिशा देने लगता है। अर्थात् जो बात हम अपने मन को बार्बार सिखाते हैं॰ अवचेतन मन उसे सच मानकर वैसा ही परिणाम देने लगता @SudheerDass 81 - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕
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🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 - Sudheer Dass| आत्मसुझाव (Auto Suggestion) - 8 सोच शब्दों इसलिए बनाए जाते हैं क्योंकि ' हमारी ; सकारात्मक वाक्य में नहीं, बल्कि तस्वीरों में आती है। अवचेतन मन स्पेलिंग नहीं समझता , वह केवल छवियाँ (images समझता है। ज़रा सोचिए= मैं कहता हूँ "माँ९ जब तो आपके दिमाग में क्या आता है? IAA की स्पेलिंग 4 माँ की तस्वीर, उसका स्नेह, उसका चेहरा? < बिल्कुल सही तस्वीर। इसलिए आत्मसुझाव हमेशा ऐसे वाक्यों में होने चाहिए जो दिमाग में सकारात्मक और स्पष्ट तस्वीर बनाएँ। क्योंकि जो तस्वीर बार-बार मन में बनती है, वही धीरे धीरे हकीकत बन जाती है। याद रखेंः शब्द रास्ता हैं, लेकिन मंज़िल हमेशा तस्वीर होती है। Sudheer Dass| आत्मसुझाव (Auto Suggestion) - 8 सोच शब्दों इसलिए बनाए जाते हैं क्योंकि ' हमारी ; सकारात्मक वाक्य में नहीं, बल्कि तस्वीरों में आती है। अवचेतन मन स्पेलिंग नहीं समझता , वह केवल छवियाँ (images समझता है। ज़रा सोचिए= मैं कहता हूँ "माँ९ जब तो आपके दिमाग में क्या आता है? IAA की स्पेलिंग 4 माँ की तस्वीर, उसका स्नेह, उसका चेहरा? < बिल्कुल सही तस्वीर। इसलिए आत्मसुझाव हमेशा ऐसे वाक्यों में होने चाहिए जो दिमाग में सकारात्मक और स्पष्ट तस्वीर बनाएँ। क्योंकि जो तस्वीर बार-बार मन में बनती है, वही धीरे धीरे हकीकत बन जाती है। याद रखेंः शब्द रास्ता हैं, लेकिन मंज़िल हमेशा तस्वीर होती है। - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - आत्मसुझाव (Auto Suggestion) - 7 daneer Vase आत्मसुझाव की प्रैक्टिस कभी भी नकारात्मक रूप में नहीं होनी चाहिए। यह कहना कि ॰मैं कितना अव्यवस्थित व्यक्ति हूँ " - गलत तरीका है। इसके बजाय यह कहिए- ٠؟٩5٦ व्यवस्थित व्यक्ति हूँ।२ आत्मसुझाव में यदि नकारात्मक शब्दों का प्रयोग किया जाता है, तो दिमाग में नकारात्मक तस्वीरें बनती हैं और वही हर्में नहीं चाहिए। हमारा अवचेतन मन शब्दों को नहीं , बल्कि तस्वीरों को ग्रहण करता है। उदाहरण सर्माझए- मैं आपसे कहूँः "नीले हाथी के बारे में मत सोचो॰ अगर तो बहुत संभावना है कि आपके दिमाग में नीले हाथी की छवि तुरंत आएगी। उभर इसलिए नियम साफ है- नकारात्मक वाक्यों से बचें और इच्छित परिणाम वाले वाक्य दोहराएँ सकारात्मक स्पष्ट क्योंकि जैसा सोचेंगे , वैसा ही बनेंगे। आत्मसुझाव (Auto Suggestion) - 7 daneer Vase आत्मसुझाव की प्रैक्टिस कभी भी नकारात्मक रूप में नहीं होनी चाहिए। यह कहना कि ॰मैं कितना अव्यवस्थित व्यक्ति हूँ " - गलत तरीका है। इसके बजाय यह कहिए- ٠؟٩5٦ व्यवस्थित व्यक्ति हूँ।२ आत्मसुझाव में यदि नकारात्मक शब्दों का प्रयोग किया जाता है, तो दिमाग में नकारात्मक तस्वीरें बनती हैं और वही हर्में नहीं चाहिए। हमारा अवचेतन मन शब्दों को नहीं , बल्कि तस्वीरों को ग्रहण करता है। उदाहरण सर्माझए- मैं आपसे कहूँः "नीले हाथी के बारे में मत सोचो॰ अगर तो बहुत संभावना है कि आपके दिमाग में नीले हाथी की छवि तुरंत आएगी। उभर इसलिए नियम साफ है- नकारात्मक वाक्यों से बचें और इच्छित परिणाम वाले वाक्य दोहराएँ सकारात्मक स्पष्ट क्योंकि जैसा सोचेंगे , वैसा ही बनेंगे। - ShareChat